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 Corona के बीच चीन में पैदा हुई नई आफत: खतरनाक Monkey B Virus की एंट्री से फैली दहशत

Corona के बीच चीन में पैदा हुई नई आफत: खतरनाक Monkey B Virus की एंट्री से फैली दहशत

बीजिंग: चीन के वुहान (Wuhan) शहर से निकले कोरोना वायरस (Coronavirus) से दुनया को छुटकारा नहीं मिला है कि तब तक चीन में फिर से एक वायरस ने संक्रमण फैलाना शुरू कर दिया है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में बंदरों से संक्रमण फैल रहा है. इस वायरस को Monkey B Virus (BV) का नाम दिया गया है. चीन ने इस वायरस के फैलने की बात को कबूल भी कर लिया है. 

Monkey B Virus (BV) बंदर से निकला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये वायरस बेहद घातक है. इससे संक्रमित लोगों में मृत्यु दर 70 से 80 प्रतिशत है. यानि, अगर 100 लोग इस वायरस की चपेट में आते हैं तो करीब 70 से 80 लोगों की मौत हो सकती है. इस लिहाज से कोरोना के बीच ही इस वायरस से निपटना चीन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है.  

चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक राजधानी बीजिंग स्थिति एक पशु चिकित्सक में बंदर से निकले वायरस Monkey B Virus (BV) की पुष्टि की गई. इलाज के दौरान पशु चिकित्सक ने दम तोड़ दिया है. हालांकि  चीन की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि डॉक्टर के संपर्क में आने वाले सभी लोग ठीक हैं.

चीन भले ही डॉक्टर के संपर्क में आने वाले अन्य सभी लोगों के ठीक होने का दावा कर रहा है लेकिन सवाल ये उठता है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) पर दुनिया को गुमराह करने वाले चीन की बातों पर यकीन कैसे किया जाए? कहीं चीन अभी भी कोरोना की तरह Monkey B Virus (BV) वायरस के खतरे की सच्चाई दुनिया से छिपा नहीं रहा.

रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर की मौत 27 मई को हो गई थी. लेकिन अब चक चीन इसे छिपाये रहा. सवाल यह भी उठता है कि चीन ने इतनों दिनों बात डॉक्टर की मौत की पुष्टि क्यों की. कोरोना के बाद विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहे चीन को इस बार शक की नजरों से देखा जाना स्वाभाविक है.

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च के शुरुआती दिनों में डॉक्टर की तबीयत बिगड़ गई थी और उसे उल्टियां आनी शुरू हो गई थीं. इससे पहले लगातार उसका जी मिचला रहा था. फिलहाल डॉक्टर को हुई दिक्कत के आधार पर यही लक्षण सामने आए हैं. इस वायरस को सबसे पहले 1932 में पहचाना गया था और ये एक तरह का जीनस मैकाका के मैकाक्स में एक अल्फाहर्पीसवायरस एनजूटिक है. ये भी कोरोना वायरस की तरह ही संक्रमण फैलाने में सक्षम होता है और इंसान से इंसान में भी फैलता है.
भारत के कुल कोविड-19 टीकाकरण ने इतने  करोड़ का आंकड़ा पार किया

भारत के कुल कोविड-19 टीकाकरण ने इतने करोड़ का आंकड़ा पार किया

 भारत में कोविड-19 टीकाकरण का आंकड़ा 40 करोड़ के अहम स्तर को पार कर गया है। आज सुबह 7 बजे तक की अस्थायी रिपोर्ट के मुताबिक, 50,46,387 सत्रों के माध्यम से टीकों की कुल 40,49,31,715 खुराक लगा दी गई हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान टीकों की 51,01,567 खुराक लगाई गई हैं। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून2021 से शुरू हुआ है। केन्द्र सरकार देश भर में कोविड-19 टीकाकरण की गति और उसका दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

महामारी की शुरुआत से अभी तक संक्रमित लोगों में से 3,02,69,796 लोग पहले ही कोविड-19 से स्वस्थ हो चुके हैं और पिछले 24 घंटों के दौरान 42,004लोग ठीक हुए हैं। इस प्रकार स्वस्थ होने की दर 97.31 प्रतिशत के स्तर पर हैजिससे लगातार बढ़ोतरी के रुझान का पता चलता है। पिछले 24 घंटों के दौरान भारत में दैनिक नए मामले 41,157 दर्ज किए गए।

लगातार 21 दिनों से दैनिक नए मामले 50,000 के स्तर से नीचे बने हुए हैं। यह केन्द्र और राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा किए गए निरंतर और सहयोगपूर्ण प्रयासों का परिणाम है।भारत के सक्रिय मामले 4,22,660 के स्तर पर बने हुए हैं और अब देश के कुल पॉजिटिव मामलों में सक्रिय मामलों की हिस्सेदारी 1.36 प्रतिशत है। देश भर में परीक्षण क्षमता में खासी बढ़ोतरी के साथपिछले 24 घंटों के दौरान देश में कुल 19,36,709जांच कराई गयी। भारत में अभी तक कुल 44.39 करोड़ (44,39,58,663) जांचें की जा चुकी हैं।

