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कोविद-19 आउट ब्रेक के दौरान बालको मेडिकल सेंटर के कर्मचारियों ने किया रक्तदान

कोविद-19 आउट ब्रेक के दौरान बालको मेडिकल सेंटर के कर्मचारियों ने किया रक्तदान

हर कुछ सेकंड्स में किसी न किसी को कहीं न कहीं रक्त चढ़ाने की आवश्कता पड़ती है | पर्याप्त रक्त सप्लाई जनता के स्वास्थ्य के लिए परम आवश्यक है | हमारे देश में रक्त की ज़रुरत एवं सप्लाई के बीच पहले से ही एक बहुत बड़ा अंतर रहा है | हर साल हमारे देश में लगभग 11 मिलयन यूनिट ही रक्तदान होता है जबकि साल में लगभग 13 मिलयन यूनिट ब्लड की आवश्कता होती है |
कई बीमारियाँ ऐसी होती है जिनमे हमेशा ही ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की आवश्कता होती है जैसे की थालेसेमिया,सिकल सेल अनेमिया , ब्लड कैंसर , अप्लास्टिक अनेमिया इत्यादि |


डॉ. श्री. नीलेश जैन , ट्रांसफ्यूज़न मेडिसिन विशेषज्ञ , बालको मेडिकल सेंटर , नवा रायपुर , ने हमे बताया कि कोविद -19 के चलते हमारे रोजाना होने वाले ब्लड डोनेशन में भरी गिरावट आई है , जिसके चलते ब्लड की आपूर्ति सुचारू रूप ने होने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है |
कोविद -19 से बचाव के लिए सामाजिक दूरी बनाये रखना बहुत जरूरी है परन्तु ब्लड आपूर्ति बनाये रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है , जिससे कई जानलेवा बीमारीयों के उपचार में कोई व्यवधान न आने पाए एवं समय से पीड़ित मरीज को इलाज मुहैया कराया जा सके |
डॉ. श्री. नीलेश जैन आगे बताते है कि विश्व स्वस्थ्य संस्थान की अन्तरिम दिशा निर्देशों के अनुसार रक्तदान से नावेल कोरोना वायरस नहीं फेलता है एवं अभी तक इसके स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले है | इसीलिए हर वो व्यक्ति जो पूर्ण-तह स्वस्थ्य है एवं कोविद -19 प्रोटोकॉल के अनुसार फिट है, वह रक्तदान कर सकता है | ब्लड बैंक भी इन प्रोटोकॉल का पलान करते हुये सामाजिक दुरी बना के एवं युनिवेर्सल प्रीकोशन को अपनाते हुये विशेष डोनेशन की पूरी व्यवस्था कर सकते है , जिससे ब्लड की आपूर्ति को सुनिशित किया जा सके |
बालको मेडिकल सेंटर में भी कुछ मरीजो को प्लेटलेट ( जो की ब्लड का एक भाग है ) की अत्यंत आवश्कता थी जिसके लिए हमारे बी .एम .सी के स्टाफ जैसे डॉ., नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ एवं एडमिन स्टाफ ने आगे आकर रक्तदान और इस दौरान कोविद -19 प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से पालन किया गया| 

नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम हो सकता है कमजोर, बढ़ सकता है स्ट्रेस

नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम हो सकता है कमजोर, बढ़ सकता है स्ट्रेस

कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है. लॉकडाउन के चलते कई लोग वर्क फ्रॉम होम भी कर रहे हैं. इस दौरान वो लैपटॉप की स्क्रीन या फिर अपने मोबाइल फोन के संपर्क में कई घंटे रहते हैं. काम खत्म होने के बाद भी कुछ लोग मोबाइल स्क्रॉल करते रहते हैं जिससे वजह से उन्हें नींद आने में काफी परेशानी होती है. रात को देर से सोना और सुबह शिफ्ट के लिए जल्दी उठ जाने से कई बार लोगों की नींद पूरी नहीं होती है जिसका सीधा असर न केवल उनके चेहरे और स्वभाव पर पड़ता है बल्कि उनकी इम्यूनिटी पावर भी काफी कमजोर हो जाती है. लेकिन क्या आप कम सोने के नुकसान जानते हैं


इम्यूनिटी सिस्टम पर पड़ता है बुरा असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप कम नींद लेते हैं तो इम्यूनिटी काफी कम हो सकती है. हालांकि कमजोर इम्यूनिटी के पीछे और भी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं.

सेक्सुअल डिसऑर्डर की समस्या:
नींद कम ले पाने का सीधा प्रभाव लोगों की यौन क्षमता पर भी पड़ता है. दरअसल, टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की वजह से ही महिलाओं और पुरुषों में यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है. जब आप सोते हैं तो टेस्टोस्टेरॉन का लेवल बढ़ जाता है.

याददाश्त होती है कमजोर:
कम नींद लेने से लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. इसका सीधा असर उनकी याददाश्त पर भी पड़ता है. लोगों की लॉन्ग टर्म मेमोरी प्रभावित होती है और वो बातों को काफी जल्दी भूलने लगते हैं.

निर्णय लेने की क्षमता होती है प्रभावित:
कम नींद लेने से आपकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. कई बार आपने शायद ऐसा महसूस किया होगा कि आप किसी बात को लेकर क्विक डिसिजन नहीं ले पा रहे हैं और निर्णय लेने के बाद भी आप उसे लेकर श्योर नहीं हैं. नींद कम लेने की वजह से अक्सर निर्णय लेते वक्त लोग असमंजस का शिकार हो जाते हैं.


बढ़ सकता है स्ट्रेस:
कम नींद लेने का सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. दरअसल, सोने से दिमाग फ्रेश रहता है और ऊर्जा से भरा रहता है. लेकिन जब नींद पूरी नहीं हो पाती है तो दिमाग भी फ्रेश नहीं महसूस करता हैं. यही वजह है कि कम नींद लेने से स्ट्रेस बढ़ सकता है.

 

वर्क फ्रॉम होम करते हुए बढ़ती जा रही है पेट की चर्बी, इन टिप्स से करें कम

वर्क फ्रॉम होम करते हुए बढ़ती जा रही है पेट की चर्बी, इन टिप्स से करें कम

कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश लॉकडाउन में के चलते कई ऐसे लोग हैं जो वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. वर्क फ्रॉम होम यानी ऑफिस का काम घर से ऑनलाइन करना. वर्क फ्रॉम होम सुनने में जितना आसान लगता है वास्तविकता में ऐसा होता नहीं है. दरअसल, ऑफिस में टेबल चेयर और एक सिस्टम पर काम करना ज़्यादा प्रोफेशनल होता है. वर्क फ्रॉम होम के दौरान शायद ज़्यादातर लोग ऐसे होंगे जो अपना लैपटॉप लेकर या तो बिस्तर पर बैठे काम कर रहे होंगे या कुछ जमीन पर भी. ऐसे में कई बार स्ट्रेस काफी ज़्यादा तो होता ही है साथ ही पोश्चर सही न होने की वजह से पेट और कमर के आसपास की चर्बी भी बढ़ सकती है. आइए हेल्थलाइन के हवाले ऐसे जानते हैं कि किस तरह आप बेली फैट यानी पेट की चर्बी कम कर सकते हैं...


घुलनशील फाइबर का करें सेवन:
खाने में ऐसे आहार को शामिल करें जिसमें प्रचुर मात्रा में घुलनशील फाइबर पाया जाता है. यह फाइबर कैलोरी को सोख लेता है. घुलनशील फाइबर इन फ़ूड आइटम्स में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है:अलसी का बीज, शिराताकी नूडल्स, ब्रसल स्प्राउट, एवोकेडो, फलियां और काले शहतूत.


ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों से रहें दूर:
कुछ अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि पेट की चर्बी बढऩे का ट्रांस फैट के ज़्यादा सेवन से गहरा कनेक्शन है. चाहे आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हों, ट्रांस फैट का खाने में कम से कम इस्तेमाल करें.

अल्कोहल बहुत कम मात्रा में लें:
अगर आप ज़्यादा मात्रा में शराब का सेवन करते हैं तो आपकी बेली फैट यानी कि तोंद बढ़ सकती है. अगर आप कमर के बढ़ते हुए घेरे को कम करना चाहते हैं तो शराब का सेवन बिलकुल संतुलित मात्रा में करें और चाहें तो न ही करें.

हाई प्रोटीन युक्त डाइट लें:
अगर आप अपनी कमर के आसपास के घेरे को कुछ कम करना चाहते हैं तो ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनमें प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है. फिश, दाल, और बीन्स में प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है.

तनाव से रहें दूर:
तनाव आपकी कमर और पेट के आसपास की चर्बी को बढ़ा सकता है. लेकिन अगर आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो तनाव कम करना आपकी प्रायोरिटी लिस्ट में शामिल होना चाहिए. दरअसल स्ट्रेस से एड्रिनल ग्रंथि में कोर्टिसोल हार्मोन ज़्यादा मात्रा में बनने लगता है. कोर्टिसोल हार्मोन को स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है. रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कोर्टिसोल हार्मोन की ज़्यादा मात्रा होने से भूख काफी तेज लगती है और इससे पेट की चर्बी बढ़ती है.

