अगर आपके घर में भी किसी को ज़रूरत से ज्यादा सेल्फी लेने का शौक है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि हो सकता है। अब आपको सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि आपका सेल्फी खींचने का शौक आपको बड़े खतरे में डाल सकता है.....
डॉक्टर्स के मुताबिक, सेल्फी का असर स्किन पर इतना ज्यादा पड़ता है कि जिस साइड से आप अक्सर सेल्फी खींचती है, उस साइड की स्किन दूसरी साइड की स्किन से ज्यादा ड्राई हो जाती है। हाल ही में आए एक सर्वे के मुताबिक, मोबाइल फोन से पडऩे वाली लाइट और रेडिएशन स्किन को धूप की किरणों से 3 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
सेल्फी लेने की यह आदत अगर लत में बदल जाए, तो आप सेल्फाइटिस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं। इस बीमारी से पीडि़त महिला के दिमाग में हमेशा यह भूत सवार रहता है कि किस जगह सेल्फी लें और कितनी जल्दी उसे सोशल मीडिया पर डालें। धीरे-धीरे यह बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि यह लत बन जाती है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, लगातार अपनी फोटो लेते रहने की लत 'सेल्फी एल्बो’ की वजह बन सकती है। यह एक नई तरह की बीमारी है, जिसमें कुहनी का दर्द सताने लगता है।
स्किन स्पेशलिस्ट के मुताबिक, चेहरे पर लगातार स्मार्टफोन की लाइट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से स्किन बूढ़ी होने लगती है जिससे जल्दी रिंकल्स पडऩे लगते हैं। मोबाइल फोन की तरंगें सीधे डीएनए को नुकसान पहुंचाती है, जिससे स्किन की नैचरल रिपेयर क्षमता दिन प्रतिदिन कम होती जाती है। जिससे आपकी स्किन पर कोई पिंपल्स या दाग धब्बे हो जाएं, तो उन्हें ठीक होने में महीनों लग जाते हैं।
दरअसल, फोन से निकलने वाली ये तरंगे अलग तरह की होती हैं, जिसमें सनस्क्रीन भी कोई काम नहीं करता। सनस्क्रीन आपकी त्वचा की बाहरी लेयर को धूप से बचाता है, जबकि मोबाइल की तरंगे स्किन के अंदर की लेयर तक को प्रभावित करती है, जिससे सनस्क्रीन भी इस नुकसान से आपको नहीं उभार पाता।
स्तन कैंसर के निदान के लिए हार्मोन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों ने डीप लर्निंग (डीएल) नेटवर्क पर आधारित एक वर्गीकरण पद्धति विकसित की है। यह पद्धति शरीर में स्तन कैंसर के बढ़ने का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाने के लिए एस्ट्रोजन रिसेप्टर की स्थिति का निर्धारण करने के लिए अब तक उपयोग में लाए जा रहे तरीकों का एक बेहतरीन विकल्प है जो पूरी तरह से स्वचालित प्रणाली पर आधारित है। स्तन कैंसर सबसे खतरनाक कैंसर है। भारत की ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कैंसर से पीड़ित महिलाओं में से 14 प्रतिशत महिलाएं स्तन कैंसर से ग्रसित होती हैं। देश में स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं के बचने की दर हालांकि 60 प्रतिशत बताई गई है लेकिन इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा महिलाएं 60 से कम उम्र वाली हैं। यदि स्तन कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में लग जाए तो इससे बचाव के उपाय समय रहते किए जा सकते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान “विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी उच्च अध्ययन संस्थान” (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने स्तन कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाने के लिए इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (आईएचसी) नमूने की मदद से एस्ट्रोजन या प्रोजेस्टेरोन की स्थिति के अध्ययन के वास्ते एक नई किस्म की डीप लर्निंग (डीएल) पद्धति विकसित की है। इस नई पद्धति की खोज डाक्टर लिपी बी महंत और उनकी टीम ने कैंसर के बारे में गहन अध्ययन करने वाले एक प्रमुख संस्थान बी बोरुआ कैंसर संस्थान के चिकित्सकों के सहयोग से की है। एक व्यावहारिक व्यावसायिक सॉफ्टवेयर के रूप में इसके इस्तेमाल की बड़ी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस अध्ययन को एक जानी मानी पत्रिका "एप्लाइड सॉफ्ट कम्प्यूटिंग" में प्रकाशित किया जा रहा है। स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे प्रचलित विधि बायोप्सी है। रोगी के शरीर से लिए गए बायोप्सी नमूने का माइक्रोस्कोप के जरिए सूक्ष्म परीक्षण कर कैंसर का पता लगाया जाता