जहां एक तरफ देश में परीक्षण क्षमता में बढ़ोतरी हुई हैवहीं मामलों की साप्ताहिक पॉजिटिविटी में गिरावट देखने को मिली है। वर्तमान में साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 2.08 प्रतिशत के स्तर पर हैजबकि आज दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.13 प्रतिशत रही। लगातार 27 दिनों से दैनिक पॉजिटिविटी दर 3 प्रतिशत से कम बनी हुई हैऔर यह पिछले लगातार 41 दिनों से 5 प्रतिशत से कम है। 

18 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

18 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

केन्द्र सरकार देश भर में कोविड-19 टीकाकरण की गति में तेजी लाने तथा इसके दायरे को विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी लोगों को कोविड-19 टीकाकरण उपलब्ध कराने का नया चरण 21 जून, 2021 से आरंभ हुआ। अधिक टीकों की उपलब्धता, बेहतर ढंग से योजना बनाने में राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सक्षम बनाने के लिए उन्हें अग्रिम रूप से टीका उपलब्ध कराने तथा टीका आपूर्ति को विवेकपूर्ण बनाने के जरिये टीकाकरण अभियान में तेजी लाई गई है।

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में, भारत सरकार राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराने के माध्यम से उनकी सहायता करती रही है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सार्वभौमिकरण के नये चरण में, केन्द्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित टीकों के 75 प्रतिशत की खरीद करेगी और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को आपूर्ति (नि:शुल्क) करेगी। अभी तक राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सभी स्रोतों से 41.99करोड़ से अधिक (41,99,68,590) टीके उपलब्ध कराए गए हैं और 15,75,140 टीके उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया प्रगति में है।

इनमें से अपव्यय सहित कुल 39,42,97,344 टीकों की (आज सुबह 8 बजे तक उपलब्ध डाटा के अनुसार) खपत हुई है।

राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास अभी भी 2.56करोड़ (2,56,71,246) से अधिक शेष तथा अप्रयुक्त टीके उपलब्ध हैं।

18 जुलाई :  कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

18 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 40.49 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,02,69,796 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.31 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 42,004 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 41,157 नए मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,22,660हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.36 % हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई हैवर्तमान में 2.08 % है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.13%लगातार 27वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 44.39 करोड़ नमूनों की जांच की गई है।

कोरोना के बाद आ गई नई मुसीबत, इस देश में मिला मंकीपॉक्स का पहला मामला, जाने क्या है यह दुर्लभ बीमारी

कोरोना के बाद आ गई नई मुसीबत, इस देश में मिला मंकीपॉक्स का पहला मामला, जाने क्या है यह दुर्लभ बीमारी

अभी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ ही रही है कि नई नई मुसीबतें सामने आती जा रही हैं। दरअसल, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने कहा है कि अमेरिका के टेक्सास में एक व्यक्ति दुर्लभ मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित पाया गया है। सीडीसी ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) और टेक्सास राज्य स्वास्थ्य सेवा विभाग ने 15 जुलाई को एक अमेरिकी निवासी में मानव मंकीपॉक्स के मामले की पुष्टि की है। इस व्यक्ति ने हाल ही में नाइजीरिया से अमेरिका की यात्रा की थी।संक्रमित मरीज को डलास के अस्‍पताल में भर्ती करा दिया गया है।वहीं अमेरिका का सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और बाकी एजेंसियां व्‍यक्ति के संपर्क में आए लोगों को खोजने में जुटी हुईं हैं, ताकि इस बीमारी के प्रकोप को रोका जा सके। गौरतलब है कि मंकीपॉक्‍स नाम की यह दुर्लभ बीमारी 18 साल बाद अमेरिका में लौटी है। अब से करीब 2 दशक पहले अमेरिका में इस दुर्लभ बीमारी का प्रकोप हुआ था। यूएसए टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक मंकीपॉक्‍स बीमारी को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि इससे आम जनता को खतरा कम है, क्‍योंकि कोविड-19 को रोकने के उपायों के कारण फ्लाइट में उसके द्वारा अन्‍य लोगों को संक्रमित करने की आशंका कम है। बता दें कि मंकीपॉक्स वायरस स्‍मॉलपॉक्‍स वायरस की फैमिली का है लेकिन यह एक दुर्लभ बीमारी है। इसमें मरीज को चेहरे और पूरे शरीर पर रैशेज और बड़े दाने आ जाते हैं। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण 2 से 4 सप्ताह तक रहता है। हालांकि इसे हल्के संक्रमण का कारण माना जाता है लेकिन यह गंभीर वायरल बीमारी का रूप ले सकती है। यह जानवरों द्वारा काटने या उनके संपर्क में आने से होती है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मंकीपॉक्स का एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में संक्रमण बड़ी श्वसन बूंदों के जरिए होता है।