 

क्या आपको भी बार-बार आती है छींक? क्या है इसके पीछे का कारण

क्या आपको भी बार-बार आती है छींक? क्या है इसके पीछे का कारण

दिन में कभी भी छींक आना एक नॉर्मल प्रक्रिया है. हालांकि कई बार ये परेशानी का कारण भी बन जाता है. सर्दी-जुकाम के दौरान छींक आना एक आम बात है (जब तक ये गंभीर न हो) क्योंकि सामान्य सर्दी-जुकाम समय के साथ ठीक हो जाता है. वैसे कई बार छींक आने के पीछे कोई गंभीर समस्या हो सकती है, जो आपको लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है. क्या आपके साथ अक्सर ऐसा होता है कि आपको कभी भी छींक आ जाती है. आप कहीं पर भी छींकने लगते हैं? यह बहुत चिंताजनक नहीं है क्योंकि यह बहुत सामान्य है और यह बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है. ऐसे कई कारण हैं जो छींक को बढ़ावा देते हैं. आइए आपको बताते हैं कि छींक आने के पीछे क्या कारण होता है.
मौसमी एलर्जी
मौसमी एलर्जी को एलर्जिक राइनाइटिस कहा जाता है. यह घर की धूल, जानवरों के बालों और फंगल बैक्टीरिया के प्रति अति संवेदनशील होते हैं. यहां तक कि किसी के तकिए या बिस्तर से भी एलर्जी हो सकती है. जब आप सोते हैं तो लक्षण बढ़ जाते हैं क्योंकि आपकी नाक का मार्ग लंबे समय तक सोने के दौरान इन कारकों को ट्रिगर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
क्या आपका कमरा ड्राई है?
एयर कंडीशन की वजह से ड्राई नोज की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक एयर कंडीशनर वाले रूम में बैठने के कारण शरीर में शुष्कता बढ़ती है. यह छींक आने का एक बड़ा कारण हो सकता है.
क्या आपको साइनस है?
साइनस की वजह से नाक के अंदर एक लाइनिंग होती है, उसको नैजल लाइनिंग बोलते हैं उसमें समस्या होती है, जिसकी वजह से नाक से म्यूकस निकलता है और हल्का दर्द होता है. यह भी छींक का कारण बन सकता है.
वासोमोटर राइनाइटिस
वासोमोटर राइनाइटिस नाक के अंदर की झिल्लियों में एक प्रकार सूजन है. यह अक्सर तापमान में बदलाव या नींद के दौरान शरीर की इम्यूनिटी सिस्टम में बदलाव के बाद छींकने का कारण बनता है. यदि आपको भी यह समस्या है, तो आपको ठंडी/गर्म हवा के संपर्क में आने से छींक का कारण बन सकता है.
 

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है गाजर, बदलते मौसम में खाने के हैं कई फायदे

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है गाजर, बदलते मौसम में खाने के हैं कई फायदे

फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, गाजर एक मल्टी न्यूट्रिशनल फूड है। गाजर नैचरल बायोऐक्टिव कंपाउंड्स से भरपूर होती है, जो हमारे शरीर को मजबूत बनाने का काम करते हैं। गाजर में चार प्रकार के फाइटोकैमिकल्स पाए जाते हैं। ये भी एक तरह के बायोऐक्टिव कंपाउंड्स होते हैं, जो पौधों से प्राप्त होनेवाले फल-सब्जियों में पाए जाते हैं। लेकिन गाजर उन चुनिंदा फूड्स में शामिल है, जो इनकी खूबियों से भरपूर होते हैं।
क्यों सर्दियों की सब्जी है गाजर?
गाजर की फूड प्रॉपर्टीज की बात करें तो इसमें पाए जानेवाली शर्करा, कैरोटिनॉइड्स और कुछ वाष्पशील यौगिक होते हैं। गर्म तापमान में उगाई गई गाजर में शरीर को इनका सही अनुपात नहीं मिल पाता है। इसलिए सर्दी के मौसम में उगाई गई गाजर सेहतमंद होती है।
कड़वा हो जाता है गाजर का स्वाद
गर्म मौसम उत्पन्न की जानेवाली गाजर में टेपरिन का संश्लेषण बढ़ जाता है। इससे गाजर का स्वाद सर्दी के मौसम में आनेवाली मीठी गाजर की तुलना में कड़वा हो जाता है। साथ ही इसके पोषक तत्वों का स्तर भी बदल जाता है। यह स्तर कैसा होगा, इस बात की जांच मौसम और मिट्टी के आधार पर ही की जा सकती है।
हृदय रोगों से बचाए
गाजर में पाए जानेवाले फाइटोकैमिकल्स के नाम इस प्रकार हैं- फेनोलिक्स, कैरोटीनॉइड, पॉलीएसेटाइलीन और एस्कॉर्बिक एसिड। गाजर को सलाद और जूस के रूप में उपयोग करने पर इसका अधिक लाभ प्राप्त होता है। खासतौर पर गाजर का जूस शरीर में ऐंटिऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ती है, जो हमारे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को प्रभावित करनेवाली हानिकारक बायॉलजिकल प्रॉसेस को रोकते हैं।
कैंसर रोधी तत्व
गाजर में पाए जानेवाले फाइटोकैमिकल्स को कैंसर रोधी माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, फेनोलिक्स, कैरोटीनॉइड, पॉलीएसेटाइलीन और एस्कॉर्बिक एसिड शरीर में कैंसर उत्पन्न होनेवाली कोशिकाओं को पनपने से रोकने में सहायता करते हैं। क्योंकि ये ऐंटिऑक्सीडेंट्स (ऑक्सीकरणरोधी) और ऐंटिइंफ्लामेट्री (सूजन घटाने) गुणों से भरपूर होते हैं।
गाजर के अलग रंग और गुण
गाजर नारंगी, पीले और लाल रंग की होती हैं। इनके रंगों के आधार पर ही इनमें अगल-अलग पोषक तत्वों की मात्रा होती है। गाजर में रंग के इस अंतर को जीनोटाइप कहा जाता है। गाजर के अलग-अलग रंग होने में भी फाइटोकैमिकल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बायोकंपाउंड्स और गाजर के गुण
नारंगी रंग की गाजर में कैरोटीन की मात्रा अधिक होती है। पीले रंग की गाजर में ल्यूटिन, लाल रंग की गाजर में लाइकोपीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। कैरोटीन हमारी आंखों, मसल्स और स्किन सेल्स को हेल्दी रखने में मदद करता है। ल्यूटिन आंखों के लिए अच्छा होता है और जरूरी प्रोटीन के निर्माण में सहायता करता है।
बैंगनी और काली गाजर के गुण
लाल गाजर में पाया जानेवाला लाइकोपीन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, दिल की कार्यक्षमता को मजबूत करने का काम करता है। इनके अलावा बैंगनी और काले रंग की गाजर भी होती हैं। बैंगनी गाजर की जड़ में एंथोसायनिन और काली गाजर में फेनोलिक यौगिक पाए जाते हैं। एंथोसायनिन और फेनोलिक ऐंटिऑक्सीडेंट्स का ही एक क्लास हैं।

 

 डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी व स्पर्श एक कोशिश सामाजिक संस्था ने मिलकर बांटे मास्क, सैनिटाइजर व नि:शुल्क दवा

डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी व स्पर्श एक कोशिश सामाजिक संस्था ने मिलकर बांटे मास्क, सैनिटाइजर व नि:शुल्क दवा

रायपुर, बरसाना एनक्लेव रायपुर में स्पर्श एक कोशिश सामाजिक संस्था के आग्रह पर डॉ त्रिवेदी होमियोपैथी के चिकित्सक डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी द्वारा कोरोनावायरस के बारे में जानकारी व लक्षण बता कर उससे बचने के उपाय बताकर रोग प्रतिरोधक दवाई फेस मास्क और सेनीटाइजर वितरित की गई। इसके अलावा आज ही के दिन 2 बस्तियों में भी यह वितरित किया गया। यह अभियान 8 दिन से चल रहा है जिसमें प्रतिदिन एक हजार के करीब मास्क, सैनिटाइजर और दवाई दी जाती है डॉक्टर त्रिवेदी ने बताया कि ,करोना जैसी महामारी से सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा इलाज है करोना जैसी बीमारी से जागरूक रहना है ना की दहशत में आकर अपने आप को किसी भी मानसिक परेशानी में डालना है करोना से बचने का सबसे सही इलाज आप शारीरिक रूप से सावधानी तो बरतें पर मानसिक रूप से किसी भी प्रकार का टेंशन इस बीमारी को लेकर ना करें।
,यह संस्था प्रतिदिन सुरक्षाकर्मियों के लिए खाना और चाय नाश्ते का इंतजाम घर से कर रही हैं जिससे हम उनकी इस समाज सेवा में कुछ सहयोग कर सकें आज 144 धारा लगने के बावजूद बाहर ना जाकर अपने अपने घरों से खाना चाय बनाकर उन तक पहुंच आती है इस शिविर में मुख्य रूप से अध्यक्ष- सत्यभामा मिश्रा ,उपाध्यक्ष -उषा अग्रवाल ,फाउंडर -अनीता लुनिया, फाउंडर -सोनाली लुनिया, प्रतिभा शर्मा, अमित अग्रवाल ,केडिया, अवस्थी, टावर, दोषी आदि उपस्थित थे।
 

कोरोना वायरस के मरीजों में 20 प्रतिशत को ही होते हैं खांसी-सर्दी के लक्षण,पढ़े पूरी खबर

कोरोना वायरस के मरीजों में 20 प्रतिशत को ही होते हैं खांसी-सर्दी के लक्षण,पढ़े पूरी खबर

नई दिल्ली,भारत में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना वायरस के जो मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें 80 प्रतिशत में सर्दी, जुकाम बुखार के होते हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने रविवार को प्रेस कॉन्फेंस में कहा कि कोरोना से संक्रमित होने पर 80 प्रतिशत मामलों में हल्की ठंड व बुखार होता है। केवल 20 प्रतिशत को ही खांसी, सर्दी, जुकाम, तेज बुखार आता है। इनमें से भी कुछ को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में अब तक 341 मामले सामने आए हैं, जिनमें बढ़ोतरी होगी। सरकार ने 1200 नए वेंटिलेटर की खरीद का ऑर्डर दिया है।
भार्गव ने प्रेस कॉन्फेंस में बताया कि कोरोना वायरस हवा में मौजूद नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमित होता है। वर्तमान हालातों को देखते हुए संक्रमण की चैन को तोड़ने के लिए जरूरी है कि हम बाहरी लोगों से दूर रहें।

भार्गव ने कहा कि हमने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे अस्पतालों को चिह्नित करें, जहां सिर्फ कोरोना वायरस के मरीजों का ही इलाज किया जाए।
भार्गव ने बताया कि अब तक 60 निजी लैब ने कोरोना वायरस की जांच के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है। देश में रोजाना अब तक 15 से 17 हजार टेस्ट किए गए हैं। हमारे पास प्रतिदिन 10 हजार टेस्ट करने की क्षमता है। हम हर सप्ताह 50 से 70 हजार टेस्ट कर सकते हैं।

 

कब होगा कोरोना वायरस का संकट ख़त्म? क्या हो पायेगी ज़िंदगी सामान्य?

