BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |
पोषक तत्वों से भरपूर है ये जूस, रोजाना गरम पानी के साथ पिएं तो ये बीमारियां होंगी दूर

पोषक तत्वों से भरपूर है ये जूस, रोजाना गरम पानी के साथ पिएं तो ये बीमारियां होंगी दूर

फलों का जूस सेहत के लिए हर मायने में काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर को एनर्जी देता है और हमें बीमारियों से बचाता है। नोनी भी एक ऐसा ही फल है जिसका जूस स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। नोनी मोरिंडा सिट्रफोलिया फेमिली का पौधा है जो दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशिया सहित प्रशांत महाद्वीपों में पाया जाता है। नोनी फल के औषधीय गुणों के कारण ही प्राचीन समय से ही इसे इम्युनिटी बढ़ाने और डिटॉक्सिफिकेशन के लिए उपयोग किया जाता है। नोनी में पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी, विटामिन बी3, विटामिन ए और आयरन पाया जाता है। यह कई बीमारियों को ठीक करने में प्रभावी होता है। आइये जानते हैं नोनी जूस का सेवन करने के कुछ मुख्य फायदों के बारे में।
हृदय को स्वस्थ रखने में
नोनी जूस में कुछ ऐसे तत्व पाये जाते हैं जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। रोजाना एक गिलास नोनी के जूस का सेवन करने से धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
इम्युनिटी बढ़ाने में
नोनी जूस में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी हिस्टामिन गुण पाया जाता है जो इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक होता है। इसे नियमित पीने से शरीर के अंदर कई बीमारियों से लडऩे की ताकत आती है।
तनाव भगाने में
रोजाना एक गिलास नोनी जूस का सेवन करने से स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है और तनाव से राहत मिलती है। यही नहीं यह ब्रेन हेल्थ के लिये भी फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीएंफ्लेमेटरी जैसे कई औषधीय गुण होते हैं। ये सभी चीजें मस्तिष्क क्षति पर सुरक्षात्मक कार्य करते हैं।
कैंसर से बचाने में
नोनी जूस इम्यून सिस्टम को स्वस्थ रखता है और ट्यूमर से बचाता है। इसके एंटी कैंसर और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो स्तन कैंसर के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है। यही नहीं यह जूस धूम्रपान से होने वाले कैंसर के खतरे से भी लड़ता है। यह शरीर में कैंसर वाले ट्यूमर को बढऩे से रोकता है।
गाउट से बचाने में
जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा हो जाने के कारण गाउट की समस्या हो जाती है और जोड़ों में गंभीर दर्द होता है। नोनी जूस ब्लड में यूरिक एसिड को घटाता है और गाउट का जोखिम कम करता है।
बुखार के इलाज में
एंटी वायरल गुणों से भरपूर होने के कारण नोनी के जूस का सेवन करने से सर्दी, खांसी, बुखार और शरीर का दर्द दूर हो जाता है।
एंटी एजिंग के रुप में
नोनी के रस में विटामिन सी और सेलेनियम पाया जाता है जो मुक्त कणों से लड़ता है और इसके हानिकारक प्रभाव से त्वचा की रक्षा करता है। साथ ही स्किन के लचीलेपन को बनाए रखता है। साथ ही इसमें एंटी एक्ने गुण भी होते हैं जो मुंहासों से छुटकारा दिलाता है। यदि आपको त्वचा में चमक भरनी है तो नोनी का जूस सुबह जरूर पिएं।
इस प्रकार जो लोग रोजाना नोनी जूस का सेवन करते हैं वे न सिर्फ बीमारियों से दूर रहते हैं बल्कि उनका बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल घटता है और गुड कोलेस्ट्रॉल एचडीएल बढ़ता है।
स्किन को हेल्दी रखने में
नोनी जूस में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जिसे रोजाना चेहरे पर लगाने से यह त्वचा को अच्छी तरह मॉश्चराइज करता है और जवान बनाये रखने में मदद करता है।
 

अगर आपने नहाने के पानी में इसको मिलाया तो  मिट जाएगी शरीर की पूरी थकान,रहेगी दिन भर ताजगी

अगर आपने नहाने के पानी में इसको मिलाया तो मिट जाएगी शरीर की पूरी थकान,रहेगी दिन भर ताजगी

हफ्तेभर की दौड़-भाग के बीच हमारा शरीर कब थक के चूर हो जाता है हमे पता भी नहीं चलता। शरीर की थकान मिटाने के लिये हम ज्यादा से ज्यादा गरम पानी से नहा लेते हैं। मगर क्या आप जानती हैं कि वहीं अगर गरम पानी में रसोईं में रखी कुछ चीजों को मिक्स कर दिया जाए तो शरीर में फिर से पहले जैसी ऊर्जा आ जाती है। आइये जानते हैं नहाने के पानी में किन किन चीजों को मिक्स कर के नहाने पर फायदा होता है....
ग्रीन टी
हम सभी जानते हैं कि ग्रीन टी पेट की चर्बी को कम करने के लिये जानी जाती है। लेकिन अगर इसको नहाने के पानी में मिला दिया जाए तो यह आपके शरीर को अच्छी तरह से डिटॉक्स करेगी। इसका प्रयोग कने के लिये लगभग 6 टी बैग को गर्म पानी से भरे टब में डालें और लगभग 15-20 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। ग्रीन टी एंटी एजिंग का काम करती है और शरीर को अच्छी तरह से साफ भी करती है।
अदरक
अगर आपकी बॉडी में थकान है तो लगभग आधा कप कद्दूकस की हुई अदरक को गर्म पानी में मिलाएं। इससे आपको ठंड और फ्लू के लक्षणों को दूर करने में मदद मिलेगी। यहां तक कि अगर आप बीमार महसूस नहीं भी कर रही हैं, तो भी अपने नहाने के पानी में अदरक मिक्स करें। इससे आपकी मांसपेशियों को आराम मिलेगा, शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलेंगे और आपको अच्छा महसूस होगा।
एप्सम साल्ट
इसके अनगिनत स्वास्थ्य लाभों के अलावा, इसे अगर नहाने के पानी में लगभग 2 कप मिलाया जाए तो दर्द से राहत मिलती है, शरीर की सूजन कम होती है और आपके दिमाग और शरीर को आराम मिलता है। एप्सम नमक के स्वास्थ्य लाभ को अच्छी तरह पाना है तो इसे सप्ताह में तीन बार नहाने के पानी में मिला कर नहाएं।
ऑलिव ऑइल
कई तरह के तेल आपकी त्वचा को खूबसूरत और मुलायम बनाते हैं, जिसमें से जैतून का तेल आम है। बस आपको अपने गर्म स्नान के पानी में जैतून के तेल के 5 बड़े चम्मच डालने हैं। जैतून के तेल से स्नान करने पर बैक्टीरियल संक्रमणों से बचाव होगा और साथ ही इम्यूनिटी मजबूत रहेगी। यह त्वचा में कोलेजन बनाए रखने में भी मददगार है। यह स्नान झुर्रियों को कम करने में मदद करेगा।
नींबू
नींबू के इस्तेमाल से आप चमकदार और गोरी त्वचा पा सकती हैं। आपको करना सिर्फ इतना है कि नहाने के पानी में लगभग 5-6 नींबू निचोड़ दें। चूंकि नींबू ताजा होते हैं, इसलिये यह पोर्स को सिकोडऩे और आपकी त्वचा को पुनर्जीवित करने में मदद करते हैं।
 

आपको बीमार बना सकता है ऑफिस में 8 से अधिक घंटे काम करना, जानें समाधान

आपको बीमार बना सकता है ऑफिस में 8 से अधिक घंटे काम करना, जानें समाधान

प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने वाला हर इंसान इस दर्द को समझता है कि आखिर काम का दबाव होता क्या है! टाइम लाइन में बंधकर काम करना, डेडलाइन के भीतर परफॉर्म करना और बेहतर से बेहतर रिजल्ट देने की कोशिश का तनाव होना... चलिए आपके जख्मों को और अधिक नहीं कुरेदते हैं... यहां बात करते हैं इस मुद्दे पर कि कैसे आपको ऑफिस में हर दिन 9 घंटे काम करना बीमार बना सकता है? साथ ही यह भी कि आखिर इस समस्या का समाधान क्या है... 

बुरा मत मानिए लेकिन सच तो सच है!

