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₹20 करोड़ के फ्रॉड में निवेशकों को ₹2000 करोड़ का नुकसान, 2 साल तक नहीं लगी कंपनी को भनक

₹20 करोड़ के फ्रॉड में निवेशकों को ₹2000 करोड़ का नुकसान, 2 साल तक नहीं लगी कंपनी को भनक

 बिजनेस डेस्कः कजारिया सेरामिक्स (Kajaria Ceramics) की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी में ₹20 करोड़ का फ्रॉड 19 दिसंबर 2025 को सामने आया। कंपनी ने इसे एक्सचेंज फाइलिंग में उजागर किया। यह मामला पिछले दो सालों में हुआ और इसकी पहचान कंपनी के इंटरनल सिस्टम्स रिव्यू Operation Mathan के दौरान हुई।

फ्रॉड कजारिया बाथवेयर प्राइवेट लिमिटेड (KBPL) की सब्सिडियरी Kerovit Global Private Limited में हुआ, जिसमें CFO दिलीप कुमार मालिवाल कथित तौर पर फर्जी वेंडर के जरिए कैपेक्स और CWIP दिखाकर फंड सायफनिंग में शामिल पाए गए।

जांच के बाद दिलीप को नौकरी से हटा दिया गया और 18 दिसंबर को दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज कराई गई। कंपनी ने अब तक ₹50 लाख की रिकवरी की है लेकिन पूरी रकम की वसूली मुश्किल बताई जा रही है। यह नुकसान FY26 में exceptional item के तौर पर दर्ज होगा।

फ्रॉड का असर तिमाही मुनाफे पर लगभग 15% और पूरे साल के मुनाफे पर 6.6% पड़ा। FY25 में कंपनी का प्रॉफिट ₹300 करोड़ था।

निवेशकों को ₹1,984 करोड़ का झटका

शेयर प्राइस में गिरावट देखी गई, 24 दिसंबर को NSE पर 4.06% गिरकर 974.40 रुपए पर बंद हुआ, जबकि 15 दिसंबर को यह ₹1,098.30 था। मार्केट कैप में लगभग ₹1,984 करोड़ की कमी आई यानी निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹1,984 करोड़ की कमी आई। 2025 में स्टॉक अब तक करीब 16% नीचे है।

ब्रोकरेज Emkay Global ने स्टॉक पर Buy रेटिंग बनाए रखी है और ₹1,550 का टारगेट दिया है। कंपनी ने कहा कि उसके फंडामेंटल मजबूत हैं और अन्य सब्सिडियरीज में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने तक शेयर पर दबाव बना रह सकता है।

Union Bank, PNB, Canara समेत इन बड़े बैंकों ने दी ग्राहकों को राहत भरी खबर, कम होगी EMI

Union Bank, PNB, Canara समेत इन बड़े बैंकों ने दी ग्राहकों को राहत भरी खबर, कम होगी EMI

 बिजनेस डेस्कः घर या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। देश के कई प्रमुख बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने हाल ही में होम लोन और व्हीकल लोन की ब्याज दरों में कटौती की है। यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल में की गई रेपो रेट कटौती के बाद लिया गया है, जिससे ग्राहकों की ईएमआई में कमी आएगी।

LIC Housing Finance ने 22 दिसंबर 2025 से नए होम लोन पर ब्याज दर 7.15% से शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी के एमडी और सीईओ त्रिभुवन अधिकारी के मुताबिक, RBI द्वारा इस साल कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती से हाउसिंग सेक्टर को बड़ा सपोर्ट मिला है। उनका मानना है कि साल 2026 में इससे नए होम बायर्स का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में मांग मजबूत होगी।

Union Bank of India ने 23 दिसंबर से होम लोन की ब्याज दर में 0.30% और वाहन लोन में 0.40% की कटौती की है। यह राहत एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) के तहत स्प्रेड में बदलाव के जरिए दी गई है।

Canara Bank ने अपने रेपो लिंक्ड बेंचमार्क लेंडिंग रेट (RLLR) में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 8.25% से घटाकर 8% कर दिया है। यह नई दरें 12 दिसंबर 2025 से लागू हैं, जिससे मौजूदा लोनधारकों की ईएमआई या लोन अवधि में कमी आएगी।

Punjab National Bank (PNB) ने भी RLLR को 8.35% से घटाकर 8.10% कर दिया है। बैंक की नई दरें 6 दिसंबर 2025 से प्रभावी हैं।

Bank of Maharashtra ने होम लोन की दर 7.35% से घटाकर 7.10% और कार लोन की दर 7.70% से घटाकर 7.45% कर दी है। इसके साथ ही बैंक ने प्रोसेसिंग फीस भी पूरी तरह माफ कर दी है, जिससे ग्राहकों का शुरुआती खर्च कम होगा।

इसके अलावा Bank of India ने भी अपने RBLR में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 8.35% से घटाकर 8.10% कर दिया है। यह बदलाव 5 दिसंबर 2025 से लागू है।

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI की रेपो रेट कट के बाद बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की गई यह कटौती ग्राहकों के लिए फायदेमंद साबित होगी। कम ईएमआई से न केवल लोगों पर वित्तीय बोझ घटेगा, बल्कि रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में मांग को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, लोन लेने से पहले ग्राहकों को बैंक की शर्तें और स्प्रेड जरूर जांचने की सलाह दी जा रही है।

 
महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत! 2026 में इतने प्रतिशत तक गिर सकती है दर, कम होगी आपके लोन की EMI

महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत! 2026 में इतने प्रतिशत तक गिर सकती है दर, कम होगी आपके लोन की EMI

 नेशनल डेस्क : जहां एक ओर पूरी दुनिया आर्थिक सुस्ती और संभावित मंदी के डर से जूझ रही है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था न केवल मजबूती से खड़ी दिखाई दे रही है, बल्कि आगे एक नई छलांग लगाने के लिए तैयार नजर आ रही है। हाल ही में जारी CareEdge की रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरो जोन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस समय अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे की विकास दर पर चल रही हैं, वहीं चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी पड़ रही है। ऐसे माहौल में भारत का मजबूत प्रदर्शन वैश्विक मंच पर उसे अलग पहचान दिला रहा है।

क्यों वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ रहा है भारत?
CareEdge की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और व्यापारिक जोखिमों के बावजूद भारत अपनी विकास गति बनाए रखने में सक्षम रहेगा। इसका सबसे बड़ा कारण घरेलू मांग और निवेश में लगातार हो रही बढ़ोतरी है।

दूसरी तिमाही के आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का प्रदर्शन खासा मजबूत रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दरों में कटौती और बाजार में बढ़ती मांग ने औद्योगिक गतिविधियों को गति दी है। इससे रोजगार और उत्पादन दोनों को सहारा मिला है।

वैश्विक स्तर पर अगले पांच वर्षों में औसत विकास दर केवल 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि भारत अगले दो वित्त वर्षों में क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

