जशपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे थम नहीं रहे है, यहां आए दिन सड़क दुर्घटना में कई लोग अपनी जान गवां रहे हैं। इसी बीच जशपुर में तमता-डूमरबहार मुख्य मार्ग स्थित पंडरीपानी के पास एक तेज रफ्तार बाइक खड़ी पानी टैंकर से जा टकराई। हादसा इतना भयानक था कि बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई।
जशपुर। जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां बीते दिन से लापता दो मासूम बच्चों की लाश तालाब में तैरती हुई मिली है। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह मामला बगीचा थाना क्षेत्र के बिसबहरी गांव का है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई है।
मृतक बच्चों की पहचान गोल्डी टोप्पो (7 वर्ष) और अनीस टोप्पो (8 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे शनिवार शाम से लापता थे। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो बगीचा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
रिपोर्ट के बाद पुलिस लगातार बच्चों की खोजबीन में लगी हुई थी। इसी बीच आज रविवार को गांव के पास स्थित एक तालाब में दोनों बच्चों के शव मिला। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को बाहर निकाला। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे तालाब में नहाने गए हुए थे, तभी यह हादसा हुआ। हालांकि, मामले में पुलिस जांच कर रही है कि आखिर यह घटना कैसे हुई। फिलहाल पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।

इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने जसक्राफ्ट ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।
इस दौरान देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। एक पेड़ माँ के नाम अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढिय़ों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
बिलासपुर। मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना ने लोगों की मुश्किलें काफी हद तक आसान कर दी हैं। 12 मार्च से शुरू हुई इस योजना का मकसद है पुराने बकाया बिजली बिलों से उपभोक्ताओं को राहत देना… और अब इसका असर ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगा है। इस योजना के तहत वर्ष 2023 के बकाया बिलों में मूलधन पर आकर्षक छूट दी जा रही है। खास बात यह है कि बीपीएल कनेक्शन धारकों को सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है… उन्हें मूल राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट और सरचार्ज पर 100 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। यानी पुराने भारी भरकम बिल अब काफी हल्के हो चुके हैं।
वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को भी निर्धारित नियमों के अनुसार राहत मिल रही है, जिससे आम लोगों में खुशी का माहौल है। बिलासपुर जिले में इस योजना को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता एस.के. जांगड़े के अनुसार बिलासपुर, मुंगेली और पेंड्रा जिलों में करीब 1 लाख 40 हजार उपभोक्ताओं को इस योजना से लाभ देना लक्ष्य है। अब तक लगभग 93 हजार लोगों तक विभाग पहुंच चुका है।
बिजली विभाग गांव-गांव शिविर लगाकर लोगों को जागरूक कर रहा है।ताकि हर पात्र व्यक्ति इस योजना का फायदा उठाकर अपने बकाया से मुक्त हो सके।
रायपुर। राजधानी रायपुर में इस साल 4 फ्लाईओवर्स के काम शुरू होंगे। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने चारों फ्लाईओवर्स के लिए कुल 360 करोड़ 35 लाख 93 हजार रुपए मंजूर किए हैं। इन फ्लाईओवर्स के निर्माण से शहर के ब्यस्त यातायात को तेज, स्मूथ और सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। शहरवासी इनके निर्माण की मांग लंबे समय से कर रहे थे
लोक निर्माण विभाग ने शहर के बीच जी.ई. रोड पर गुरू तेज बहादुर उद्यान से तेलीबांधा के नेताजी सुभाष चौक तक फ्लाईओवर के लिए 172 करोड़ 86 लाख 28 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। रायपुर के रिंग रोड क्रमांक-2 में सोनडोंगरी चौक पर ओवरपास के लिए 43 करोड़ 89 लाख 17 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं। विभाग ने रायपुर में वी.आई.पी. रोड के फुंडहर चौक में ओवरपास के निर्माण के लिए 56 करोड़ सात लाख 35 हजार रुपए की स्वीकृति दी है। शहर के अटल पथ एक्सप्रेस-वे पर फुंडहर चौक में ग्रेड सेपरेटर के निर्माण के लिए भी लोक निर्माण विभाग द्वारा 87 करोड़ 53 लाख 13 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य शासन रायपुर में यातायात को तेज, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। शहर में फ्लाईओवर्स और सड़कों के चौड़ीकरण के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इनसे ट्रैफिक-जॉम में कमी आएगी और लोगों की आवाजाही अधिक सहज होगी। हमारी प्राथमिकता है कि रायपुरवासियों और यहां आने वाले हर व्यक्ति को बेहतर और सुगम यातायात मिले।