17 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

17 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

 केन्द्र सरकार देश भर में कोविड-19 टीकाकरण की गति में तेजी लाने तथा इसके दायरे को विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी लोगों को कोविड-19 टीकाकरण उपलब्ध कराने का नया चरण 21 जून, 2021 से आरंभ हुआ। अधिक टीकों की उपलब्धता, बेहतर ढंग से योजना बनाने में राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सक्षम बनाने के लिए उन्हें अग्रिम रूप से टीका उपलब्ध कराने तथा टीका आपूर्ति को विवेकपूर्ण बनाने के जरिये टीकाकरण अभियान में तेजी लाई गई है।

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में, भारत सरकार राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराने के माध्यम से उनकी सहायता करती रही है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सार्वभौमिकरण के नये चरण में, केन्द्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित टीकों के 75 प्रतिशत की खरीद करेगी और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को आपूर्ति (नि:शुल्क) करेगी।अभी तक राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सभी स्रोतों से 41.69करोड़ से अधिक (41,69,24,550) टीके उपलब्ध कराए गए हैं और 18,16,140 टीके उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया प्रगति में है।

इनमें से अपव्यय सहित कुल 38,94,87,442 टीकों की (आज सुबह 8 बजे तक उपलब्ध डाटा के अनुसार) खपत हुई है।

राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास अभी भी 2.74करोड़  (2,74,37,108) से अधिक शेष तथा अप्रयुक्त टीके उपलब्ध है।

17 जुलाई :  कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

17 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 39.96 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,02,27,792  मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.31 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 43,916  मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 38,079  नए मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,24,025 हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.36 % हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.10 % है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 1.91 %, लगातार 26वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 44.20 करोड़ नमूनों की जांच की गई है।

16 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

16 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

केन्द्र सरकार देश भर में कोविड-19 टीकाकरण की गति में तेजी लाने तथा इसके दायरे को विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी लोगों को कोविड-19 टीकाकरण उपलब्ध कराने का नया चरण 21 जून, 2021 से आरंभ हुआ। अधिक टीकों की उपलब्धता, बेहतर ढंग से योजना बनाने में राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सक्षम बनाने के लिए उन्हें अग्रिम रूप से टीका उपलब्ध कराने तथा टीका आपूर्ति को विवेकपूर्ण बनाने के जरिये टीकाकरण अभियान में तेजी लाई गई है।

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में, भारत सरकार राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को निशुल्क टीका उपलब्ध कराने के माध्यम से उनकी सहायता करती रही है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सार्वभौमिकरण के नये चरण में, केन्द्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित टीकों के 75 प्रतिशत की खरीद करेगी और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को आपूर्ति (निशुल्क) करेगी।  अभी तक राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सभी स्रोतों से 41.10 करोड़ से अधिक (41,10,38,530) टीके उपलब्ध कराए गए हैं और 52,90,640 टीके उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया प्रगति में है।

इनमें से अपव्यय सहित कुल 38,58,75,958 टीकों की (आज सुबह 8 बजे तक उपलब्ध डाटा के अनुसार) खपत हुई है।

राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास अभी भी 2.51 करोड़  (2,51,62,572) से अधिक शेष तथा अप्रयुक्त टीके उपलब्ध है।

16 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

16 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 39.53 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,01,83,876 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.28 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 40,026 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 38,949 नए मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,30,422 हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.39 % हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.14 % है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 1.99 %, लगातार 25वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 44.00 करोड़ नमूनों की जांच की गई है।

आइये एक नज़र डालते हैं आज के  कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी पर

आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी पर

केंद्र सरकार पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार तेज करने और दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू हुआ है। टीकाकरण अभियान के जरिये ज्यादा टीकों की उपलब्धता के साथ, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को टीकाकरण उपलब्धता की अग्रिम जानकारी देकर तेज किया गया है ताकि टीकों को लेकर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश बेहतर योजना बना सकें और टीकों की आपूर्ति श्रृंखला सुव्यवस्थित की जा सके। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निशुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। सबको टीका उपलब्ध कराने से जुड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान के नए चरण के तहत केंद्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित 75 प्रतिशत टीके खरीदेगी और उनकी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को (निशुल्क) आपूर्ति करेगी। भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 40.31 करोड़ से अधिक खुराक (40,31,74,380) सभी स्रोतों के माध्यम से प्रदान की है। इसके अलावा टीके की 83,85,790 खुराक प्रक्रियारत हैं। आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़े के अनुसार इनमें बर्बाद सहित कुल 38,39,02,614 खुराक की खपत हुई है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अब भी टीके की 1.92 करोड़ से अधिक (1,92,71,766)खुराक उपलब्ध हैं जो बची हुई हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया है।