महंगाई और ब्याज दरों से आम आदमी को राहत
आम लोगों के लिए राहत की सबसे बड़ी खबर महंगाई के मोर्चे पर है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) घटकर औसतन 2.1 प्रतिशत रह सकती है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में स्थिरता और कमोडिटी बाजार में नरमी से महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वर्ष 2025 का अंत पिछले छह वर्षों की सबसे आक्रामक ब्याज दर कटौती के साथ किया है। बेंचमार्क ब्याज दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ईएमआई पर बोझ कम होने की संभावना है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी विकास को प्राथमिकता देने वाला रुख अपनाया है। जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ और अक्टूबर में खुदरा महंगाई के 0.25 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने से केंद्रीय बैंक को नीतिगत ढील देने का भरोसा मिला है।

डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कैसी है?
हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया गया है। बीते कुछ महीनों में व्यापार घाटा बढ़ने और निवेश प्रवाह में कमी के चलते रुपये पर दबाव देखा गया है। इसके अलावा अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में देरी ने भी बाजार की धारणा को कुछ हद तक प्रभावित किया है। इसके बावजूद RBI ने संतुलित रणनीति अपनाई है और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक हस्तक्षेप करने के बजाय रुपये को धीरे-धीरे समायोजित होने दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER) के आधार पर रुपया अभी भी अपनी वास्तविक कीमत से लगभग 3 प्रतिशत नीचे है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इसमें किसी बड़ी गिरावट का खतरा फिलहाल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती और डॉलर के कमजोर होने से रुपये को आगे समर्थन मिल सकता है। इसके साथ ही ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में भारत के शामिल होने से विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Bank Holiday Alert in January: आ गई छुट्टियों की लिस्ट...जनवरी  में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक

Bank Holiday Alert in January: आ गई छुट्टियों की लिस्ट...जनवरी में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक

 बिजनेस डेस्कः साल 2026 की शुरुआत से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की छुट्टियों की सूची जारी कर दी है। RBI के बैंक हॉलिडे कैलेंडर 2026 के मुताबिक, जनवरी महीने में अलग-अलग राज्यों में कुल 16 दिन बैंक बंद रहेंगे। हालांकि, ये छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी। इनमें दूसरे और चौथे शनिवार के 2 दिन, 4 रविवार और 10 राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय अवकाश शामिल हैं।

RBI ने बैंक ग्राहकों को सलाह दी है कि जनवरी में किसी भी जरूरी बैंकिंग काम से पहले अपने राज्य या शहर की छुट्टियों की सूची जरूर जांच लें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।

जनवरी 2026 में नए साल, स्वामी विवेकानंद जयंती, मकर संक्रांति, बिहू, पोंगल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती और गणतंत्र दिवस जैसे त्योहारों और अवसरों के कारण कई राज्यों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। कुछ राज्यों में लगातार दो से तीन दिन तक बैंकिंग सेवाएं बाधित रह सकती हैं।

जनवरी 2026 की प्रमुख बैंक छुट्टियां इस प्रकार हैं....

  • 1 जनवरी: नववर्ष/गान-नगई के अवसर पर कई राज्यों में बैंक बंद
  • 2 जनवरी: नव वर्ष जयंती के चलते कुछ राज्यों में अवकाश
  • 3 जनवरी: हजरत अली जयंती (लखनऊ)
  • 4, 11, 18, 25 जनवरी: रविवार
  • 10 जनवरी: दूसरा शनिवार
  • 12 जनवरी: स्वामी विवेकानंद जयंती (कोलकाता)
  • 14–15 जनवरी: मकर संक्रांति, बिहू, पोंगल और उत्तरायण से जुड़े अवकाश
  • 16–17 जनवरी: तमिलनाडु में विशेष पर्वों के कारण अवकाश
  • 23 जनवरी: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती/बसंत पंचमी
  • 24 जनवरी: चौथा शनिवार
  • 26 जनवरी: गणतंत्र दिवस (देशभर में बैंक बंद)

ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल बैंकिंग सेवाओं जैसे UPI, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का अधिक से अधिक उपयोग करें, क्योंकि इन सेवाओं पर छुट्टियों का असर नहीं पड़ता।

Reasons Gold-Silver rate Hike: लगातार दूसरे महंगा हुआ 10g सोने का भाव, 1kg चांदी ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

Reasons Gold-Silver rate Hike: लगातार दूसरे महंगा हुआ 10g सोने का भाव, 1kg चांदी ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

 बिजनेस डेस्कः सोने-चांदी की कीमतों में 23 दिसंबर को लगातार दूसरे दिन जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 1551 रुपए उछल कर 1,38,295 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। जबकि चांदी की कीमत में 3077 रुपए की तेजी दर्ज की गई है, ये 2,15,949 रुपए प्रति किलो ग्राम पर है।

सोने ने आज 1,38,295 रुपए का हाई लेवल टच किया, इसका लो लेवल 1,37,826 रुपए था। चांदी का हाई लेवल 2,16,596 रुपए रहा और लो लेवल 2,14,498 रुपए था। 

चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण
 

1. इंडस्ट्रियल डिमांड में विस्फोट

सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब चांदी सिर्फ ज्वेलरी मेटल नहीं रही, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल रॉ-मटेरियल बन चुकी है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

2. ट्रंप टैरिफ का डर और सप्लाई संकट

अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता के चलते कंपनियां पहले से चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। इससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और कीमतों को तेज सपोर्ट मिला है।

3. मैन्युफैक्चरर्स की एडवांस खरीदारी

प्रोडक्शन में रुकावट के डर से मैन्युफैक्चरर्स भविष्य की जरूरतों के लिए पहले ही खरीदारी कर रहे हैं। इसी वजह से बाजार में मांग बनी हुई है और आने वाले महीनों में भी चांदी में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

क्यों उछला सोना? 
 

1. ब्याज दरों में कटौती और कमजोर डॉलर

2025 में अमेरिकी महंगाई 3% से नीचे आ गई, जिसके बाद फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती शुरू की। इससे रियल यील्ड घटी और गोल्ड जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स ज्यादा आकर्षक बन गए। कमजोर डॉलर ने भी सोने को सपोर्ट दिया।

2. सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी

चीन, रूस, मिडिल ईस्ट और एशियाई देशों के सेंट्रल बैंकों ने डॉलर रिजर्व से दूरी बनाते हुए रिकॉर्ड मात्रा में सोना खरीदा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में ऑफिशियल सेक्टर की खरीदारी ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

3. जियोपॉलिटिकल और ट्रेड अनिश्चितता

US-चीन ट्रेड टकराव, रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट तनाव और नए टैरिफ्स जैसी अनिश्चितताओं ने सेफ-हेवन डिमांड को और मजबूत किया।

4. निवेश मांग में उछाल

ETFs, Sovereign Gold Bonds और फिजिकल गोल्ड में लगातार इनफ्लो देखने को मिला। कई बड़े फंड्स ने इक्विटी बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए गोल्ड को हेज के तौर पर पोर्टफोलियो में बढ़ाया।

Credit Card: फोन पर बार-बार कॉल करके क्यों बैंक हर हाल में थमाना चाहते हैं क्रेडिट कार्ड? जानें

Credit Card: फोन पर बार-बार कॉल करके क्यों बैंक हर हाल में थमाना चाहते हैं क्रेडिट कार्ड? जानें