हमारा मकसद आपको डराना या हर्ट करना बिल्कुल नहीं है। हम बस बीमारी के रूप में आनेवाले उन खतरों को लेकर आपको आगाह करना चाहते हैं, जो हर दिन 9 घंटे काम करने के चलते आपको अपनी गिरफ्त में ले सकते हैं। इनका नाम है, हाइपरटेंशन, हार्ट अटैक, ऐंग्जाइटी, स्ट्रोक, डिप्रेशन, मसल्स पेन, बैक पेन, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल पेन आदि

बढ़ती है लोनलीनेस की समस्या

उद्गम मेंटल हेल्थ केयर के सीनियर सायकाइट्रिस्ट का कहना है कि जो लोग 8 घंटे से अधिक लंबी शिफ्ट में लगातार काम करते हैं, उन लोगों में कुछ समय बाद अकेलेपन की भावना घर करने लगती है। इसका मुख्य कारण होता है कम्यूनिकेशन का अभाव और फैमिली तथा फ्रेंड्स के साथ वक्त ना बिता पाना। इस कारण ये लोग अपनी सोसायटी से कट जाते हैं। अक्सर ऐसे केसेज हमारे पास आते हैं कि एक छत के नीचे रहते हुए भी लोग थकान के कारण एक-दूसरे को वक्त नहीं दे पाते हैं, जिससे एक-दूसरे से दूरी बनने लगती है और फिर यहीं से अकेलापन घर करने लगता है।

काम का हद से ज्यादा तनाव 

आइडियली एक इंसान को दिन में कितने घंटे काम करना चाहिए? इस मुद्दे पर एक ऑर्गेनाइजेशन द्वारा कराई गई रिसर्च में सामने आया कि भारतीय युवा काम के लिए निर्धारित 8 घंटों से कहीं अधिक समय ऑफिस में रुकते हैं और लंबी शिफ्ट्स में काम करते हैं। यही वजह है कि युवाओं में तनाव का प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। अगर जापान जैसे विकसित देश की बात करें तो वहां के युवा सामान्य तौर पर सप्ताह में केवल 46 घंटे ऑफिस में बिताते हैं। जबकि भारत के युवाओं का यह समय 52 घंटे है।

युवा बन रहे हैं चिड़चिड़े 

युवाओं के व्यवहार में तेजी से बढ़ती नकारात्मकता का बड़ा कारण यह है कि वे मेंटली तो बहुत अधिक थक रहे हैं और फिजिकली ऐक्टिव रहने का उनके पास ना तो वक्त है और ना ही ऑफिस के बाद उनमें इतनी एनर्जी बचती है। ऐसे में वे धीरे-धीरे अपने-आपमें सिमटने लगते हैं। जब मन की बातें और दिमाग की परेशानी वे किसी से शेयर नहीं कर पाते तो उनके अंदर इरिटेशन बढऩे लगता है और वे बात-बात पर चिड़चिड़ाने लगते हैं। जो उनके तनाव को और अधिक बढ़ाने का काम करता है।

क्षमताओं से अधिक काम 

खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर में काम करनेवाले युवाओं पर करियर में ग्रोथ और खुद को प्रूव करने का बहुत अधिक दबाव रहता है। इसलिए वे चाहकर भी अपने इंट्रस्ट और हॉबीज के लिए वक्त नहीं निकाल पाते हैं। हर समय खुद को जज किया जाना और कदम-कदम पर को खुद द बेस्ट प्रूव करना उन्हें निर्धारित समय से अधिक काम करने को मजबूर कर रहा है।

ऐसे करें खुद को रिलैक्स 

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अपने सपनों को पूरा करने की चाहत में जुटे रहना बुरा नहीं है। बस ध्यान रखें कि आपकी सेहत पर आपके काम का बुरा असर ना पड़े। आप उन आसान ट्रिक्स के बारे में जानिए जो आपकी थकान को कुछ ही मिनट में गायब कर दें। जैसे प्राणायाम करें, शवासन करें, गर्म दूध पिएं, पसंद का म्यूजिक सुनें आदि। इसके बाद परिवार के साथ 10 मिनट ही सही, जरूर बैठें। इससे आपक खुद को मजबूत महसूस करेंगे। यह मानसिक मजबूती आपको करियर में और बेहतर परफॉर्म करने की एनर्जी देगी।

 
इस फेसपैक को लगाने से  स्किन रहेगी पूरे हफ्ते फ्रेश

इस फेसपैक को लगाने से स्किन रहेगी पूरे हफ्ते फ्रेश

देखिए, हम बहुत अच्छी तरह से इस बात को समझते हैं कि पूरे सप्ताह आप कितने व्यस्त रहते हैं। इस दौरान आपके पास नींद पूरी करने का भी वक्त नहीं होता है तो ब्यूटी केयर की बात करना ही बेकार है। इसलिए हम आपके लिए लाए हैं मूंग दाल का वो इफेक्टिव फेस पैक जिसे आप संडे के संडे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाकर खुद को सप्ताहभर ग्लोइंग और स्किन को फ्रेश रख सकते हैं...

मूंगदाल फेस पैक के लिए जरूरी चीजें

मूंग दाल का पैक बनाने के लिए आपको जिन चीजों की जरूरत पड़ेगी आप उन्हें एक बार खरीदकर ही महीनों के लिए स्टोर कर सकते हैं। क्योंकि इनमें कोई भी आइटम जल्दी एक्सपायर होनेवाला नहीं होता है।

-मूंग दाल

-गुलाबजल

-शहद

-बादाम का तेल

फेस पैक बनाने की विधि

रात को 3 चम्मच मूंग की दाल पानी में भिगोकर रख दीजिए। शानदार और पर्फेक्ट ग्लो चाहते हैं तो दाल को पानी की जगह गुलाबजल में भिगो दीजिए। इसे रातभर के लिए छलनी से ढककर छोड़ दीजिए। 

ऐसे लगाएं फेस पैक

-सुबह उठकर इस दाल को पीसकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में आधा चम्मच शहद मिला लें। तैयार फेस पैक को 25 से 30 मिनट के लिए चेहरे और गर्दन पर लगा लें।

-जब पैक सूखने लगे तो चेहरे को पानी या गुलाबजल की मदद से हल्का गीला करें। गीले सॉफ्ट हो चुके फेसपैक से चेहरे पर स्क्रबिंग करें। आप 2 से 3 मिनट चेहरे और गले पर स्क्रबिंग कर सकते हैं।

ऐसा हो आपका क्लिनिंग मेथड

- अब ताजे पानी से चेहरा धुल लें। कॉटन के कपड़े से चेहरा और गर्दन पोंछ लें। पोछने के तुरंत बाद हथेली पर 3 से 4 बूंद बादाम का तेल लें और चेहरे तथा गर्दन की मसाज करें।

- इस ब्यूटी रेजीम को फॉलो करने के तुरंत बाद आपको कहीं निकलना हो तो चेहरे पर अपनी ब्यूटी क्रीम बादाम तेल के बाद अप्लाई कर सकते हैं। जरूरी ना हो तो बादाम तेल के बाद कुछ लगाने की जरूरत नहीं है।

ऐसे लाभ पहुंचाता है मूंग दाल फेस पैक

मूंग दाल के फेस पैक को चेहरे पर लगाने के बाद यह हमारी त्वचा के पोर्स को क्लीन करने, डैमेज सेल्स को रिपेयर करने का काम करती है तो शहद स्किन को मॉइश्चराइज कर रहा होता है। वहीं, गुलाबजल स्किन में मेलानिन का असर कम कर स्किन को निखारने का काम करता है।

डैमेज सेल्स को रिपेयर करे

मूंग दाल में अन्य दालों की तरह प्रोटीन होता है लेकिन कई दूसरी दालों की तुलना में इसमें प्रोटीन के साथ ही विटमिन-ए भी अच्छी मात्रा में होता है। जो हमारी डैमेज स्किन सेल्स को रिपेयर करने में मदद करता है।

डेड स्किन हटाए

मूंग दाल का फेसपैक लगाने के बाद जब हम पैक को दोबारा हल्का सा गीला करके इसे स्क्रब की तरह स्किन पर यूज करते हैं तो इससे हमारे चेहरे और गर्दन की सभी डेड सेल्स और डस्ट पूरी तरह हट जाती हैं। इससे त्वचा स्मूद और कांतिमय बनती है।

डार्क सर्कल की वजह से आंखों की खूबसूरती हो गई कम, इन घरेलू नुस्खों से मिलेगा फायदा

डार्क सर्कल की वजह से आंखों की खूबसूरती हो गई कम, इन घरेलू नुस्खों से मिलेगा फायदा

अक्सर देर रात तक जगने, ज्यादा देर तक सिस्टम के सामने बैठकर काम करने से अक्सर महिलाओं को डार्क सर्कल हो जाते हैं. आंखों के चारों तरफ डार्क सर्कल होने से चेहरे की खूबसूरती न सिर्फ कम हो जाती है बल्कि सबका ध्यान इस पर जाने लगता है. कई बार डार्क सर्कल ज्यादा होने से चेहरा बीमारों जैसा लगने लगता है. आंखों के चारों तरफ डार्क सर्कल होने से कई बार कॉन्फिडेंस लो होने लगता है. यदि आपके चेहरे पर भी डार्क सर्कल हो गए हैं तो कुछ घरेलू नुस्खों को आजमा सकते हो.
संतरे के छिलके
- आंखों के नीचे काले घेरे खत्म करने का सबसे आसान तरीका है संतरे के छिलकों का इस्तेमाल.
- संतरे के छिलके से डार्क सर्कल खत्म करने के लिए सबसे पहले संतरे के छिलकों को धूप में सूखा दीजिए.
-सूखे हुए संतरे के छिलकों पर गुलाब जल डालकर आखों पर लगाकर रखिए.
- आप चाहे तो संतरे के छिलकों को सूखाकर पीस लीजिए और उसमें गुलाबजल मिलाकर आंखों के चारों तरफ लगाइए.
- सप्ताह में 2 बार संतरे और गुलाब जल का इस्तेमाल करने से डार्क सर्कल से छुटकारा पाया जा सकता है.खीरा
- डार्क सर्कल के कारण आंखों की खूबसूरती कम हो जाती है. ऐसे में आप खीरे का इस्तेमाल कर सकती हैं.
- खीरे का रस निकालकर उसमें गुलाब जल को मिक्स कीजिए.
- खीरे और गुलाब जल के मिक्स को कॉटन से आंखों के चारों तरफ लगाइए. खीरा और गुलाब जल दोनों ही आंखों के लिए अच्छा होता है.
- सप्ताह में 2 से 3 बार खीरे और गुलाब जल का इस्तेमाल करने से आंखों को ठंडक मिलती है. साथ ही डार्क सर्कल भी खत्म हो जाते हैं.
ग्रीन टी बैग्स
- डार्क सर्कल खत्म करने के लिए ग्रीन टी बैग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- अक्सर ग्रीन टी बैग्स को यूज करके लोग फेंक देते हैं. आप इसे डार्क सर्कल को खत्म करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं.
- यूज किए हुए टी बैग को पानी में भिगोकर फ्रीज में 2 से 3 घंटे के लिए रख दीजिए.
- जब टी बैग ठंडा हो जाए तो इसे आंखों को बंद करके उस पर रख दीजिए. ग्रीन टी बैग को ऐसे इस्तेमाल करने से आंखों को ठंडक मिलती है और डार्क सर्कल भी खत्म होते हैं.
- ग्री टी बैग से डार्क सर्कल खत्म करने के लिए सप्ताह में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल करें.
 