है। कैंसर का पता लगाने के लिए किए जाने वाले परीक्षण में आईएचसी मार्कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उपयोग एक रोगसूचक मार्कर के रूप में किया जाता है। इसमें कैंसर के मुख्य केन्द्र या न्यूकलिक की पहचान के लिए विशेष प्रकार के रंग का इस्तेमाल किया जाता है। इस रंग की तीव्रता अलग अलग होती है और इसी के आधार पर रोग की गंभीरता को 0 से 3 तक की श्रेणी में परिभाषित किया जाता है। रंगो की तीव्रता के आधार पर गणना करने की यह प्रणाली आलरेड और एच स्कोर कहलाती है। नैदानिक परीक्षणों के दौरान इनके आधार पर ही एस्ट्रोजेन रिसेप्टर और प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जाता है। इस प्रतिक्रिया के आधार पर ही शरीर में कैंसर के फैलाव की संभावनाओं तथा भविष्य में इसके दोबारा होने के खतरे को भांपा जाता है। इसने वैज्ञानिकों की टीम को उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों की मदद से इसके प्रबंधन के लिए और प्रभावी समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। टीम ने एक एल्गोरिथम विकसित किया जो यह बताने में मदद करता है कि शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं की सतह पर हार्मोन रिसेप्टर्स हैं या नहीं। इस अध्ययन ने स्तन ऊतकों की तस्वीरों में से कैंसर के नाभिक क्षेत्र को पहचान कर उसे आसानी से अलग करने की एक नई विधि खोज निकाली। यह प्रक्रिया कैंसर का पता लगाने में मशीन लर्निंग (एमएल)मॉडल के तीनों निष्कर्षों को एकीकृत करती है।
बच्चों को समुचित पोषण न मिले तो यह उनमें ऊर्जा की कमी, कमजोर याद्दाश्त और आलस जैसी समस्याओं के हमले करवा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों के खान-पान और उनमें पोषण की मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाए। आज हम आपको पांच ऐसे हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में बताने वाले हैं जो आपके बच्चों के दिमाग और सेहत को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। ये उनकी परीक्षाओं के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में मददगार हो सकते हैं....
1. बादाम का दूध :- बादाम दूध याद्दाश्त बढ़ाने का सबसे कारगर नुस्खा माना जाता है। बादाम में पाया जाने वाला प्रोटीन संज्ञानात्मक क्षमता को बढ़ाने में मददगार होता है। उबले दूध में कुछ बादाम पीसकर डाल लें और हर रोज इसे बच्चे को पीने के लिए दें।
2. ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी :- ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स दिमाग की कोशिकाओं को क्षततिग्रस्त होने से बचाते हैं। इसलिए कुछ ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी को पीसकर एक कप दही और दूध के साथ मिलाकर मिक्सर में पीस लें। अब इसे अपने बच्चे को पीने के लिए दें।
3. डार्क चॉकलेट शेक :- अगर आप अपने बच्चे की एकाग्रता और उसके समस्याओं के सुलझाने का कौशल बढ़ाना चाहते हैं तो उसे हर रोज डार्क चॉकलेट शेक पीने के लिए दें। शेक में इस्तेमाल होने वाला दूध दिमाग के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ऐसे में परीक्षाओं के दौरान यह बच्चों के लिए लाभदेह पेय हो सकता है।
4. चुकंदर का जूस :- चुकंदर का जूस पोषक तत्वों का भंडार होता है। इसे आप बच्चों की परीक्षाओं के दौरान सेवन करने के लिए दे सकते हैं। इसमें विटामिन ए, के, सी, बीटा कैरोटिन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फोलेट और पॉलीफेनॉल्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो आपके बच्चों के दिमाग पर बेहतरीन असर डालते हैं।
5. गुड़ की चाय :- गुड़ एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य है। परीक्षाओं के दौरान बच्चों को गुड़ की चाय बनाकर पिलाया जा सकता है। यह उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होता है।
Weight loss: शरीर का अतिरिक्त फैट आपके स्वास्थ्य के लिए कभी अच्छा नहीं रहा है. आपके पेट के आसपास का फैट बहुत नुकसानदेह हो सकता है और कई स्वास्थ्य की पेचीदगी की वजह बन सकता है. पेट का फैट दिल की बीमारियों और अन्य पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है. ये आपके ब्लड प्रेशर को भी प्रभावित करता है. आपके पेट के इर्दगिर्द जमा फैट हाई ब्लड शुगर लेवल का भी जिम्मेदार होता है. इससे पाचन क्रिया खराब है और हार्मोन का असंतुलन भी होता है.