Credit Card: आपने अक्सर मॉल, शॉपिंग सेंटर या फोन कॉल पर क्रेडिट कार्ड बेचने वालों की लंबी कतार देखी होगी। बैंक आपको फ्री रिवॉर्ड्स कैशबैक और 45 दिनों के ब्याज मुक्त समय का लालच देते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कार्ड से आप पैसे उधार लेते हैं उससे बैंक को क्या फायदा होता है? भारत में जनवरी 2025 तक एक्टिव क्रेडिट कार्डों की संख्या 11 करोड़ को पार कर चुकी है। आइए समझते हैं कि क्रेडिट कार्ड बैंकों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी कैसे बन गया है।

बैंक की कमाई के 5 गुप्त रास्ते

बैंक केवल आपसे सालाना फीस ही नहीं लेते बल्कि उनके पास कमाई के कई और जरिए होते हैं:

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1. भारी ब्याज दर (High Interest Rates)

क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा फंदा ब्याज है। यदि आप समय पर पूरा बिल नहीं चुकाते हैं तो बैंक बकाया राशि पर 15% से 40% तक सालाना ब्याज वसूलते हैं। यह किसी भी पर्सनल लोन के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

2. इंटरचेंज Fees 

जब आप किसी दुकान या ऑनलाइन मर्चेंट को क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करते हैं तो बैंक उस दुकानदार से ट्रांजैक्शन का 1% से 3% कमीशन लेता है। इसे 'इंटरचेंज फीस' कहते हैं। आप जितना ज्यादा खर्च करेंगे बैंक उतना ज्यादा कमीशन कमाएगा।

3. Cash Advance Fees

क्रेडिट कार्ड से एटीएम (ATM) के जरिए पैसे निकालना सबसे महंगा सौदा है। इस पर 2.5% से 5% तक की तुरंत फीस लगती है और इस पर कोई 'ग्रेस पीरियड' नहीं मिलता। यानी जिस दिन आपने पैसा निकाला उसी दिन से भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है।

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4. लेट पेमेंट और अन्य पेनल्टी

बिल भरने में एक दिन की भी देरी हुई तो बैंक लेट पेमेंट फीस वसूलता है। इसके अलावा एनुअल रिन्यूअल फीस, ईएमआई कन्वर्जन फीस और बैलेंस ट्रांसफर फीस भी बैंक की जेब भरती हैं।

5. रिवॉर्ड्स का मनोविज्ञान

कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स आपको बार-बार कार्ड स्वाइप करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इससे बैंक का 'कंज्यूमर स्पेंडिंग' बढ़ता है जिससे उनकी फीस और कमीशन की इनकम बढ़ती जाती है।

भारतीय बाजार में बढ़ता क्रेज

आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2025 में भारतीयों ने क्रेडिट कार्ड के जरिए 1.84 ट्रिलियन रुपये (1.84 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए। लोग अब क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल केवल उधारी के लिए नहीं बल्कि अपना क्रेडिट स्कोर (CIBIL) बनाने के लिए भी कर रहे हैं। अच्छा क्रेडिट स्कोर भविष्य में होम लोन या कार लोन लेने में मदद करता है।

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सावधानी: RBI के सख्त नियम

क्रेडिट कार्ड के बढ़ते जाल और कर्ज के बोझ को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब नियमों को और सख्त कर रहा है। बैंकों को अब ग्राहकों को चार्ज के बारे में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

स्मार्ट टिप: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तभी फायदेमंद है जब आप हर महीने अपना बिल 100% फुल पेमेंट करें। केवल 'मिनिमम अमाउंट' (Minimum Amount Due) भरने की गलती कभी न करें क्योंकि यह आपको कर्ज के कभी न खत्म होने वाले चक्र में फंसा सकता है।

 

 
 
 
कर्ज में डूबा डिलीवरी बॉय बना करोड़पति, 13 घंटे की मेहनत ने बदली किस्मत

कर्ज में डूबा डिलीवरी बॉय बना करोड़पति, 13 घंटे की मेहनत ने बदली किस्मत

 बिजनेस डेस्कः जब ज़िंदगी एक झटके में सब कुछ छीन ले और आगे का रास्ता धुंध में खो जाए, तब हर कोई हार नहीं मानता। कुछ लोग टूटने के बजाय उसी मुश्किल को अपनी ताकत बना लेते हैं। चीन के एक युवा डिलीवरी बॉय की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—जहां कर्ज, नाकामी और लगातार थकान के बावजूद उसने मेहनत और अनुशासन के दम पर ऐसी वापसी की, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। रोज 13 घंटे, बिना रुके सातों दिन काम करते हुए इस डिलीवरी बॉय ने मेहनत को अपनी ताकत बनाया। लगातार पांच साल की कड़ी मेहनत, सादा जीवन और मजबूत अनुशासन के दम पर वह कर्ज से बाहर निकला और आज करोड़ों की कमाई कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन गया।

ब्रेकफास्ट बिजनेस फेल, कर्ज में डूबे

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के फुजियान प्रांत के झांगझोउ शहर के रहने वाले 25 वर्षीय झांग शुएछ्यांग की जिंदगी साल 2020 में पूरी तरह बदल गई। उनका छोटा सा ब्रेकफास्ट बिजनेस बंद हो गया, जिससे वे करीब 50,000 युआन (लगभग 6.5 लाख रुपए) के कर्ज में फंस गए। नई शुरुआत की तलाश में झांग शंघाई पहुंचे और एक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी राइडर के तौर पर काम शुरू किया।

रोज 13 घंटे, हफ्ते के सातों दिन काम

झांग ने हालात से लड़ने के लिए मेहनत को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। वे रोज करीब 13 घंटे काम करते थे और हफ्ते के सातों दिन डिलीवरी करते रहे। उनका दिन सुबह लगभग 10:40 बजे शुरू होता और कई बार रात 1 बजे तक चलता। साल भर में उन्होंने गिनती के ही दिन छुट्टी ली। इतनी लंबी शिफ्ट के बावजूद उन्होंने अपनी सेहत का भी ध्यान रखा और रोज करीब साढ़े आठ घंटे की नींद लेना सुनिश्चित किया।

सादा जीवन, मजबूत बचत

पैसों के मामले में झांग बेहद अनुशासित रहे। उन्होंने मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल अपनाई और गैर-जरूरी खर्चों से दूरी बनाए रखी। कर्ज चुकाने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के बाद भी वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचाने में सफल रहे। पांच साल के दौरान उन्होंने हर महीने औसतन 300 से ज्यादा डिलीवरी पूरी कीं। एक डिलीवरी में लगभग 25 मिनट लगते थे और इस दौरान उन्होंने कुल मिलाकर करीब 3.24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया

‘ऑर्डर किंग’ से मिली पहचान

उनकी मेहनत और तेजी ने उन्हें सहकर्मियों के बीच अलग पहचान दिलाई। साथी उन्हें प्यार से “ऑर्डर किंग” और “ग्रेट गॉड” कहने लगे। पांच साल की कड़ी मेहनत के दम पर झांग ने करीब 14 लाख युआन (लगभग 1.42 करोड़ रुपए) की कमाई की, जिसमें से बड़ा हिस्सा उन्होंने बचत के तौर पर जोड़ लिया।