कब होगा कोरोना वायरस का संकट ख़त्म? क्या हो पायेगी ज़िंदगी सामान्य?

कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से पूरी दुनिया लगभग थम सी गई है। जिन जगहों पर रोज़ाना भयंकर भीड़ हुआ करती थी वो अब भुतहा लगने लगी हैं। स्कूल-कॉलेज से लेकर यात्राओं पर प्रतिबंध है, लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है। दुनिया का हर शख़्स इससे किसी ना किसी रूप में प्रभावित है।

यह एक बीमारी के ख़िलाफ़ बेजोड़ वैश्विक प्रतिक्रिया है। लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं कि आख़िर यह सब कहां जाकर ख़त्म होगा और लोग अपनी आम ज़िंदगियों में लौट पाएंगे।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का मानना है कि ब्रिटेन अगले 12 हफ़्तों में इसके पर फ़तह पा लेगा और देश 'कोरोना वायरस को उखाड़ फेंकेगा।'

भले ही अगले तीन महीनों में कोरोना वायरस के मामले ज़रूर कम हो भी जाएं लेकिन फिर भी हम इसे जड़ से उखाड़ फेंकने में बहुत दूर होंगे। ये समाप्त होने में बहुत समय लगेगा, ऐसा अनुमान है कि इसमें शायद सालभर भी लगे।

हालांकि, यह भी साफ़ है कि सब कुछ बंद करने की नीति बड़े तबके के लिए लंबे समय तक संभव नहीं है। सामाजिक और आर्थिक नुक़सान तो विध्वंसकारी हैं ही।

दुनिया के देश अब 'एग्ज़िट स्ट्रेटेजी' चाहते हैं ताकि प्रतिबंध हटाए जाएं और सब सामान्य हो सके। लेकिन यह भी सच है कि कोरोना वायरस ग़ायब नहीं होने जा रहा है। अगर आप प्रतिबंध हटाते हैं तो वायरस लौटेगा और मामले तेज़ी से बढ़ेंगे।

एडिनब्रा विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग महामारी विज्ञान के प्रोफ़ेसर मार्क वूलहाउस कहते हैं, "हमारी सबसे बड़ी समस्या इससे बाहर निकलने की नीति को लेकर है कि हम इससे कैसे पार पाएंगे।" "एग्ज़िट स्ट्रेटेजी सिर्फ़ ब्रिटेन के पास ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के किसी देश के पास नहीं है।"

कोरोना वायरस इस समय की सबसे बड़ी वैज्ञानिक और सामाजिक चुनौती है।

इस संकट से निकलने के तीन ही रास्ते हैं।

1. टीका

2. लोगों में संक्रमण से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता का विकास

3. या हमारे समाज या व्यवहार को स्थाई रूप से बदलना

इनमें से हर एक रास्ता वायरस के फैलने की क्षमता को कम करेगा।

टीका आने में कितना वक़्त लगेगा?
एक टीका किसी शरीर को वो प्रतिरोधक क्षमता देता है जिसके कारण वो बीमार नहीं पड़ता है। तक़रीबन 60 फ़ीसदी आबादी को रोग से मुक्त करने के लिए उनकी प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने को 'हर्ड इम्युनिटी' कहते हैं ताकि कोई वायरस महामारी न बन जाए।

इस सप्ताह अमेरिका में कोरोना वायरस के एक टीके का परीक्षण एक व्यक्ति पर किया गया। इस परीक्षण में शोधकर्ताओं को छूट दी गई थी कि वो पहले जानवरों पर इसका प्रयोग करने की जगह सीधे इंसान पर करें।

कोरोना वायरस के टीके पर शोध बहुत ही अभूतवूर्व गति से हो रहा है लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि यह सफल होगा या नहीं और क्या वैश्विक स्तर पर यह सभी को दिया जा सकेगा।

अगर सब सही जाता है तो ऐसा अनुमान है कि 12 से 18 महीनों में यह टीका बन सकता है। यह इंतज़ार का एक बहुत लंबा समय होगा जब दुनिया पहले ही इतनी पाबंदियों का सामना कर रही है।

प्रोफ़ेसर वूलहाउस कहते हैं कि टीके के इंतज़ार करने को रणनीति का नाम नहीं दिया जाना चाहिए और यह कोई रणनीति नहीं है।

मनुष्यों में प्राकृतिक प्रतिरक्षा पैदा हो सकती है?
ब्रिटेन की रणनीति इस समय वायरस के संक्रमण को कम से कम फैलने देने की है ताकि अस्पतालों पर अधिक बोझ न पड़े क्योंकि इस समय आईसीयू के बेड खाली नहीं हैं।

एक बार इसके मामले आने कम हुए तो कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी लेकिन यह मामले आना ऐसे ही बढ़ते रहे तो और प्रतिबंध लगाने पड़ जाएंगे।

ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वेलेंस कहते हैं कि 'चीज़ों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना संभव नहीं है।' कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण अनजाने में लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ सकती है लेकिन इसे होने में काफ़ी साल लग सकते हैं।

इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर नील फ़र्ग्युसन कहते हैं, "हम एक स्तर पर संक्रमण को दबाने की बात कर रहे हैं। आशा है कि एक छोटे स्तर पर ही लोग इससे संक्रमित हो पाएं।"

"अगर यह दो से अधिक सालों तक जारी रहता है तो हो सकता है कि देश का एक बड़ा हिस्सा संक्रमित हो गया हो जिसने अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली हो।" लेकिन यहां सवाल यह है कि यह प्रतिरोधक क्षमता कब तक रहेगी?

क्योंकि बुख़ार के लक्षण वाले दूसरे कोरोना वायरस भी कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले पर हमला करते हैं और जो लोग पहले कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं, उनके नए कोरोना वायरस की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है।

क्या हैं दूसरे रास्ते?
प्रोफ़ेसर वूलहाउस कहते हैं, "तीसरा विकल्प हमारे व्यवहार में हमेशा के लिए बदलाव करना है, जिससे कि संक्रमण का स्तर कम रहे।"

इनमें वो कुछ उपाय शामिल हो सकते हैं जिन्हें लागू किया गया है। इसमें कुछ कड़े परीक्षण और मरीज़ों को पहले से अलग करने की प्रक्रिया भी शामिल की जा सकती है।

प्रोफ़ेसर वूलहाउस कहते हैं, "हमने मरीज़ों की पहले से पहचान और उनके संपर्क में आए लोगों को ढूंढने की प्रक्रिया अपनाई थी लेकिन इसने काम नहीं किया।"

अन्य रणनीतियों में Covid-19 संक्रामक बीमारी के लिए दवाई विकसित करना भी शामिल हो सकती है। इसका उपयोग उन लोगों पर कर सकते हैं जिनमें इसके लक्षण दिखे हों ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

या एक तरीक़ा यह भी हो सकता है कि मरीज़ों का अस्पताल में ही इलाज किया जाए ताकि यह कम जानलेवा बने। इसके साथ ही आईसीयू के बेड की संख्या बढ़ाकर भी इस संकट का सामना किया जा सकता है।

मैंने ब्रिटेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार प्रोफ़ेसर क्रिस विटी से पूछा कि उनके पास इस संकट से बाहर निकलने की क्या रणनीति है। तो उन्होंने कहा, "साफ़तौर पर एक टीका ही इससे बाहर निकाल सकता है और उम्मीद है कि वो जल्द से जल्द होगा और विज्ञान किसी नतीजे के साथ सामने आएगा।"

 

केमिकल युक्त फ्लोर क्लीनर के इस्तेमाल से बचें, बच्चे के दिमाग पर पड़ता है बुरा असर

केमिकल युक्त फ्लोर क्लीनर के इस्तेमाल से बचें, बच्चे के दिमाग पर पड़ता है बुरा असर

घर साफ-सुथरा रहे और खतरनाक बैक्टीरिया और विषाणु न पनप पाएं इसके लिए लोग घर की साफ-सफाई में केमिकल युक्त क्लीनर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपको इस बात का जरा भी अंदाजा है कि यह केमिकल युक्त क्लीनर आपकी सेहत के लिए कितना नुकसानदायक साबित हो सकता है. कुछ समय पहले ही एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि घरेलू सफाई उत्पादों से बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. अध्ययन के मुताबिक, घरेलू सफाई उत्पाद खासतौर पर शिशुओं के विकास को प्रभावित कर सकते हैं.