राजनांदगांव। आईपीएल सीजन के दौरान सक्रिय सटोरियों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिले की पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से कार, लैपटॉप और मोबाइल सहित लाखों रुपये का मशरूका बरामद हुआ है।
सबसे बड़ी कार्रवाई घुमका थाना अंतर्गत ग्राम खैरझिटी में हुई। यहाँ एक कृषि फार्महाउस के भीतर छिपे सटोरिए हाईटेक उपकरणों के जरिए ऑनलाइन दांव लगवा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ‘सांई ऐप’ और विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर क्रिकेट मैच की हर गेंद और ओवर पर सट्टा खिला रहे थे।
सटोरियों के पास से पुलिस ने 1 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 1 सट्टा लेख कॉपी, 2 लग्जरी कारें (होंडा सिटी और प्रोन्स), 900 रुपये नगद, सट्टा पट्टी में दर्ज करीब 7,68,000 रुपये का सामान जब्त किया है।
जगदलपुर । जगदलपुर सहित बस्तर संभाग के कई इलाकों में बीती रात भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। देर रात लगभग 11:31 बजे आए इन झटकों के दौरान लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में था और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई, जबकि इसकी गहराई जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे थी। झटके कुछ ही सेकंड तक महसूस हुए, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई और लोगों ने राहत की सांस ली।
हालांकि बस्तर क्षेत्र को भूकंप की दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, ऐसे में यहां इस तरह जमीन का हिलना लोगों के साथ-साथ विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, झटके इतने तेज थे कि घरों की दीवारें और सामान तक हिलने लगे, जिससे डर का माहौल बन गया। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति हर क्षेत्र को तैयार रहना जरूरी है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में बिहान योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर हैं। स्व सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आजीविका के नए अवसर विकसित कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम टांगरगाँव की संज्योति चौहान ने बैंक सखी के रूप में कार्य कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। वे चांदनी स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुडऩे के बाद उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला, जिससे उनके आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली।
चौहान वर्ष 2019 से ग्रामीण बैंक से संबद्ध बैंक सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। वे किराना दुकान के साथ-साथ बैंकिंग सेवाएं भी प्रदान कर रही हैं। उनके द्वारा प्रतिमाह लगभग 8 से 9 लाख रुपये तक का लेन-देन किया जाता है, जिससे उन्हें औसतन 3 से 4 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त वे डिजिटल भुगतान, बीमा एवं अन्य वित्तीय सेवाओं के माध्यम से ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं।
उन्होंने बताया कि बैंक सखी के रूप में कार्य प्रारंभ करने के लिए उन्होंने स्व सहायता समूह के माध्यम से 68 हजार रुपये का ऋण लिया, जिससे उन्हें यह कार्य शुरू करने में सहायता मिली। आज वे आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रही हैं। श्रीमती संज्योति चौहान की यह सफलता दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं और समाज में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर सकती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अध्यक्ष राजीव गुप्ता, सचिव मोती जैन ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश के 6000 से ऊपर निजी स्कूल जिनमे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत इसी माह से प्रवेश प्रस्तावित है। ये सभी लॉटरी के माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों की एडमिशन की प्रक्रिया में सहयोग न करते हुए चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश भी नहीं देंगे।