सपनों की दोबारा शुरुआत

अब झांग एक बार फिर अपने सपनों की ओर लौटने को तैयार हैं। वे शंघाई में करीब 8 लाख युआन का निवेश कर दो नई ब्रेकफास्ट शॉप खोलने की योजना बना रहे हैं। उनकी कहानी सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि हिम्मत, अनुशासन और कभी हार न मानने वाले जज़्बे की मिसाल है।

EPFO ने नियमों में किया बड़ा बदलाव, कर्मचारियों पर पड़ेगा सीधा असर

EPFO ने नियमों में किया बड़ा बदलाव, कर्मचारियों पर पड़ेगा सीधा असर

बिजनेस डेस्कः कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरी बदलने वाले लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए राहत भरे नियम लागू किए हैं। अब नौकरी बदलते समय छोटा गैप या वीकेंड भी सर्विस ब्रेक में नहीं गिना जाएगा, जिससे पीएफ और एम्प्लॉयी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) योजना के लाभ सीधे कर्मचारियों के परिवार तक पहुंचेंगे।

नौकरी बदलने में अब 60 दिन तक का गैप मान्य

नए नियमों के तहत, अगर दो नौकरियों के बीच अधिकतम 60 दिनों तक का अंतर है, तो इसे सेवा में ब्रेक नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि नौकरी बदलते समय थोड़े समय का गैप भी कर्मचारी की लगातार सेवा में जोड़ा जाएगा।

बीमा लाभ में राहत

अगर किसी EPFO सदस्य की मृत्यु आखिरी पीएफ योगदान मिलने के 60 दिनों के भीतर हो जाती है और वह कंपनी के रिकॉर्ड में कर्मचारी के रूप में दर्ज था, तो अब उसके परिवार को EDLI योजना का लाभ मिलेगा। पहले ऐसे मामलों में सर्विस ब्रेक का हवाला देकर बीमा दावा खारिज कर दिया जाता था।

वीकेंड और छुट्टियों का ब्रेक नहीं माना जाएगा

नौकरी बदलते समय आने वाले शनिवार, रविवार या राजपत्रित अवकाश अब सर्विस ब्रेक में नहीं गिने जाएंगे। इससे वीकेंड गैप के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार को बीमा लाभ लेने में मदद मिलेगी।

Banking Alert: इस बैंक पर RBI ने लगाए सख्त प्रतिबंध, ग्राहक नहीं निकाल सकेंगे पैसे

Banking Alert: इस बैंक पर RBI ने लगाए सख्त प्रतिबंध, ग्राहक नहीं निकाल सकेंगे पैसे

 बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुजरात के वलसाड में स्थित वलसाड महिला नागरिक सहकारी बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस पर कड़े नियामकीय प्रतिबंध लगा दिए हैं। RBI द्वारा जारी ये ‘डायरेक्शंस’ गुरुवार को कारोबार समाप्त होने के बाद से लागू हो गई हैं और अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेंगी। इन निर्देशों के तहत बैंक के ग्राहक अब अपने खातों से किसी भी प्रकार की राशि की निकासी नहीं कर सकेंगे।

बैंक पर लगी प्रमुख पाबंदियां

RBI के अनुसार, बैंक अब उसकी पूर्व अनुमति के बिना

  • कोई नया ऋण नहीं दे सकेगा
  • मौजूदा ऋणों का नवीनीकरण नहीं कर पाएगा
  • किसी भी तरह का निवेश नहीं कर सकेगा
  • कोई नई देनदारी नहीं ले सकेगा
  • अपनी किसी भी संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण नहीं कर पाएगा।

इसके अलावा, बैंक की कमजोर लिक्विडिटी को देखते हुए बचत, चालू या अन्य किसी भी खाते से धन निकासी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, जमा राशि के बदले ऋण के समायोजन (सेट-ऑफ) की अनुमति दी गई है।

RBI ने क्यों उठाया कदम?

केंद्रीय बैंक ने बताया कि हालिया घटनाक्रमों के चलते बैंक को लेकर गंभीर सुपरवाइजरी चिंताएं सामने आई थीं। जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना आवश्यक हो गया। RBI ने पहले बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ मिलकर सुधार की कोशिश की थी लेकिन पर्याप्त ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

जमाकर्ताओं को क्या राहत मिलेगी?

RBI ने स्पष्ट किया है कि पात्र जमाकर्ताओं को DICGC (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन) के तहत प्रति जमाकर्ता अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि का बीमा कवर मिलेगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी साफ किया कि इन प्रतिबंधों का मतलब बैंक का लाइसेंस रद्द किया जाना नहीं है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक सीमित बैंकिंग सेवाएं जारी रखेगा और RBI इसकी स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखेगा।

Mobile Recharge Hike: मोबाइल यूजर्स को लग सकता है झटका, 20% तक बढ़ सकते हैं टैरिफ

Mobile Recharge Hike: मोबाइल यूजर्स को लग सकता है झटका, 20% तक बढ़ सकते हैं टैरिफ

 बिजनेस डेस्कः भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां—रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया—अगले साल प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों मोबाइल प्लान की कीमतों में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह बढ़ोतरी रेगुलर टैरिफ रिवीजन का हिस्सा होगी, जिससे टेलीकॉम इंडस्ट्री की कमाई में इजाफा होने की उम्मीद है।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट क्या कहती है?

ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, 2026 में 4G और 5G प्रीपेड-पोस्टपेड प्लान की कीमतों में 16–20 प्रतिशत तक का इजाफा संभव है। इसका सीधा असर वित्त वर्ष 2027 में टेलीकॉम कंपनियों के रेवेन्यू और प्रति ग्राहक औसत कमाई (ARPU) पर पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां रेवेन्यू बढ़ाने के लिए सस्ते प्लान धीरे-धीरे बंद कर रही हैं और OTT जैसे अतिरिक्त लाभों को महंगे प्लान्स के साथ जोड़ रही हैं। ऐसे में ग्राहकों को मजबूरी में महंगे रिचार्ज प्लान चुनने पड़ सकते हैं, जिससे उनकी जेब पर असर पड़ेगा।

किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?

इस संभावित टैरिफ हाइक से सबसे अधिक फायदा भारती एयरटेल को होने की उम्मीद है। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि पिछले टैरिफ बढ़ोतरी के दौर में एयरटेल को अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में रेवेन्यू और EBITDA के मामले में ज्यादा फायदा मिला था।

एयरटेल ने हाल के वर्षों में रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया के साथ मिलकर प्रीपेड प्लान की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी की है। कंपनियों का तर्क रहा है कि टेलीकॉम सेक्टर को मजबूत बनाए रखने और 5G नेटवर्क में निवेश के लिए यह जरूरी है।

पहले कब-कब बढ़ीं थीं कीमतें?