समग्र स्वस्थ रहने के लिए आपको गंभीरतापूर्वक देर होने से पहले पेट की चर्बी कम करने पर ध्यान देना चाहिए. अगर आपके पास पेट का अतिरिक्त फैट है, तब कुछ बातों को दिमाग में रखना चाहिए. सबसे पहले खाने को सही बनाना सुनिश्चित करना चाहिए. अल्कोहल पीने और धूम्रपान से बचें. आपको पर्याप्त नींद और आराम लेना चाहिए, लेकिन सुनिश्चित करें आप उसे ज्यादा न करें. ध्यान रखना चाहिए कि तनाव भी एक बड़ा फैक्टर वजन बढ़ने का हो सकता है, इसलिए आपको तनाव का लेवल काबू में रखना चाहिए.
ये जरूरी है कि आप व्यायाम नियमत करें या कम से कम किसी तरह की शारीरिक गतिविधि को अपनाएं जिससे फैट आपके शरीर में जमा होने से रुक सके. स्वस्थ जिंदगी और अच्छी जीवनशैली अतिरिक्त वजन से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकते हैं. आपको जानना चाहिए कि खास फूड्स आप अपनी रोजाना की डाइट की शामिल कर सकते हैं जिससे आपको पेट का फैट तेजी से पिघलाने में मदद मिलेगी.
पेट के फैट को आसानी और तेजी से घुलाने में मददगार सब्जी
पालक- पालक ज्यादा पौष्टिक हरी सब्जी है. रिसर्च से साबित हुआ है कि उसमें फैट घुलानेवाले गुण होते हैं. ये बहुत ज्यादा आपके पेट के फैट को जलाने के लिए मुफीद है. आप पालक को उबालकर या पकाकर खा सकते हैं. दोनों तरीके आपके अतिरिक्त फैट को कम करने और स्वस्थ रहने में मदद करेंगे.
ब्रोकली- ब्रोकली उच्च गुणवत्ता वाला फाइबर है. ये विटामिन और मिनलर में भरपूर होता है. ब्रोकली में फाइटोकेमिकल्स भी होता है जो शरीर के फैट से लड़ता है. ब्रोकली में मौजूद फोलेट आपके शरीर के अंगों के इर्दगिर्द ब्लोटिंग को कम करने में मदद करता है.
गाजर- गाजर कैलोरी में कम होने के लिए लोकप्रिय है. अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तब आपको जरूर इस सब्जी को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करना चाहिए. ये फाइबर में भरपूर होता है जिसका मतलब हुआ कि ये वजन घटाने के लिए है.