रोजाना 2 कप से ज्यादा दूध पीती हैं तो हो जाइए सावधान, ब्रेस्ट कैंसर का खतरा !

रोजाना 2 कप से ज्यादा दूध पीती हैं तो हो जाइए सावधान, ब्रेस्ट कैंसर का खतरा !

जिन महिलाओं को दूध पीना बहुत पसंद है उनके लिए ये खबर शॉक की तरह हो सकती है। जी हां, दूध जिसे सबसे हेल्दी फूड माना जाता है, दूध जो बचपन से ही मम्मी-पापा बच्चों को बोल-बोल कर खूब सारा पिलाते हैं, दूध जो कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है और हड्डियों को मजबूत बनाता है, वही दूध अब कैंसर की वजह भी बन रहा है। नियमित रूप से रोजाना दूध पीने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ऐसा हम नहीं कह रहे कि बल्कि एक नई रिसर्च में यह बात सामने आयी है।

अमेरिका की कैलिफॉर्निया स्थित लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी में यह रिसर्च हुई जिसमें अनुसंधानकर्ताओं ने कुछ डराने वाले खुलासे किए। इसके मुताबिक हर दिन सिर्फ 1 कप यानी करीब 250 एमएल दूध पीने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक होता है जबकी वैसी महिलाएं जो 2 से 3 कप दूध रोजाना पीती हैं उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। स्टडी के ऑथर गैरी ई फ्रेजर कहते हैं, हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि हर दिन डेयरी मिल्क पीने से या फिर डेयरी मिल्क में कोई ऐसा तत्व मौजूद है जिस वजह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

खानपान की आदत पर 8 साल तक रखी गई नजर 

इस रिसर्च के नतीजों को इंटरनैशल जर्नल ऑफ इपिडेमोलॉजी में प्रकाशित किया गया। इस रिसर्च में 100-200 नहीं बल्कि नॉर्थ अमेरिका की 53 हजार महिलाओं को शामिल किया गया और उनकी डायट से जुड़ी रोजाना की आदतों पर करीब 8 साल तक नजर रखी गई। ये सभी महिलाएं रिसर्च का हिस्सा बनने से पहले पूरी तरह से कैंसर फ्री थीं। रिसर्च के दौरान इन महिलाओं की डायट और खान पान की आदतों से जुड़े कई सवाल पूछे गए। इसके अलावा भी कई सवाल पूछे गए जैसे- ब्रेस्ट कैंसर की फैमिली हिस्ट्री है या नहीं, फिजिकल ऐक्टिविटी कितनी होती है, ऐल्कॉहॉल का सेवन कितना करती हैं, हॉर्मोन्स से जुड़ी कोई समस्या है या नहीं, किसी और तरह की दवा तो नहीं खा रहीं और प्रजनन और गाइनैकॉलजी से जुड़े इशूज हैं या नहीं।

गाय के दूध में मौजूद हॉर्मोन हो सकता है जिम्मेदार 

हालांकि इस रिसर्च में सिर्फ निरीक्षण किया गया था और स्टडी में दूध पीने से कैंसर क्यों होता है इस बात का कारण साबित नहीं हो पाया लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो गाय के दूध में मौजूद एक तरह के हॉर्मोन को इसके लिए जिम्मेदार माना जा सकता है। इस स्टडी के खत्म-खत्म होते होते रिसर्च में शामिल महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के करीब 1100 नए मामले सामने आ चुके थे। कैंसर के रिस्क का संबंध फुल फैट मिल्क, लो फैट मिल्क या नो फैट मिल्क से नहीं था। तीनों ही तरह के दूध का सेवन करने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढऩे की बात सामने आयी।

8 में से 1 महिला ब्रेस्ट कैंसर का शिकार 

ब्रेस्ट कैंसर आज महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर बन गया है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर 8 में से 1 महिला ब्रेस्ट कैंसर की शिकार हो जाती हैं। इसलिए इस कैंसर के परीक्षण के लिए सही समय पर जांच करवानी चाहिए। जांच के अलावा ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों के बारे में भी जानकारी होना भी जरूरी है। नैशनल ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के कुछ कारण ऐसे होते हैं जिनसे अगर दूरी बना ली जाए तो ब्रेस्ट कैंसर से बचा जा सकता है, जैसे शराब का सेवन, धूम्रपान, खानपान की आदतें आदि। 

ब्रेस्ट कैंसर के इन लक्षणों की न करें अनदेखी 

- अगर स्किन के टेक्सचर और रंग में बदलाव दिखे। 

- निप्पल की स्किन उतरने लगे या पपड़ी जम जाए। 

- ब्रेस्ट सिकुड़ जाए या उसमें गड्ढा बन जाए। 

- एक या दोनों ब्रेस्ट की शेप या साइज बदल जाए। 

- ब्रेस्ट मिल्क के अलावा किसी और तरह का डिस्चार्ज होने लगे। 

- ब्रेस्ट में सूजन आ जाए या फिर लगातार खुजली हो।

खतरनाक हो सकता है क्रॉस लेग करके बैठना, सेहत पर पड़ता है इतना बुरा असर

खतरनाक हो सकता है क्रॉस लेग करके बैठना, सेहत पर पड़ता है इतना बुरा असर

बात जब बॉडी लैंग्वेज और स्टाइलिंग की आती है तो क्रॉस लेग करके बैठना कॉन्फिडेंट होने का सिंबल माना जाता है। बैठने के इस तरीके में हम सभी बहुत सहज महसूस करते हैं। लेकिन यह सहजता हमारे शरीर को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकती है। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक एक के ऊपर एक पैर रखकर बैठने से ब्लड प्रेशर और वेरिकॉज वेन्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  

क्रॉस लेग पॉजिशन का बीपी पर असर

कई हेल्थ स्टडीज में यह बात सामने आ चुकी है के एक के ऊपर एक पैर रखकर बैठने से हमारी नर्व्स पर दबाव पड़ता है, इस कारण हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इसलिए बीपी के मरीजों को इस पॉजिशन में बैठने से बचना चाहिए। साथ ही जिन लोगों को बीपी की दिक्कत नहीं है, उन्हें भी लंबे समय तक इस पॉजिशन में नहीं बैठना चाहिए।

ब्लड सर्कुलेशन पर असर

क्रॉस लेग करके बैठने से केवल ब्लड प्रेशर पर असर नहीं पड़ता बल्कि ब्लड सर्कुलेशन भी डिस्टर्ब होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप जब एक पैर के ऊपर दूसरा पैर रखकर बैठते हैं तो दोनों पैरों में बल्ड सर्कुलेशन एक समान नहीं हो पाता है। इस कारण पैरों में सुन्नता या झंझनाहट की समस्या होने लगती है।

पेल्विक इंबैलंस

क्रॉस लेग पॉजिशन में हमारी पेल्विक मसल्स इंबैलंस हो सकती हैं। क्योंक हर दिन कई-कई घंटे इस स्थिति में बैठने पर हमारी थाइज में खिंचाव, सूजन, सुन्नता या दुखन की समस्या हो सकती है।

जॉइंट्स में दिक्कत

एक ही जगह पर और खासतौर पर ऑफिस में कुर्सी पर 8 से 9 घंटे रोज क्रॉस लेग करके बैठने से पैरों के जॉइंट पेन की समस्या हो सकती है। कई बार हम समझ नहीं पाते हैं कि वॉक, एक्सर्साइज और यग करने के बाद भी हमारे जॉइंट्स में दर्द क्यों हो रहा है। तो इस दर्द की वजह कुछ और नहीं बल्कि हमारा क्रॉस लेग पॉश्चर होता है।

लोअर बैक में दर्द

क्या आपको भी उठते-बैठते वक्त कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है? या जकडऩ का अहसास होता है? अगर इस सवाल के जवाब आप हां में दे रहे हैं तो आपको अपने बैठने के तरीके में सुधार करने की जरूरत है। आज से ही क्रॉस लेग पॉजिशन में बैठना बंद कर दें।

लकवा से बचने के लिए

क्रॉस लेग करके ना बैठने की एक दूसरी वजह यह भी बताई जाता है कि इस मुद्रा में लंबे समय तक बैठने पर पॉल्सी या पेरोनियल नर्व पैरालिसिस की समस्या हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति हर रोज कई घंटे इस स्थिति में बैठता है तो उसकी नर्व्स डैमेज हो सकती हैं। 