  • 2019: 15% से 50% तक टैरिफ बढ़ा
  • 2021: 20% से 25% की बढ़ोतरी
  • 2024: 10% से 20% तक दाम बढ़े
  • 2025 में भी करीब 15 प्रतिशत टैरिफ बढ़ोतरी की उम्मीद थी लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हुआ है।
10g Gold Price Today: लगातार चौथे दिन टूटा सोने का भाव, चांदी में उछाल जारी

10g Gold Price Today: लगातार चौथे दिन टूटा सोने का भाव, चांदी में उछाल जारी

 बिजनेस डेस्कः सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को लगातार सोने में एक बार फिर गिरावट देखी जा रही है। इसके इलट चांदी की कीमतों में तेजी का दौर जारी है, हालांकि ये अपने ऑलटाइम हाई से नीचे है। आज लगातार चौथे दिन सोने की कीमतें टूटी हैं। MCX पर सोना का वायदा भाव 0.34 फीसदी लुढ़ककर 1,34,065 रुपए प्रति 10 ग्राम पर है। चांदी की कीमत में 0.28 फीसदी की तेजी आई है, ये 2,04,139 रुपए प्रति किलोग्राम पर है।

सर्राफा बाजार में चांदी 1,800 रुपए उछली

चांदी बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में 1,800 रुपए उछलकर 2,07,600 रुपए प्रति किलोग्राम के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसका कारण कारोबारियों की निरंतर खरीदारी है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। चांदी बुधवार को 7,300 रुपए उछलकर पहली बार दो लाख रुपए प्रति किलोग्राम को पार कर 2,05,800 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इस वृद्धि के साथ, चांदी की कीमत इस साल एक जनवरी को दर्ज की गई 90,500 रुपए प्रति किलोग्राम से 1,17,100 रुपए किलो यानी 129.4 प्रतिशत बढ़ चुकी है। 

सर्राफा संघ के अनुसार, स्थानीय सर्राफा बाजार में, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,36,500 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर स्थिर रहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 13.16 डॉलर यानी 0.31 प्रतिशत घटकर 4,325.02 डॉलर प्रति औंस रह गया। 

बड़ा बैंकिंग घोटाला: ₹80 करोड़ का बैंक फ्रॉड आया सामने, क्या आप भी हैं इस बैंक के ग्राहक?

बड़ा बैंकिंग घोटाला: ₹80 करोड़ का बैंक फ्रॉड आया सामने, क्या आप भी हैं इस बैंक के ग्राहक?

 बिजनेस डेस्कः Bank Fraud: स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने अपनी प्रायोरिटी बैंकिंग यूनिट में सामने आए कथित धोखाधड़ी मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। यह मामला नवंबर में बेंगलुरु की एक शाखा से शुरू हुआ था, जहां एक ग्राहक ने अपने खाते से पैसे गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। अब सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु की एमजी रोड शाखा से जुड़े कुछ हाई-नेटवर्थ ग्राहकों के करीब ₹80 करोड़ तक के फंड में हेरफेर की आशंका जताई जा रही है।

शिकायत से खुला मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत पिछले महीने एक ग्राहक की शिकायत से हुई थी, जिसने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट से ₹2.7 करोड़ के हेरफेर का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु सिटी पुलिस से जांच को राज्य के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) को सौंपने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी की राशि ₹5 करोड़ से अधिक होने की वजह से यह फैसला लिया गया। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने इस बात की पुष्टि की है कि मामले की जांच जारी है।

कौन कर रहा है जांच?

बैंक ने कहा, “हमारे ग्राहकों के हित सर्वोपरि हैं। जांच में यह सामने आया है कि बेंगलुरु शाखा में एक कर्मचारी ने कुछ अनियमितताएं की हैं। बैंक की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया और बैंक ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया है।”

बैंक ने प्रभावित ग्राहकों से सीधे संपर्क किया है और एक आंतरिक जांच भी शुरू की गई है। सूत्रों के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले हुई प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद PwC को फॉरेंसिक जांच सौंपी गई है।

बैंक का पक्ष और ग्राहकों को भरोसा

सूत्रों के मुताबिक, जांच में बड़े पैमाने पर ग्राहकों के फंड के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं। कई हाई-प्रोफाइल और कारोबारी परिवारों से जुड़े ग्राहक इस मामले से नाराज बताए जा रहे हैं। बैंक ने प्रभावित ग्राहकों को हुए नुकसान की भरपाई करने का आश्वासन दिया है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने कहा है कि पुलिस और आंतरिक जांच दोनों प्रक्रियाएं जारी हैं और बैंक जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है। बैंक ने स्पष्ट किया कि ग्राहकों के गबन किए गए फंड की वापसी उसकी प्राथमिकता है।

आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजा गया

बेंगलुरु की एक स्थानीय अदालत ने रिलेशनशिप मैनेजर नक्का किशोर कुमार (40) को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन पर एक ग्राहक से ₹2.7 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें पिछले महीने गिरफ्तार किया था और बैंक ने तत्काल प्रभाव से उन्हें बर्खास्त कर दिया।

कैसे हुआ फ्रॉड?

शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने ग्राहकों के नकली हस्ताक्षर किए और RTGS के जरिए फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए दिए गए फंड को दूसरे खातों में डायवर्ट कर दिया। ग्राहक ने एफडी के लिए ₹2 करोड़, ₹50 लाख और ₹25 लाख के चेक दिए थे, जिन्हें इच्छित उद्देश्य के बजाय तीसरे पक्ष को ट्रांसफर कर दिया गया।

इसके बाद कम से कम पांच अन्य लोगों ने भी इसी तरह की धोखाधड़ी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। जांच एजेंसियां अब अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान में जुटी हैं, क्योंकि आरोपी ने कई ग्राहकों को नकली एफडी बॉन्ड भी जारी किए थे। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला 15 साल पहले गुरुग्राम में सिटीबैंक की वेल्थ मैनेजमेंट यूनिट में हुए बड़े फ्रॉड से मिलता-जुलता है।

NPS नियमों में बड़ा बदलाव, नोटिफिकेशन जारी, अब मिलेगा ज्यादा फायदा

NPS नियमों में बड़ा बदलाव, नोटिफिकेशन जारी, अब मिलेगा ज्यादा फायदा

 बिजनेस डेस्कः नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े करोड़ों निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS के नियमों में अब तक का सबसे अहम बदलाव कर दिया है। इस संबंध में नई नोटिफिकेशन भी जारी कर दी गई है, जिससे खासतौर पर गैर-सरकारी NPS सब्सक्राइबर्स को बड़ा फायदा मिलेगा।

क्या बदला है नया NPS नियम?

PFRDA ने रिटायरमेंट और एग्जिट नियमों में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब गैर-सरकारी NPS निवेशक रिटायरमेंट के समय अपने कुल कॉर्पस का अधिकतम 80% तक पैसा लंपसम निकाल सकेंगे।

अभी तक क्या था नियम?

अब तक NPS से बाहर निकलते समय निवेशकों को कम से कम 40% राशि से एन्यूटी खरीदना अनिवार्य था। एन्यूटी के जरिए रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन मिलती थी, लेकिन नए नियमों में इस अनिवार्यता को घटाकर 20% कर दिया गया है। यह बदलाव All Citizen Model और Corporate NPS दोनों कैटेगरी के सब्सक्राइबर्स पर लागू होगा।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

PFRDA द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह सुविधा उन सब्सक्राइबर्स को मिलेगी जो:

  • 60 साल की उम्र में सामान्य एग्जिट लेते हैं
  • न्यूनतम सब्सक्रिप्शन अवधि पूरी करने के बाद एग्जिट करते हैं
  • 60 से 85 साल की उम्र के बीच NPS से बाहर निकलते हैं

इसका मतलब है कि अब रिटायरमेंट पर मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा सीधे हाथ में लिया जा सकेगा।

कितनी रकम निकाल सकते हैं?

