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कोरोना वायरस के खतरे के बीच शरीर में कैसे बनाए रखें ऑक्सीजन लेवल, जानें किन चीजों का करें सेवन

कोरोना वायरस के खतरे के बीच शरीर में कैसे बनाए रखें ऑक्सीजन लेवल, जानें किन चीजों का करें सेवन

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच दुनिया इस महामारी का विकराल रूप देख रही है। वहीं, इस बार कोरोना के इन लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ ऐसी वजह है, जिसकी वजह से इस बीमारी का डरावना रूप देखने को मिला। कोरोना के मरीजों में ऑक्सीजन लेवल की कमी होने के कारण उनकी हालत तेजी से बिगड़ती है। ऐसे में सभी लोग शरीर में ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने के लिए डाइट का खास ख्याल रख रहे हैं। आइए, जानते हैं ऑक्सीजन को बनाए रखने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

इन चीजों के सेवन से बना रहा है ऑक्सीजन लेवल
शरीर में ऑक्सीजन लेवल बनाए रखने के लिए आयरन, कॉपर, विटामिन ए, विटामिन बी2, विटामिन बी3, विटामिन बी5, विटामिन बी6, विटामिन बी9 और विटामिन 12 की जरूरत होती है।


विटामिन बी12 के स्रोत-
मांसाहारी स्रोत - ऑर्गन मीट (लीवर), चिकन, टूना फिश और अंडे।
शाकाहारी स्रोत- मशरूम, आलू, एवोकाडो, मूंगफली, ब्रोकली, ब्राउन राइस और पनीर आदि।

 

विटामिन बी2-
मांसाहारी स्रोत - अंडे, ऑर्गन मीट (किडनीलीवर)।
शाकाहारी स्रोत- दूध, दही, ओट्स, बादाम, बींस और टमाटर।

 

विटामिन ए-
मांसाहारी स्रोत - आर्गन मीट, टूना फिश और अंडे में मिलता है।
शाकाहारी स्रोत- गाजर, शकरकंद, लौकी, आम, वनीला आइसक्रीम और पालक।

 

आयरन-
मांसाहारी स्रोत - ओएस्टर, चिकन, बत्तख और बकरे के मीट में।
शाकाहारी स्रोत- बींस, गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, दालें और मटर।

 

कॉपर-
मांसाहारी स्रोत - ओएस्टर (सीप), क्रैब और टर्की।
शाकाहारी स्रोत- चॉकलेट, तिल, काजू, आलू, शिताके मशरूम।

Disclaimer- इस आलेख में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है। हालांकि, हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। यह लेख केवल आपकी जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। 

बढ़ा खतरा: फेफड़े ही नहीं शरीर के बाकी अंगों पर भी हमला करता है कोरोना वायरस

बढ़ा खतरा: फेफड़े ही नहीं शरीर के बाकी अंगों पर भी हमला करता है कोरोना वायरस

नई दिल्ली, देश में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर का हमला तेज हो गया है. बेलगाम कोरोना के चलते देश में पिछले एक सप्तानह से हर दिन कोरोना के तीन लाख से ज्यानदा नए केस सामने आ रहे हैं. कोरोना की दूसरी लहर में इस बात के संकेत मिले हैं कि वायरस न केवल फेफड़ों (Lungs) पर हमला करता है, बल्कि कोरोना के हमले से शरीर के कई अंग भी प्रभावित होते हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे-जैसे शरीर पर कोरोना वायरस का हमला बढ़ता है वैसे वैसे ये शरीर के इम्यूभन सिस्टेम को कमजोर करने लगता है और शरीर के अन्य़ अंगों पर हमला करने लगता है. वायरस दूसरे बॉडी पार्ट्स में सूजन पैदा कर रहा है. अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाइपरटेंशन या मोटापे की समस्या है तो फिर कोरोना का शरीर पर असर और ज्यादा होता है.

ऐसे में जरूरी है कि अगर आपको अपनी शरीर में इस तरह की कोई दिक्कीत दिख रही है तो उसे नजरअंदाज करने की भूल न करें...

वायरस दिल पर करता है बड़ा हमला :
जिन लोगों को पहले से हार्ट की बीमारी है या फिर जिनका मेटाबोलकि सिस्टकम खराब है उन लोगों के कोरोना के चपेट में आने का खतरा ज्याजदा होता है. SARs-COV-2 वायरस कोरोना मरीजों के दिल की मांसपेशियों में सूजन बढ़ा देता है. कोरोना पर नजर रखने वाले डॉक्टारों का कहना है कि कोरोना के लगभग एक चौथाई मरीज, जिन्हेंज गंभीर लक्षण के बाद अस्पटताल में भर्ती कराया गया था.

न्यूरोलॉजिकल की बढ़ रही समस्या :
इस बार के कोरोना में कोविड मरीजों में सिर दर्द, चक्क,र आना, धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण सामने आए हैं. JAMA न्यूरोलॉजी में छपी एक स्टडी के मुताबिक, वुहान में अस्पताल में भर्ती 214 में से एक तिहाई कोरोना के मरीजों में न्यूरोलॉजिक लक्षण पाए गए थे. बताया जाता है कि कोरोना का ये असर काफी लंबे समय तक बना रहता है.

किडनी पर हमला कर सकता है वायरस :
कोरोना का असर अगर लंबे समय तक किसी के शरीर में रह जाए तो किडनी की समस्याह बढ़ जाती है. SARS-CoV-2 कोशिकाओं पर बड़ा हमला करता है, जिसकी वजह से किडनी समेत कई अंगो की कोशिकाएं संक्रमित हो जाती हैं. वायरस किडनी में पहुंचने के बाद सूजन कर देता है जिसका असर किडनी के टिश्यू पर भी पड़ता है. इसकी वजह से यूरीन की मात्रा कम हो जाती है.

ब्लड क्लॉट का भी बना रहता है खतरा :
कोरोना की वजह से शरीर में सूजन हो जाती है, जिसकी वजह से कई लोगों में खून के थक्केा बनने लगते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ACE2 रिसेप्टर्स से जुड़ने के बाद SARS-COV-2 वायरस रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है. इसकी वजह से बनने वाला प्रोटीन ब्लड क्लॉटिंग बढ़ाता है. खून के थक्कें बन जाने के कारण फेफड़ों पर सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

 