बैठते वक्त रखें इन बातों का ध्यान

ऑफिस में सिटिंग जॉब है तो जाहिर तौर पर आपको बैठना ही पड़ेगा। लेकिन अगर आप सेहत से जुड़ी हर तरह की समस्या से बचना चाहते हैं तो बीच-बीच में सीट से ब्रेक लेते रहें। कम से कम हर 45 मिनट बाद 5 मिनट का ब्रेक जरूर लें। 

जब बैठना हो कई घंटें

एक ही सीट या जगह पर कई घंटे रोज बैठने के दौरान आप थोड़े-थोड़े समय बाद अपनी सिटिंग पॉजिशन चेंज करते रहें। बीच-बीच में सीट से खड़े होकर फिर बैठ जाएं। ऐसा करने से ना केवल बॉडी में मूवमेंट बना रहता है बल्कि थकान भी हावी नहीं होती।

इसलिए नहीं होती थकान

आपको लग रहा होगा कि सीट से बीच-बीच में उठने पर आखिर थकान कैस कम हो सकती है? तो इस सवाल का जवाब एक्सपर्ट्स इस तरह देते हैं कि जब हम काफी देर बैठने के बाद खड़े होते हैं तो हमारा ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाता है। इससे बॉडी में ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ता है और हम ताजगी का अनुभव करते हैं।

ब्लड प्रेशर रहता है नियंत्रण में

अगर हम लगातार एक जगह पर क्रॉस लेग पॉजिशन में बैठे रहते हैं और हमें पहले से ही हाई बीपी की दिक्कत हो तो घंटों तक इस तरह बैठे रहना हमारी हालत को और अधिक बिगाड़ सकता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप वर्किंग ऑवर्स के दौरान बीच-बीच में अपनी सीट से उठते रहें।

ऑफिस की थकान 15 मिनट में हो जाएगी गायब, रोज करें शवासन

ऑफिस की थकान 15 मिनट में हो जाएगी गायब, रोज करें शवासन

दिनभर की थकान दूर करने के लिए हम ऐसा क्या करें कि तुरंत मानसिक और शारीरिक थकान से मुक्ति पा सकें? इस सवाल के जवाब में हेल्थ और फिटनेस एक्सपर्ट गौतम कहते हैं - शवासन कीजिए। सबसे आसान और बेहद असरदार है शवासन योग। 

मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाए

आज लगभग सभी लोग प्रेशर वाली लाइफ जी रहे हैं और मान चुके हैं कि असली जिंदगी यही है। लोग दिन-रात अपने सपनों के पीछे भाग रहे हैं और सपनों को जीने की चाह में जिंदगी जीना भूल रहे हैं। यहीं से हमारे जीवन में मानसिक तनाव हावी होने लगता है।

अटक गया है हमारा ब्रेन

हमारा ब्रेन हर समय ज्यादा से ज्यादा पाने में अटका रहता है। हम हर समय गैजेट्स में उलझे रहते हैं। घर की जरूरतों से लेकर ऑफिस का काम तक सब कुछ टेक्नॉलजी पर निर्भर हो गया है। किसी भी चीज का उपयोग यदि अति में करते हैं तो उसके नकारात्मक प्रभाव भी हमें देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि आज गैजेट्स और टेक्नॉलजी हमें मानसिक रूप से बीमार बना रहे हैं।

फोकस की कमी दूर करे

सिटिंग और कंप्यूटर बेस्ड जब होने के कारण हमें मेंटल रेस्ट नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि हम विचलित रहते हैं, किसी भी एक काम पर फोकस नहीं रह पाते, ऐंग्जाइटी बढ़ रही है। इन सभी तरह की दिक्कतों से निजात दिलाने में शवासन बहुत अधिक मददगार है।

लाइफ में बैलंस बढ़ाता है

मानसिक रूप से थके और बेचैन रहने के कारण हम अपनी लाइफ को बैलंस नहीं कर पाते हैं। लेकिन जिंदगी को बैलंस करना जरूरी है ताकि स्ट्रेस से बचे रहें। इसमें शवासन हमारी बॉडी के लिए बहुत अधिक लाभकारी रहता है। क्योंकि शवासन की मुद्रा में हमारा पूरा फोकस अपनी श्वास पर होता है, जिस कारण हमें मानसिक शांति मिलती है।

प्राकृतिक योग है शवासन

मेंटल फिजिकल और इमोशनल लेवल पर बैलंस के लिए योग बहुत अधिक आसान और इफेक्टिव तरीका है। खासतौर पर शवासन। शवासन की उत्पत्ति ही इसलिए हुई ताकि हमें रेस्ट मिल सके। प्राकृतिक रूप से हम सोते हुए भी इस अवस्था में ही होते हैं। यह मुद्रा हमारे शरीर की हर नर्व और सेल को प्रभावित करती है।

शरीर को रिलैक्स करे

शरीर को रिलैक्स करने के लिए शवासन इसलिए जरूरी है क्योंकि यह एक ऑटो सजेशन प्रॉसेस है, जब हम अपने आपको निर्देश देते हैं कि हमें शांत होना है। ऑटो सजेशन एक पॉवरफुल प्रॉसेस है जो बिल्कुल मेडिटेशन की तरह काम करती है। शवासन हमारी शारीरिक थकान उतारता है। गर्दन दर्द, सिरदर्द, ऐंग्जाइटी, कमर दर्द में राहत देता है।

शवासन करने का तरीका

शवासन करने के लिए आप किसी शांत जगह पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इस दौरान आपके पैरों और हाथों को शरीर से उतनी दूरी पर रखें, जितनी दूरी पर आप सहज महसूस करें। आपकी हथेलियां आसमान की तरफ खुली हुई और आंखें बंद होनी चाहिए। 

श्वांस पर रहे ध्यान केंद्रित

शवासन के दौरान हमें सबसे अधिक लाभ तभी मिलता है, जब हम श्वांस को सहज बनाए रखते हैं। शवासन के दौरान धीरे-धीरे गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। आपका ध्यान पूरी तरह अपनी श्वांस पर होना चाहिए। इस दौरान अपने शरीर को एकदम ढीला छोड़कर रखें।

हर रोज कितनी देर करें

हर रोज 10 से 15 मिनट किसी भी वक्त हम शवासन कर सकते हैं। यह कहिए कि जब भी आपको थकान महसूस हो आप इस योग मुद्रा को 10 से 15 मिनट के लिए कर लीजिए आपकी मानसिक और शारीरिक थकान तुरंत उतर जाएगी।

कैसे करता है काम?

शवासन हमारे शरीर की सभी मसल्स को शांत करता है। इस दौरान हम सहज अवस्था में होते हैं, जिससे पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है। गहरी सांस लेने से बॉडी में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक पहुंचती है, जिससे ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और ब्रेन सहित पूरी बॉडी तनाव मुक्त होती है।

फिजिकल लेवल पर इसके फायदे

जब भी बहुत अधिक थकान महसूस होती है तो हम चाय पीने या स्मोक करने चले जाते हैं। यह हमें नुकसान पहुंचाता है। अगर उस वक्त हम शवासन करें तो हमें बहुत अधिक फायदा मिलेगा। अगर आपके ऑफिस में ऐसी कोई जगह नही है जहां आप इस आसन को कर सकें तो खुली और शांत जगह में बैठकर गहरी सांसें लें।

 
हर घर में पाए जाने वाले नींबू के है अनेक फायदे,पढ़े क्या है खास ...

हर घर में पाए जाने वाले नींबू के है अनेक फायदे,पढ़े क्या है खास ...

नींबू केवल खाने-पीने की चीजों में ही इस्तेमाल नहीं होता। इसके कुछ ऐसे नुस्खे भी है जिन्हें आजमाकर आप कई तरह की सेहत और सौन्दर्य समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

आइए, जानते हैं नींबू के 10 कमाल के घरेलू नुस्खे -
1 शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।

2 नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।

3 नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।

4 नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।

5 नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
6 नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।

7 नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।

8 नींबू के बीज को पीसकर माथे पर लगाने से गंजापन दूर होता है।
9 बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।

10 आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएं, रक्त की कमी दूर होगी।


 

माइग्रेन के दर्द से हैं परेशान, तो दूध में ये मिलाकर पीने से मिलेगा आराम

माइग्रेन के दर्द से हैं परेशान, तो दूध में ये मिलाकर पीने से मिलेगा आराम

स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी छोटी परेशानी आपके जिंदगी को बहुत प्रभावित कर सकती है। ऐसी ही एक परेशानी का नाम है माइग्रेनज्ज्.माइग्रेन, सिरदर्द का एक बुरी स्थिति है, जिसमें इंसान सिरदर्द को बर्दास्त नहीं कर पाता है। यह 10-40 वर्ष के लोगों को हो सकता है। आमतौर पर यह दिमाग में एबनॉर्मल एक्टिविटी के कारण होता है। इसके अतिरिक्त यह हार्मोन में बदलाव, फूड, एल्कोहॉल ड्रिंक, स्ट्रेस के कारण भी होता है।

दूध में मिलाएं तुलसी

माइग्रेन की स्थिति में आप दूध में तुलसी की 7-8 पत्ती को उबाल लें और इसको पीने के लिए इस्तेमाल करें। आपको माइग्रेन अटैक से काफी हद तक राहत मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि तुलसी की पत्ती में एंटीडिप्रेसेंट और एंटी एंजायटी गुण पाए जाते हैं। जबकि माइग्रेन होने के कारण में डिप्रेसन और एंजायटी भी शामिल हैं। इसलिए इनके लक्षण के दिखते ही आप दूध में तुलसी की पत्ती को उबालकर पी लें। 