नए नियमों में कॉर्पस की राशि के आधार पर अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं:

₹8 लाख तक का कॉर्पस

निवेशक पूरी रकम लंपसम निकाल सकता है। एन्यूटी लेना पूरी तरह वैकल्पिक होगा, जो अधिकतम 20% तक हो सकता है।

₹8 लाख से ₹12 लाख तक का कॉर्पस

अधिकतम ₹6 लाख लंपसम निकासी की अनुमति होगी। बची राशि से या तो एन्यूटी खरीदी जा सकती है या फिर 6 साल तक Systematic Withdrawal के जरिए पैसा निकाला जा सकता है।

₹12 लाख से ज्यादा का कॉर्पस

कम से कम 20% राशि से एन्यूटी खरीदना अनिवार्य होगा। शेष 80% तक रकम लंपसम निकाली जा सकेगी।

क्यों अहम है यह बदलाव?

इस बड़े फैसले से PFRDA ने गैर-सरकारी NPS निवेशकों को उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर ज्यादा नियंत्रण दिया है। अब निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से ज्यादा कैश हाथ में ले सकेंगे और एन्यूटी की बाध्यता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।

लगातार चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 78 अंक फिसला

लगातार चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 78 अंक फिसला

 मुंबईः स्थानीय शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन गिरावट आई। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में नरम रुख से सेंसेक्स 78 अंक के मामूली नुकसान में रहा जबकि निफ्टी स्थिर बंद हुआ। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 77.84 अंक यानी 0.09 प्रतिशत टूटकर 84,481.81 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 84,780.19 अंक के ऊपरी और 84,238.43 अंक के निचले स्तर तक भी गया। इस तरह इसमें 541.76 अंक की घट-बढ़ हुई। एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी तीन अंक यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 25,815.55 अंक पर स्थिर रहा।

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में सन फार्मा, टाटा स्टील, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी और भारती एयरटेल प्रमुख रूप से नुकसान में रहें। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, अडानी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक और एचसीएल टेक शामिल हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, "वैश्विक संकेतों और रुपए से जुड़ी चिंताओं का निवेशक धारणा पर असर बना रहा। इसकी वजह से कारोबारियों ने सतर्कता बरती।" 

व्यापक बाजार में मझोली कंपनियों का बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.05 प्रतिशत चढ़ गया जबकि छोटी कंपनियों के स्मालकैप सूचकांक में 0.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार सूचकांकों में बिजली खंड में सर्वाधिक 1.01 प्रतिशत की गिरावट रही जबकि तेल एवं गैस खंड में 0.81 प्रतिशत, पूंजीगत उत्पाद खंड में 0.80 प्रतिशत और उपयोगिता खंड में 0.75 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके उलट, फोकस आईटी खंड 1.24 प्रतिशत उछल गया और आईटी खंड में भी 1.10 प्रतिशत की तेजी रही। 

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त का कारण निचले मूल्य पर खरीदारी और केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से रुपए में आई मजबूती थी। हालांकि, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर बनी अनिश्चितता ने बाजार धारणा को कमजोर किया और मुनाफावसूली देखने को मिली।'' शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) कई दिनों के बाद खरीदार बने और उन्होंने बुधवार को 1,171.71 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी पिछले कारोबार में 768.94 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और जापान का निक्की सूचकांक में गिरावट रही, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सकारात्मक दायरे में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर कारोबार में तेजी का रुख था। अमेरिकी बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.42 प्रतिशत चढ़कर 59.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सेंसेक्स बुधवार को 120.21 अंक टूटा था जबकि निफ्टी में 41.55 अंक की गिरावट आई थी। 

नया साल आने से पहले निपटाएं ये फाइनेंस काम, वरना उठाना पड़ेगा नुकसान

नया साल आने से पहले निपटाएं ये फाइनेंस काम, वरना उठाना पड़ेगा नुकसान

 बिजनेस डेस्कः साल 2025 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और इसके साथ ही टैक्स, बैंकिंग और आधार से जुड़े कई अहम कामों की डेडलाइन 31 दिसंबर को समाप्त होने जा रही है। अगर आपने समय रहते ये जरूरी काम पूरे नहीं किए, तो आपको जुर्माना, ब्याज या वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। इनमें बिलेटेड ITR, रिवाइज्ड ITR, GST रिटर्न, PAN–Aadhaar लिंक और बैंक लॉकर एग्रीमेंट जैसे अहम काम शामिल हैं।

31 दिसंबर तक भर सकते हैं बिलेटेड ITR

इस साल आयकर रिटर्न (ITR) भरने की अंतिम तारीख 16 सितंबर 2025 थी। अगर आप तय समय तक ITR दाखिल नहीं कर पाए, तो आपके पास 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न फाइल करने का मौका है। हालांकि, इसके लिए आपको इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत लेट फीस और धारा 234A के तहत ब्याज देना होगा यानी देरी करने पर आपकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

रिवाइज्ड ITR का भी आखिरी मौका

अगर आपने समय पर ITR फाइल कर दिया था लेकिन उसमें कोई गलती या जानकारी छूट गई है, तो आप उसे रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए सुधार सकते हैं। रिवाइज्ड ITR 31 दिसंबर 2025 तक या टैक्स अधिकारियों द्वारा असेसमेंट शुरू होने से पहले (जो भी पहले हो) दाखिल किया जा सकता है। इसमें कोई लेट फीस नहीं लगती लेकिन अगर संशोधन के बाद टैक्स देनदारी बढ़ती है, तो अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना होगा।

GST और कंपनियों के लिए भी अहम डेडलाइन

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए GST एनुअल रिटर्न (GSTR-9 और GSTR-9C) दाखिल करने की आखिरी तारीख भी 31 दिसंबर 2025 है। हालांकि, कुछ प्रोफेशनल संस्थाओं ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है लेकिन फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इसके अलावा, कंपनियों को FY25 के लिए एनुअल रिटर्न और वित्तीय स्टेटमेंट (फॉर्म MGT-7 और AOC-4) भी इसी तारीख तक जमा करने होंगे।

PAN–Aadhaar लिंक और बैंक लॉकर नियम

अगर आपने 1 अक्टूबर 2024 से पहले आधार एनरोलमेंट ID के जरिए PAN बनवाया था, तो आपको 31 दिसंबर तक PAN को आधार से लिंक कराना जरूरी है। वहीं, जिन ग्राहकों के पास बैंक लॉकर है, उन्हें अपने बैंक के साथ अपडेटेड लॉकर रेंटल एग्रीमेंट साइन करना होगा। ऐसा नहीं करने पर लॉकर सील या आवंटन रद्द किया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी डेडलाइन भी 31 दिसंबर है, हालांकि पहले इसे कई बार बढ़ाया जा चुका है।