खीरा- खीरा आपके शरीर के लिए डिटॉक्स का काम करता है. ये आपको हाइड्रेटेड रखता है और अतिरिक्त भोजन के लिए आपकी इच्छा पर अंकुश लगाता है. इसमें फैट को जलानेवाले रस पाया जाता है और देर रात की भूख का खात्मा भी करता है. उसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है. उसे तेजी से वजन घटाने के लिए रोजाना इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
नईदिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च, 2021 को प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि (PMSSN) को एक एकल गैर-चूक योग्य आरक्षित निधि (single non-lapsable reserve fund) के रूप में मंजूरी दी है। यह नॉन-लैप्सबल रिजर्व फंड है। इस फंड में स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर में स्वास्थ्य की हिस्सेदारी से प्राप्त आय शामिल होगी। इस फण्ड में इस राजस्व का उपयोग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सहित स्वास्थ्य मंत्रालय की फ्लैगशिप योजनाओं और आपातकालीन और आपदा सहायता प्रतिक्रियाओं के लिए किया जाएगा। इस फंड को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाएगा। इस फंड में आपातकालीन, आपदा तैयारियों और स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान प्रतिक्रियाएं भी शामिल हैं। यह फण्ड महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फंड सार्वभौमिक और सस्ती स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच को सुनिश्चित करेगा। स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण संपत्ति है क्योंकि यह विकास के बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद करता है। बेहतर स्वास्थ्य बेहतर उत्पादकता की ओर ले जाता है। इसलिए, इस कोष की आवश्यकता थी ताकि सभी के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके।
सांस की बदबू कोई बड़ी समस्या नहीं है, मगर ये आपके व्यक्तित्व को जरूर प्रभावित करती है. उसके चलते लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है. कुल्ली करने से अस्थायी तौर पर समस्या से छुटकारा पाना संभव है, मगर ये काम हर जगह नहीं किया जा सकता. अगर आप भी सांस में बदबू की समस्या से ग्रसित हैं, तो आपके लिए चंद नुस्खे मुफीद साबित होंगे.
पानी
आप पहले ही जानते हैं कि पानी पीना फायदेमंद है. पानी आपको हाइड्रेटेड रखता है, दिमाग के स्वास्थ्य को बढ़ाने से लेकर स्किन की लोच को सुधारने तक. लेकिन ये सांस के लिए प्राकृतिक फ्रेशनर का भी काम करता है. मुंह की नमी बरकरार रहने से जुबान पर भोजन के अंश और मृत कोशिकाएं भी इकट्ठा नहीं होंगी. ये मुंह में बैक्टीरिया की वृद्धि को भी रोकेगा.
दही
दही में मौजूद बैक्टीरिया पाचन तंत्र की मदद करता है, विशेषकर दूध से बने प्रोडक्ट्स को पचाने में. उससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और सांस की बदबू के मुद्दे कम होने की संभावना रहती है. दही में प्रोबायोटिक्स पाया जाता है और ये अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो आपके मुंह में खराब बैक्टीरिया की संख्या को अच्छे बैक्टीरिया में बदलने का काम करते हैं. अच्छे बैक्टीरिया की स्वस्थ संख्या स्वाभाविक रूप से आपकी सांस को ताजा करेगी.
दूध
दही के साथ दूध भी सांस की बदबू से लड़ने में मदद कर सकता है. हमें दूध में मौजूद फैट और पानी का सांस को ताजगी देने की क्षमता के लिए आभारी होना चाहिए, खासकर मुंह में जब प्यास या लहसुन की बदबू जिम्मेदार हो. सांस की बदबू दूर करने के अलावा, दूध के आश्चर्यजनक लाभी भी हैं.
ग्रीन टी
रिसर्च से साबित हुआ है कि ग्रीन में मौजूद पॉलीफिनोल प्राकृतिक रूप से सांस को ताजा करने में मदद करता है. इस सच्चाई के अलावा ये दांत में सड़न को रोकने, खास प्रकार के मुंह के कैंसर से लड़ने और वजन में कमी के प्रयास को बढ़ाने में भी भूमिका अदा कर सकता है. ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स सांस की बदबू के जिम्मेदार बैक्टीरिया से लड़ाई में भी मदद करते हैं.
सेब
अगर आप लहसुन खाना पसंद करते हैं, तो अपनी सांस को सुखद बनाए रखने के लिए एक सेब खाएं. ये लहसुन से सांस में पैदा होनेवाली बदबू का मुकाबला करता है. रिसर्च में बताया गया है कि जिन लोगों ने सेब खाया, उनकी सांस की बदबू 30 मिनट के अंदर स्पष्ट तौर से कम हो गई.
नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
पॉपकॉर्न कई तरह के होते हैं। थिएटर में मूवी देखते वक्त या घर में इन्स्टैंट स्नैक्स के रूप में खूब इस्तेमाल किए जाने वाले पॉपकॉर्न्स हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। तो चलिए जानते हैं कि वे फायदे क्या-क्या हैं....