बौद्धिक विकास पर पड़ता है असर:
अध्ययन ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है. उन्होंने पाया कि घरेलू कीटनाशकों से बच्चों का भाषा विकास प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के नियमित रूप से जहरीले घरेलू रसायनों के संपर्क में रहने से उनकी सोचने, समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है. साथ ही वे शब्दों को सीखने और बोलने में भी समय लेते हैं. ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और शोधकर्ता हुई जियांग ने कहा, निष्कर्षों का कहना है कि जहरीले घरेलू रसायनों के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने के लिए अभिभावकों को परामर्श देने की जरूरत है.
दिमागी विकास के लिए दो वर्ष की आयु महत्वपूर्ण समय :
गर्भावस्था के दौरान लगभग 20 फीसदी माताओं ने जहरीले सफाई उत्पादों को इस्तेमाल करने की बात कही. लेकिन जब बच्चे एक से दो साल के बीच के थे, तो लगभग 30 फीसदी माताओं ने इन उत्पादों का इस्तेमाल किया. शोध के मुताबिक, माताओं ने बच्चे के जन्म के बाद जहरीले सफाई उत्पादों का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया.
शोधकर्ता ने कहा, जब बच्चे दो साल की उम्र में पहुंचते हैं, तो यह उनके दिमाग के विकास का महत्वपूर्ण समय होता है. अगर वे जहरीले रसायनों के संपर्क में आते हैं, तो उनकी भाषा और संज्ञानात्मक विकास में समस्याएं हो सकती हैं.
 
मसूड़ों की सूजन से छुटकारा दिलाएंगे ये घरेलू नुस्खे, आज ही करें ट्राई

मसूड़ों की सूजन से छुटकारा दिलाएंगे ये घरेलू नुस्खे, आज ही करें ट्राई

अनियमित खानपान, जल्दबाजी में ब्रश करना जैसी चीजों के कारण मसूड़ों में सूजन, दांतों में दर्द जैसी समस्या हो सकती है. खासकर मसूड़ों की सूजन इन दिनों काफी आम हो चुकी है. मसूड़ों की सूजन में बहुत तेज दर्द होता है. इसकी वजह से खाना चबाने, कुछ भी खाने या पीने पर झंझनाहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में सूजन के कारण मसूड़ों से खून भी आने लगता है.

मसूड़ों की समस्या से निजात पाने के लिए अक्सर लोग बाजार में मिलने वाले टूथ पेस्ट, माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं. बाजार में मिलने वाले प्रोडक्ट्स मसूड़ों की सूजन को कम करने का दावा तो करते हैं लेकिन इसमें बहुत ज्यादा समय लेते हैं. इसलिए मसूड़ों की सूजन को खत्म करने का सबसे बेस्ट तरीका है घरेलू नुस्खा. इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं मसूड़ों की सूजन को खत्म करने के सबसे बेस्ट नुस्खे...

नमक का पानी

नमक के पानी में कई सारे गुण पाए जाते हैं, जो इंफेक्शन से दांतों को बचाते हैं. मसूड़ों की सूजन को खत्म करने के लिए गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर उससे कुल्ला करें. नियमित तौर पर नमक के पानी से कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन खत्म हो सकती है. इतना ही नहीं नमक का पानी मसूड़ों के बैक्टीरिया को भी खत्म कर देता है.

लहसुन

जब भी बात सर्दी और खांसी को खत्म करने की आती है तो भारतीय घरों में लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है. लहसुन जितना सर्दी- खांसी को खत्म करने में सहायक है उतना ही मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने की क्षमता रखता है. मसूड़ों की सूजन कम करने के लिए लहसुन की कलियों को छिलकर पीस लें और दांतों, मूसड़ों पर लगाकर रखें. 10 से 15 मिनट तक लहसुन के पेस्ट को लगाने के बाद कुल्ला करें. सप्ताह में 2 से 3 बार लहसुन को इस तरह से इस्तेमाल करके आप मसूड़ों की समस्या से निजात पा सकते हैं.

लहसुन का इस्तेमाल करने वाले लोगों को हो सकता है कि शुरुआत के कुछ दिनों में मुंह से बदबू की समस्या आए. इसके लिए माउथफ्रेशनर का इस्तेमाल करें. अगर, आपके मसूड़ों के दर्द की समस्या ज्यादा बढ़ती है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

 
हैवी वर्कआउट के बाद हमेशा खाएं ये फूड्स, तुरंत होगी मसल्स रिकवरी

हैवी वर्कआउट के बाद हमेशा खाएं ये फूड्स, तुरंत होगी मसल्स रिकवरी

आज के बिजी लाइफस्टाइल में फिट रहना ज्यादातर लोगों की पहली पसंद होती है. हालांकि फिट रहने के लिए लोग जिम में जाकर कड़ी मेहनत के साथ एक्सरसाइज करते हैं और हेल्दी डाइट भी लेते हैं. बॉडी को हेल्दी बनाए रखने के लिए मांसपेशियों का स्वस्थ होना भी बहुत जरूरी होता है. जिम जाने वाले ज्यादातर युवा मसल्स बनाने की कोशिश में तो लग जाते हैं लेकिन इसके लिए प्रोपर डाइट नहीं लेते. दरअसल मसल्स बनाने या मजबूत करने का मतलब ये नहीं है कि सिर्फ जिम जाकर बॉडी बनाई जाए बल्कि आपको मांसपेशियों को स्वस्थ रखने का तरीका भी पता होना चाहिए.

आज के समय में प्रोटीन और सप्लीमेंट ने युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिस कारण ज्यादातर युवा कम उम्र में ही कई रोगों का शिकार हो जाते हैं. बॉडी बनाने वाले लोगों को ये जानना बेहद जरूरी है कि ऐसे कई फूड्स हैं, जिन्हें हैवी वर्कआउट के बाद खाकर बॉडी बनाई जा सकती है. आइए आपको बताते हैं ऐसे 6 फूड्स के बारे में जिन्हें आप हैवी वर्कआउट के बाद खा सकते हैं और बॉडी बना सकते हैं.

पीनट बटर

अगर आप बॉडी बिल्डिंग के शौकीन हैं तो पीनट बटर बॉडी बनाने में आपकी मदद कर सकता है. ज्यादातर बॉडी बिल्डर्स और एथलीट्स पीनट बटर का सेवन करते हैं. प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट्स, पोटेशियम, एंटी-ऑक्सीडेंटस, मैगनीशियम और अन्य कई पोषक तत्वों का भंडार पीनट बटर में मौजूद है. ये कई बीमारियों से भी बचाने की क्षमता रखता है. इसके अलावा पीनट बटर के सेवन से आपको मैग्निशियम भी प्राप्त होता है, जिससे हैवी वर्कआउट के बाद आपकी हड्डियों ओर मांसपेशियों को रिकवरी करने में मदद मिलती है. पीनट में विटामिन बी6 और जिंक भी होता है, जो आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में भी मदद करता है.

चिकन

चिकन में बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन मौजूद होता है. प्रोटीन के साथ-साथ चिकन अच्छी कैलोरी भी प्रदान करता है. आप चाहें तो इसे अच्छे से उबाल कर खा सकते हैं और इसमें नमक, धनिया, काली मिर्च और नींबू डालकर इसका हेल्दी सूप भी बना सकते हैं. इसका पूरा पोषण लेने के लिए इसमें कोई दूसरा मसाला न मिलाएं.केला

केले बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और जिम जाने वाली व्यक्ति की पहली पसंद भी होते हैं. आप इन्हें कभी भी खा सकते हैं और ये कार्ब का एक अच्छा स्त्रोत है. ये आपको तुरंत एनर्जी देने में सक्षम होते हैं. अगर आप केले से संपूर्ण पोषण लेना चाहते हैं तो पीले केले ही खाएं.

अंडा

हैवी वर्कआउट के बाद शरीर को प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है ताकि मसल्स की रिकवरी तेजी से हो सके. अंडा प्रोटीन का एक समृद्ध स्त्रोत होता है. वर्कआउट के बाद दो से 3 अंडे (सिर्फ अंडे का सफेद भाग) खाए जा सकते हैं. आप इस पर नमक और फिर काली मिर्च लगाकर भी खा सकते हैं.

लाल चावल

लाल चावल यानी रेड राइस सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है. वजन घटाने से लेकर ये आपके दिल को भी हेल्दी रखता है. साथ ही ये आपके ब्लड शुगर को भी कंट्रोल में रखता है. आप इन्हें उबाल कर चिकन और अंडे के साथ खा सकते हैं. हैवी वर्कआउट के बाद ये आपको रिकवरी करने में मदद करता है.

नट्स

आप हैवी वर्कआउट के बाद 10 से 12 बादाम और 5 से 6 अखरोट खा सकते हैं. अगर आपको शेक पीना पसंद है तो आप इसे बारीक-बारीक काट लें और मिल्कशेक या बनाना शेक में डालकर पिएं. ऐसा करने से आपको एनर्जी और रिकवरी करने में मदद मिलेगी.