क्यों जरूरी है समय पर काम निपटाना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन डेडलाइन को नजरअंदाज करना जुर्माने, ब्याज और कानूनी परेशानी को न्योता दे सकता है। ऐसे में बेहतर है कि साल खत्म होने से पहले ही अपने सभी टैक्स और बैंकिंग से जुड़े जरूरी काम निपटा लिए जाएं।

नए साल से कार खरीदना पड़ेगा महंगा, JSW MG Motor ने बढ़ाए दाम

नए साल से कार खरीदना पड़ेगा महंगा, JSW MG Motor ने बढ़ाए दाम

 बिजनेस डेस्कः अगर आप जल्द नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। साल 2025 के खत्म होते-होते ऑटो सेक्टर में एक बार फिर महंगाई की आहट सुनाई देने लगी है। JSW MG Motor India ने अपनी गाड़ियों की कीमतें बढ़ाने का ऐलान किया है, जिससे ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

कंपनी ने गुरुवार को बताया कि वह 1 जनवरी 2026 से अपने वाहनों की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी करेगी। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से होगी यानी कुछ गाड़ियों पर मामूली असर पड़ेगा, जबकि कुछ मॉडल्स के दाम ज्यादा बढ़ सकते हैं।

कीमत बढ़ाने की वजह

JSW MG Motor India के मुताबिक, इनपुट कॉस्ट में लगातार इजाफा और वैश्विक आर्थिक हालात इस फैसले की मुख्य वजह हैं। कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी का दबाव अब सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहा है। ऐसे में कंपनी के लिए कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है।

ऑटो इंडस्ट्री पहले से दबाव में

JSW MG Motor का यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब पूरी ऑटो इंडस्ट्री लागत बढ़ने के दबाव से जूझ रही है। इलेक्ट्रिक और पेट्रोल-डीजल दोनों सेगमेंट में वाहनों की लागत बढ़ रही है, वहीं ग्राहकों की मांग को संतुलित रखना कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है। कीमतों में यह बढ़ोतरी खासतौर पर उन ग्राहकों को प्रभावित करेगी, जो नए साल में कार खरीदने की तैयारी कर रहे थे।

लग्जरी सेगमेंट में भी महंगाई

MG Motor अकेली कंपनी नहीं है जो कीमतें बढ़ा रही है। लग्जरी कार सेगमेंट में भी महंगाई की लहर दिख रही है। Mercedes-Benz India और BMW जैसी दिग्गज कंपनियां भी जनवरी 2026 से अपने वाहनों के दाम बढ़ाने का ऐलान कर चुकी हैं। इससे साफ है कि आने वाले समय में कार खरीदना और महंगा हो सकता है।

Gold-Silver Rate: सोना और चांदी के दामों में क्यों हो रही लगातार बढ़ोतरी? सरकार ने बताई वजह

Gold-Silver Rate: सोना और चांदी के दामों में क्यों हो रही लगातार बढ़ोतरी? सरकार ने बताई वजह

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने और चांदी की कीमतों में हाल के महीनों में तेज़ उछाल देखने को मिला है। सरकार ने संसद में बताया कि निवेशकों के सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान के चलते कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है, जिसका सीधा असर इनके दामों पर पड़ा है।

सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाल के महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता है। इन परिस्थितियों में निवेशक जोखिम भरे निवेश विकल्पों से हटकर सुरक्षित माने जाने वाले साधनों, जैसे सोना और चांदी, की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि भारत में सोने और चांदी की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होने वाले भाव, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर तथा देश में लागू करों और शुल्कों पर निर्भर करती हैं।

सरकार ने बताई बजह

मंत्री ने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसे हालात बनते हैं, मंदी की आशंका बढ़ती है या आर्थिक अस्थिरता गहराती है, तब निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिमपूर्ण साधनों से निकलकर सोने-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करते हैं। इससे इन कीमती धातुओं की मांग बढ़ती है और कीमतों में उछाल आता है। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और बड़े वित्तीय संस्थान भी बड़ी मात्रा में सोने की खरीद कर रहे हैं, जिससे मांग और मजबूत हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि चालू वर्ष में सोने और चांदी के दाम बढ़े हैं, लेकिन इसका असर सभी राज्यों और समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से नहीं पड़ता। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इन धातुओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व अलग-अलग है। सोना और चांदी केवल उपभोग की वस्तु नहीं हैं, बल्कि निवेश का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं और अनिश्चित समय में इन्हें सुरक्षित संपत्ति माना जाता है।

मंत्री के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी से उन परिवारों की संपत्ति का मूल्य बढ़ता है, जिनके पास पहले से सोना और चांदी मौजूद है, जिससे घरेलू संपत्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कीमती धातुओं की कीमतें पूरी तरह बाजार आधारित होती हैं और सरकार इनके मूल्य निर्धारण में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं निभाती। आंकड़ों का उल्लेख करते हुए पंकज चौधरी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में सितंबर तक भारत ने लगभग 26.51 अरब डॉलर का सोना और 3.21 अरब डॉलर की चांदी का आयात किया है, जो देश में इन कीमती धातुओं की मजबूत घरेलू मांग को दर्शाता है।

HDFC Bank UPI downtime: HDFC ग्राहक ध्यान दें, इन तारीखों को नहीं कर पाएंगे UPI पेमेंट, जान लें वजह

HDFC Bank UPI downtime: HDFC ग्राहक ध्यान दें, इन तारीखों को नहीं कर पाएंगे UPI पेमेंट, जान लें वजह

बिजनेस डेस्कः HDFC Bank UPI downtime अगर आप HDFC बैंक के ग्राहक हैं और रोजमर्रा के लेन-देन UPI पर करते हैं, तो यह जरूरी खबर आपके लिए है। दिसंबर में दो अलग-अलग दिनों पर HDFC बैंक अपनी UPI सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद रखने जा रहा है। बैंक ने सिस्टम अपग्रेड और मेंटेनेंस के चलते 4-4 घंटे की विंडो तय की है, जिसके दौरान UPI से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी। ऐसे में किसी भी जरूरी ट्रांजैक्शन की पहले से योजना बनाना जरूरी है।

कब नहीं चलेंगे HDFC UPI?

HDFC बैंक के अनुसार, इन तारीखों और समय पर UPI सेवाएं बंद रहेंगी:

  • 13 दिसंबर 2025: 2:30 AM से 6:30 AM
  • 21 दिसंबर 2025: 2:30 AM से 6:30 AM

इन घंटों के दौरान HDFC बैंक से जुड़े किसी भी प्रकार के UPI पेमेंट नहीं किए जा सकेंगे।

कौन-कौन सी सेवाएं रहेंगी प्रभावित?

मेंटेनेंस विंडो के दौरान निम्न सेवाएं काम नहीं करेंगी—

  • HDFC सेविंग/करंट अकाउंट से UPI पेमेंट
  • HDFC द्वारा जारी RuPay क्रेडिट कार्ड से होने वाले UPI पेमेंट
  • HDFC MobileBanking ऐप पर UPI ट्रांजैक्शन
  • Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे ऐप जिनमें HDFC बैंक लिंक है
  • HDFC से जुड़े मर्चेंट्स की UPI कलेक्शन और सेटलमेंट सेवाएं

क्या होगा विकल्प?