15 जुलाई:  कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

15 जुलाई: कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

 देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 39.13 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,01,43,850 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.28 प्रतिशत हुई।

पिछले 24 घंटों के दौरान 39,130 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 41,806 नए मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,32,041 हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.39 प्रतिशत है।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.21 प्रतिशत है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.15 प्रतिशत, लगातार 24वें दिन भी 3 प्रतिशत से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 43.80 करोड़ नमूनों की जांच की गई है।

जीभ के रंग से होने वाली परेशानी के बारे में आप पता लगा सकते हैं, जानिए किस रंग से हो सकती है कौन से समस्या

जीभ के रंग से होने वाली परेशानी के बारे में आप पता लगा सकते हैं, जानिए किस रंग से हो सकती है कौन से समस्या

Tongue Health: आंख, नाखून और जीभ का रंग आपकी हेल्थ के बारे में बहुत कुछ बताते हैं. अगर जीभ के रंग में थोड़ा-सा भी बदलाव आता है तो इससे आप अपनी सेहत का अंदाजा लगा सकते हैं. जीभ का रंग बदलने के पीछे कई वजह हो सकती हैं. जीभ के रंग से आप कई तरह की बीमारियों का अंदाज लगा सकते हैं. कई बार दवाओं या किसी खाने की वजह से भी जीभ का रंग कुछ देर के लिए बदल जाता है, लेकिन अगर आपकी जीभ का रंग ज्यादा समय के लिए बदल जाए तो समझिए कोई परेशानी है. आज हम आपको कुछ ऐसे फैक्ट्स बता रहे हैं जिससे जीभ के रंग और होने वाली परेशानी के बारे में आप पता लगा सकते हैं.


नॉर्मल जीभ का रंग कैसा होना चाहिए?
सामान्य तौर पर जीभ का रंग हल्का गुलाबी होता है. इसपर लाइट वाइट कोटिंग होना भी बिल्कुल नॉर्मल कंडीशन है. नॉर्मल जीभ का टेक्सचर थोड़ा धुंधला होता है. अगर आपकी जीभ भी ऐसी है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है.


जीभ का रंग सफेद- अगर जीभ का रंग सफेद हो गया है तो इसका मतलब है कि आपका ओरल हाइजिन काफी खराब है और शरीर में डिहाइड्रेटेड की समस्या है. अगर जीभ पर कोटिंग कॉटेज चीज की लेयर जैसी दिखती है तो स्मोकिंग की वजह से आपको लिकोप्लेकिया भी हो सकता है. कई बार फ्लू की वजह से भी जीभ का रंग सफेद हो जाता है.


जीभ का रंग पीला- कुछ लोगों की जीभ का रंग पीला होने लगता है. इससे आप समझ सकते हैं कि शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी होने लगी है. इसके अलावा डाइजेस्टिव सिस्टम में गड़बड़ी होने, लिवर या पेट की दिक्कत होने पर भी जीभ का रंग पीला होने लगता है. इसी स्थिति में जीभ पर पीली कोटिंग जमने लगती है.

 

जीभ का ब्राउन रंग- जो लोग ज्यादा कैफीन का सेवन करते हैं उनकी जीभ ब्राउन कलर की हो सकती है. कई स्मोकिंग करने वालों की जीभ का कलर भी ब्राउन हो जाता है. स्मोकिंग करने वाले लोगों की जीभ पर ब्राउन कलर की एक परमानेन्ट लेयर जम जाती है.


जीभ का काला रंग- अगर आपकी जीभ का रंग काला होने लगा है तो आपको सावधान होने की जरूरत है. चेन स्मोकर्स की जीभ का रंग भी काला होने लगता है. इसके अलावा कैंसर, अल्सर या फंगल इनफेक्शन होने पर भी जीभ का रंग काला होने लगता है. कई बार ओरल हाइजीन की वजह से भी जीभ पर ऐसे बैक्टिरिया बनने लगते हैं, जिससे जीभ का रंग काला होने लगता है.


जीभ का रंग लाल- अगर आपकी जीभ का रंग अजीब तरीके से लाल होने लगा है तो शरीर में फॉलिक एसिड या विटमिन B-12 की कमी हो सकती है. जीभ पर रेड स्पॉट दिखें तो इसे जियोग्राफिक टंग कहते हैं.


जीभ का रंग नीला- जीभ का रंग नीली या पर्पल होने का मतलब है कि आपको हार्ट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. जब हार्ट ब्लड को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता या ब्लड में ऑक्सिजन कम होने लगता है तो जीभ का रंग नीला या पर्पल हो जाता है.