 
चेहरे के अनचाहे बालों से हो परेशान, तो बालों को हटाने के लिए अपनाए ये घरेलु नुस्खे

चेहरे के अनचाहे बालों से हो परेशान, तो बालों को हटाने के लिए अपनाए ये घरेलु नुस्खे

अगर आप भी घर बैठे चेहरे के अचनाहे बालों को हटाने का सुरक्षित और असरकारी तरीका ढूंढ रही हैं तो आपको बता दें कि हेल्दी ओटमील और जिलेटिन से भी आप ऐसा कर सकती हैं। जिनकी सेंसिटिव स्किन है, वो भी ओटमील और जिलेटिन से बने पैक की मदद से अनचाहे बालों से हमेशा के लिए निजात पा सकती हैं। 

जौ, दूध और नींबू का रस

अगर आप भी चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के तरीके के बारे में सोच रही हैं तो आपको बता दें कि जौ, दूध और नींबू के रस की मदद से आप ऐसा कर सकती हैं। इसके लिए एक चम्मच जौ का पाउडर लें और उसमें एक चम्मच दूध और एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं। अब आपके पाए एक पेस्ट तैयार हो जाएगा। इसे अनचाहे बालों पर 30 मिनट के लिए लगाएं और उसके बाद हल्के हाथों से रगड़ कर पेस्ट को निकाल लें और चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। आपको इस नुस्खे का इस्तेमाल हफ्ते में दो से तीन बार करना है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग भी इस नुस्खे का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन आप स्किन को ज्यादा रगड़ें नहीं।

ओटमील और केला

ये अनचाहे बाल हटाने का तरीका बहुत आसान है। दो चम्मच ओटमील लें और उसे एक पके केले के साथ ब्लेंड कर लें। अब इस पेस्ट को अनचाहे बालों पर लगाएं। इस पेस्ट से 15 मिनट तक चेहरे की मालिश करें और फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। ओटमील एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो कि स्किन से लालिमा को कम करने में मदद करते हैं। चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के साथ-साथ ये पेस्ट चेहरे पर चमक भी लाता है। 

जिलेटिन और दूध

एक चम्मच अनफ्लेवर्ड जेलेटिन पाउडर लें और 3 चम्मच कच्चा दूध एवं नींबू के रस की कुछ बूंदें लें। अब एक कटोरी में जिलेटिनडालकर दूध और नींबू के रस को मिक्स कर लें। इस मिश्रण को 15 से 20 सेकंड के लिए माइक्रोवेव में गर्म करें। माइक्रोवेव से निकालने के बाद इस पेस्ट को थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें और फिर चेहरे के अनचाहे बालों पर लगाएं। इस मास्क को चेहरे पर 5 मिनट के लिए रहने दें और फिर उंगलियों की मदद से इसे हटाएं। ये मास्क बालों को हटाने के साथ-साथ ब्लैकहैड्स और त्वचा की मृत कोशिकाओं को भी खत्म करता है। सेंसिटिव और मुहांसों वाली त्वचा के लिए भी ये नुस्खा कारगर और सुरक्षित है। 

चेहरे के बालों को साफ करने के और भी तरीके हैं जिनके बारे में नीचे बताया जा रहा है। चेहरे के अलावा शरीर के किसी भी हिस्से से बालों को साफ करने के लिएआप इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकती हैं।

हल्दी और दूध

एक चम्मच हल्दी में एक चम्मच दूध डालकर मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को चेहरे के उस हिस्से पर लगाएं जहां पर बाल हैं। लगभग 20 मिनट के बाद ये पैक पूरी तरह से सूख जाएगा। अब उंगलियों को हल्का-सा गीला करके उस हिस्से पर हल्के से रब करें। ध्यान रहे आपको बालों की ग्रोथ की विपरीत दिशा में तब तक रब करना है, जब तक कि पेस्ट पूरी तरह से स्किन से हट न जाए। अब इस हिस्से को ठंडे पानी से धो लें।

शहद और चीनी

चेहरे से बालों को जड़ से साफ करने के लिए एक चम्मच शहद, दो चम्मच चीनी और एक चम्मच पानी लें। एक कटोरी लें और चीनी, शहद और पानी डालकर तीनों चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें। इस मिश्रण को 30 सेकंड के लिए माइक्रोवेव पर रखें और चीनी को पूरी तरह से पिघलकर घुलने दें। 

अब माइक्रोवेव से कटोरी निकालकर इस पेस्ट को अच्छी तरह से मिक्स कर लें और हल्का ठंडा होने पर चेहरे के अनचाहे बालों पर लगाएं। जिस जगह आपने पेस्ट लगाया है वहां पर सूती कपड़े या वैक्सिंग स्ट्रिप को लगाएं और कुछ सेकेंड बाद बालों की ग्रोथ की उल्टी दिशा में तेजी से खींच लें। ये नुस्खा बालों को हटाने के साथ-साथ त्वचा की मृत कोशिकाओं को भी हटाता है। सभी स्किन टाइप के लोग इस नुस्खे का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अंडे की सफेद जर्दी और कॉर्न फ्लोर

एक छोटी कटोरी लें और उसमें एक अंडे का सफेद भाग डालें। अब इसमें आधा चम्मच कॉर्न फ्लोर यानी मक्के का आटा डालें और 1 चम्मच चीनी डालकर स्मूद पेस्ट तैयार होने तक मिक्स करते रहें। पेस्ट तैयार होने के बाद इसे चेहरे के अनचाहे बालों पर लगाएं। 20 मिनट बाद जब ये पेस्ट सूख जाए तो इसे बालों की ग्रोथ की उल्टी दिशा में हल्के से निकालने की कोशिश करें। इसके बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।

पपीता और हल्दी

अनचाहे बालों से छुटकारा पाने का उपाय है कच्चा पपीता और हल्दी। एक कच्चा पपीता और आधा चम्मच हल्दी पाउडर लें। पपीते को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। पूरा पपीता लेने की बजाय उसमें से अपनी जरूरत के अनुसार या तीन पपीते के 4 से 5 टुकडें लें और उसे पीस लें। अब इसमें हल्दी डालकर मिक्स करें। इस पेस्ट को चेहरे के अनचाहे बालों पर लगाएं। इस पेस्ट से पहले त्वचा की मालिश करें और फिर इस पेस्ट को सूखने के लिए 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें। 15 से 20 मिनट के बाद जब पेस्ट सूख जाए, तब गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। आपको इस नुस्खे का इस्तेमाल हफ्ते में दो बार करना है। पपीते में पपेइन नामक एंजाइम होता है जो कि बालों को साफ करने का काम करता है।

बेसन, दूध और हल्दी

चेहरे से अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए आधी कटोरी बेसन और 1 चम्मच हल्दी पाउडर एवं 1 चम्मच ताजा क्रीम लें। अब इसमें उतना दूध मिलाएं कि ये सब चीजें मिलकर एक स्मूद पेस्ट के रूप में तैयार हो जाएं। चेहरे को धो लें और फिर उस पर इस पेस्ट को लगाएं। इस पेस्ट को 20 से 25 मिनट तक सूखने दें। पेस्ट के सूखने पर उसे बालों की ग्रोथ की उल्टी दिशा में हल्के हाथों से रब करें। इस नुस्खे का लगातार इस्तेमाल करने से आपको धीरे-धीरे अनचाहे बालों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनेगी। बेहतर परिणाम के लिए इस पेस्ट को हफ्ते में एक बार जरूर लगाएं। 

चेहरे से अनचाहे बालों को हटाने के इन तरीकों से कोई दर्द या साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। आप घर पर ही जब चाहें इनकी मदद से अनचाहे बालों से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकती हैं।

 
अगर ज्यादा अचार खाने के हैं शौकीन तो जान लीजिए ये नुकसान

अगर ज्यादा अचार खाने के हैं शौकीन तो जान लीजिए ये नुकसान

अधिकांश लोग खाने के साथ विभिन्न प्रकार के अचार खाना पसंद करते हैं, अगर आप भी अचार खाने के शौकिन हैं तो आपको मालूम होना चाहिए कि अधिक मात्रा में आचार का सेवन सेहत के लिए समस्याएं भी खड़ी कर सकता है।
खाने के साथ चटपटे अचार के शौकीन लोगों की कोई कमी नहीं है, आखिर अचार खाने का स्वाद और खाने के प्रति दिलचस्पी को बढ़ा जो देते हैं। अगर आप भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं जो नियमित तौर पर अचार खाते हैं, तो एक बार अचार खाने के यह नुकसान भी जरूर जान लीजिए -
1 अचार में तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और उसमें प्रयोग किए जाने वाले मसाले भी अक्सर पके हुए नहीं होते, जिसके कारण कोलेस्ट्रॉल और अन्य समस्याएं हो सकती है।
2 अचार का प्रयोग पेट में अम्लीयता को बढ़ावा देता है जिसके कारण इसके अधिक सेवन से आपको एसिडिटी, गैस, खट्टी डकार आना जैसी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
3 अचार में नमक की मात्रा भी ज्यादा होती है, जो सोडियम की अधिकता के अलावा हाई ब्लडप्रेशर और अन्य सेहत समस्याएं भी पैदा कर सकता है।
4 अचार में मसालों के अलावा सिरके का प्रयोग भी काफी मात्रा में किया जाता है, जिसका सेवन नियमित रूप से करने पर आपको अल्सर भी हो सकता है और अन्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
5 अचार बनाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए जिन प्रिसजर्वेटिव का प्रयोग होता है, वे शरीर के लिए हानिकरक होते हैं और एसिडिटी या शरीर में सूजन आदि के लिए जिम्मेदार होते हैं।

 

बालको मेडिकल सेंटर के विशेषज्ञ ने बताया कोरोना वायरस से बचाव के उपाए साथ ही सोशल मीडिया की अफवाहो से बचने की दी सलाह