उन्होंने बताया कि आर.टी.ई. में पहली बार 2011 से ही कक्षा पहली से पांचवी तक की प्रतिपूर्ति राशि 7000/-, छठवीं से आठवीं तक 11400/- प्रति विद्यार्थी /प्रति वर्ष तय की गई थी। राज्य सरकार ने 2018 में कक्षा नवमी से बारहवी को दायरे में लाया गया एवं राशि 15000/- प्रति विद्यार्थी / प्रति वर्ष तय की। 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि अभी तक नहीं बढ़ाई गई है। राशि बढ़ाने की मांग संगठन 2016 से लगातार कर रहा है। इसकी अनदेखी पर जुलाई 2025 में संगठन की याचिका पर उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 19 सितंबर 25 को 6 महीने के अंदर संगठन द्वारा दी गई रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय हेतु आदेशित किया । उसके बाद पिछले 6 महीना से विभाग अनदेखी से 1 मार्च विभाग के किसी पत्र / नोटिस का जवाव नहीं दे रहे हैं। राशि इतनी कम है की सभी विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
अन्य प्रदेशों में प्रतिपूर्ति राशि यहां से बहुत ज्यादा है। जैसे असम-16396, चंडीगढ़-28176, गुजरात- 13000, हिमाचल प्रदेश 34744, कर्नाटक-8000 एवं 16000, महाराष्ट्र - 17670, उड़ीसा 21247, राजस्थान 10688, तमिलनाडु -11700, उत्तराखंड-16596, छत्तीसगढ़ से कम प्रतिपूर्ति राशि सिर्फ तीन प्रदेश बिहार, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की है।
रायपुर। बैंकॉक में 31 से 4 अप्रैल तक आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में छत्तीसगढ़ के तीरंदाज तोमन कुमार ने 3 गोल्ड मेडल प्राप्त कर भारत सहित पूरे छत्तीसगढ़ का नाम विदेश में रौशन किया है। इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष विष्णुदेव साय, भारतीय तीरंदगी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मुरारका व छत्तीसगढ़ तीरंदाजी संघ के सचिव आयुष मुरारका ने शुभकामनाएं दी है।
छत्तीसगढ़ तीरंदाजी संघ के सचिव आयुष मुरारका ने ने बताया कि तोमन ने पहला गोल्ड शीतला देवी के साथ खेलते हुए मिक्स टीम में हासिल किया उन्होंने इंडोनेशिया के खिलाडिय़ों को मात दी। दूसरा गोल्ड कंपाउंड पुरुष टीम में उन्होंने चीनी ताइपे को हारते हुए हासिल किया और तीसरा गोल्ड व्यक्तिगत कपाउंड पुरुष वर्ग में हासिल किया। अगर तोमन टॉप 4 में आ गए तो आने वाले समय में उसका तीरंदाजी के ओलंपित में खेलना तय हो जाएगा।
रायपुर। प्रदेश में एक बार फिर सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी है। जानकारी के अनुसार, सीमेंट कंपनियां सोमवार से प्रति बोरी करीब 50 रुपए तक दाम बढ़ाने की योजना बना रही हैं। वर्तमान में जहां सीमेंट की कीमतें 250 से 285 के बीच हैं, वहीं बढ़ोतरी के बाद इनके 300 के पार जाने की संभावना है।
हैरानी की बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की जा रही है, जब मानसून के दौरान निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और बाजार में सीमेंट की मांग भी कम रहती है। इसके बावजूद कंपनियों द्वारा दाम बढ़ाने की तैयारी उपभोक्ताओं और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर विरोध देखने को मिला था। जिसे लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी कंपनियों के फैसले पर आपत्ति जताई थी और कीमतों पर नियंत्रण की मांग की थी। अब एक बार फिर संभावित मूल्य वृद्धि से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो निर्माण कार्य करा रहे हैं।
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां एक कॉलेज छात्रा का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिला है। छात्रा का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। गांव के लोगों ने जब छात्रा के शव को देखा तो उन्होंने आनन-फानन में इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और छात्रा के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं पुलिस की टीम इस मामले की जांच में जुट गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला जशपुर जिले के नारायणपुर थाना के चारभट्टी गांव का है। यहां कॉलेज छात्रा का शव संदिग्ध परिस्थिति में खेत में मिला। गांव के लोगों ने जैसे ही छात्रा के शव को देखा तो उनमे हड़कंप मच गया और पूरे इलाके में सनसनी फ़ैल गई। ग्रामीणों ने आनन-फानन में इसकी सूचना पुलिस को दी सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और छात्रा के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं पुलिस की टीम इस मामले की जांच में जुट गई है।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के 31 मार्च 2026 को माओवादी आतंक से मुक्त होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शहीद जवानों, बस्तर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, सुरक्षा बलों और बस्तर की जनता के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।