सावधान: एक रिपोर्ट के मुताबिक वन्यजीवों से कोरोनावायरस फैलने की अधिक संभावना

सावधान: एक रिपोर्ट के मुताबिक वन्यजीवों से कोरोनावायरस फैलने की अधिक संभावना

कोविड महामारी के स्रोत का पता लगाने के प्रयास लगातार जारी हैं। हाल ही में सीएनएन द्वारा प्रसारित साक्षात्कार में एक प्रमुख वैज्ञानिक सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल के पूर्व निदेशक और वायरोलॉजिस्ट रॉबर्ट रेडफील्ड ने बिना किसी प्रमाण के दावा किया कि सार्स-कोव-2 वुहान की प्रयोगशाला से निकला है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह मात्र एक निजी राय है। इसके दो दिन बाद कुछ अन्य लोगों (डबल्यूएचओ और चीन सरकार की टीम) ने वायरस के वन्यजीवों से फैलने की बात कही जिसकी शुरुआत चमगादड़ों से हुई है। इसमें भी कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि वुहान की प्रयोगशाला में किसी को भी ऐसा कोरोनावायरस नहीं मिला है जिसे बदलकर ज़्यादा फैलने वाला बनाया गया हो और फिर उसने बदलते-बदलते सार्स-कोव-2 जैसा रूप लेकर वहां किसी कर्मचारी को संक्रमित कर दिया हो। इसी तरह किसी को जंगली जीवों में कोरोनावायरस के प्रमाण भी नहीं मिले हैं जो एक से दूसरे जंतु में आगे बढ़ते-बढ़ते उत्परिवर्तित होकर सार्स-कोव-2 के समान हो गया हो और फिर मनुष्यों में प्रवेश कर गया हो।
अभी तक ये दोनों ही विचार प्रमाण-विहीन हैं और दोनों ही संभव हैं।
फिर भी इन दोनों विचारों के सही होने की संभावना बराबर नहीं है। देखा जाए तो प्रयोगशाला से वायरस के निकलने की कोई एक या शायद कुछ मुट्ठी भर घटनाएं हो सकती हैं जबकि वन्यजीवों से वायरस के फैलने के अनेकों अवसर होंगे।
रेडफील्ड की अटकल है कि किसी भी वायरस के लिए इतने कम समय में जीवों से मनुष्यों में प्रवेश करने की कुशलता हासिल करना बिना प्रयोगशाला के संभव नहीं है। लेकिन एक बार में इतनी बड़ी छलांग बहुत बड़ी बात होगी। स्वयं रेडफील्ड ने कहा है कि यह वायरस हमारी जानकारी में आने के कई महीनों पहले से प्रसारित हो रहा था। यानी मनुष्यों तक पहुंचने से पहले एक लंबी अवधि रही होगी जो इस वायरस के वन्यजीवों से फैलने का संकेत देती है।
वन्यजीवों से वायरस के फैलने का विचार इस बात पर टिका है कि चीन में करोड़ों चमगादड़ हैं और उनका मनुष्यों समेत अन्य जीवों से खूब संपर्क होता है। अत:, वायरस के मनुष्यों में प्रवेश करने के कई मौके हो सकते हैं। मूल रूप में तो यह वायरस मनुष्यों में खुद की प्रतिलिपि तैयार करने में अक्षम होता है। लेकिन मनुष्यों को संक्रमित करने के पहले इसे विकसित होने के लाखों मौके मिले होंगे। गौरतलब है कि चमगादड़ अक्सर कई जीवों जैसे पैंगोलिन, बैजर, सूअर, एवं अन्य के संपर्क में आते हैं जिससे ये मौकापरस्त वायरस इन प्रजातियों को आसानी से संक्रमित कर देते हैं। चमगादड़ कॉलोनियों में रहते हैं इसलिए विभिन्न प्रकार के कोरोनावायरस के मिश्रण की संभावना होती है और उन्हें अपने जींस को पुनर्मिश्रित करने का पूरा मौका मिलता है। यहां तक कि एक अकेले चमगादड़ में भी विभिन्न कोरोनावायरस देखे गए हैं।
इन वायरसों को मेज़बानों के बीच छलांग लगाने के लिए कई महीनों का समय मिलता है। इसी दौरान वे उत्परिवर्तित भी होते रहते हैं। एक बार मनुष्यों में प्रवेश करने पर उन वायरस संस्करणों को वरीयता मिलती है जो मानव कोशिकाओं को संक्रमित करके अपनी प्रतिलिपियां बनाने की क्षमता रखते हैं। जल्द ही वे कोशिकाओं को इस स्तर तक संक्रमित कर देते हैं कि लोग बीमार होने लगते हैं। तब जाकर एक नई बीमारी प्रकट होती है। यह वही अवधि होती है जिसे रेडफील्ड ने माना है कि वायरस प्रसारित होता रहा है।
वास्तव में हम कोरोनावायरस के विकास में यह घटनाक्रम देख भी रहे हैं। इसमें काफी तेज़ी से उत्परिवर्तन हो रहे हैं (E484K और 501Y जैसे) जो वायरस को और अधिक संक्रामक बनाते हैं। युनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वायरोलॉजिस्ट एडम लौरिंग के अनुसार ये परिवर्तन प्राकृतिक रूप से हो रहे हैं। जिसका कारण यह है कि वायरस को लाखों संक्रमित व्यक्तियों में उत्परिवर्तन के लाखों अवसर मिल रहे हैं।
तो किसे सही माना जाए? रेडफील्ड की प्रयोगशाला से रिसाव की परिकल्पना को जो मात्र एक संयोग पर निर्भर है? या फिर वन्यजीवों से प्रसारित होने की परिकल्पना को जिसे लाखों अवसर मिल रहे हैं? हालांकि दोनों ही संभव हैं लेकिन एक की संभावना अधिक मालूम होती है। इसीलिए, अधिकांश वैज्ञानिकों को वन्यजीवों के माध्यम से इस वायरस के फैलने के आशंका अधिक विश्वसनीय लगती है।
वायरस की उत्पत्ति का सवाल महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी महामारी के शुरू होने की जानकारी मिल सकती है ताकि भविष्य में इस तरह की स्थितियों को रोका जा सके। आज भी कई रोग पैदा करने वाले वायरस हमारे बीच मौजूद हैं जो महामारी का रूप ले सकते हैं।
-स्रोत फीचर्स
 

होम आइसोलेशन के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की नई गाइडलाइंस, जानें घर पर कैसे करें कोरोना मरीजों का इलाज

होम आइसोलेशन के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की नई गाइडलाइंस, जानें घर पर कैसे करें कोरोना मरीजों का इलाज

नई दिल्ली: कोरोना को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. अस्पतालों के बाहर इलाज के लिए भटक रहे मरीजों के अलावा बड़ी संख्या में कोरोना के ऐसे भी शिकार हैं जो घरों में बंद हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे ही कोरोना के हल्के और बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं.


-होम आइसोलेशन में रहने पर 10 दिन बाद अगर लगातार 3 दिन तक लक्षण ना दिखे तो दोबारा टेस्ट की जरूरत नहीं है
-घर पर रहने वाले मरीज रेमडेसिविर इंजेक्शन न लगाएं, अस्पताल में ही लगाएं
-मामूली लक्षण में मरीजों को स्टेरॉयड नहीं दिया जाए
-60+ उम्र के कोरोना पॉजिटिव अगर हाइपरटेंशन, डाइबिटीज, दिल, फेफड़े या गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं तो डॉक्टर से पूछकर ही आइसोलेशन में रहें
-घर पर रहने वाले मरीज दिन में दो बार भाप लें और गर्म पानी से गरारा करें


साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने खास हिदायत दी है कि घर पर रहने वाले कोरोना संक्रमितों का ऑक्सीजन लेवल 94 से ऊपर रहना चाहिए. 

‘आयुष 64’ - लक्षणविहीन संक्रमण, हल्के तथा मध्यम संक्रमण के लिए इसे अनुशंसित किया जा सकता है: डॉ. वी.एम. कटोच

‘आयुष 64’ - लक्षणविहीन संक्रमण, हल्के तथा मध्यम संक्रमण के लिए इसे अनुशंसित किया जा सकता है: डॉ. वी.एम. कटोच

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के विश्वव्यापी कहर के बीच ‘आयुष 64’ दवा हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की एक किरण के रूप में उभरी है। देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फॉर्मूला आयुष 64, लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के लिए मानक उपचार की सहयोगी (adjunct to standard care) के तौर पर लाभकारी है। उल्लेखनीय है कि आयुष 64 मूल रूप से मलेरिया की दवा के रूप में वर्ष 1980 में विकसित की गई थी तथा कोविड 19 संक्रमण हेतु पुनरुद्देशित (repurpose) की गई है।

हाल ही में आयुष मंत्रालय तथा-सीएसआईआर द्वारा हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में आयुष 64 की प्रभावकारिता और इसके सुरक्षित होने का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक और गहन बहु-केंद्र नैदानिक (क्लीनिकल) ​​परीक्षण पूरा किया गया है।

आयुष 64, सप्तपर्ण (Alstonia scholaris), कुटकी (Picrorhiza kurroa), चिरायता (Swertia chirata) एवं कुबेराक्ष (Caesalpinia crista) औषधियों से बनी है। यह व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर बनाई गयी है और सुरक्षित तथा प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है। इस दवाई को लेने की सलाह आयुर्वेद एवं योग आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga)’ द्वारा भी दी गयी है जोकि आईसीएमआर की कोविड प्रबंधन पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स (National Task Force on COVID Management) के निरीक्षण के बाद जारी किया गया था।