बालको मेडिकल सेंटर के विशेषज्ञ ने बताया कोरोना वायरस से बचाव के उपाए साथ ही सोशल मीडिया की अफवाहो से बचने की दी सलाह

रायपुर,विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस (COVID-19) को विश्वव्यापी (पेन डेमिक) बीमारी घोषित कर दिया है, जिसका कारण इस बीमारी का तेज़ी से फैलना है। पर एक चीज़,जो कोरोना वायरस से भी तेज फैल रही है, वो है इससे जुड़ी अफवाहे और भ्रांतिया. आज ऐसी ही कुछ भ्रांतियों के बारे में डॉ अनिमेष चौधरी जी ने बताया कि
1. कोरोना मतलब मृत्यु- 2019 के कोरोना वायरस पीड़ितों की संख्या बहुत ज्यादा है, पर उनमे से अधिकतर को मात्र सामान्य लक्षण ही पाए गए थे, 50% से ज्यादा लोग अब पूरी तरह स्वस्थ हो गए है. इसके अलावा पहले से बीमार, बुजुर्ग या छोटे बच्चों को गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा है, पहले से स्वस्थ और युवाओं में कोरोना के कारण अधिकतर सामान्य फ्लू ही देखा जा रहा है.
2. खूब पानी पीना, विटामिन सी, प्याज या लहसुन कोरोना का उपचार है- विटामिन सी, लहसुन और पानी का सेवन आपके शरीर के लिए अच्छी चीज है, पर इनसे कोरोना वायरस के ठीक होने के कोई प्रमाण नही है.
3. अगर आपको 10 सेकंड तक सांस रोकने में दिक्कत है तो आपको कोरोना है- ये पूरी तरह गलत तथ्य है. कोरोना वायरस के लक्षणों में सामान्य सर्दी खांसी से लेकर सांस लेने में दिक्कते शामिल है, पर इनमे से कोई भी लक्षण सिर्फ कोरोना वायरस के लिए विशिष्ट नही है. किसी भी सांस की बीमारी में ऐसा हो सकता है और इसके विपरीत बहुत से कोरोना के मरीज़ों को सांस लेने में कोई दिक्कत नही भी हो सकती .
4. गौ मूत्र और गोबर में कोरोना का इलाज है- अभी तक इस बात के कोई प्रमाण नही मिले है. किसी भी व्यक्ति या पशु के मूत्र एक उत्सर्जित पदार्थ होता है, जिनमे शरीर से निकले हुए बहुत से मलित पदार्थ होते है, जो शरीर को नुकसान भी पहुचा सकते है
5. इससे बचने के लिए सभी को मास्क पहनना पड़ेगा- सभी को मास्क पहनने की कोई जरूरत नही है, केवल जो बीमार है या जो बीमारों की सेवा कर रहे है, उन्हें मास्क पहनने की जरूरत है.अपितु गलत तरीके से पहना गया मास्क या बार बार एक ही मास्क पहनना आपके इन्फेक्शन के रिस्क को बढ़ा सकता है
6.रुमाल या कपड़े को दो परत कर के मास्क बनाया जा सकता है- ऐसा मास्क आपको धूल मिट्टी से बचा सजता है, पर वायरस से नही बचाएगा. इसके लिए काम से कम तीन स्तरिय (थ्री प्लाई) मास्क पहनना चाहिए, जिसकी एक परत जल प्रतिरोधक होती है. घरेलू मास्क आपकी सुरक्षा नही करेंगे.
7. आफ्टर शेव लोशन में पानी मिलाने से घरेलू सेनिटाइजर बना सकते है- नही, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार एक असरकारी हैंड सेनिटाइजर में अल्कोहल का प्रतिशत कम से कम 60% होना चाहिए. वर्तमान में बहुत से आफ्टर सेव लोशन बिना अल्कोहल के आते है, या उनमे अल्कोहल की मात्रा बहुत कम होती है, उसमे भी पानी मिला देने से वो असरकारी नही रहेंगे. घरेलू उपयोग के लिए सेनिटाइजर बनाना आसान तो है, पर इतना भी नही। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट में इसके बहुत सी विधियां बताई गई है जिसे आप देख सकते है.
वैसे भी जहा तक संभव हो साबुन से हाथ धोना सबसे असरदार उपाय है.
8. कोरोना सेंट्रिलिजेड एयर कूलिंग सिस्टम से फैलता है- अभी तक इस बात के कोई प्रमाण नही है, बहुत कम ऐसे पैथोजन है, जो इस तरीके से फैल सकते है, कोरोना वायरस के बारे में अभी ऐसा कोई प्रमाण नही है.

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप से आप थोड़ी सी सावधानी से बच सकते है, पर ऐसी भ्रांतियों न केवल आपके बचाव को कमजोर कर देती है, बल्कि आपको और आपके आस पास वाले के बीमार पड़ने की संभावना भी बढ़ा देते है, क्योंकि आप इन अवैज्ञानिक सावधानियों को असरकारक समझ कर कही न कही लापरवाह हो जाते है. सावधानियां जरूरी है, और उससे भी ज्यादा जरूरी है उनका वैज्ञानिक और प्रामाणिक होना. कोरोब से डरे नही, पर सतर्क रहें.. स्वस्थ रहे, मस्त रहे .
 

रंग खेलने से पहले अपनाएं ये टिप्स, नहीं होगा त्वचा और बालों को नुकसान

रंग खेलने से पहले अपनाएं ये टिप्स, नहीं होगा त्वचा और बालों को नुकसान

होली खेलने में जितना मजा आता है, उतनी ही दिक्कत होती है होली के बाद रंग छुड़ाने में। जिन लोगों को रंग खेलना बहुत पसंद होता है, वे अक्सर ऐसे तरीके खोजने में लगे रहते हैं, जिससे स्किन पर रंग ज्यादा दिनों तक ना टिका रहे और त्वचा को होनेवाले उस नुकसान से बचाया जा सके, जो रंगों में मिले कैमिकल्स की वजह से होता है।

आइए, यहां जानते हैं उन आसान और मजेदार टिप्स के बारे में जो होली रंग त्वचा से चुटकियों में साफ कर सकते हैं...
सरसों और नारियल तेल
ऑफिस और स्कूल्स में छुट्टियां होने लगी हैं, जाहिर है सभी लोग होली का त्योहार मनाने के लिए तैयारी में जुट रहे हैं। तो रंग खरीदते वक्त आप सरसों तेल, नारियल तेल और वैसलीन का छोटा पैक भी खरीद लीजिए। होली वाले दिन रंग खेलने से पहले अपने पूरे शरीर पर सरसों तेल की मालिश कर लीजिए। तेल थोड़ा अधिक और रंगड़कर लगाएं। ताकि त्वचा सोख सके और तेल स्किन पर टिका भी रह सके।
बालों की देखभाल
सरसों तेल से बालों में भी अच्छी तरह मसाज करें। तेल बालों में और सिर की त्वचा पर बहुत अच्छी तरह लगा होना चाहिए। ताकि रंग आपके बालों को डैमेज ना कर सके। साथ ही रंग खेलने के बाद जब आप शैंपू करें तो आपके बालों का नैचरल ऑइल और मॉइश्चराइजिंग डिसबैलंस ना हो।
ऐसे लगाएं नारियल तेल
नारियल तेल आपको तब लगाना है, जब आप होली खेलने के बाद नहा लें। नहाने के पश्चात आप स्किन पर कोई और मॉइश्चराइजर लगाने की जगह नारियल का तेल लगाएं। यह तेल सिर और पूरे शरीर पर लगाएं। इससे आपकी स्किन को जरूरी पोषण मिलेगा। त्वचा पर बाकी बचा रह गया रंग अगली बार नहाते समय निकालने में आसानी होगी। साथ ही किसी तरह की एलर्जी और इंफेक्शन आपको परेशान नहीं कर पाएगा। क्योंकि नारियल तेल ऐंटीफंगल और ऐंटिबैक्टीरियल होता है।
नेल्स की देखभाल
रंग खेलने के दौरान हमारे हाथ और पैर दोनों के ही नाखूनों में रंग भर जाता है। जिन लोगों की स्किन सेंसेटिव होती है, उन्हें नेल्स के आस-पास की स्किन में जलन या खुजली की दिक्कत भी हो जाती है। इससे बचने के लिए अपने नाखूनों और क्यूटिकल्स यानी नाखूनों के तीनों तरफ की त्वचा पर अच्छी तरह से वैसलीन लगा लें। इससे आपकी क्यूटिकल्स में फंसे रंग को निकालने में आसानी होगी और रंग सीधे स्किन को डैमेज भी नहीं कर पाएगा।
लिप और आई केयर ऐसे करें
होठों, आखों और चेहरे की देखभाल के लिए आप होठों पर वैसलीन पैट्रोलियम जेली, लगा लें। चेहरे पर किसी भी तरह के तेल का उपयोग करने से बचें। चेहरे और गर्दन पर पहले मॉइश्चराइजर लगाएं और उसके बाद पैट्रोलियम जैली। इससे आपकी स्किन रंगों से होनेवाले खतरे से पूरी तरह प्रोटैक्ट रहेगी।
नहाते समय अपनाएं ये टिप्स
-रंग खेलने के बाद नहाते समय बालों पर दो बार शैंपू अप्लाई करें। इससे बालों में फंसा रंग भी अच्छी तरह साफ हो पाएगा और आपने जो अतिरिक्त सरसों का तेल लगाया है, वह भी क्लीन हो जाएगा।
-बालों में लगा सरसों का तेल अधिक शैंपू यूज करने से होनेवाले नुकसान और ड्राइनेस से बालों को प्रोटैक्ट करेगा। साथ ही रंग को अधिक समय तक बालों और सिर की स्किन पर टिकने नहीं देगा।
- शैंपू करने के बाद कंडीशनर का उपयोग जरूर करें। इससे बालों को पोषण मिलेगा और उन्हें कैमिकल रंगों के कारण होनेवाली किसी भी तरह की इजिंग, बर्निंग या रैशेज से खुद को प्रोटैक्ट करने में मदद मिलेगी।
-नहाते समय शरीर पर ऐंटिबैक्टीरियल सोप का उपयोग करें। अगर आप अपने डेली ब्यूटी सोप से नहा रहे हैं तो ध्यान रखें कि आपको यह सोप दो बार अपनी बॉडी पर लगाना है। ताकि स्किन पोर्स में फंसा रंग बाहर निकल सके।
- नहाते समय हाथ और पैर के नाखून साफ करने के लिए पैडिक्यॉर ब्रश का उपयोग करें। अगर आपके पास यह ब्रश नहीं है तो किसी पुराने लेकिन साफ टूथब्रश से अपने नाखूनों और आस-पास के क्यूटिकल एरिया में फंसे रंग को साफ करें।
- नारियल तेल वॉशरूम में साथ लेकर जाएं और शॉवर के तुरंत बाद स्किन पोंछकर पूरी बॉडी पर इसे लगा लें। ऐसा इसलिए क्योंक नहाने के बाद हमारी स्किन काफी सॉफ्ट होती है। ऐसे में उसे मॉइश्चराइज करने का अधिक लाभ मिलता है। त्वचा को अच्छी तरह पोषण मिल पाता है।