 

अब जेब में साथ लेकर चलिए ऑक्सीजन, महज इतने रुपये में मिलेगी 'ऑक्सीराइज, पढ़े पूरी खबर

अब जेब में साथ लेकर चलिए ऑक्सीजन, महज इतने रुपये में मिलेगी 'ऑक्सीराइज, पढ़े पूरी खबर

कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर ने भारत में जमकर तबाही मचाई. इस लहर के दौरान कई लोगों ने ऑक्सीजन की कमी के चलते दम तोड़ दिया. हर तरफ ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार देखने को मिला. कोरोना वायरस अभी हमारे बीच से गया नहीं है. लोगों को अब भी मास्क और सैनिटाइजर अपने साथ लेकर चलने की सलाह दी जा रही है. वहीं अब सैनिटाइजर के साथ ऑक्सीजन को भी जेब में लेकर चल सकेंगे. जी, हां ऐसी तकनीक इजाद की गई है जिससे आप ऑक्सीजन की बोतल अपने साथ ले जा सकेंगे. आइए जानते हैं इसके बारे में.


इतनी है कीमत
दरअसल IIT कानपुर के पूर्व छात्र और ई-स्पिन नैनोटेक प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. संदीप पाटिल ने ऑक्सीराइज नाम की बोतल बनाई है, जिसमें 10 लीटर ऑक्सीजन की गैस को स्टोर किया जा सकता है. इसकी खासियत ये है कि किसी की तबियत बिगड़ने पर उसे इस बोतल के जरिए ऑक्सीजन के कुछ शॉट्स देकर अस्पताल तक ले जाया जा सकता है. इस बेहद काम की ऑक्सीजन बोतल की कीमत महज 499 रुपये तय की गई है. आप इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं.


मुंह में स्प्रे करके दे सकेंगे ऑक्सीजन
डॉ. संदीप पाटिल का कहना है कि महामारी के इस दौर में ऑक्सीजन की इस गंभीर समस्या के चलते इसे इजाद किया गया है. ये पोर्टेबल है और इमरजेंसी में इसे काफी आसानी से इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. पाटिल के मुताबिक इस बोतल में एक खास डिवाइस भी लगाई गई है जिसके जरिए मरीज के मुंह में स्प्रे करके ऑक्सीजन दी जा सकती है. इसकी बिक्री कंपनी की वेबसाइट swasa.in से की जा रही है. अभी एक दिन में 1000 बोतलों का प्रोडक्शन किया जा रहा है. 

आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण की ताज़ा जानकारी पर

आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण की ताज़ा जानकारी पर

केंद्र सरकार देशभर में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और टीके लगाने की गति को तेज करने के लिये प्रतिबद्ध है। कोविड-19 के टीकों की सर्व-उपलब्धता का नया दौर 21 जून, 2021 से शुरू किया गया है। टीकाकरण अभियान को अधिक से अधिक वैक्सीन की उपलब्धता के जरिये बढ़ाया गया। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पूर्व सूचना प्रदान की गई, ताकि वे बेहतर योजना के साथ टीके लगाने का बंदोबस्त कर सकें और टीके की आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त किया जा सके।

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निःशुल्क कोविड वैक्सीन प्रदान करके उन्हें समर्थन दे रही है। टीकों की सर्व-उपलब्धता के नये चरण में, केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं से 75 प्रतिशत टीके खरीदकर उन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निःशुल्क प्रदान करेगी।

केंद्र सरकार द्वारा सभी प्रकार के स्रोतों से अब तक वैक्सीन की 39.59करोड़ से अधिक (39,59,21,220)खुराकें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदान की गई हैं। इसके अलावा 30,250खुराकें भेजे जाने की तैयारी है।

आज आठ बजे सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से उपरोक्त खुराकों में से बेकार हो जाने वाली खुराकों को मिलाकर कुल 38,07,68,770खुराकों की खपत हो चुकी है।

अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 टीके की1.51 करोड़ से अधिक(1,51,52,450)अतिरिक्त और बिना इस्तेमाल की हुई खुराकें बची हैं, जिन्हें लगाया जाना है। 

14 जुलाई :  कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

14 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 36.76 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,01,04,720 मरीज स्वस्थ हुए।

रिकवरी दर में बढ़ोत्तरी वह 97.28 प्रतिशत पहुंची।

पिछले 24 घंटों के दौरान 41,000 मरीज स्वस्थ हुए।

पिछले 24 घंटों में भारत में 38,792 नये मामले दर्ज हुए।

भारत में इस समय सक्रिय मामले 4,29,946 हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 2.25 प्रतिशत है।

 

 

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.10 प्रतिशत है, जो लगातार 23वें दिन तीन प्रतिशत से कम पर कायम है।

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 43.59 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। 

अब तक दुनिया के 29 देशों में पहुंचा कोरोना का लैंबडा वेरिएंट, क्या यह ज्यादा खतरनाक है?