पुणे के सेंटर फॉर रूमेटिक डिसीज के निदेशक और आयुष मंत्रालय के ‘आयुष मंत्रालय-सीएसआईआर सहयोग’ के मानद मुख्य नैदानिक ​​समन्वयक डॉ. अरविंद चोपड़ा ने बताया कि परीक्षण तीन केंद्रों पर आयोजित किया गया था। इसमें KGMU, लखनऊ; DMIMS, वर्धा और BMC कोविड केंद्र, मुंबई शामिल रहे तथा प्रत्येक केंद्र में 70 प्रतिभागी शामिल रहे। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि आयुष 64 ने मानक चिकित्सा (Standard of Care यानी एसओसी) के एक सहायक के रूप में महत्वपूर्ण सुधार प्रदर्शित किया। और इस तरह इसे एसओसी के साथ लेने पर अकेले एसओसी की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने की अवधि भी कम देखी गई। उन्होंने यह भी साझा किया कि सामान्य स्वास्थ्य, थकान, चिंता, तनाव, भूख, सामान्य हर्ष और नींद पर आयुष 64 के कई महत्वपूर्ण, लाभकारी प्रभाव भी देखे गए। निष्कर्ष रूप में डॉ. चोपड़ा ने कहा कि इस तरह के ‘नियंत्रित दवा परीक्षण अध्ययन’ ने स्पष्ट सबूत दिए हैं कि आयुष 64 को कोविड -19 के हल्के से मध्यम मामलों का उपचार करने के लिए मानक चिकित्सा के सहायक के रूप में प्रभावी और सुरक्षित दवा के रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो रोगी आयुष 64 ले रहे हैं, उनकी निगरानी की अभी भी आवश्यकता होगी ताकि अगर बीमारी और बिगड़ने की स्थिति हो तो उसमें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ऑक्सीजन और अन्य उपचार उपायों के साथ अधिक गहन चिकित्सा की आवश्यकता की पहचान की जा सके।

आयुष नेशनल रिसर्च प्रोफेसर तथा कोविड-19 पर अंतर-विषयक आयुष अनुसंधान और विकास कार्य बल (Inter-disciplinary Ayush Research and Development Task Force on COVID-19) के अध्यक्ष डॉ. भूषण पटवर्धन ने कहा कि आयुष 64 पर हुए इस अध्ययन के परिणाम अत्यधिक उत्साहजनक हैं और आपदा की इस कठिन घड़ी में ज़रूरतमंद मरीज़ों आयुष 64 का फायदा मिलना ही चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति (Ayush-CSIR Joint Monitoring Committee) ने इस बहु-केंद्रीय परीक्षण की निगरानी की थी। स्वास्थ्य शोध विभाग के पूर्व सचिव तथा आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी एम कटोच इस समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष 64 पर हुए इन नैदानिक अध्ययनों (clinical studies) की समय-समय पर एक स्वतंत्र संस्था 'डेटा और सुरक्षा प्रबंधन बोर्ड' (Data and Safety Management Board यानी डीएसएमबी) द्वारा समीक्षा की जाती थी।

डॉ. पटवर्धन के दावे की पुष्टि करते हुए आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ वीएम कटोच ने बताया कि समिति ने आयुष 64 के अध्ययन के परिणामों की गहन समीक्षा की है। उन्होंने कोविड-19 के लक्षणविहीन संक्रमण, हल्के तथा मध्यम संक्रमण के प्रबंधन के लिए इसके उपयोग की संस्तुति की। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस निगरानी समिति ने आयुष मंत्रालय से सिफारिश की है कि वह राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों / नियामकों (Regulators) को आयुष 64 के इस नये उपयोग (Repurposing) के अनुरूप इसे हल्के और मध्यम स्तर के कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में उपयोगी के तौर पर सूचित करे।

केंद्रीय आयुर्वेदीय अनुसन्धान संस्थान (CCRAS) के महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने विस्तार से बताया कि CSIR-IIIM, DBT-THSTI, ICMR-NIN, AIIMS जोधपुर और मेडिकल कॉलेजों सहित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़; किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ; गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नागपुर; दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नागपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आयुष 64 पर अध्ययन जारी हैं। अब तक मिले परिणामों ने हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमणों से निबटने में इसकी भूमिका स्पष्ट तौर पर जाहिर की है। उन्होंने यह भी बताया कि सात नैदानिक (क्लीनिकल) अध्ययनों के परिणाम से पता चला है कि आयुष 64 के उपयोग से संक्रमण के जल्दी ठीक होने (Early clinical recovery) और बीमारी के गंभीर होने से बचने के संकेत मिले हैं।

 

उखड़ती साँसों के लिए संजीवनी साबित हो रही होमियोपैथी : डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी

उखड़ती साँसों के लिए संजीवनी साबित हो रही होमियोपैथी : डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी

रायपुर | आज के समय मे संक्रमित लॉगो का ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर रहा है और ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए त्राहि-त्राहि मची है ऐसे समय में होम्योपैथी कारगर साबित हो रही है होम्योपैथी दवाओं से ऑक्सीजन के तेजी से नीचे आने की प्रक्रिया संभल जा रही है ऑक्सीजन लेवल एकदम से नहीं गिर रहा है लगभग 300 से अधिक मरीजों पर यह प्रयोग डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी द्वारा लिली चौक पुरानी बस्ती स्थित त्रिवेदी होम्योपैथी क्लीनिक में किया गया है।

डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी ने बताया कि पिछले बार का संक्रमण इस बार से संक्रमण काफी ज्यादा खतरनाक दिख रहा और यह सीधा फेफड़ों पर असर करता है,जिसका एक मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा इम्युनिटी बढ़ाने की दवाई लेना भी है,तेज बुखार के साथ हाथ पैरों व सर में असहनीय दर्द,खासी आना,कमजोरी गला सुखना ,ठंड लगना के साथ अन्य कई लक्षण है व मानसिक रूप से लोग डर व सहम चुके और मानसिक प्रेशर बढऩे से कई लोगो की आंतरिक शक्ति कमजोरी हो रही, लेकिन होम्योपैथी में लक्षणों ( शारीरिक व मानसिक) के मिलान के आधार पर चुनी हुई औषधि देने से चमत्कारिक परिणाम सामने आ रहे हैं कई ऐसे मरीज हैं जिनका ऑक्सीजन लेवल 70 से 75 तक था और आज वह नॉर्मल है वह एकदम स्वस्थ है अपने सारा काम कर रहे हैं। होम्योपैथी में एक नहीं सैकड़ों दवाइयां उपलब्ध है जो ऑक्सीजन की कमी को दूर करने में सहयोग कर सकती हैं इसमें कृतिम ऑक्सीजन पर निर्भरता कम होगी उन्होंने यह बताया कि कोरोनावायरस  से बचाव के इलाज में होम्योपैथी को शामिल करने से अस्पताल पर दबाव कम होगा जिससे इलाज में आसानी होगी और साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए होम्योपैथिक की आर्सेनिक एल्बम 30 दवा हर महीने में 3 दिन तीन खुराक तक लगातार ले सकते हैं जिससे कि कहीं न कहीं इस महामारी लडऩे के लिए हमारे अंदर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी वह हम काफी हद तक बच पाएंगे। आगे चर्चा करते हुवे उन्होंने यह भी बताया कि होमियोपैथी में लक्षणों में मिलान के आधार पर दवाईये दी जाती है किसी भी बीमारी के लिए पहले से कोई दवाई नही होती है अत: फेसबुक और व्हाट्सअप पर मैसेज पढ़कर दवाई लेने न दौड़े अपने नजदीकी चिकित्सक से जरूर संपर्क करे।

 

 
इन चीजों को छूने के बाद नहीं धोए हाथ तो हो सकतें है Covid-19 के शिकार!

इन चीजों को छूने के बाद नहीं धोए हाथ तो हो सकतें है Covid-19 के शिकार!