 

होली में शरीर को रंगों से सुरक्षित रखने के ये आसन उपाए

होली में शरीर को रंगों से सुरक्षित रखने के ये आसन उपाए

1. तेल लगाकर खेलें होली : होली खेलने से पहले खासतौर पर अपने हाथ-पैर, चेहरे, बालों और शरीर पर अच्छे से नारियल या सरसों का तेल या कोई लोशन लगा लें। यदि आपने ऐसा किया है तो होली के रंग छुड़ाने में आसानी होगी।
2. रंग छुड़ाने से पहले गीले शरीर को सुखने दें फिर सबसे पहले कपड़ों और सिर से जितना सूखा रंग झाड़ सकते हैं, निकाल दें। उसके बाद सूखे, मुलायम कपड़े से रंग साफ कर लें। इसके बाद ही नहाएं।
3. मुलतानी मिट्टी, बेसन या आटे में नींबू का रस डालकर मिला लें और उसे संपूर्ण शरीर पर अच्छे से मल लें। सुखने के बाद उसे धीरे धीरे रगड़ कर निकालें। इससे अधिकतर रंग आसानी से निकल जाएगा।
4. मूली का रस निकालकर उसमें दूध व बेसन मिलाकर पेस्ट बनाएं और उसे संपूर्ण शरीर पर अच्छे से मल लें। सुखने के बाद उसे धीरे धीरे रगड़ कर निकालें। इससे अधिकतर रंग आसानी से निकल जाएगा।
5.स्पंज से नहाएं : नहाते वक्त कुछ लोग डिटर्जेंट का उपयोग करते हैं जो कि गलत है। आप किसी अच्छे साबून का प्रयोग करें। पहले संपूर्ण शरीर पर अच्छे से साबून लगा लें फिर उसे हल्के हल्के स्पंज के बड़े-बड़े टुकड़ों से रगड़े। यदि प्राकृतिक रंग होगा तो जल्दी से निकल जाएगा लेकिन यदि केमिकल रंग होगा तो देर लगेगी। केमिकल रंगों को जबरन निकालने का प्रयास ना करें। वह वक्त के साथ खुद ब खुद ही निकल जाएंगे। जबरन निकालने में त्वचा को नुकसान पहुंचेगा।
 

अगर आपको होली पर भांग का नशा चढ़ गया है जल्द राहत पाना है तो करे ये उपाए

अगर आपको होली पर भांग का नशा चढ़ गया है जल्द राहत पाना है तो करे ये उपाए

होली में जो लोग भांग पीते हैं और कुछ ज्यादा ही पी जाते हैं तो कैसे उसका नशा चुटकियों में उतारें
ऐसे उतारे भांग का नशा
1.यदि आपने ज्यादा भांग नहीं पी है तो भुने हुए चने खाने से उसका नशा उतर जाएगा। बस यह ध्यान रखें की कोई भी मीठे पदार्थ का सेवन ना करें।
2.यदि ज्यादा चढ़ गई है तो अरहर की कच्ची दाल को पीसकर उसको पानी में घोल लें और उसका सेवन करें।
3. भांग उतारने के लिए खटाई का सेवन करना सबसे बेहतर तरीका है। इसके लिए आप संतरे, नींबू, छाछ, दही या फिर इमली का पना बनाकर उसका सेवन कर सकते हैं।
4. इसके अलावा सरसों का तेल हल्का गुनगुना करके संबंधित व्यक्ति के कान में डाल दें। एक-दो बूंद सरसों का तेल दोनों कानों में डालें। बेशक इन तरीकों से भांग का नशा उतर जाएगा।
5. कई लोग घी के सेवन को भी भांग के इलाज के तौर पर प्रयोग करते हैं। इसके लिए शुद्ध देशी घी का अत्यधिक मात्रा में सेवन करना बेहद जरूरी है, ताकि भांग का नशा उतरने में आसानी हो।
 

होली की मस्ती न पड़े भारी, इसलिये ऐसे रखें बच्चों की सेफ्टी का ख्याल

होली की मस्ती न पड़े भारी, इसलिये ऐसे रखें बच्चों की सेफ्टी का ख्याल

होली का दिन उत्साह और मौज मस्ती से भरा होता है। इस दिन बड़ों से ज्यादा छोटे बच्चे उत्साहित दिखते हैं। रंग बिरंगी पिचकारियों के साथ जब वह उधम-चौकड़ी मचाते हैं तो मां-बाप का दिल थोड़ा सा बेचैन हो जाता है। मौज मस्ती के चक्कर में कहीं बच्चों के साथ पैरेंट्स की भी होली फीकी न पड़ जाए इसके लिये कुछ बातों का ख्याल जरूर रखें। आपकी जरा सी भी लापरवाही आपके बच्चों पर भारी पड़ सकती है। होली के दौरान माता पिता बच्चों को लेकर किस तरह की सावधानी बरतें जानें यहां...
अपने बच्चे पर नजर रखें
इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि जब भी आपका बच्चा रंग या पानी से होली खेले तो घर का कोई न कोई बड़ा उसके आस पास रहे। खासकर तब जब वहां पर पानी से भरा कोई ड्रम या टब मौजूद हो। बच्चा अपनी पिचकारी में पानी भरने के लिये जब झुकेगा तब टब या ड्रम में गिर सकता है। इसलिए, हमेशा अपने बच्चे के करीब रहें। इससे उन दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी जो अन्यथा प्रबल हो सकती हैं।
इको-फ्रेंडली कलर्स का इस्तेमाल करें
बच्चे के लिये हमेशा प्राकृतिक रंगों का ही चयन करें। आप हल्दी, चंदन, मेंहदी आदि का उपयोग करके घर पर हर्बल रंग बना सकते हैं। कैमिकल रंगों का उपयोग करने से बचें जिनमें हानिकारक रसायन होते हैं। ये बच्चों में स्किन एलर्जी या रैश का कारण बन सकते हैं। ऐसे रंग धोने में भी काफी आसान होते हैं और त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।
पिचकारियों का सेफली यूज करें
अपने बच्चे को इस तरह से पिचकारियों का इस्तेमाल करने की सलाह दें जिससे दूसरों को कोई नुकसान न हो। उसे अन्य बच्चों की आंखों-कानों तथा चेहरे पर पानी डालने से मना करें।
वाटर बैलून से बचें
माना कि गुब्बारे के साथ खेलने में मजा आता है लेकिन यह उस व्यक्ति को चोट पहुंचा सकता है जिस पर गुब्बारा फेंका जा रहा है। जिस प्रभाव के साथ यह उन पर पड़ता है, वह त्वचा, आंखों या कानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है
रंगों को बच्चे के मुंह से रखें दूर
छोटे बच्चे अक्सर चीजों को अपने मुंह में डाल कर टेस्ट करना चाहते हैं। लेकिन बच्चों को अपने मुंह में रंग न डालना सिखाएं। इन रंगों में हानिकारक रसायन होते हैं, जिनका सेवन करने पर उल्टी या फिर मौत भी हो सकती है।
सही तरह के कपड़े पहनाएं
सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा ऐसे कपड़े पहन कर होली खेलने जाए जिसमें उसके हाथ पैर पूरी तरह से कवर किये हों। यह बात लड़के और लड़कियों दोनों के लिये है। यह मुख्य रूप से त्वचा के साथ सीधे रंगों के संपर्क से बचने के लिए है।
बच्चों को घर के बाहर न भेजें
होली के मौके पर सड़कों पर काफी हुड़दंग मचा रहता है। अगर बच्चा अपने किसी फ्रेंड के घर पर जा कर होली खेलने की जिद कर रहा है तो आप भी उसके साथ जाएं। मगर उसे अकेले घर के बाहर छोडऩा बिल्कुल भी सही नहीं है। यदि आप घर पर होली खेलने का प्लान बना रहे हैं तो केवल उन्हीं को बुलाएं जिस पर आपको भरोसा हो। क्योंकि रंगों की आड़ में कुछ लोग गलत भी करते हैं।
 

कोरोनॉ वायरस का बचाव होमियोपैथी से संभव :डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी

कोरोनॉ वायरस का बचाव होमियोपैथी से संभव :डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी

कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है. इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है. इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था. डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकना वाला कोई टीका नहीं है.