उन्होंने सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साहसपूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन, संकल्प और सतत प्रेरणा ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध इस निर्णायक अभियान को दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश को भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का आह्वान करते हुए युवाओं से मानवता के दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी थी।
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने रायपुर में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जिसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन मिला, साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा का उत्तर दृढ़ता से दिया जाएगा, जबकि शांति का मार्ग अपनाने वालों का स्वागत किया जाएगा।
शहीदों के बलिदान से लिखी गई बस्तर की नई कहानी: मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों के उन बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने साहस और संकल्प के साथ अपनी जान की परवाह किए बिना माओवाद की जड़ों पर प्रहार किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की जनता के प्रति भी विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने उस दौर को याद किया जब मतदान करने पर उंगली काटने की धमकियाँ दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने निर्भय होकर लोकतंत्र को मजबूत किया। यही जनविश्वास एक ऐसे नेतृत्व को स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध हुआ, जिसने एक दशक के भीतर इस चुनौती का समाधान किया।
हिंसक माओवादी विचारधारा ने वर्षों तक अनगिनत परिवारों को पीड़ा दी – मांओं की कोख उजड़ी, बहनों का सुहाग छिना और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी; यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मबल और संकल्प का प्रतीक रहा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद माओवादी हिंसा के विरुद्ध एक निर्णायक और सुनियोजित रणनीति पर कार्य प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई राज्य इस चुनौती से मुक्त हुए, हालांकि छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही; ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के बाद पिछले ढाई वर्षों में सामूहिक संकल्प के बल पर इस सशस्त्र माओवादी नासूर का समूल नाश संभव हो सका।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने उन लोगों का स्वागत किया है, जिन्होंने माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है, और यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं बल्कि विश्वास, पुनर्वास और विकास के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने कहा कि अब बस्तर में एक नया अध्याय प्रारंभ हो चुका है – जहाँ बच्चे निर्भय होकर विद्यालय जाएंगे, माताएं और बहनें स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकेंगी और विकास का प्रकाश हर गांव तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है। इसी विश्वास और संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में एक युवक और एक शिक्षक की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों घटनाएं कटघोरा थाना क्षेत्र की है। एक घटना में कार सवार शिक्षक की मौत हो गई। वहीँ दूसरी घटना में बाइक सवार युवक की एक्सीडेंट में जान चले गई।
पहली घटना
कटघोरा थाना क्षेत्र के सीताराम चौक के चकचकवा पहाड़ के पास की है। बताया जा रहा है कि ऐतमा नगर निवासी 25 वर्षीय शिपाल पोर्ते बाइक पर सवार होकर काम से निकला था। इसी बीच चकचकवा पहाड़ के पास सड़क पर गिट्टी-मिट्टी के ढेर की वहज से उसकी बाइक टकरा गई और अनियंत्रित होकर गिर गया। घटना में युवक के सिर, हाथ, पैर में गंभीर चोट लगी। राहगीरों ने उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर उपचार के दौरान डाॅक्टरों ने उसके मौत की पुष्टि की।