Covid-19 Alert: देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है. कोरोना के रोजाना मामले तीन लाख को पार कर रहे है और हजारों लोगों की रोज मौत हो रही है. ऐसे में कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण से बचने के लिए आपका मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और हाथों को बार-बार साफ करना और हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना शामिल है. कोरोना इंफेक्श न (Corona Infection) से बचने के लिए हाथों को साबुन या हैंडवॉश से अच्छी तरह से धोना बेहद जरूरी है. बच्चों को भी हमें हाथ धोने के जरूरत को बताने की आवश्यकता है.
हमें किसी भी बीमारी या इंफेक्शजन से बचने के लिए हाथों को ठीक से साफ करना चाहिए. यह आदतें हम घर में ही सीखते है. आपको हम बताते हैं कि हाथों को साफ रखने के क्या फायदे है और हाथों हाइजीन को आप कैसे मेंटेन कर सकतें है.
इन चीजों को करने से पहले हाथ धोना है बेहद जरूरी
1. फल और सब्जियों को काटने या पकाने से पहले आप हाथ अच्छे से धोएं.
2. खाने से पहले हाथ ठीक से धोएं.
3. अगर आप किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल कर रहे है तो हाथों को साफ रखना बहुत जरूरी है.
4. घाव का इलाज या दवाई लगाने से हाथों को ठीक से साफ करें.
5. आखों में कॉन्टेक्ट लेंस लगाने या हटाने से पहले भी हाथों को साफ करें.
6. खाना बनाने से पहले हाथ धोएं.
7. टॉयलेट का इस्तेमाल करने या बच्चों का डायपर चेंज करने के बाद हाथों को साबुन से धोएं.
8. खांसने या छींकने के बाद भी हाथों को धोएं.
9. जानवर को चारा देने के बाद हाथों को धोएं.
10. कचरा छूने के बाद हाथों को साफ जरूर करें
हाथों को कैसे करें साफ
कई बार हमारे साथ ऐसा होता है जब हमारे पास साबुन और पानी नहीं होता की हम हाथों को साफ करें ऐसे में हैंड सैनिटाइजर से आप अपने हाथों को साफ कर सकतें है. सबसे पहले आप 60 प्रतिशत अल्कोैहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का यूज करें. सबसे पहले आप हैंड सैनिटाइजर पर्याप्त मात्रा में लें और हाथों को एक साथ रगड़ें, पूरे हाथों को कवर करें. हाथ को तब तक कवर करके रखें जब तक की हाथ पूरी तरह से सुख ना जाएं.
 

बेहद काम की खबर: कैसे करें असली-नकली रेमेडिसविर की पहचान, जरूर देखें ये निशान

बेहद काम की खबर: कैसे करें असली-नकली रेमेडिसविर की पहचान, जरूर देखें ये निशान

Remdesivir Real Or Fake: देश भर में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर के कारण हाहाकार मचा है. गंभीर मरीजों के ईलाज के लिए डॉक्टर्स रेमेडिसविर (Remdesivir) इंजेक्शन की मांग कर रहे हैं. पर इस बीच इसकी कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं. कुछ लोग नकली रेमेडिसविर बेच रहे हैं, ये भी पता चला. ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर कैसे इस इंजेक्शन के असली या नकली होने की पहचान की जाए.
अगर आपके मन में भी इसी तरह का सवाल है तो ये खबर आपके बेहद काम की है. दरअसल, अब आप असली और नकली दवा की बेहद आसानी से पहचान कर सकते हैं.
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी और IPS अफसर मोनिका भारद्वाज ने इससे संबंधित ट्वीट किया है. ये काफी वायरल भी हो रहा है.
उन्होंने ट्वीट में इस बात की जानकारी दी है कि असली व नकली दवा में क्या फर्क दिखता है. उन्होंने रेमेडिसविर के पैकेट के ऊपर कुछ गलतियों के बारे में बताया है, जिन पर गौर करके ही आप असली और नकली रेमेडिसविर के बीच फर्क को जान सकते हैं.

 

कुछ खास बातें जिन पर ध्यान देना है, वे हैं-
1. नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले ‘Rx’ नहीं है.
2. असली इंजेक्शन के पैकेट पर ‘100 mg/Vial’ लिखा है, जबकि नकली पैकेट पर ‘100 mg/vial’ लिखा है. यानी स्पेलिंग नहीं कैपिटल लेटर का फर्क है, गौर करें.
3. असली पैकेट पर जहां ‘For use in’ लिखा है तो वहीं नकली पैकेट पर ‘for use in’ है. यहां भी लेटर का झोल है.
4. असली रेमेडिसविर इंजेक्शन के पैकेट के पीछे वॉर्निंग लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट में काले रंग में.

 

18 से 44 साल के लोगों के लिए आज शाम इतने बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा, जानें पूरा प्रोसेस

18 से 44 साल के लोगों के लिए आज शाम इतने बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा, जानें पूरा प्रोसेस

नई दिल्ली. देशभर में एक मई से कोरोना टीकाकरण का अगला चरण शुरू होने जा रहा है. इसी शनिवार से 18 साल से 44 साल के लोग भी कोरोना का टीका लगवाने के पात्र होंगे. इससे पहले 45 साल से ऊपर के लोग ही टीका लगवा सकते थे. 18 से 44 की उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए आज शाम 4 बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. सरकार ने साफ किया है कि इन लोगों को वॉक-इन यानी सीधा टीका केंद्रों पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा नहीं मिलेगी. बता दें कि रजिस्ट्रेशन करने के लिए आप कोविन पोर्टल या फिर आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. टीकाकरण के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ही मान्य किया गया है.


क्या है प्रोसेस?
कोरोना वैक्सीनेशन के लिए 18-44 साल के लोग आज से कोविन पोर्टल या फिर आरोग्य सेतु एप पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. Cowin ऐप पर या फिर cowin.gov.in वेबसाइट पर जाकर आपको सबसे पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस ऐप या वेबसाइट पर जाकर आपको अपना मोबाइल नंबर फीड करना होगा. मोबाइल नंबर पर डालने पर आपको एक OTP दिया जाएगा. इस OTP को वैरिफाई कराना होगा. इसके बाद आप वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन पेज तक पहुंच जाएंगे. यहां पर आपको फोटो आईडी प्रूफ की जानकारी डालनी होगी. फोटो आईडी प्रूफ के तौर पर आप आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट या फिर पेंशन की पासबुक सिलेक्ट कर सकते हैं. इसके बाद आपको आईडी प्रूफ का नंबर, अपना नाम, जेंडर और बर्थ ईयर डालना होगा. सारी जानकारी भरने के बाद आपको रजिस्टर बटन पर क्लिक करना होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद आप पसंदीदा वैक्सीनेशन सेंटर चुन सकते हैं. यहां आपको वैक्सीनेशन डेट और टाइमिंग की जानकारी मिल जाएगी. इसी तरह से आप आरोग्य सेतु ऐप पर भी वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.
 

Proning से बढ़ जाएगा Oxygen Level, बच सकेगी कोरोना मरीज की जान, जानिए क्या है Process

Proning से बढ़ जाएगा Oxygen Level, बच सकेगी कोरोना मरीज की जान, जानिए क्या है Process