 क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?

इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है. यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था. इसके दूसरे देशों में पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है.

 क्या हैं इससे बचाव के उपाय?

कोरोना वायरस से बचने के लिए,

हाथों को साबुन से धोना चाहिए.

अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें.

जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें.

अंडे और मांस के सेवन से बचें.

जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.

 होमियोपैथिक उपचार

डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी के अनुसार

होमियोपैथी उपचार पूर्ण रूप से लक्षण पर आधारित होती है किसी भी  बीमारियों के लक्षणों को मिलान कर चुनी हुई होमियोपैथी दवाइया देने से मरीज की उस बीमारी से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है, जिससे उसे तत्काल लाभ मिलता है नीचे दी हुई दवाइय का उपयोग लक्षण मिलान कर दिया जा सकता है

 होम्योपथिक दवाएं

होम्योपथी में रोग के नाम से कोई दवा नहीं होती है, रोगी के लक्षण के अनुसार चिकित्सकीय सलाह के बाद ये दवायें दे सकते हैं।

 

1)  आर्सेनिक एल्बम 30 /200यह दवा रोग के शुरुआत में उपयोगी है। मांस खाने के कारण होने वाले रोग, सांस लेने में तकलीफ, नाक से पतला पानी जैसा बहे, आंखों में जलन हो, तेज ज्वर के साथ बेचैनी, कमजोरी लगे, बुखार कभी ठीक हो जाता है। कभी फिर से हो जाता है। बहुत तेज प्यास लगती है। (यह दवा रात को नहीं खाएं)

 

2)  एकोनाएट (Aconite)30अचानक से और तीव्र गति से होने वाला बुखार, जिसमें बहुत ज्यादा शारीरिक व मानसिक बेचैनी होती है। बहुत ज्यादा छीकें आना, आँखें लाल सूजी हुई, गले में दर्द व जलन। (इस दवा को रात कोनहीं खाएं)

 

3)  नक्स -वोमिका रोगी को बहुत ठण्ड लगती है। कितनी भी गर्मी पहुंचाई जाए ठण्ड नहीं जाती है, शरीर में दर्द, सर्दी जुकाम, दिन में नाक से पानी बहता है और रात को नाक बंद हो जाती है, खांसी के साथ छाती में दबाव, सांस लेने में तकलीफ, खांसी के कारण सिरदर्द, आँखों से पानी गिरना।

4) जेल्सिमियम( Gelsemium) सारे शरीर में दर्द रहता है। रोगी नींद जैसी हालत में पड़ा रहता है, सिरदर्द, खांसी, जुकाम, आँखों में दर्द, सिर के पिछले भाग में दर्द, सिरदर्द के साथ गर्दन व कंधे में दर्द, छींकें, गले में निगलने में दर्द, बुखार में बहुत ज्यादा कांपता है, प्यास बिलकुल नहीं लगती है, चक्कर आते हैं।

5) ब्रायोनिया  प्यास बहुत ज्यादा लगती है, सारे शरीर के मसल्स में दर्द जो कि हिलने-डुलने से बढ़ता है और आराम करने से ठीक होता है। सिरदर्द के साथ पसलियों में दर्द, सूखी खांसी, उल्टी के साथ छाती में दर्द, चिड़चिड़ा होता है, गले में दर्द होता है, बलगम रक्त के रंग का होता है।

 

 

6)  बेपटीसिया धीमा बुखार, मसल्स में बहुत ज्यादा दर्द, सांस, पेशाब, पसीना आदि सभी स्त्राव से बहुत ज्यादा दुर्गन्ध आती है। महामारी के रूप में फैलने वाला इन्फ़्लुएन्ज़ा। लगता है कि शरीर टूट गया है, बड़बड़ाता है, बात करते-करते सो जाता है, मुहं में कड़वा स्वाद, गले में खराश, दम घुट जाने जैसा लगे, कमजोरी बहुत ज्यादा लगे।

 

7) सेबेडिला  सर्दी जुकाम, चक्कर बहुत ज्यादा छींकें, नींद नहीं आती है, आँखें लाल व जलन करती हैं, नाक से पतला बहता पानी, सर्दी के कारण सुनने में तकलीफ, गले में बहुत ज्यादा दर्द, गरम चीजें खाने-पीने से आराम, सूखी खाँसी।

 

8) एलियम -सीपा नाक से तीखा स्त्राव, माथे में दर्द, आँखें बहुत ज्यादा लाल व पानी गिरता है, पलकों में जलन, कान में दर्द, छींकें, नाक से बहुत ज्यादा पानी आता है, गले में दर्द, जोड़ों में दर्द होता है।

9 युपटोरियम-पर्फोलियम इन्फ़्लुएन्ज़ा के साथ सारे मसल्स व हड्डियों में दर्द, छींकें, गले व छाती में दर्द, बलगमयुक्त खाँसी, सुबह 7 से 9 बजे ठण्ड लगती है।

 

 प्रतिरोधकदवा preventive medicine

1) थूजा (THUJA)200

2) जेल्सिमियम( GELSEMIUM)

3) नक्स वोमिका

4) इन्फ़्लुएन्ज़िउम (INFLUENZIU

5) आर्सेनिक एल्बम

 

नोट होम्योपथी में रोग के कारण को दूर कर के रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।

 

अधिक जानकारी के लिए आप संपर्क कर सकते है :-

 

 

डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी

 

होमियोपैथिक चिकित्सक

डॉ त्रिवेदिस होमियोपैथी

लिली चौक,पुरानी बस्ती रायपुर छत्तीसगढ़

8462030001

खाली पेट चुकंदर खाने से बढ़ेगा हीमोग्लोबिन, कभी नहीं होंगी ये गंभीर बीमारियां

खाली पेट चुकंदर खाने से बढ़ेगा हीमोग्लोबिन, कभी नहीं होंगी ये गंभीर बीमारियां

सलाद की बात हो और चुकंदर का जिक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। चुकंदर आपको लगभग सभी मौसम में मिल जाएगा। डॉक्टरों के द्वारा इसे डाइट में शामिल करने की सलाह भी दी जाती है। इसे खाने के कई सारे फायदे हैं, जो आपको कई बीमारियों से बचाए रखने में मदद करेंगे। 


चुकंदर खाने से हीमोग्लोबिन की मात्रा तो बढ़ती ही है, इसके अलावा भी इसके कई सारे स्वास्थ्य फायदे हैं। नीचे जाने चुकंदर खाना आपको कितनी बीमारियों से बचाए रखने का काम कर सकता है।

हीमोग्लोबिन बढ़ाने में करेगा मदद-
खून का लाल रंग, खून में मौजूद हीमोग्लोबिन के कारण ही होता है। यहां तक कि अगर आपके खून में हीमोग्लोबिन की पर्याप्त मात्रा नहीं है, तो आप किसी को ब्लड भी नहीं डोनेट कर सकते हैं। हालांकि चुकंदर खाने से हीमोग्लोबिन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। इसलिए हीमोग्लोबिन की कमी से बचने के लिए आप भी खाने में चुकंदर को शामिल कर सकते हैं।

कैंसर से बचाता है चुकंदर-
चुकंदर खाने से कैंसर होने का खतरा भी कई गुना तक कम हो जाता है। दरअसल चुकंदर में कैंसर को जन्म देने वाली कोशिकाओं को नष्ट करने का गुण पाया जाता है। इसके साथ-साथ एक वैज्ञानिक अध्ययन में यह भी देखा गया कि चुकंदर खाने से प्रोस्टेट कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी खत्म हो जाता है। साथ ही यह शरीर में नई स्वस्थ कोशिकाओं को बनाने में भी मदद करता है।

त्वचा को रखेगा चमकदार-
चुकंदर का सेवन करने से त्वचा को चमकदार बनाने में भी मदद मिलती है। चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को निखारने और एंटीएजिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है। इससे आपकी त्वचा खूबसूरत तो बनी ही रहती है साथ ही अगर आपकी त्वचा पर झुर्रियां भी मौजूद हैं तो आपको उससे भी राहत मिल जाएगी।

दांतों और हड्डियों के लिए चुकंदर के फायदे-
दांतों और हड्डियों के लिए भी चुकंदर का सेवन बहुत फायदेमंद हो सकता है। दरअसल चुकंदर में कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है। यह पोषक तत्व न केवल दांतों के लिए बल्कि हड्डियों के लिए भी बहुत लाभदायक होता है। इसका सेवन करने से दांतों और हड्डियों को सीधे रूप से कैल्शियम की पूर्ति होती है और इन्हें स्वस्थ बनाने में मदद मिलती है। 

ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है चुकंदर-
ब्लड प्रेशर को कम करने में भी चुकंदर बहुत लाभकारी है। चुकंदर में नाइट्रेट नामक पोषक तत्व पाया जाता है। यह पोषक तत्व हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। इसलिए आपको भी अगर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो आप चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। 

बालों के लिए भी है बहुत फायदेमंद-
बालों के स्वास्थ्य के लिए भी चुकंदर के बहुत फायदे हैं। चुकंदर में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-ए, विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व बालों को झडऩे से बचाने के साथ-साथ स्कैल्प में होने वाली खुजली से भी राहत दिलाने का काम करते हैं। स्वस्थ और घने बालों के लिए डॉक्टरों के द्वारा भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।