दूसरी घटना
पोड़ी उपरोड़ा निवासी शिक्षक जय पांडेय वैगनआर कार में सवार होकर कहीं जा रहे थे। इसी दौरान बरपाली के पास उनकी तेज रफ़्तार कार अंधेरे की वजह से अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। हादसा इतना जबरदस्त था कि कार के परखच्चे उड़ गए, वहीं शिक्षक जय पांडेय को गंभीर हालत में उपचार के लिए सामुदायिक केंद्र कटघोरा लाया गया, जहां से उन्हें कोरबा रेफर किया गया था। अस्पताल में उपचार के दौरान डाॅक्टरों ने शिक्षक को मृत घोषित कर दिया।
अलग-अलग क्षेत्रों में हुई दो घटनाओं में दो लोगों की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, ग्रामीणों ने सड़कों पर लाइट बंद और जगह जगह मलबा होने को लेकर आक्रोश जताया है।
गरियाबंद। जिले में पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने पुलिसकर्मियों के तबादले का आदेश जारी किया है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से किए गए इस फेरबदल में इकाई में पदस्थ प्रआर./आर. को आगामी आदेश पर्यंत उनके नाम के सम्मुख दर्शित नवीन पदस्थापना पर अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना पर पदस्थ किया गया है और उन्हें शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विभाग के इस निर्णय को कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दुर्ग। भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस-4 में शुक्रवार को ठेका मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। खोमलाल वर्मा (49), निवासी पहंडोर (पाटन), करीब 30 फीट ऊंचाई पर काम कर रहे थे, तभी अचानक संतुलन बिगडऩे से नीचे गिर पड़े। सहकर्मियों ने तत्काल उन्हें बीएसपी के मेन मेडिकल पोस्ट पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सेक्टर-नौ अस्पताल रेफर किया गया।
अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मजदूर की हालत गंभीर बनी रही और देर शाम इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गिरने से उनके पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। घटना के बाद शव को अस्पताल की मरच्यूरी में रख दिया गया है।
इससे पहले नवंबर 2025 में भी देवेंद्र चंद्राकर की इसी तरह काम के दौरान गिरने से मौत हो चुकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं न कहीं कमी रह जा रही है।
ठेका श्रमिकों की सुरक्षा पर फोकस जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई पर काम करते समय सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य होता है। इसके साथ ही सुपरवाइजर की मौजूदगी और सुरक्षित कार्य प्रक्रिया (एसडब्ल्यूपी) का सख्ती से पालन जरूरी है। मौजूदा हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन सभी नियमों का सही तरीके से पालन किया जा रहा था।
मजदूर संगठनों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था, तो हादसा कैसे हुआ। वहीं, यदि लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेका एजेंसी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच के बाद तय होगी जवाबदेही
प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या इस बार जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या नहीं। लगातार हो रहे हादसों के बीच श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
CG News : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में देरी को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी को भविष्य निधि यानी पीएफ की देरी से हुई भुगतान राशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए।
मामले में याचिकाकर्ता जगन्नाथ सिंह वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन उनके पीएफ की कुल राशि में से करीब 1 लाख 55 हजार रुपए 12 साल बाद 24 जनवरी 2023 को जारी किए गए। यह देरी विभागीय पासबुक में एंट्री नहीं होने के कारण हुई, जिसे कोर्ट ने प्रशासनिक चूक माना।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ कर्मचारी का अधिकार हैं, कोई उपहार नहीं। कोर्ट ने अक्टूबर 2011 से जनवरी 2023 तक की अवधि के लिए 8 प्रतिशत ब्याज देने और चार महीने के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए।