Coronavirus की दूसरी लहर से देश में हालात अब बेकाबू होते जा रहे हैं. वहीं ऑक्सीजन को लेकर कई जगहों पर हाहाकार मचा है. कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है और वो जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है. ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण कई मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है. ऐसी भयंकर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सांस लेने में जिन मरीजों को तकलीफ हो रही है, उनके लिए प्रोनिंग के कुछ आसान तरीके सुझाए हैं, जिसे प्रयोग में लाकर कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन लेवल को सुधारा जा सकता है.
कैसे करें Proning
मरीज को पेट के बल लिटा दें.
गर्दन के नीचे एक तकिया रखें फिर एक या दो तकिये छाती और पेट के नीचे बराबर रखें और दो तकिये पैर के पंजे के नीचे रखें.
30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक इस पोजीशन में लेटे रहने से मरीज को फायदा मिलता है.
ध्यान रहे हर 30 मिनट से दो घंटे में मरीज के लेटने के पोजिशन को बदलना जरूरी है.
उसे पेट के बल लिटाने के बाद इसी समयावधि के बीच बारी-बारी दाईं और बाईं तरफ करवट करके लिटाएं.
इसके बाद मरीज को बैठा दें और फिर उसे पेट के बल लिटा दें.
इस प्रक्रिया में फेफड़ों में खून का संचार अच्छा होने लगता है और फेफड़ों में मौजूद फ्लूइड इधर-उधर हो जाता है, जिससे लंग्स में ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती रहती है. ऑक्सीजन का लेवल भी नहीं गिरता है.
क्या होती है Proning
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक,
प्रोनिंग एक तरह की प्रक्रिया है जिससे मरीज अपना ऑक्सीजन लेवल खुद ही सुधार सकता है.
ऑक्सीजनाइजेशन तकनीक में ये प्रक्रिया 80 प्रतिशत तक कारगर है.
इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए आप पेट के बल लेट जाएं.
मेडिकली भी ये प्रूव हो चुका है कि प्रोनिंग करने से सांस लेने में हो रही तकलीफ में आराम मिलता है.
इससे ऑक्सीजन लेवल में सपोर्ट मिलता है.
होम आइसोलेशन में कोरोना मरीजों के लिए प्रोनिंग काफी मददगार है.
प्रोन पोजीशन सुरक्षित है और इससे खून में ऑक्सीजन लेवल के बिगड़ने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है.
इससे आईसीयू में भी भर्ती मरीजों में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं.
वेंटिलेटर नहीं मिलने की स्थिति में यह प्रक्रिया सबसे अधिक कारगर है.
कब करें प्रोनिंग…
प्रोनिंग तब करें जब कोरोना मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और ऑक्सीजन लेवल 94 से कम हो जाए.
अगर आप होम आइसोलेशन में हैं तो समय-समय पर अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें.
इसके अलावा, बुखार, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर भी समय-समय पर मापते रहें.
समय पर सही प्रक्रिया के साथ प्रोनिंग कई लोगों की जान बचाने में मददगार है.
ऐसी स्थिति में ना करें Proning
खाना खाने के तुरंत बाद ही प्रोनिंग प्रक्रिया न करें.
खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही इस प्रक्रिया को अपनाएं.
अगर आप प्रेगनेंट हैं तो ना करें.
गंभीर कार्डिएक कंडीशन है या शरीर में स्पाइनल से जुड़ी कोई समस्या या फ्रैक्चर हो तो इस प्रक्रिया को न अपनाएं.
ऐसी स्थिति में Proning से आपको नुकसान हो सकता है।

 

कोरोना संकट के बीच जाने देश के इन बड़े डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर कही ये बात

कोरोना संकट के बीच जाने देश के इन बड़े डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर कही ये बात

नई दिल्ली, कोरोना संकट के बीच एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान, एम्स के प्रोफेसर और एचओडी डॉ. नवीत विग और डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज़ डॉ. सुनील कुमार एक साथ सामने आए और उन्होंने लोगों के बीच पैदा हो रहे तमाम भ्रम को तोड़ने की कोशिश की. इन तमाम डॉक्टरों ने कोरोना से जुड़े तमाम सवालों पर गहराई से जवाब दिए. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति में जनता में पैनिक है. उन्होंने कहा, "लोगों ने घर में इंजेक्शन, सिलेंडर रखने शुरू कर दिए हैं, जिससे इनकी कमी हो रही है. कोविड आम संक्रमण है, 85-90% लोगों में ये आम बुखार, जुकाम होता है, इसमें ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की जरूरत नहीं पड़ती है."


रेमडेसिविर की ज़रूरत कब?


रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जो मरीज घर पर हैं और जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से ज़्यादा है, उन्हें रेमडेसिविर की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर आप रेमडेसिविर लेते हैं तो उससे आपको नुकसान ज़्यादा हो सकता है, फायदा कम होगा.


मेदांता के चेयरमैन नरेश त्रेहान ने कहा कि जब आपका आरटी पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो सबसे पहले आप अपने लोकल डॉक्टर से संपर्क करें. उन्होंने कहा कि इलाज का प्रोटोकॉल सबको पता है, वो (डॉक्टर) उसके हिसाब से आपका इलाज शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि 90 फीसदी से ज्यादा लोग घर पर ही ठीक हो जाएंगे, जिनको सही वक्त पर सही दवाई दी जाएगी.


सुरक्षा डबल करें


डॉ. नरेश त्रेहान ने कहा कि आपको अपना बचाव सबसे पहले करना है. उन्होंने कहा कि बाहर जाने से पहले दो मास्क पहने, एन95 मास्क है तो उसके अंदर सर्जिकल मास्क पहनें. अगर कपड़े का मास्क है तो भी दो पहनें. ताकी अंदर वायरस न जाए. भीड़ भाड़ वाली जगहों से शादी और पार्टियों से दूर रहे.


"वाट्सएप यूनिवर्सिटी पर ध्यान न दें"


वैक्सीन को लेकर फैले भ्रम पर देश के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज़ सुनील कुमार ने कहा कि वैक्सीन को लेकर बहुत सी अफवाहे हैं. वैक्सीन का कोई सीरियस साइड इफेक्ट्स नहीं है, जो आए भी हैं वह नगण्य हैं. वैक्सीन और कोरोना नियमों को मानना, ये वो दो चीज़ें हैं जो चेन को ब्रेक करने में हमारी मदद करेंगी. उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा खबरों पर फोकस न करें. कुछ सेलेक्टिव खबरें ही देखें. वाट्सएप यूनिवर्सिटी भी है, उधर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है. इस व्यवहार का पालन आपको, डॉक्टरों, समाज के साथ-साथ मीडिया को भी करना होगा.


एम्स के एचओडी ऑफ मेडिसिन प्रोफेसर नवीत विग ने कहा कि दिल्ली में आज पॉजिटिविटी रेट 30 फीसदी है, मुंबई में एक दिन 26 फीसदी था और मुंबई में कड़े प्रतिबंध लगाए गए तो पॉजिटिविटी रेट 14 फीसदी हो गया. हमें कड़े प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे. 

Covid- 19:  घर पर आइसोलेशन के दौरान कई कोरोना के मरीज कर रहे हैं ये गलतियां, जो हो सकता है खतरनाक

Covid- 19: घर पर आइसोलेशन के दौरान कई कोरोना के मरीज कर रहे हैं ये गलतियां, जो हो सकता है खतरनाक

Covid- 19: कोरोना वायरस की दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हो रही है. इस खतरनाक संक्रमण के कारण एक बार फिर लोगों के बीच काफी डर का माहौल बना हुआ है. कोरोना का यह नया स्ट्रेन बच्चों और युवाओं को भी अपनी शिकार बना रहा है. बहुत से लोग कोरोना संक्रमण होने पर खुद को घर पर ही आइसोलेट कर रहे हैं. ऐसे में बहुत से लोग ऐसे हैं जो इस दौरान कई गलतियां कर रहे हैं. कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचने के लिए कुछ लोग अपने मन से दवाई खा रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करने से आपकी दिक्कतें काफी बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं लोगों द्वारा की जाने वाली इन गलतियों के बारे में-
पेनकिलर्स- सेल्फ आइसोलेशन में लोग बुखार और सिरदर्द से छुटकारा पाने के लिए पैरासिटामोल का सेवन कर रहे हैं. आपको बता दें कि यह दवाई आपके सिर दर्द को तो ठीक कर सकती हैं लेकिन कोरोना के संक्रमण को नहीं, ऐसे में बहुत अधिक दवाई खाने से बचे. और डॉक्टर से परामर्श जरूर करें.
कफ सिरप- कोरोना में खांसी से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह से ही कफ सिरप लें. गले में खराश से राहत पाने के लिए आप शहद और नींबू भी ले सकते हैं. या फिर गुनगुने पानी से गरारे कर सकते हैं.
एंटीबायोटिक्स- कोरोना से बचने के लिए अगर आप भी एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं तो यह सही नहीं है. इससे कोरोना वायरस को नहीं मारा जा सकता. इससे बेहतर है कि आप एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल करें.
आयुर्वेदिक उपचार- कोरोना का वायरस जब से भारत में आया हा आए दिन लोग कोई ना कोई आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बताते रहते हैं. ऐसे में इन आयुर्वेदिक उपचारों को फॉलो करने से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें.