दूध और पेठा का करें सेवन

माइग्रेन की शुरुआती लक्षण के दिखने पर दूध और पेठा को मिक्सर में डालकर पांच मिनट घुमाएं। उसके बाद इसे पीने के लिए इस्तेमाल करें। दूध में एंटीएंटीडिप्रेसेंट गुण होने के कारण यह आपके माइग्रेन अटैक को काफी हद तक कम कर देगा। जबकि पेठे (आगरा का मशहूर) में सिरदर्द को ठीक करने का गुण पाया जाता है, जिससे माइग्रेन के जोखिम को कम करने में काफी मदद मिलेगी।

सिर पर लगाएं ये लेप

माइग्रेन के दर्द को कम करने के लिए आप सिर/माथे पर लेप भी लगा सकते हैं। इसके लिए आप चंदन, दालचीनी और मुलेठी को पीस लें और इसका एक बड़ी चम्मच में लेप बना लें। इसके बाद आप इसे माथे पर या सिर में लगाएं। आपको काफी हद तक आराम मिलेगा। मुलेठी, चंदन और दालचीनी में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसी कारण से यह आपके दर्द को काफी हद तक कम कर देता है। 

एंटीडिप्रेसेंट की दवा का करें सेवन

माइग्रेन के खतरे से बचे रहने के लिए डॉक्टर के सुझाव पर एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का सेवन करें। यह आपको माइग्रेन के खतरे से बचाए रखने में मदद करेंगे। एक बात का विशेष ध्यान दें कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें। नहीं तो इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं।

एस्पिरिन का न करें ज्यादा सेवन

यह दवा माइग्रेन में कई लोगों के द्वारा इस्तेमाल की जाती है। हालांकि इसका फायदा तो मिलता है लेकिन इसके नुकसान भी हैं। दरअसल एक वैज्ञानिक रिसर्च के बाद यह देखा गया कि माइग्रेन से पीडि़त जिन लोगों के द्वारा इस दवा का सेवन ज्यादा किया गया, उनका लीवर बहुत कमजोर था। इसलिए इस दवा के अधिक सेवन से बचे रहें। 

अच्छे से पूरी करें अपनी नींद

माइग्रेन के अटैक से बचे रहने के लिए जरुरी है कि आप अपनी नींद को अच्छे से पूरी करें। डॉक्टर के द्वारा तो यह सुझाव दिया ही जाता है लेकिन इसका वैज्ञानिक कारण भी है। डॉक्टरों के द्वारा इस विषय पर रिसर्च के बाद बताया गया कि नींद पूरी करने से दिमाग की सारे नसें शिथिल पड़ जाती हैं और उनमें ट्रिगर का कोई भी खतरा नहीं रहता है। यही वजह है कि माइग्रेन से परेशान लोगों को हमेशा भरपूर नींद लेनी चाहिए और लेट नाईट पार्टियों से भी बचना चाहिए।

बालों की चोटी बनाने से मिलते हैं बड़े फायदे, जानकर हो जाएंगे हैरान

बालों की चोटी बनाने से मिलते हैं बड़े फायदे, जानकर हो जाएंगे हैरान

बचपन में मां अक्सर बेटियों को जबरन पकड़कर उनके खुले बालों की चोटी बना देती थीं. हालांकि उस समय से ये बच्चों को बुरा लगता था लेकिन क्या आपको पता है कि चोटी बनाने से बालों के साथ साथ शरीर को भी कई तरह के फायदे होते हैं. कई लोग अपने बालों में तेल नहीं लगाते और न ही उन्हें ढंग से सुलझा कर कंघी करते हैं.

वहीं लड़कियां भी आज के समय में लंबे वक्त तक खुले बालों में घूमती नजर आती हैं. ऐसा करने से उनके बाल टूटते है और बेजान हो जाते हैं. आपको बता दें कि पहले के समय में ज्यादातर महिलाएं अपने बालों को बांधक रखती थीं जिससे बाल लंबे समय तक बचे रहते थे. इसके अलावा भी बालों को बांधकर उनकी चोटी बनाने के कई और फायदे हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में.

बालों का टूटना होगा कम

बालों को बांधना एक अच्छा और सुरक्षात्मक तरीका है जो आपके बालों को टूटने से बचा सकता है. यह बालों को मजबूत भी बनाता है. चोटी बनाने के लिए बालों में तेल लगाएं और फिर अच्छे से हल्के हाथों से चोटी गुथ लें. रात में चोटी बनाकर सोना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आपके बाल सुलझे रहेंगे और टूटेंगे नहीं.

सोते वक्त नसों को मिलेगा आराम

बिस्तर पर जाने से पहले अपने बालों की ब्रेडिंग कर लें. दरअसल बंधे बालों और तकिया कवर के बीच कम घर्षण पैदा होता है. इससे तकिया और माथे के बीच एक आराम का पॉज बनता है, जिससे सिर की नसों को आराम मिलता है. इस तरह आपकी नसों में खिंचाव नहीं होगा और न ही आपको सोते वक्त सिरदर्द जैसी कोई तकलीफ होगी.

बालों को पोषण देता है

चोटी नमी को बालों में बंद करने में मदद करती है और उन्हें पोषित रखती है. आप बालों को ज्यादा पोषण देने के लिए बादाम और नारियल तेल लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें और फिर चोटी बांध लें. इस तरह ये पोषण बालों में लॉक हो जाएगा और बालों की जड़ों में जाकर उन्हें आराम देगा. साथ ही आपके बालों की ग्रोथ भी अच्छी होगी.

बालों के रूखेपन को रोकना

जिन लोगों के बाल बीच-बीच से टूटे हुए या दोमुंहे हो जाते हैं उनके लिए चोटी बनाना एक अच्छा उपाय है. चोटी बनाकर आप अपने बालों को स्ट्रेट और सुलझे रख सकते हैं. वहीं जब आप घर से बाहर निकलें तो चोटी आपके बालों को तेज धूप और धूल-मिट्टी से बचाने में मदद कर सकती है.

 
क्या आप भी त्वचा के मस्सों से हैं परेशान, अपनाएं ये आसान नुस्खे

क्या आप भी त्वचा के मस्सों से हैं परेशान, अपनाएं ये आसान नुस्खे

क्या आपकी त्वचा पर भी बड़े या छोटे मस्से उभर आएं हैं? अगर आप मस्सों को जड़ से हटा देना चाहते हैं, तो कोई प्राकृतिक उपाय करना ही सबसे बेहतर होगा ताकि आपकी त्वचा पर किसी प्रकार का बुरा प्रभाव न पड़े। जानिए ऐसे ही कुछ प्राकृतिक घरेलू उपाय -


1 सेब का सिरका मस्सों को जड़ से खत्म करने के लिए बेहद प्रभावकारी उपाय है। इसे प्रतिदिन कम से कम 3 बार मस्सों पर रुई की सहायता से लगाएं और ऊपर से रुई चिपका दें। कुछ ही दिनों में मस्से का रंग गहरा हो जाएगा और उसकी त्वचा सूखकर निकल जाएगी। अगर इसे लगाने के बाद आपको कोई परेशानी महसूस हो, तो आप ऐलोवेरा जैल लगा सकते हैं।

2 लहसुन की कलियों को छीककर काट लें और इसे मस्सों पर रगड़ें या फिर इसका पेस्ट बनाकर मस्सों पर लगाएं। ऐसा करने से भी कुछ ही दिनों में मस्से समाप्त हो जाएंगे। नींबू के रस में रुई भि‍गोर मस्से पर लगाना भी लाभप्रद हो सकता है।

3 आलू का रस लगाना या फिर आलू को काटकर मस्सों पर रगड़ना भी एक बढ़ि‍या विकल्प है, अनचाहे मस्सों से निजात पाने का। आप चाहें तो आलू का रस रात भर मस्सों पर लगाकर भी रख सकते हैं।

4 बेकिंग सोडा का इस्तेमाल त्वचा की कई समस्याओं को समाप्त करने के लिए किया जाता है। मस्से समाप्त करने के लिए बेकिंग सोडा को अरंडी के तेल में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे मस्सों पर लगाएं। कुछ ही दिनों में फर्क नजर आएगा।

5 अनानास का रस, फूलगोभी का रस, शहद या फिर प्याज के रस का प्रयोग भी मस्सों को समाप्त करने के लिए किया जा सकता है। इसमें मस्सों को खत्म करने वाले विशेष एंजाइम्स होते हैं।


 

लगातार कुर्सी पर बैठने से हो गया कमर में दर्द, राहत दिलाएंगे ये घरेलू नुस्खे

लगातार कुर्सी पर बैठने से हो गया कमर में दर्द, राहत दिलाएंगे ये घरेलू नुस्खे

जकल की स्ट्रेस भरी लाइफस्टाइल में 10 से 12 घंटे का समय लोगों का ऑफिस में ही निकल जाता है. देर तक एक ही पोजिशन में कुर्सी पर बैठने, लंबे समय तक एक्सरसाइज न करने या गलत पोजिशन में बैठने से कमर में तेज दर्द हो सकता है. कभी कभार कमर में दर्द ठीक लगता है, लेकिन कई बार ये दर्द परेशान कर देता है. बैक पेन की वजह से रोजाना का काम तक बिगड़ जाता है. हम ठीक से चल नहीं पाते, बैठ नहीं पाते, दर्द की वजह से चिड़चिड़ापन, गुस्सा एक आम बात है.