अब तक दुनिया के 29 देशों में पहुंचा कोरोना का लैंबडा वेरिएंट, क्या यह ज्यादा खतरनाक है?

Corona Lambda Variant: पेरू में अब तक प्रति व्यक्ति कोविड मौतों की संख्या सबसे अधिक है. प्रत्येक एक लाख की आबादी के पीछे 596 की मौत कोरोना से हुई है. अगला सबसे अधिक प्रभावित देश हंगरी है, जिसमें प्रति एक लाख लोगों पर 307 मौतें होती हैं.
ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से पेरू में महामारी का प्रकोप इतना अधिक है. इनमें एक खराब वित्त पोषित, अविकसित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली शामिल है, जिसमें बहुत कम आईसीयू बेड; धीमा टीकाकरण; सीमित परीक्षण क्षमता; एक बड़ी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (कुछ लोग काम नहीं कर सकते); और भीड़भाड़ वाले आवास हैं. देश को लैंबडा वेरिएंट को भी झेलना पड़ा. शुरुआत में राजधानी लीमा में अगस्त 2020 में इसके होने की पुष्टि की गई, अप्रैल 2021 तक पेरू में इसका प्रभाव 97 फीसदी था.
लैंबडा अब विश्वव्यापी हो गया है. हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह 29 देशों में पाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है: ‘‘लैंबडा कई देशों में सामुदायिक प्रसारण का कारण है, समय के साथ इसकी व्यापकता और कोविड-19 मरीजों की संख्या बढ़ रही है.’’
14 जून 2021 को, डब्ल्यूएचओ ने लैंबडा को बीमारी का वैश्विक वेरिएंट घोषित किया. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने 23 जून को इसे ‘‘अंतर्राष्ट्रीय विस्तार और कई उल्लेखनीय उत्परिवर्तन’’ के कारण ‘‘जांच के तहत वेरिएंट’’ करार दिया. ब्रिटेन में लैंबडा के आठ पुष्ट मामलों में से अधिकांश को विदेश यात्रा से जोड़ा गया है.

सबूत क्या दिखाते हैं?

वायरस का जिज्ञासा का एक प्रकार वह है जिसमें उत्परिवर्तन होते हैं जो कि ट्रांसमिसिबिलिटी (कितनी आसानी से वायरस फैलता है), बीमारी की गंभीरता, पिछले संक्रमण या टीकों से प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता, या भ्रमित नैदानिक परीक्षण जैसी चीजों को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं. कई वैज्ञानिक लैंबडा के उत्परिवर्तन के ‘‘असामान्य संयोजन’’ की बात करते हैं, जो इसे और अधिक पारगम्य (प्रवेश के योग्य) बना सकता है.
लैंबडा में स्पाइक प्रोटीन पर सात म्यूटेशन होते हैं, वायरस के बाहरी आवरण पर मशरूम के आकार की संरचना, जो इसे हमारी कोशिकाओं को जकड़ने और उन पर आक्रमण करने में मदद करते हैं. ये उत्परिवर्तन लैंबडा को हमारी कोशिकाओं को बांधना आसान बना सकते हैं और हमारे एंटीबॉडी के लिए वायरस को पकड़ना और उसे बेअसर करना कठिन बना देता है.
लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रतिरक्षा प्रणाली के टूलकिट में एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना एकमात्र उपकरण नहीं है - वे अध्ययन करने में सबसे आसान हैं. टी कोशिकाएं भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए कुछ हद तक उत्परिवर्तन - हालांकि असामान्य - लैंबडा को हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को पूरी तरह से चकमा देने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है.
तो हमारे पास क्या सबूत हैं कि ये उत्परिवर्तन लैंबडा को मूल कोरोना वायरस से अधिक खतरनाक बनाते हैं? बहुत कम, यह पता चला है. लैंबडा वेरिएंट पर कोई प्रकाशित अध्ययन नहीं है और केवल कुछ मुट्ठी भर पूर्व-पत्र हैं जो अभी तक अन्य वैज्ञानिकों (सहकर्मी समीक्षा) की जांच के अधीन हैं और एक पत्रिका में प्रकाशित हैं.
न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक प्रीप्रिंट ने लैंबडा वेरिएंट के खिलाफ फाइजर और मॉडर्न टीके के प्रभाव को देखा और मूल वायरस की तुलना में वैक्सीन-से मिली एंटीबॉडी में दो से तीन गुना कमी पाई. विश्लेषण करें तो यह एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने का एक बड़ा नुकसान नहीं है. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि ये एमआरएनए टीके शायद लैंबडा वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षात्मक रहेंगे.
चिली विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लैंबडा वेरिएंट के खिलाफ सिनोवैक (जिसे ‘‘कोरोनावैक’’ भी कहा जाता है) टीका के प्रभाव की जांच की. उन्होंने मूल वेरिएंट की तुलना में एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने में तीन गुना कमी पाई. तथ्य यह है कि इन दो अध्ययनों में पाया गया कि आंशिक स्तर पर पाई गई निष्क्रियता कम नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह टीकाकरण द्वारा प्राप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का केवल एक पहलू है.
लैंबडा के पीएचई के नवीनतम ‘‘जोखिम मूल्यांकन’’ (8 जुलाई) के अनुसार, ऐसे देश का कोई सबूत नहीं है जहां लैंबडा ने डेल्टा को पछाड़ दिया है. अध्ययन चल रहे हैं, लेकिन अभी के लिए, लैंबडा चिंता के एक प्रकार के बजाय जिज्ञासा का एक प्रकार बना हुआ है.