 

कोरोना कहर के बीच इन बैसिक बातों को जरूर जानें और समझें

कोरोना कहर के बीच इन बैसिक बातों को जरूर जानें और समझें

कोरोना बहुत तेजी से फैल रहा है, इस बीच कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं। लोग कन्‍फ्यूज्‍ड हैं कि किस सलाह पर ध्‍यान दें और किस पर नहीं। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ बहुत ही सामान्‍य सी बातों के बारे में जो आपको सुरक्षि‍त और स्‍वस्‍थ्‍य रखने में बहुत काम आएगी।

क्‍या अच्‍छा होता है साबुन या सैनिटाइज़र?
साबुन और पानी से हाथों को साफ करने का तरीका अब भी सबसे अच्छा है। हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से धोया जाना चाहिए। यह तरीका सैनि‍टाइजर से ज्‍यादा कारगर है क्‍योंकि बाजार में नकली सैनिटाइजर भी चल रहे हैं।

कौन सा सैनिटाइज़र सही रहेगा?
यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं है, तो कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें। अच्‍छी कंपनी का सैनिटाइजर पर लिखा रहेगा कि उसमें कितना प्रतिशत अल्‍कोहल शामिल है।

अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र क्यों होना चाहिए?
अल्कोहल वायरस और बैक्टीरिया सहित विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं को मारने में प्रभावकारी है। कोरोना वायरस एक ऐसे प्रकार का वायरस है, जिसमें एक बाहरी आवरण होता है। इसे आवरण को इनवेलप कहा जाता है। अल्कोहल इस आवरण को खत्म कर सकता है।

सैनिटाइज़र का उपयोग कैसे करें?
हैंड सैनिटाइज़र को एक हथेली पर लगाने के बाद दोनों हाथों को एक साथ रगड़ना चाहिए। रगड़ते समय, जेल को हाथ की सभी सतहों को कवर करते हुए अंगुलियों पर फैलाया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया जेल के पूरी तरह सूखने तक की जानी चाहिए।

क्या हम किसी और चीज को कीटाणुरहित कर सकते हैं?
क्लीन्ज़र और वाइप्स उन वस्तुओं, सतहों की सफाई करने और कीटाणुरहित करने में प्रभावी होते हैं, जिन्हें अक्सर छुआ जाता है।

क्‍या किसी खास मौसम में कोरोना खत्‍म हो जाएगा?
यह मानने का कोई कारण नहीं है कि ठंड का मौसम नोवेल कोरोनावायरस या अन्य बीमारियों को खत्म कर सकता है। बाहरी तापमान या मौसम कोई भी हो, सामान्य मानव शरीर का तापमान लगभग 36.5 डिग्री सेल्सियस से 37 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। कोरोनावायरस से खुद को बचाने के लिए सबसे प्रभावी तरीका अल्कोहल पर आधारित हैंड रब से साफ करना या साबुन और पानी से धोना है।

क्या वोदका का सैनिटाइज़र के रूप में उपयोग किया जा सकता है?
कई DIY (डू इट योरसेल्फ) साइटों और कार्यक्रमों में यह सुझाव दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद वोदका में प्रभावी रूप से रोगाणुओं को मारने के लिए पर्याप्त मात्रा में एल्कोहल नहीं होता है, बेहतर होगा मेड‍िकल आधारित चीजों का ही इस्‍तेमाल करें। 

वैक्सीन लगवाने से पहले या बाद में कोरोना हो जाए तो घबराएं नहीं, जानिए ऐसी स्थिति में क्या करें?

वैक्सीन लगवाने से पहले या बाद में कोरोना हो जाए तो घबराएं नहीं, जानिए ऐसी स्थिति में क्या करें?

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत में अब 1 मई से 18 साल से ऊपर के लोगों को भी वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी. हालांकि कोरोना वैक्सीन को लेकर अभी भी लोगों के मन में कई सवाल हैं. लोगों को डर है कि वैक्सीन के बाद उन्हें कोरोना हो जाएगा. अगर वैक्सीन लगने से पहले ही कोरोना के लक्षण दिख जाएं तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए. अगर कोरोना वैक्सीन लगने के बाद बुखार आ जाए तो क्या करना चाहिए. आइये जानते हैं हेल्थ एक्सपर्ट का इस पर क्या कहना है.

1- अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना होने या इसके लक्षण दिखने पर अपको वैक्सीन अपॉइंटमेंट टाल देना चाहिए. आपकी वजह से सेंटर पर वैक्सीन लगवाने आए दूसरे लोगों को भी कोरोना हो सकता है. संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है


2- अगर आप वैक्सीन लगवाने जा रहे हैं तो अपॉइंटमेंट से पहले आपकी हेल्थ से जुड़े कई सवाल पूछे जा सकते हैं. वैक्सीनेशन सेंटर पर स्क्रीनिंग भी की जाती है. अगर डॉक्टर को किसी तरह के लक्षण दिखते हैं तो आपका अपॉइंटमेंट कैंसिल हो सकता है.


3- CDC की गाइडलाइन के अनुसार COVID-19 के मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने पर ही वैक्सीन लगवानी चाहिए. आइसोलेशन से बाहर आने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं.


वैक्सीन के बाद संक्रमित होने पर क्या करें?


अगर आपने वैक्सीन लगवा ली है और आप संक्रमित हो गए हैं तो ऐसी स्थिति में आपको दूसरी डोज की डेट 3-4 हफ्ते आगे बढ़ा देनी चाहिए. आपको इस मामले में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. कई स्टडीज की मानें तो वैक्सीन की पहली डोज के बाद अगर आप कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो आपको कई हफ्तों तक दूसरी डोज नहीं लेनी चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे शरीर में एंटीबॉडी मजबूत और ज्यादा दिनों तक रहती है.


वैक्सीन से पहले दवा को लेकर रहें सावधान
1 अगर आपको किसी तरह की कोई बीमारी है या फिर पहले से कोई दवा चल रही है तो वैक्सीनेशन लेने के दौरान इस बात की जानकारी जरूर दें.
2 वैक्सीन लगवाने से पहले किसी भी तरह के पेन किलर खाने से बचें.
3 एलर्जी से बचने के लिए वैक्सीन लगवाने से पहले एंटीहिसटामाइन दवा लेने से मना किया जाता है.
4 वैक्सीन लगवाने के बाद 15 से 30 मिनट तक वैक्सीनेशन सेंटर पर जरूर रूकें और देखें कि कहीं आपको कोई गंभीर साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा.
5 वैसे वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट बहुत कम हैं, लेकिन खुजली, बेहोशी, उल्टी होना, एलर्जी रिएक्शन, सांस लेने में दिक्कत होना इसके गंभीर लक्षण हैं. आपको ऐसा कुछ लगे तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें.

 

कोरोना महामारी: जाइडस Zydus Cadila की (Virafin) वीराफिन, तेजी से वायरल को खत्म करने में मददगार साबित

कोरोना महामारी: जाइडस Zydus Cadila की (Virafin) वीराफिन, तेजी से वायरल को खत्म करने में मददगार साबित

नईदिल्ली। कोरोना महामारी से तबाह भारत के ड्रग्स रेगुलेटर ने शुक्रवार को महामारी के मरीजों के इलाज के लिए जाइडस Zydus Cadila की (Virafin) वीराफिन दवा के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने जानकारी दी कि फेज 3 के क्लिनिकल ट्रायल में दवा देने के बाद कोरोना से जंग लड़ रहे मरीजों में काफी सुधार पाया गया है। ट्रायल्स के दौरान ज्यादातर मरीजों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट सात दिनों में निगेटिव आ गई। यह दवा तेजी से वायरल को खत्म करने में मददगार साबित होती है।

कितनी कारगर है दवा
दवा बनाने वाली कंपनी जायडस ने दावा किया है कि वीराफिन के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट 7 दिन बाद निगेटिव आई है। ऐसा कोरोना के 91.15 प्रतिशत मरीजों के साथ हुआ है। कंपनी ने बताया कि इस दवा से कोरोना के मरीजों को वायरस से लड़ने की ताकत मिलती है। अगर वायरस से संक्रमण के शुरुआती लक्षणों के बाद यह दवा मरीज को दी जाए तो उसे कोरोना से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी।

जानकारी के मुताबिक, जायडस ने इसका ट्रायल देश के तकरीबन 25 सेंटर्स पर किया था, जिसमें उत्साहजनक नतीजे सामने आए। इसे देखते हुए भारत की दवा नियंत्रक संस्था (डीसीजीआई) ने कोरोना मरीजों के लिए इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

अब इसे अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाएगा और डॉक्टरों की सलाह के बाद इसे मरीजों को दिया जाएगा। इससे पहले रेमडेसिविर का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए किया जा रहा था। यह मरीजों को कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाने में मदद करता है।

बता दें कि भारत में बीते 24 घंटों के भीतर 3 लाख 32 हजार 730 नए मामले सामने आए हैं। वहीं एक दिन में 2 हजार 263 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। फिलहाल देश में 24 लाख 28 हजार 616 ऐक्टिव केस हैं। 

WHO ने जारी की फूड गाइड लाइन, भोजन में इन्हें करें शामिल...