कई बार इस दर्द को दूर करने के लिए लोग बाम या फिर पेन किलर्स का इस्तेमाल करने लगते हैं. अब दर्द हल्का फुल्का हो तो दवा लेना सही है, लेकिन हर बार दवा से ही दर्द को दूर भगाना भी गलत है. क्योंकि एक मात्रा से ज्यादा दवा लेने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. ऐसे में आप कुछ घरेलु नुस्खों को आजमा सकते हैं. इन नुस्खों को अपनाने से आपको कमर के दर्द से तुरंत राहत मिल सकती है.

तेल से करें मसाज

अगर, आपकी पीठ या कमर के हिस्से में लंबे समय से दर्द है तो किसी दोस्त या फैमिली मेंबर से बॉडी मसाज करवाइए. घर पर मसाज करवाने के लिए आप गुनगुने तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस तरह के मसाज से आपको पीठ, कमर के दर्द से मिनटों में राहत मिल सकती है.

सिकाई

अगर, आपकी पीठ में ज्यादा दर्द है और मसाज के लिए वक्त नहीं है तो आप सिकाई का ऑप्शन ट्राई कर सकते हैं. रोजाना नहाने से पहले आप हल्के गुनगुने पानी से पीठ की सिकाई कीजिए. गर्म पानी से सिकाई करने से रक्त कोशिकाएं खुल जाती है. साथ ही शरीर की सूजन भी कम जाती है, जिससे दर्द नहीं होता है.

लहसुन करेगा कमाल

लहसुन का सेवन करने के बहुत फायदे होते हैं ये बात तो सभी जानते हैं. लहसुन जितना खाने का स्वाद बढ़ाता है उससे कहीं ज्यादा पीठ, कमर दर्द को दूर भगाने का काम करता है. कमर दर्द होने पर लहसुन की 10 से 12 कलियों का एक बारीक पेस्ट बना लीजिए. अब इस पेस्ट को कमर पर लगाइए. इसके बाद गर्म पानी में एक तौलियों को डूबाकर निचोड़ लीजिए. इसके बाद इस तौलियों को लहसुन पेस्ट लगे कमर के हिस्से के ऊपर रख दें. आधे घंटे बाद पेस्ट को साफ कर लें. इस पेस्ट को लगाने के बाद कमर का दर्द चुटकियों में गायब हो सकता है.

एक्सरसाइज करें

कमर दर्द का सबसे स्टीक इलाज है एक्सरसाइज करना. रोजाना महज 10 से 15 मिनट की एक्सरसाइज करने से पीठ की हड्डियां मजबूत बनेंगी. साथ ही कुर्सी पर आपके बैठने की पोजिशन को भी सही करेंगी.

नोट: जिन लोगों को कमर में ज्यादा दर्द की समस्या रहती है वो डॉक्टर से संपर्क करें. घरेलु इलाज के साथ-साथ कमर के तेज दर्द में डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है.

 
फटे होंठों को मुलायम बनाएंगे ये 7 तरह के ऑयल, ये है लगाने का तरीका

फटे होंठों को मुलायम बनाएंगे ये 7 तरह के ऑयल, ये है लगाने का तरीका

ज की लाइफस्टाइल में फटे होंठो की समस्या एक आम बात हो गई है. इस पर मौसम का कोई असर नहीं होता है. पहले कहते थे कि सर्दियों में ही होंठ फटते हैं लेकिन अब किसी भी मौसम में होंठ फट जाते हैं. कहते हैं कि होंठो को खूबसूरत बनाने, उनके रूखेपन को दूर करने और फटे हुए होंठों को ठीक करने के लिए नाभि में तेल लगाना फायदेमंद होता है.

नाभि का कनेक्शन सीधे अंबिलिकल कॉर्ड यानि गर्भनाल से होता है इसलिए इसमें तेल लगाने से न सिर्फ होंठों की खूबसूरती बढ़ती है बल्कि त्वचा की खूबसूरती में भी चार चांद लग जाते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं नाभि में तेल लगाने से स्किन संबंधी अनेक परेशानियां दूर हो जाती है.

त्वचा पर इंफेक्शन भी नहीं होता. लेकिन अब बात आती है कि नाभि में कौन सा तेल लगाया जाए. आइए आपको बताते हैं कि नाभि में कौन-कौन से तेल लगाकर आप अपने होंठों और सिक्न दोनों को खूबसूरत बना सकते हैं.

बादाम का तेल

बादाम के तेल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है. थोड़ा सा गर्म करके कुछ बूंद बादाम का तेल अगर आप नाभि में लगाते हैं तो इससे फटे होंठ खूबसूरत और मुलायम बन जाते हैं. साथ ही स्किन भी ग्लोइंग दिखती है.

सरसों का तेल

सरसों का तेल फटे होंठों की समस्या को दूर करने के लिए सबसे फायदेमंद माना जाता है. नाभि में सरसों का तेल लगाने से फटे होंठ सही हो जाते हैं. साथ ही त्वचा भी मुलायम और खूबसूरत बन जाती है.

नारियल का तेल

बालों के साथ साथ नारियल का तेल त्वचा के लिए भी बहुत अच्छा होता है. नारियल का तेल भी विटामिन ई से भरपूर होता है. इसको नाभि में लगाने से त्वचा बेहद खूबसूरत बनती है और फटे हुए होंठ भी सुंदर और मुलायम बन जाते हैं.

घी

नाभि में घी लगाना त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इससे स्किन तो खूबसूरत बनती ही है साथ ही होंठ भी नरम और मुलायम रहते हैं.

नीम का तेल

नीम के तेल में चिकनाई तो होती ही है साथ ही एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं. इसमें कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं. रात को सोने से पहले या नहाने से आधा घंटा पहले नाभि में नीम का तेल लगाने से होंठ मुलायम और खूबसूरत बनते हैं. साथ ही स्किन के दाग-धब्बे और पिंपल्स भी दूर होते है. त्वचा में कोई इंफेक्शन भी नहीं होता है.

लेमन ऑयल

नींबू में विटामिन सी होता है. लेमन ऑयल नाभि में लगाने से होंठो का रूखापन दूर होता है और होंठ नरम बन जाते हैं. साथ ही स्किन भी फ्रेश नजर आती है.

ऑलिव ऑयल

ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) नाभि में लगाना त्वचा और होंठों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. ऑलिव ऑयल में विटामिन ई भरपूर होता है. इसे नाभि में लगाने से होंठ खूबसूरत बनते हैं. साथ ही त्वचा में भी निखार आता है.

 
फरवरी-मार्च में जरूर खाएं ये चीजें, नहीं होगा सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर

फरवरी-मार्च में जरूर खाएं ये चीजें, नहीं होगा सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर

मौसम के बदलते ही कई लोगों को अलर्जी, वायरल फीवर और सर्दी-जुकाम की समस्या होने लगती है. फरवरी और मार्च का महीने में सर्दी भाग रही होती है और गर्मी की शुरुआत होने लगती है. तापमान में भी अंतर नजर आने लगता है. ऐसे में शरीर को विभिन्न प्रकार के इंफेक्शन से बचाना जरूरी हो जाता है. दरअसल शरीर पर मौसम का प्रभाव सबसे पहले पड़ता है.

इस समय अधिकतर लोग बुखार, एलर्जी, सर्दी-जुकाम और खांसी से पीडि़त हो जाते हैं. ऐसे में हेल्दी खाने पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. आपकी डाइट ही आपकी सुरक्षा कर सकता है. आइए आपको बताते हैं इस मौसम में किन चीजों का सेवन करने से आप अपने आप को इंफेक्शन से बचा सकते हैं.

विटामिन सी का सेवन करें

इस बदलते मौसम में विटामिन सी का सेवन करना बहुत जरूरी होता है. विटामिन सी एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. यह शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया से लडऩे की क्षमता को बढ़ाता है. विटामिन सी भरपूर मात्रा में खाने से सर्दी-जुकाम की समस्या कम होती है. विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे संतरे, बेल, मिर्च, अंगूर, कीवी, अमरूद, और स्ट्रॉबेरी को अपने डाइट में जरूर शामिल करें.

मसाले करेंगे मदद

इस मौसम में हल्दी, अदरक, लहसुन, अजवायन, दालचीनी, लौंग, जीरा, तुलसी और पुदीना का सेवन जरूर करना चाहिए. ये मसाले कई तरह की बीमारियों को दूर रखने में मदद करते हैं. ये मसाले एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरे होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करते हैं. इस मौसम में चाय, सूप और सलाद को भी अपनी डाइट में शामिल जरूर करें.

खूब नट्स खाएं

नट्स सबसे अधिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों में से एक हैं. ज्यादातर लोग वजन घटाने के लिए इन्हें अपनी डाइट में शामिल करते हैं. बादाम, अखरोट और पिस्ता जैसे नट्स को मौसम के बदलाव के दौरान जरूर खाना चाहिए. ये आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. ये नट्स विटामिन ई से भरपूर होते हैं, जो विटामिन सी की तरह ही एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है. यह इंफेक्शन को दूर रखने के काम आते हैं.

हरी सब्जियों को डाइट में करें शामिल

इस समय पालक, सरसों के पत्ते, मेथी के पत्ते और बथुआ को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. पत्तेदार हरी सब्जियां लोगों को बीमारियों से दूर रखती हैं. ये इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती हैं. इन सब्जियों में विटामिन, खनिज और फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता है. इस मौसम में आप ग्रीन स्मूदी, सूप, स्टू या सलाद का विकल्प चुन सकते हैं.