कोलेस्ट्रॉल करे कम :-
पॉपकॉर्न में पाया जाने वाला फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और धमनियों को भी चौड़ा करता है। इस वजह से शरीर में रक्त प्रवाह दुरुस्त होता है और दिल पर दबाव भी कम होता है। जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
कैंसर से सुरक्षा :-
पॉपकॉर्न में पॉलीफेनोलिक कंपाउंड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि एक पॉवरफुल एंटी-ऑक्सीडेंट है। यह कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स से मुक्ति दिलाने का काम करता है।
मोटापा कम करे :-
पॉपकॉर्न से बहुत कम मात्रा में कैलोरी प्राप्त होती है। एक कप पॉपकॉर्न खाने से मात्र तीस कैलोरी ही मिलती है। यह आलू के चिप्स से मिलने वाली कैलोरी से 5 गुना कम होती है। इसमें मौजूद तेल भी शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसे में भूख लगने पर पॉपकॉर्न खाना ज्यादा सही है।
हड्डियां रखे मजबूत :-
पॉपकॉर्न में मैंगनीज काफी मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने में कारगर है। ऐसे में पॉपकॉर्न का सेवन आगे चलकर आपको ऑस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस और ओस्टिओआर्थराइटिस आदि से बचाने में मदद कर सकता है।
डॉयबिटीज के लिए सही फूड :-
पॉपकॉर्न में मौजूद फाइबर शरीर में ब्लड शुगर पर अच्छा प्रभाव डालता है। यह ब्लड शुगर और इंसुलिन को नियमित करने का काम करता है। ऐसे में डायबिटीज के रोगियों के लिए पॉपकॉर्न का सेवन बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
अधिकांश लोग खाने के लिए कच्चा पपीता नहीं खरीदते हैं और पका पपीता ही घर लाकर खाते हैं। लेकिन जब आपको कच्चा पपीता खाने के फायदों के बारे में पता चलेगा तो आप इसे भी खरीदकर घर लाने लगेंगे और खाना शुरू कर देंगे।
आइए, जानते हैं कच्चा पपीता खाने के 7 फायदे -
1 पके पपीते की तरह ही कच्चा पपीता भी पेट के रोगों में बेहद फायदेमंद है। ये गैस, पेटदर्द और पाचन की समस्याओं में फायदेमंद है। और बेहतर पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी है।
2 कच्चा पपीता गठिया और जोड़ों की समस्याओं में लाभदायक होता है। इसे ग्रीन टी के साथ उबालकर बनाई गई चाय का सेवन गठिया को ठीक करने में मदद करता है।
3 कच्चा पपीता आपका वजन कम करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। जी हां, इसका नियमित सेवन तेजी से फैट बर्न करने में सहायक है जिससे आपका वजन जल्दी कम होता है।
4 डायबिटीज के लिए भी कच्चे पपीते के फायदे कुछ कम नहीं हैं। यह खून में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करने में मदद करता है और आपकर डायबिटीज कंट्रोल में रहती है।
5 इसका एक बेहतरीन फायदा ये भी है कि यह यूरिन इंफेक्शन से बचाव और उसे ठीक करने में बेहद फायदेमंद है। इसका नियमित इस्तेमाल आपको कभी ये समस्या नहीं होने देगा।
6 पीलिया हो या फिर लिवर संबंधी अन्य कोई समस्या, कच्चे पपीते का सेवन आपको गजब का फायदा पहुंचाता है।
7 और तो और विटामिन ई, सी और ए के साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट, फीटोन्यूट्रिएंट्स और इसमें मौजूद अन्य पोषक तत्व, कैंसर से बचाव के साथ ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा करते हैं।
नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
बाल झड़ने की समस्या एक आम समस्या बनती जा रही है. लोग बाल झड़ने पर काफी चिंतित महसूस करते हैं. कभी कभी समय से पहले बाल झड़ने की वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बाल झड़ने कई कई कारण होते हैं. बालों के गिरने या कमजोर होने का मुख्य कारक 1800 कैलोरी से नीचे की डायट है.
एक स्टडी के अनुसार बताया गया है कि हमारे सिर पर एक लाख से भी ज्यादा रोम छिद्र होते हैं. जिनसे बालों का गिरना और उगना जारी रहता है. वहीं देखरेख और पोषण की कमी के कारण बालों के गिरने की गति तेज हो जाती है और नए बालों का आना रुक जाता है. गंजेपन या फिर बालों के झरने के पीछे मुख्य कारण शरीर में विटामिन, प्रोटीन की कमी के साथ ही साथ बहुत अधिक तनाव, धूम्रपान, हार्मोनल असंतुलन, आनुवांशिक कारक भी हो सकते हैं. इससे बचने के लिए बाजार में कई प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं जिनसे गिरते बालों को रोका जा सकता है. वहीं कई घरेलू उपचार भी हैं जिनकी मदद से हम बालों को गिरने से रोकने के साथ ही साथ उन्हें स्वस्थ भी बना सकते हैं.