WHO ने जारी की फूड गाइड लाइन, भोजन में इन्हें करें शामिल...

कोरोना वायरस महामारी से पुनः दहशत का माहौल बना हुआ है। कोरोना का नया रूप बहुत संक्रामक है और जरा सी लापरवाही से हर कोई इसकी चपेट में आ रहा है। पिछले साल 2020 की तुलना में साल 2021 में कोरोना वायरस और अधिक आक्रामक और भयावह होता जा रहा है। भारत में चल रही कोरोना की दूसरी लहर में हर आयु वर्ग के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं।

इस महामारी का सही इलाज अभी भी उपलब्ध नहीं है लेकिन इम्यून सिस्टम को बूस्ट कर इस महामारी को जरूर हराया जा सकता है। इस भयानक माहौल में आपकी जीवनशैली सबसे अधिक मायने रखती है। आपका खान-पान, आपकी दैनिक एक्टिविटी आपको इस बीमारी की चपेट में आने से बचा सकती है। WHO ने बताया है कि कोरोना के दौर में कैसी डाइट लेना चाहिए...

डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी की गई फूड गाइड में बताया गया है कि अधिक से अधिक ताजे फल, कच्ची सब्जी या अनप्रोसेस्ड सब्जियों का सेवन करें। इससे आपकी बॉडी को जरूरी विटामिन, मिनरल्स, फाइबर, प्रोटीन मिलते रहेंगे।

सब्जियों को खाने का सही तरीका
- डब्ल्यूएचओ ने बताया कि सब्जियों को अधिक पकाकर खाने से उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इसलिए कोशिश करें। उन्हें भाप में पका कर खाएं या कच्ची सब्जी खाएं।


- शाम को भूख लगने पर कच्ची सब्जियां और ताजे फल ही खाएं। इससे पोषक तत्व आपके शरीर में पहुंच सकेंगे। वहीं अगर आप डिब्बा बंद सब्जियां और फ्रूट्स या अन्य कुछ खाते हैं तो ध्यान रहे उसमें अधिक नमक या चीनी नहीं हो। यह दोनों ही, शरीर के लिए नुकसानदायक है।

एक और रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी में आपका डाइट प्लान इससे बचाने में सहायक हो सकता है। इसलिए जानते हैं कैसे अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट करें -

इम्यूनिटी बूस्टर फूड्स

सहजन फली - सहजन फली में मौजूद तत्व आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करेंगे। यह सुपरफूड में गिना जाता है।

नारियल पानी - नारियल पानी पीने से शरीर में ताजगी बनी रहती है। कमजोरी महसूस होने पर तुरंत एक नारियल पानी पी लीजिए। इससे शरीर में पानी की कमी भी पूरी हो जाएगी और तरावट बनी रहेगी।

प्याज, लहसन और हल्दी - किसी भी तरह की बीमारी में यह तीनों ही रामबाण की तरह कारगर होती है। जी हां, यह आपके इम्यूनिटी को बूस्ट करने में कारगर है।

मिक्स बीज - अलसी, सूरजमूखी और कद्दू के बीज में प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं। कोरोना की दवाई यह है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इन बीज का सेवन करने से आपको विटामिन ई, फाइबर, मैग्निशियम, आयरन की प्रचुर मात्रा मिल जाती है।

अलसी - इसे तीसी भी कहा जाता है। विदेश में भी इसकी काफी डिमांड होती है। इसमें काफी मात्रा में फाइबर और प्रोटीन मौजूद होता है। ओमेगा-3 अलसी में काफी मात्रा में होता है। हार्ट मरीजों के लिए काफी कारगर मानी जाती है।

सूरजमूखी बीज - इसमें विटामिन बी और ई की मात्रा अधिक पाई जाती है। विटामिन ई आपके अंदर मौजूद कोशिकाओं की रक्षा करता है। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में यह सहायता करता है। वहीं गर्भवती महिलाओं को इसके बीज दिए जाते हैं।

कद्दू के बीज - अक्सर खाने की मूल चीज को फेंक देते हैं। कद्दू के बीज में विटामिन बी की प्रचूर मात्रा पाई जाती है। इसमें मैग्निशियम, आयरन, जिंक और प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। इतना ही नहीं इसका सेवन करने से मानसिक तनाव और डिप्रेशन जैसी बीमारी में भी आराम मिलता है।
 

Corona को फेफड़े तक पहुंचने से रोक सकता है यह साधारण उपाय

Corona को फेफड़े तक पहुंचने से रोक सकता है यह साधारण उपाय

मुंह की स्वच्छता के लिए अपनाए गए साधारण उपाय नए कोरोनावायरस (Coronavirus) के मुंह से फेफड़ों तक पहुंचने के जोखिम को कम करने में मददगार हैं और कोविड-19 के गंभीर मामलों को रोकने में इनसे मदद मिलती है। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है।
‘जर्नल ऑफ ओरल मेडिसिन एंड डेंटल रिसर्च’ में प्रकाशत इस शोध में पाया गया कि इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि मुंह साफ करने के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध कुछ सस्ते उत्पाद (माउथवॉश) कोविड-19 के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 को निष्क्रिय करने में काफी प्रभावी हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोनावायरस लार के जरिए लोगों के फेफड़ों में जा सकता है। इसमें वायरस मुंह से सीधे रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है- विशेष तौर पर व्यक्ति यदि मसूड़े के रोग से पीड़ित हो।

शोधकर्ताओं के मुताबिक साक्ष्यों से पता चलता है कि फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं शुरू में कोविड-19 फेफड़ों की बीमारी में प्रभावित होती हैं और लार में वायरस की उच्च सांद्रता होती है। दांतों के आसपास के उत्तकों में सूजन के मामलों में मौत का जोखिम बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, दां तों पर जमा गंदगी और मसूड़ों के आसपास के उत्तकों में सूजन सार्स-सीओवी-2 वायरस के फेफड़ों में पहुंचने और ज्यादा गंभीर संक्रमण करने की आशंका को और बढ़ा देते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह की साफ-सफाई एक प्रभावी जीवनरक्षक उपाय हो सकता है। उन्होंने अनुशंसा की कि दांतों और मुंह की साफ-सफाई से जुड़े आसान, लेकिन प्रभावी उपाय अपनाकर लोग जोखिम को कम कर सकते हैं।
ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक इयान चैपल ने कहा, इस मॉडल से हमें यह समझने में मदद मिल सकती है कि क्यों कुछ लोगों को कोविड-19 फेफड़े की बीमारियां होती हैं और कुछ को नहीं।उन्होंने कहा कि इससे वायरस के प्रबंधन का तरीका भी बदल सकता है- मुंह के लिए लक्षित सस्ते या यहां तक कि मुफ्त उपचार की संभावना के जरिए और अंतत: जिंदगी बचाकर।
इसमें कहा गया है कि सावधानीपूर्वक दांतों को ब्रश से साफ कर उनके बीच जमा होने वाली गंदगी को दूर करके, माउथवॉश का उपयोग कर या फिर साधारण तौर पर नमक के पानी से गरारे करके भी मसूड़ों की सूजन कम की जा सकती है- जिसके लार में वायरस की सांद्रता को कम करने में मदद मिल सकती है।(भाषा)

 

Covid-19 Mouth Symptoms: मुंह में दिखने वाले इन लक्षणों को ना करें इग्नोर, जल्द से जल्द कराएं कोरोना टेस्ट