ग्रीन टी पिएं

ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट पॉलीफेनोल्स से भरपूर होती है जो मौसमी परिवर्तनों से जूझने के लिए शरीर को मजबूत बनाती है. ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन (एक प्रकार का पॉलीफेनोल) आम फ्लू वायरस के खिलाफ बेहद प्रभावी होता है. इसे पीने से इंफेक्शन काखतरा कम होता है.

 
क्या आपके बच्चे को हर बात पर न कहने की है आदत ? ऐसे बदलें ये हैबिट

क्या आपके बच्चे को हर बात पर न कहने की है आदत ? ऐसे बदलें ये हैबिट

जब पैरेंट्स बच्चों के लिए न शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो बच्चे भी उनसे यही सीखते हैं. नकारात्मक शब्द जैसे न, नहीं करना और नहीं ये बच्चों को बुरा बर्ताव सिखाता है. इन नकारात्मक शब्द की जगह बच्चों के लिए उनके पैरेंट्स को अलग शब्द तलाशने चाहिए जिससे बच्चे इस नकारात्मक शब्द का इस्तेमाल करने से बचें.

अक्सर बच्चे बात बात पर न कहने की आदत बना लेते हैं. ऐसे में पैरेंट्स को बच्चों की इस आदत को बदलने की कोशिश करनी चाहिए. आइए आपको बताते हैं कैसे आप अपने बच्चे की इन आदतों को बदल सकते हैं.

न की जगह बाद में कहें

अगर आपका बच्चा बात-बात पर न बोलता हो तो आपको उनके इन शब्दों में बदलाव करने की कोशिश करनी चाहिए. आप अपने बच्चों को सिखाएं कि आप न की जगह जरूर, लेकिन बाद में कहें. इससे आपके बच्चे के व्यवहार में पॉजिटिविटी नजर आएगी. इससे आपका बच्चा किसी भी चीज को करने के लिए न कहने से पीछे हटेगा.

ध्यान भटकाएं

कई बार बच्चे अपनी जिद को पूरा करने के लिए चिल्लाते हैं तो ऐसे में आपको उनका ध्यान भटकाना चाहिए. आप उनका ध्यान भटकाने के लिए कुछ भी कह सकते हैं. उनकी जिद्द को मानने से आप इनकार करें. बच्चों का ध्यान किसी और चीज पर लगाएं ताकि वह न कहने से डरें और आपकी बात सुनने की पूरी कोशिश करें.

किसी और खेल में व्यस्त करें

कैंची और चाकू जैसी खतरनाक चीजें बच्चों को बहुत पसंद होती हैं. बच्चे ऐसी चीजों से खेलने के लिए उत्सुक नजर आते हैं. लेकिन जब आप उन्हें इन हरकतों के लिए डांटते हैं या उनसे ये चीजें वापस लेते हैं तो वह इस बात के लिए साफतौर पर न कह देते हैं. इसकी जगह आप अपने बच्चे को कुछ और खेल में बिजी कर सकते हैं. कई बार आपको भी बच्चों को समझने की जरूरत होती है जिससे की आप उनके मुताबिक चीजें कर सकें.

बच्चों के साथ समय बिताएं

जरूरी नहीं कि आपका बच्चा स्कूल में ही सब चीजें सीख जाए. आपको भी उनके पीछे समय देने की जरूरत होती है. आप अपने बच्चों को समझने के लिए उनके साथ थोड़ा समय जरूर बिताएं. बच्चे छोटे हों या बड़े, सभी अपेन पैरेंट्स का प्यार और अटेंशन दोनों चाहते हैं. प्यार से बच्चों को कुछ भी सिखाया जा सकता है.

 
दूध या जूस, सुबह की पहली ड्रिंक के लिहाज से क्या है बेहतर, जानें

दूध या जूस, सुबह की पहली ड्रिंक के लिहाज से क्या है बेहतर, जानें

ह बात न सिर्फ हमारे बड़े बुजुर्ग कहते आ रहे हैं बल्कि अब तो यह बात पूरी तरह से साबित भी हो चुकी है कि ब्रेकफस्ट हमारे दिन का सबसे अहम मील है और किसी भी हाल में ब्रेकफस्ट को स्किप नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं, आप ब्रेकफस्ट में क्या खाते हैं इस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। रात के डिनर के बाद जब हम सोते हैं तो कम से कम 8-9 घंटे की फास्टिंग हो जाती है और ऐसे में सुबह-सुबह शरीर को फिर से एनर्जी पाने के लिए ब्रेकफस्ट की जरूरत होती है। लिहाजा पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को ब्रेकफस्ट में शामिल करना चाहिए। 

ब्रेकफस्ट में दूध या जूस?
लेकिन एक सवाल जो अक्सर लोगों के मन में आता है कि- ब्रेकफस्ट में दूध पीना चाहिए या जूस? बहुत से लोग ब्रेकफस्ट में कैल्शियम से भरपूर 1 गिलास दूध पीना पसंद करते हैं तो वहीं कुछ लोगों को सुबह-सुबह नाश्ते में ब्रेड-टोस्ट या ऑमलेट के साथ विटमिन सी से भरपूर 1 गिलास ऑरेंज जूस पीना पसंद होता है। लेकिन सुबह की पहली ड्रिंक के लिहाज से दूध या जूस क्या है बेहतर, यहां जानें दोनों के फायदे और नुकसान। 
दूध पीने के हैं इतने फायदे
दूध कैल्शियम का तो बेस्ट सोर्स है ही, साथ ही दूध में प्रोटीन, विटमिन बी 12, हेल्दी फैट्स आदि भी भरपूर मात्रा में होते हैं। सदियों से दूध को एक कम्प्लीट मील के तौर पर देखा जाता रहा है। दूध के तमाम फायदों की वजह से ही शरीर को हेल्दी और ऐक्टिव रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दूध का सेवन करते हैं। ऐसे में देखा जाए तो सुबह ब्रेकफस्ट में दूध पीना फायदेमंद हो सकता है। 
दूध के कुछ नुकसान भी हैं
दूध में सैच्युरेटेड फैट होता है जिससे मोटापा और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा हो सकता है। साथ ही इन दिनों दूध देने वाले जानवरों को इंजेक्शन भी लगाया जाता है ताकि वे ज्यादा दूध दे सकें और इस इंजेक्शन का भी हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में जब तक आप दूध की क्वॉलिटी को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त न हों सुबह-सुबह दूध पीने से बचें। बहुत से लोगों में लैक्टोज इनटॉलरेंस की भी दिक्कत होती है और ऐसे लोगों को भी दूध से बचना चाहिए। कई बार ज्यादा दूध पीने से डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें भी हो जाती हैं। हालांकि आप चाहें तो डेयरी मिल्क की जगह सोया मिल्क का सेवन कर सकते हैं। 
विटमिन सी से भरपूर ऑरेंज जूस के फायदे
विटमिन सी और ऐंटिऑक्सिडेंट्स से भरपूर ऑरेंज जूस हमारी शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाकर हमें बीमारियों से दूर, फिट और हेल्दी रहने में मदद करता है। विटमिन सी शरीर को वातावरण से जुड़ी दिक्कतें जैसे- पलूशन, सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें आदि से भी बचाता है। सुबह ब्रेकफस्ट में अगर आप 1 गिलास ऑरेंज जूस पी लें तो आपके दिनभर की विटमिन सी की जरूरत पूरी हो जाती है। 
ऑरेंज जूस के नुकसान
हालांकि अगर आप घर में खुद ऑरेंज का जूस निकालकर फ्रेश जूस पी रहे हैं तभी वो फायदेमंद होगा। डिब्बाबंद या पैकेज्ड ऑरेंज जूस में चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है और वो फ्रेश नहीं होता, काफी पुराना होता है, उसमें जूस का टेस्ट बढ़ाने के लिए केमिकल्स भी मिले होते हैं। फ्रेश ऑरेंज जूस के साथ भी एक दिक्कत ये है कि जब आप फल का जूस निकालते हैं तो उसके ज्यादातर पोषक तत्व बाहर निकल जाते हैं और जूस में सिर्फ पानी ही रह जाता है। 
ऑरेंज जूस नहीं दूध है बेहतर
जूस और दूध की इस जंग में दूध बाजी मारता नजर आ रहा है क्योंकि दूध में कैल्शियम होता है जो हमारी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है जबकी ऑरेंज जूस दांतों के इनैमल को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी बात ये है कि 1 गिलास दूध पीने से आपका पेट भरा हुआ महसूस होता है और आपको देर तक भूख नहीं लगती जबकी 1 गिलास जूस पीने के बाद आपको पेट भरने वाली फीलिंग नहीं आती। दूध में हेल्दी प्रोटीन होता है जिससे आप दिनभर अनहेल्दी स्नैकिंग करने से बच सकते हैं। लिहाजा डिनर और ब्रेकफस्ट के बीच के 8-9 घंटे की फास्टिंग को तोडऩे के लिए जूस से बेहतर ऑप्शन है दूध।
 