 

आइये एक नज़र डालते हैं आज के  कोविड-19 टीकाकरण की ताज़ा जानकारी पर

आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण की ताज़ा जानकारी पर

केंद्र सरकार देशभर में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और टीके लगाने की गति को तेज करने के लिये प्रतिबद्ध है। कोविड-19 के टीकों की सर्व-उपलब्धता का नया दौर 21 जून, 2021 से शुरू किया गया है। टीकाकरण अभियान को अधिक से अधिक वैक्सीन की उपलब्धता के जरिये बढ़ाया गया। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पूर्व सूचना प्रदान की गई, ताकि वे बेहतर योजना के साथ टीके लगाने का बंदोबस्त कर सकें और टीके की आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त किया जा सके। देशव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निःशुल्क कोविड वैक्सीन प्रदान करके उन्हें समर्थन दे रही है। टीकों की सर्व-उपलब्धता के नये चरण में, केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं से 75 प्रतिशत टीके खरीदकर उन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निःशुल्क प्रदान करेगी। केंद्र सरकार द्वारा सभी प्रकार के स्रोतों से अब तक वैक्सीन की 39.46 करोड़ से अधिक (39,46,94,020) खुराकें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदान की गई हैं। इसके अलावा 12,00,000 खुराकें भेजे जाने की तैयारी है। आज आठ बजे सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से उपरोक्त खुराकों में से बेकार हो जाने वाली खुराकों को मिलाकर कुल 37,55,38,390 खुराकों की खपत हो चुकी है। अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 टीके की 1.91 करोड़ से अधिक (1,91,55,630) अतिरिक्त और बिना इस्तेमाल की हुई खुराकें बची हैं, जिन्हें लगाया जाना है। 

13 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

13 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 38.14 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

पिछले 24 घंटों में भारत में 31,443 नये मामले दर्ज हुये,जो 118 दिनों में सबसे कम हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,00,63,720 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.28% हुई।

पिछले 24 घंटों के दौरान 49,007 मरीज ठीक हुए।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,31,315 है109 दिनों में सबसे कम।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.40% हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई हैवर्तमान में 2.28% है

 

दैनिक पॉजिटिविटी दर 1.81%लगातार 22वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 43.40 करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

मोटापा घटाने के लिए 5 सबसे असरदार डाइटिंग टिप्स, हफ्तेभर में वजन कम होने लगेगा

मोटापा घटाने के लिए 5 सबसे असरदार डाइटिंग टिप्स, हफ्तेभर में वजन कम होने लगेगा

Weight Loss Diet Tips: वजन कम करना काफी मुश्किल काम है. हालांकि डाइट और एक्सरसाइज के जरिए आप वजन कम कर सकते हैं. कई लोग मोटापा घटाने के लिए ऐसे उपाय ढूंढते हैं जिससे जल्दी वजन कम हो जाए. मोटापा बढ़ने से न सिर्फ शरीर बेडौल होता है बल्कि कई बीमारियां भी परेशान करने लगती हैं. ऐसे में कुछ लोग वजन कम करने के लिए घरेलू उयाय (Remedies Lose Weight) भी ढूंढते हैं तो वहीं कुछ लोग डाइट (Weight Loss Diet) फॉलो करके वजन कम करते हैं. आज हम आपको वजन कम करने के लिए खाने से अलग ऐसी टिप्स बता रहे हैं जो आपको वजन कम करने में मदद करेंगी. आप कुछ बातों का ध्यान रखते हुए पेट की चर्बी (Belly Fat) को आसानी से कम कर सकते हैं. जानते हैं कैसे?