HDFC बैंक ने सलाह दी है कि ग्राहक इन घंटों में PayZapp वॉलेट का उपयोग करें। PayZapp की सेवाएं मेंटेनेंस के दौरान भी सामान्य रूप से चालू रहेंगी, जिससे पेमेंट और ट्रांसफर बिना रुकावट किए जा सकते हैं।

मेंटेनेंस क्यों जरूरी है?

बैंक ने कहा है कि यह तकनीकी अपग्रेड UPI सिस्टम को और तेज, सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए किया जा रहा है। अपग्रेड के बाद ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग बेहतर होने की उम्मीद है।

ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

  • तारीख और समय नोट कर लें
  • इन घंटों में कोई जरूरी पेमेंट शेड्यूल न करें
  • जरूरत पड़ने पर PayZapp वॉलेट का उपयोग करें
Stock Market Holidays 2026: अगले साल इतने दिन बंद रहेगा शेयर बाजार, जारी हुई छुट्टियों की लिस्ट

Stock Market Holidays 2026: अगले साल इतने दिन बंद रहेगा शेयर बाजार, जारी हुई छुट्टियों की लिस्ट

 बिजनेस डेस्कः नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने साल 2026 के लिए शेयर बाजार की आधिकारिक छुट्टियों की सूची जारी कर दी है। एनएसई कैलेंडर के मुताबिक, शनिवार और रविवार के अलाव अगले साल भारतीय शेयर बाजार कुल 15 दिन बंद रहेंगे। ये छुट्टियां राष्ट्रीय पर्वों और प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक त्योहारों के मौके पर रहेंगी।

यह हॉलिडे लिस्ट निवेशकों, ट्रेडर्स और ब्रोकिंग फर्म्स के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, ताकि वे पहले से अपनी ट्रेडिंग और निवेश की रणनीति बेहतर तरीके से प्लान कर सकें। खास बात यह है कि इन 15 में से 5 छुट्टियां शुक्रवार को पड़ रही हैं, जिससे कई मौकों पर निवेशकों को लॉन्ग वीकेंड का फायदा मिल सकता है। हर शनिवार और रविवार को शेयर बाजार में कारोबार बंद रहता है।

बजट के दिन खुलेगा शेयर बाजार?

वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट 1 फरवरी 2026 (रविवार) को पेश होने की संभावना है। बीते वर्षों की परंपरा को देखते हुए माना जा रहा है कि बजट के दिन शेयर बाजार में स्पेशल ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रविवार होने के बावजूद निवेशकों को बाजार में कारोबार का मौका मिलेगा, ताकि वे बजट घोषणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें।

NSE Holiday List 2026

  • 26 जनवरी (सोमवार) – गणतंत्र दिवस
  • 3 मार्च (मंगलवार) – होली
  • 26 मार्च (गुरुवार) – श्री राम नवमी
  • 31 मार्च (मंगलवार) – श्री महावीर जयंती
  • 3 अप्रैल (शुक्रवार) – गुड फ्राइडे
  • 14 अप्रैल (मंगलवार) – डॉ. बी.आर. अंबेडकर जयंती
  • 1 मई (शुक्रवार) – महाराष्ट्र दिवस
  • 28 मई (गुरुवार) – बकरी ईद
  • 26 जून (शुक्रवार) – मुहर्रम
  • 14 सितंबर (सोमवार) – गणेश चतुर्थी
  • 2 अक्टूबर (शुक्रवार) – महात्मा गांधी जयंती
  • 20 अक्टूबर (मंगलवार) – दशहरा
  • 10 नवंबर (मंगलवार) – दिवाली (बलिप्रतिपदा)
  • 24 नवंबर (मंगलवार) – गुरु नानक जयंती
  • 25 दिसंबर (शुक्रवार) – क्रिसमस
SBI Credit Card यूजर्स के लिए बड़ी खबर, नए साल से लागू होंगे नए नियम

SBI Credit Card यूजर्स के लिए बड़ी खबर, नए साल से लागू होंगे नए नियम

 बिजनेस डेस्कः अगर आप अक्सर हवाई यात्रा करते हैं और एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल करते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए अहम है। SBI Card ने अपने डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस प्रोग्राम में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। ये नए नियम 10 जनवरी 2026 से लागू होंगे और कुछ चुनिंदा क्रेडिट कार्ड्स पर लाउंज एक्सेस का तरीका बदल जाएगा।

दो सेट में बांटे गए SBI क्रेडिट कार्ड

नए नियमों के तहत SBI Card ने अपने क्रेडिट कार्ड्स को सेट A और सेट B में बांटा है।

सेट A कार्ड्स

इन कार्ड्स पर लाउंज एक्सेस चुनिंदा बड़े एयरपोर्ट्स तक सीमित रहेगा:

  • Apollo SBI Card SELECT
  • BPCL SBI Card OCTANE
  • Club Vistara SBI Card SELECT
  • Landmark Rewards SBI Card SELECT
  • Paytm SBI Card SELECT
  • PhonePe SBI Card SELECT

इन कार्ड्स से अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और पुणे एयरपोर्ट्स के लाउंज में प्रवेश मिलेगा।

सेट B कार्ड्स

इन कार्ड्स को अपेक्षाकृत बड़े नेटवर्क में लाउंज एक्सेस मिलेगा:

  • SBI Card PRIME
  • KrisFlyer SBI Card
  • Titan SBI Card
  • पार्टनर बैंकों के PRIME वेरिएंट्स

इन कार्ड्स से भुवनेश्वर, चंडीगढ़, कोच्चि, गोवा, इंदौर, जयपुर, वडोदरा, श्रीनगर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों के एयरपोर्ट लाउंज में भी प्रवेश संभव होगा। SBI Card ने स्पष्ट किया है कि केवल सेट A और सेट B में शामिल कार्ड्स के लाउंज लाभों में बदलाव किया गया है, अन्य सभी क्रेडिट कार्ड्स के फायदे पहले जैसे ही रहेंगे।

लाउंज में एंट्री के लिए ऑथेंटिकेशन जरूरी

नए नियमों के मुताबिक, लाउंज में प्रवेश के लिए SBI क्रेडिट कार्ड को POS टर्मिनल पर स्वाइप/ऑथेंटिकेट करना अनिवार्य होगा Visa और RuPay कार्ड्स पर ₹2 का नॉन-रिफंडेबल चार्ज लगेगा। Mastercard पर ₹25 का टेम्पररी होल्ड लगेगा, जो बाद में हटा दिया जाएगा

फ्री विजिट लिमिट खत्म होने पर एंट्री नहीं

अगर किसी कार्ड की फ्री लाउंज विजिट लिमिट पूरी हो चुकी है, तो लाउंज में प्रवेश नहीं मिलेगा। अतिरिक्त विजिट के लिए स्टैंडर्ड लाउंज चार्ज देना होगा। SBI Card ने यह भी बताया कि लाउंज प्रोग्राम को Visa, RuPay और Mastercard नेटवर्क पार्टनर्स मैनेज करते हैं और उन्हीं की नियम व शर्तें लागू होंगी।