सिर्फ हंसना ही नहीं रोना भी सेहत के लिए है फायदेमंद, कैसे यहां जानें

सिर्फ हंसना ही नहीं रोना भी सेहत के लिए है फायदेमंद, कैसे यहां जानें

हुत से लोगों को ऐसा लगता है कि रोना कमजोरी की निशानी है और शायद यही वजह है कि पुरुष तकलीफ होने पर भी आंसू बहाने और रोने से परहेज करते हैं। लेकिन साइंस की मानें तो रोने के ढेर सारे फायदे हैं। जिस तरह खुलकर हंसना सेहत के लिए फायदेमंद है, ठीक उसी तरह फूट फूट कर रोना भी बेहद जरूरी है। रोना भी आपकी सेहत को उतना ही फायदा देता है, जितना हंसना। लेकिन आखिर आप और हम रोते क्यों है? रोने और आंसू आने के पीछे की वजह क्या है? रोने के क्या-क्या फायदे हैं, यहां जानें।

शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद

रोना एक सामान्य ह्यूमन ऐक्शन है जो हमारे अलग-अलग इमोशन्स की वजह से ट्रिगर होता है। जब हम दुखी होते हैं, उदास होते हैं, किसी बात को लेकर टेंशन या स्ट्रेस में होते हैं तो इन अलग-अलग भावनाओं की वजह से रोना आ जाता है। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तों रोना आपके तन के साथ-साथ मन के लिए भी फायदेमंद है और इसकी शुरुआत तभी से हो जाती है जब बच्चा जन्म लेते वक्त पहली बार रोता है। 

आंसूओं के जरिए टॉक्सिन्स निकलते हैं बाहर

एक स्टडी के मुताबिक, जिस तरह से पसीना और यूरिन जब शरीर के बाहर निकलते हैं तो शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, वैसे ही आंसू आने पर भी आंखों की सफाई हो जाती है। आपको बता दें कि आंसू 3 तरह के होते हैं। 

अनैच्छिक आंसू तब निकलता है जब आंखों में कोई कचरा, धूल के कण या धुंआ चला जाए तो आंखों से पानी आने लगता है। 

बुनियादी आंसू जिसमें 98 प्रतिशत पानी होता है, यह आंखों को लुब्रिकेट रखता है और इंफेक्शन से बचाता है।

भावनात्मक आंसू जिसमें स्ट्रेस हॉर्मोन्स और टॉक्सिन्स की मात्रा सबसे अधिक होती है और इनका बह जाना फायेदमंद होता है।

रोने से खुद को शांत करने में मिलती है मदद

खुद को सांत्वना देने और शांत करने का बेस्ट तरीका है रोना। 2014 में हुई एक स्टडी से जुड़े अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो रोने से हमारे शरीर में पैरासिम्प्थेटिक नर्वस सिस्टम (पीएनएस) उत्तेजित हो जाता है और इसी पीएनएस की वजह से शरीर को आराम करने और डाइजेशन में मदद मिलती है। रोने के फायदे आपको तुरंत नजर नहीं आएंगे। लेकिन अगर आप कुछ देर तक आंसू बहाएं तो आपको खुद में रोने के फायदे नजर आएंगे। 

रोने से दर्द होता है कम

लंबे वक्त तक रोने से ऑक्सिटोसिन और इन्डॉर्फिन जैसे केमिकल्स रिलीज होते हैं। ये फील गुड केमिकल हैं जिससे शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही तरह के दर्द को कम करने में मदद मिलती है। एक बार जब ये केमिकल्स रिलीज हो जाते हैं तो ऐसा लगता है मानो शरीर सुन्न की अवस्था में पहुंच जाता है। ऑक्सिटोसिन हमें राहत का अहसास कराता है और इसी वजह से रोने के बाद हमारा मन शांत हो जाता है। 

मूड होता है बेहतर

दर्द दूर करने के साथ-साथ रोने से आपका मूड भी बेहतर होता है और आपको बेहतर महसूस होता है। जब आप रोते हैं या सिसकियां लेते हैं तो ठंडी हवा के कुछ झोंके शरीर के अंदर जाते हैं जिससे ब्रेन का तापमान कम होता है और शरीर का तापमान भी रेग्युलेट होने लगता है। जब आपका दिमाग ठंडा हो जाता है तो आपका मूड भी बेहतर हो जाता है। 

रोने से स्ट्रेस कम होता है

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया जब आप किसी इमोशनल वजह से रोते हैं तो आपके आंसूओं में स्ट्रेस हॉर्मोन्स और दूसरे केमिकल्स की मात्रा सबसे अधिक होती है। ऐसे में रोने से शरीर में इन केमिकल्स की मात्रा कम होती है क्योंकि ये केमिकल्स आंसूओं के जरिए आंखों से बह जाते हैं जिससे आपका स्ट्रेस कम होता है। 

आंखों की रोशनी बनी रहती है

आंसू आंखों में मेमब्रेन को सूखने नहीं देते। इसके सूखने की वजह से आंखों की रोशनी में फर्क पड़ता है, जिस वजह से लोगों को कम दिखना शुरू हो जाता है। मेमब्रेन सही बना रहता है, तो आंखों की रोशनी लंबे समय तक ठीक बनी रहती है।

 
फिटनेस के साथ यादाश्त भी बढ़ाती है एरोबिक एक्सर्साइज

फिटनेस के साथ यादाश्त भी बढ़ाती है एरोबिक एक्सर्साइज

हालही हुई कई स्टडीज में सामने आया है कि तेज गति से की जानेवाले एक्सर्साइज दिमाग की सेहत और यादाश्त को दुरुस्त रखने में मददगार हैं। खास बात यह है कि केवल युवाओं में ही नहीं इन फास्ट एक्सर्साइज का सकारात्मक प्रभाव 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में भी देखने को मिलता है। साथ ही धीमी गति से की जानेवाली एक्सर्साइज की जगह सेफ्टी का ध्यान रखते हुए तेज गति से यदि एक्सर्साइज की जाए तो उसका असर शरीर और दिमाग पर कहीं अधिक देखने को मिलता है। 

हैमिल्टन की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 12 सप्ताह तक 60 से 88 वर्ष की आयु के बीच के 64 सेडेंटरी (ज्यादातर समय बैठे रहनेवाले लोग) लोगों पर शोध किया। इस दौरान इन लोगों के ग्रुप को तीन भागों में बांटा, जिन्हें अलग-अलग तरह की एक्सर्साइज कराई गईं। इन लोगों के यह शोध शुरू करने से पहले और शोध के बाद लिए गए डेटा विश्लेषण में सामने आया कि जो एडल्ट तीव्र गति वाली अक्सर्साइज करते हैं उनमें अल्जाइमर होने का रिस्क कम होता है। साथ ही उनकी यादाश्त पहले के मुकाबले कहीं बेहतर हो जाती है।

इनको कराई गई तीव्र गति वाली एक्सर्साइज में 4 मिनट तक ट्रेड मिल वॉक के चार सेट और मीडियम तीव्रता वाली एरोबिक्स एक्सर्साइज शामिल थीं, जो इन्हें हर रोज करीब 50 मिनट तक कराई जाती थीं। शोध में यह भी सामने आया कि धीमी गति से लंबे समय तक की जानेवाली एक्सर्साइज की तुलना में अधिक प्रभाव डालने वाली तीव्र गति की एक्सर्साइज कम समय तक करना ब्रेन के लिए अधिक प्रभावी रहता है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह बात भी साफ कर दी कि इस तरह का व्यायाम लोगों को डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचाने में मददगार है अगर ये ऐक्टिविटीज किसी एक्सपर्ट की देखरेख में की जाएं। लेकिन बीमारी हो जाने पर उन्हें ठीक करने में इनके रोल के बारे में अभी कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता।

 
रोज खाए चोकलेट , बढ़ेगा स्टैमिना

रोज खाए चोकलेट , बढ़ेगा स्टैमिना

चॉकलेट खाना भला किसे पसंद नहीं होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्म पिघली हुई चॉकलेट पीने से 60 साल की उम्र में अपने पैरों पर खड़े रहने और चलने में मदद मिलती है. हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार कोको जिससे चॉकलेट बनता है, पैरों में रक्त के प्रवाह को सुचारू बनाए रखने में मदद करता है.

शोध में सामने आई ये बात : शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन के तहत जिन प्रतिभागियों ने हर दिन तीन कप गर्म चॉकलेट का सेवन छह महीनों तक किया उनके चलने की गति और तरीके में सुधार पाया गया.

पैड से पीडि़त लोगों पर किया अध्ययन :

दरअसल, कोको में इपिकैटेचिन नामक एक पदार्थ होता है जो डार्क चॉकलेट में भी पाया जाता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इपिकैटेचिन लोगों के पैरों के पीछे की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है जिससे उन्हें ज्यादा चलने में मदद मिलती है. बता दें कि  शोध को ऐसे लोगों पर किया गया था जो कॉमन पेरीफेरल आर्टरी डिजीज (पैड) से पीडि़त थे.

पैरों की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह नहीं होता : अमेरिकी शोधकर्ता प्रोफेसर मेरी मैकडरमोट ने कहा, पैड से जूझ रहे लोगों के चलने की क्षमता में सुधार करने के लिए ज्यादा थेरेपी मौजूद नहीं है. शोधकर्ता नेओमी हैमबर्ग ने कहा, पैड से पीडि़त लोगों को चलने में उतनी ही परेशानी होती है जितना दिल की धड़कन रुकने वाले मरीजों को होती है.

क्या है पैड:

पेरीफेरल आर्टरी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें आर्टरी (धमनियां) संकरी हो जाती हैं. पैड की वजह से चलने के दौरान पैरों की मांसपेशियों में दर्द, कड़ापन और जकडऩ महसूस होती है.