वजन कम करने के लिए डाइटिंग टिप्स
1- वजन कम करने के लिए आपको डाइटिंग की जरूरत नहीं है बल्कि आपको डाइट को बैलेंस करने की जरूरत है. मोटापा कम करने के लिए आपको डाइट में कम प्रोटीन वाले आहार को ही शामिल करना चाहिए. तली हुई चीजों की जगह ग्रिल्ड चीजें खाएं. ज्यादा फैटी खाने से वजन बढ़ता है.
2- मोटापा कम करने के लिए आपको अपनी लाइफस्टाइल से अल्कोहल, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक्स को हटा देना चाहिए. इसके अलावा आईसक्रीम भी वजन बढ़ाती है. इसलिए पतला होने के लिए आपको इन चीजों को अपनी डाइट से हटा देना चाहिए.
3- मोटापा कम करने की चाहत रखने वालों को अपने डेली रुटीन में कुछ बदलाव करने चाहिए. खासतौर से डाइट को लेकर ध्यान रखने की जरूरत है. आपको अपनी डाइट से ज्यादा शुगर, फैट और कैलोरी हटा देनी चाहिए. इससे तेजी से वजन में फर्क नजर आएगा.
4- वजन को कंट्रोल रखने के लिए आपको डाइट में ड्राईफ्रूट्स जैसे बादाम और अखरोट जरूर शामिल करने चाहिए. बादाम में प्रोटीन होता है जिससे मांसपेशियां रिपेयर होती हैं और फाइबर होने की वजह से भूख नहीं लगती है. बादाम को वजन कम करने के लिए सुपरफूड माना जाता है. बादाम में हाई फाइबर और कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जिससे पेट भरा हुआ लगता है.
5- वजन कम करने के लिए आपको डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां और फल जरूर शामिल करने चाहिए. फल और सब्जियों में फाइबर बहुत ज्यादा और कर्बोहाइड्रेट्स, कैलोरीज बहुत कम होती हैं. आप ज्यादा सब्जियां अपनी डाइट में शामिल करके कम कैलोरी कंज्यूम करते हैं. जिससे आपका मोटापा तेजी से कम होने लगता है.

 

खुशखबरी : जल्द लगेगा 12 से 18 साल के बच्चों को कोरोना का टीका

खुशखबरी : जल्द लगेगा 12 से 18 साल के बच्चों को कोरोना का टीका

नई दिल्ली। तीसरी लहर को देखते हुए सरकार स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती महिलाओं के बाद अब बच्चों को टीका लगाने की योजना बना रही है। इसके तहत पहले 12 से 18 साल के बच्चों को टीका दिया जाएगा। बच्चों का दूसरे चरण का टीकाकरण सितंबर महीने के बाद होगा। इस योजना को शुरू करने के लिए फिलहाल सरकार जाइडस कैडिला की डीएनए वैक्सीन पर विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) की सिफारिशों का इंतजार कर रही है। 


वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद बच्चों को भी यह दी जा सकती है। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीकाकरण में बच्चों को भी शामिल करने की योजना बन चुकी है। 


चूंकि जाइडस कैडिला की वैक्सीन परीक्षण में 12 साल तक के बच्चे शामिल थे। इसलिए वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद वयस्कों के साथ 12 साल तक वालों को वैक्सीन मिलेगी। यह पहला चरण होगा जोकि इसी माह शुरू होने के बाद सितंबर माह तक चलेगा।


सितंबर में बच्चों पर कोवाक्सिन का परीक्षण

पूरा सितंबर माह में कोवाक्सिन का परीक्षण भी पूरा हो जाएगा जोकि इन दिनों 2 से 18 साल तक की आयु वालों पर चल रहा है। इसके परिणाम सामने आने के बाद सितंबर-अक्तूबर माह में 12 साल से कम आयु वालों को भी टीकाकरण में शामिल कर लिया जाएगा। 


उन्होंने यहां तक बताया कि आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद ही राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीकाकरण शाखा ने इस संदर्भ में तैयारी पूरी कर ली है।


 30 करोड़ से अधिक है आबादी 
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों की कुल आबादी 94 करोड़ से अधिक है। जबकि 18 वर्ष से कम आयु वालों की आबादी करीब 30 से 32 करोड़ के आसपास है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दो वैक्सीन के साथ बच्चों का टीकाकरण शुरू करने से फायदा होगा, क्योंकि भारत के पास बाल टीकाकरण का अनुभव काफी है। इसका असर कोरोना टीकाकरण पर सकारात्मक रहेगा।


कंपनी ने शुरू कर दिया उत्पादन 
आपात इस्तेमाल की अनुमति से पहले जाइडस कैडिला ने वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया है। सरकार को कंपनी ने जानकारी दी है कि उनके पास अगले तीन माह में तीन से चार करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की क्षमता है जिसे पूरा करने के लिए वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया है। इसकी पुष्टि करते हुए कंपनी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अगस्त माह तक एक करोड़ खुराक सरकार को उपलब्ध कराने पर काम चल रहा है।