Covid-19 Mouth Symptoms: मुंह में दिखने वाले इन लक्षणों को ना करें इग्नोर, जल्द से जल्द कराएं कोरोना टेस्ट

Oral Symptoms of Coronavirus: कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में हर जगह दहशत फैला दी है. कोरोना के सबसे कॉमन लक्षण है बुखार और खांसी है. कोविड-19 के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक है बुखार आने के बाद कई लोगों को स्वाद और गंध महसूस होना या तो कम हो जाती है या पूरी तरह से बंद हो जाती है. कई मरीजों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें कई दिनों तक स्वाद और गंध (Taste and Smell) महसूस नहीं हो रही है.
एक स्टडी के अनुसार कोविड-19 से ग्रस्त होने वाले 60 प्रतिशत मरीजों में स्वाद और गंध ना महसूस होने की समस्या देखी गई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (National Institute of Health) की एक स्टडी के अनुसार कोरोना संक्रमित आधे से ज्यादा लोगों में यह देखा गया है कि उन्हें मौखिक लक्षण दिखने लगते हैं पर लोग इन लक्षण पर ध्यान नहीं देते है और इन्हें हल्की-फुल्की समस्या मानने की गलती कर बैठते है.
अगर आपको भी यह पांच लक्षण अपने मुंह में दिखने लगे तो तुरतं डॉक्टर से करें संपर्क-


जीभ में सूजन और जलन-

आपकों बता दें कि कोरोना वायरस हमारी जीभ पर भी अपना असर डालता है. स्टडी के अनुसार कई कोरोना के मरीज जीभ में सूजन और जलन महसूस कर रहे हैं. कई मरीजों के शरीर पर हल्के रैशेज भी देखने को मिले हैं. अगर आपकों भी यह लक्षण दिखाई देते हैं तो देर ना करे और जल्द से जल्द अपना कोविड-19 टेस्ट करा लें.
जीभ पर गहरे लाल निशान-

कोविड-19 संक्रमण हमारी ओरल कैविटी (Oral Cavity) को इफेक्ट कर देता है जिससे जीभ अपना रंग बदलना शुरू कर देती है. मरीजों मे कभी-कभी होठों पर झुनझुनी और चिड़चिड़ापन दिखने लगता है. जीभ पर गहरे लाल निशान दिखना भी कोविड-19 संक्रमण का सूचक हो सकता है.
बदबूदार सांस –
सांस से बदबू आना कभी-कभी मुंह सूखने का आम संकेत है, जिसे व्यक्ति आसानी से समझ नहीं पाता। इससे भोजन चबाने और बोलने में कठिनाई पैदा हो सकती है. कोरोना महामारी में ऐसे असामान्य लक्षण दिखें, तो आपको एक बार जांच जरूर करानी चाहिए.
सांस मे बदबू आना-

कई मरीजों में यह देखने को मिला है कि उन्हें सांस में बदबू भी आने लगती है और यह लक्षण समझने में ज्यादातर व्यक्ति चूक जाते है. उन्हें कभी-कभी बोलने में भी कठनाई महसूस होती है.
मुंह का बार-बार सूखना-

कोरोना के कई मरीजों में देखा गया है कि मुंह में सूजन के कारण उनका मुंह सूखने लगता है. ऐसा इस कारण होता है क्योंकि यह वायरस मसल फाइबर पर अटैक करता है जिससे कुछ लोगों को माउथ इंफेक्शन अल्सर, जलन और एलर्जी जैसी समस्या देखने को मिलती है.

 

क्या डबल मास्क पहनने से कम होता है कोरोना का खतरा? यहां जानें इससे जुड़ी सभी बातें

क्या डबल मास्क पहनने से कम होता है कोरोना का खतरा? यहां जानें इससे जुड़ी सभी बातें

Coronavirus Prevention: देशभर में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि ऐसे तरीकों को अपनाया जाए जिससे लोग इस खतरनाक वायरस से इंफेक्ट ना हो. कोरोना की इस दूसरी लहर से लोग इतना अधिक डरे हुए हैं कि कुछ का मानना है कि इस खतरनाक दौर में केवल एक मास्क से सुरक्षा नहीं मिल सकती है. ऐसे में क्या आप भी दो मास्क (Double Mask) को लेकर कंफ्यूज हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में सभी बातें.
फोर्टिस अस्पताल, मुंबई के कल्याण में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ कीर्ति सबनीस के अनुसार, डबल मास्किंग से सुरक्षा बढ़ सकती है और वायरस को प्रसारण को रोका जा सकता है. उन्होंने बताया कि “रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) में एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि अगर सभी लोग डबल मास्क का इस्तेमाल करें तो इससे कोरोना के मामलों में 96.4 प्रतिशत की कमी आ सकती है.
क्या है डबल मास्किंग?
जब कोई व्यक्ति एक मास्क दूसरे के ऊपर पहनता है, तो उसे ‘डबल मास्किंग’ कहा जाता है. दो मास्क को एक साथ पहलले से एक सील बन जाती है. जैसा कि सभी जानते हैं कि कोरोना व वायरस सांस से फैलता है. इसलिए दो परतें फिल्टरेशन को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं और यदि आपके आस-पास कोई व्यक्ति छींकता है या खांसी करता है तो उससे भी सुरक्षा प्रदान करता है.

कब पहनें डबल मास्क 
हवाई अड्डों और बस स्टैंड जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बाहर निकलने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय डबल मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए.

क्या है डबल मास्क पहनने का सही तरीका
सर्जिकल मास्क के ऊपर एक कपड़ा मास्क या दो कपड़े मास्क पहनना एक सही तरीका है. इसके साथ ही सबसे ऊपर एक कपड़े का मास्क और अंदर 3 प्लाई मास्क पहनना भी अच्छा उपाय है. लेकिन अगर आप एन 95 मास्क पहन रहे हैं तो डबल मास्क ना पहनें.

 

कोरोना के इस खतरनाक दौर में शरीर में ऑक्सी्जन लेवल मेंटेन करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

कोरोना के इस खतरनाक दौर में शरीर में ऑक्सी्जन लेवल मेंटेन करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

How To Improve Oxygen Level: कोरोना वायरस संक्रमण एक बार फिर तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है. इस बार कोरोना की यह दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में इस दौरान खून में ऑक्सीजन लेवल की सबसे बड़ा संकट है. कोरोना से बचने के लिए लगभग हर किसी को ऑक्सीजन की जरूरत हैं लेकिन मांग बढ़ने के कारण ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है. अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन को सिक्योर करके रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है. देश में ऑक्सीजन के लिए चल रही जद्दोजहद के बीच जरूरी है कि लोग अपने शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को ठीक रखें. आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपके शरीर में ऑक्सीजन का लेवल ठीक रहेगा.
शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को मेंटेन करने के लिए डाइट और एक्सरसाइज का अहम रोल होता है. इससे आपक शरीर में ऑक्सीजन को मेंटेन कर सकते हैं. आइए जानते हैं कुछ खास टिप्स-
ब्रीदिंग एक्सरसाइज- ऑक्सीजन के लेवल को मेंटेन रखने के लिए ताजी हवा काफी जरूरी होती है. ऐसे में ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से बॉडी में ऑक्सीजन का लेवल मेंटेन रहता है. जितना हम सांसों को लेते और छोड़ते हैं उतनी फ्रेश एयर और ऑक्सीेजन हमारे अंदर जाती है और हमारे फेफड़ों को अच्छेत से एनर्जी मिलती है.
आयरन को करें डाइट में शामिल- आयरन शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करता है. आयरन शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन को लेकर जाता है और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत रखता है. इसके लिए आप अपनी डाइट में सेब, गुड, किशमिश समेत उन चीजों को शामिल करें जिनमें आयरन अधिक होता है.
पीएं भरपूर पानी- पानी हमारी बॉडी के लिए काफी जरूरी होता है इशमें ऑक्सीजन की मात्रा होती है. जो लोग पानी कम पीते हैं उनमें सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की कमी होती है. पानी कई समस्याओं का समाधान होता है. ऐसे में भरपूर पानी पीएं.