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी सिहावा पहाड़ी पर लाश मिलने से हड़कंप मचा हुआ है, बताया जा रहा यहां सिहावा थाना क्षेत्र में सिहावा पहाड़ी पर एक अधेड़ व्यक्ति का विघटित शव पड़ा हुआ मिला है, इस घटना के बाद से इलाके में सनसनी है, फिलहाल मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर आगे की कार्रवाई कर रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ स्थानीय ग्रामीण किसी काम से पहाड़ी के तरफ गए हुए थे, इस दौरान उन्हें बदबू आने लगा,जब पास जाकर देखें तो लाश को पड़ा हुआ देख लोग हैरान रह गए, जिसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई, मामले में पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक लाश कुछ दिन पुरानी है जिसकी पहचान केरेगांव थाना इलाके दरगहन निवासी जगन्नाथ पिता मयाराम साहू उम्र 49 वर्ष के रूप में हुई है, बताया जा रहा है मृतक बीते 13 जनवरी से मॉर्निंग वॉक पर जा रहा हूं बोलकर निकले थे, लेकिन घर वापस नहीं लौटे इस दौरान परिजनों ने अपने स्तर पर तलाश शुरू की लेकिन फिर उसका कहीं पता चला ऐसे में परेशान परिजनों ने केरेगांव थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
जिसके बाद पुलिस मृतक की लगातार तलाश कर रही थी,जिसका शव आज सिहावा पहाड़ी पर मिला है, पुलिस के मुताबिक मौके पर 505 कीटनाशक की बोतल पड़ा हुआ मिला है, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि वह उसी का सेवन सुसाईड किया होगा, इस घटना ने अपने पीछे कई सवाल खड़े कर दिए है?मृतक घर से टहलने निकला था तो यहां इतने दूर क्या अकेले आया था या फिर किसी के साथ? ये अभी जांच का विषय है,फिलहाल पुलिस ने मामले की सूचना मृतक के परिजनों को दे दी है।
रायपुर :- कुंवरगढ़ महोत्सव धरसीवां में आज भिलाई के बेटी सुश्री निधि टंडन जी ने कथक नृत्य में भगवान रामचंद्र एवं केवटराज के कथा को कत्थक नृत्य के साथ प्रतुति किए हजारों दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल माननीय विधायक अनुज शर्मा, सौरभ साहब डॉ राजेंद्र रंगीला मिलन रंगीला विख्यात कलाकारों सहित अनेक जनप्रतिनिधि हजारों के तादाद में दर्शक मौजूद रहे !
रायपुर: दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित आवासों में मात्र 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर जिले ने एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया गया। “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” थीम के साथ 13 मार्च 2025 को इसकी शुरुआत हुई। अभियान के प्रथम चरण में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के घरों में मात्र दो घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट का निर्माण कर गोल्डन बुक में नाम दर्ज कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनी।
द्वितीय चरण में 08 दिसंबर को 12,418 सोक पिट का निर्माण किया गया, जिससे कुल 14,182 सोक पिट स्वप्रेरणा से तैयार हुए। इसके साथ ही “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत 23,889 कंटूर ट्रेंच एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण भी पूर्ण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से इन कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 32,058 जल संरक्षण संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है।

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित न रहकर जन आंदोलन के रूप में स्थापित हो गई है। प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास में निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं।
अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें कम लागत के 24 कार्य, 15 बोरवेल रिचार्ज, 03 चेकडैम, 5,875 कंटूर ट्रेंच, 07 गली प्लग, 03 नाला बंड, 18 ओपन वेल रिचार्ज (डगवेल), 07 परक्यूलेशन तालाब, 537 रिचार्ज पिट, 05 रिचार्ज शाफ्ट, 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 6,676 सोक पिट, 09 टैंक, 48 ग्राम तालाब तथा 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच शामिल हैं।
इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि “हर घर जल संचय” का लक्ष्य साकार हो सके।
रायपुर: मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना ने ग्रामीण अंचलों में परिवहन व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित बस सेवा योजना अंतर्गत दूरस्थ जनजातीय गांवों को जिला एवं विकासखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली 4 नई बस सेवाओं की शुरुआत की गई है।
पहले कई गांव ऐसे थे जहाँ नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं थी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी, पैदल या महंगे निजी साधनों से तय करनी पड़ती थी। किसानों और व्यापारियों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई होती थी। लेकिन बस सेवाओं के संचालन से ग्रामीणों को सुरक्षित, सुलभ परिवहन सुविधा मिल रही है। विद्यार्थी अब समय पर स्कूल और कॉलेज पहुंच पा रहे हैं। किसान अपनी उपज सीधे बाजार तक ले जा पा रहे हैं। श्रमिकों और व्यापारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। राजपुर, रामानुजगंज, शंकरगढ़, वाड्रफनगर के अनेक गांव अब सीधे बस सेवा से जुड़ गए हैं। इससे ग्रामीणों के समय की बचत हो रही है।

रामानुजगंज से मर्मा जा रही नगोई बाई अपने पुराने दिनों को साझा करते हुए बताती है कि पहले कही जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था या महंगे साधन लेना पड़ता था। अब बस सेवा से परिवहन करना आसान हो गया है। राजपुर से नरसिंहपुर जा रही महिला श्यामा ने कहा कि अब अस्पताल, बाजार या अन्य जरूरी कामों के लिए हमें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। बस सेवा से हमारी जिंदगी काफी आसान हो गई है।
रामानुजगंज से लोधा जा रहे दशरथ मरावी का कहना है कि पहले परिवहन सुविधा न होने के कारण गांव से बाहर जाने में परेशानी होती थी। लेकिन अब बस संचालन से हम आसानी से विकासखण्ड एवं जिला मुख्यालय तक पहुंच जाते हैं। इससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। योजना के माध्यम से उन्हें निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो गई है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत जिले में 4 बस सेवाएं प्रदान की गई है। सुदूर वंनांचलों में रहने वाले लोगों के आवागमन सुविधा से सहुलियत मिल रही है। इसके लिए जिले में 4 मार्गों का चयन किया गया है। जिसके अंतर्गत राजपुर से नरसिंहपुर (व्हाया, राजपुर, परसागुड़ी, चिलमा कला, नरसिंहपुर)।

इसी प्रकार रामानुजगंज से भीतरचुरा (व्हाया रामचन्द्रपुर, बाहरचुरा, चरगढ़, चेरवाडीह, भीतरचुरा) एवं शंकरगढ़ से पटना (व्हाया पटना, जगिमा, डीपाडीहखुर्द, हरगावां, घुघरीखुर्द, चलगली, शंकरगढ़) तथा रामानुजगंज से वाड्रफनगर (व्हाया छतवा, लोधा, डाटम, बाहरचुरा, विमलापुर, डिण्डो, सलवाही, कसरईया, गोबरा, फुलीडुमर) में बस परिवहन सेवा शुरू की गई। ग्रामीण बस सेवा शुरू होने से यात्रा करने वाले ग्रामीणों को अब अधिक सुगम, सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल रही है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम कर सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। जो समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है और ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में विकास को नई गति मिल रही है और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना अंतर्गत ग्रामीण परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होने से गांव और शहर के बीच की दूरी कम हुई है और लोगों का जीवन आसान हुआ है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज आने वाले दिनों में बदलने वाला है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश में अगले पांच दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है, जिससे मौसम सुहावना तो होगा लेकिन सतर्कता भी जरूरी रहेगी।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। खासकर मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में अगले 48 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में वृद्धि होने के संकेत हैं। इसके बाद तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। वहीं दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होने की संभावना है।
बीते 24 घंटों के मौसम पर नजर डालें तो प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई है। पेंड्रारोड में सबसे अधिक 10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहा, लेकिन बादलों की आवाजाही बनी रही।
तापमान की बात करें तो राजनांदगांव में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। वहीं दुर्ग में न्यूनतम तापमान 20.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो अपेक्षाकृत ठंडा रहा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।
खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।