नियमित रूप से करें तेल की मालिश
सिर पर की गई तेल की मालिश से भी बालों को उचित पोषण दिया जा सकता है. हफ्ते में तीन से चार दिन तक की गई तेल की मालिश बालों की जड़ों को लंबी उम्र देती है. हमें सर की मालिश करने के लिए तेल के प्रकार को काफी सावधानी से चुनना चाहिए. सर की मालिश करने के लिए हमें सरसों और बादाम तेल को प्राथमिकता देनी चाहिए.
खानपान का रखें खास ख्याल
खाने में प्रोटीन की मात्रा को अधिक रखें. बालों के निर्माण में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है इसीलिए सही खानपान की मदद से प्रोटीन वाली चीजों को खाने में ज्यादा से ज्यादा शामिल करना चाहिए. ओमेगा 3 फैटी एसिड वाली चीजों को खाने में जरूर लें. इसको खाने से बालों की चमक और नमी दोनों बढ़ती है. ओमेगा 3 फैटी एसिड वाली चीजों जैसे सोयाबीन, कैनोला ऑयल, फ्लैक्स सीड्स और चिया सीड्स जैसी चीजों का सेवन फायदेमंद होगा.
बालों में लगाएं प्याज का रस
गंजेपन या बालों को झरने से बचाने के लिए प्याज का रस सबसे असरदार कारक है. प्याज के रस में सल्फर का मात्रा काफी अधिक होती है जिसके कारण बालों के रोम छिद्रों के लिए ब्लड सर्कुलेशन तेज करता है. इसके कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है. इसके साथ ही प्याज के रस में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो सर को किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाते हैं.
एप्पल पल्प और नारियल पानी भी फायदेमंद
बाल झड़ने की प्रॉब्लम के लिए आप एप्पल पल्प और नारियल पानी का ये नुस्का् भी अपना सकते हैं. जो किसी नेचुरल हेयर बूस्टक सीरम की तरह काम करता है और बालों की ग्रोथ में भी कारगर है. साथ ही साथ अगर आप बालों के झड़ने से परेशान हैं, तो कद्दू के बीजों का तेल भी ट्राई कर सकते हैं. - लगभग 100 या 150 ग्राम कद्दू के बीजों का पाउडर बनाएं और उसे रोज अपने बालों पर लगाएं.
नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
अश्वगंधा को आयुर्वेद में अहम स्थान दिया गया है, इसे एक ऐसा चमत्कारी पौधा माना गया है जो कई तरह की बीमारियों को दूर करने में सक्षम है।
आइए, जानते हैं आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा के गुण –
1 अश्वगंधा एक चमत्कारी हर्ब है। इसे आयुर्वेद में अहम स्थान प्राप्त है। इसकी जड़ों और पत्तियों से दवा बनाई जाती है।
2 तनाव, चिंता, थकावट, नींद की कमी जैसी कई सेहत समस्यों का इलाज अश्वगंधा से किया जा सकता है। यह स्ट्रेस हार्मोन यानी कि कॉर्टिसोल के स्तर को कम करने में सहायक होता है।
3 अगर कोई डिप्रेशन से पीड़ित हो, तो उसका इलाज भी अश्वगंधा से संभव है।
4 इसमे कई एंटी इंफ्लामेट्री और एंटी बैक्टीरियल गुण होते है जिस वजह से ये इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है, साथ ही हृदय को स्वस्थ रखने में भी मददगार होता है।
5 अश्वगंधा कैंसर के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। एक रिसर्च के अनुसार ये कीमोथेरेपी से होने वाले बुरे प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।
6 माना जाता है कि इसकी जड़ों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है। साथ ही ये रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत करता है।
7 माना जाता है कि त्वचा के रोगों को दूर करने, झुर्रियों को कम करने और चर्म रोग को ठीक करने में भी ये सहायक होता है।
नोट : अगर आपकी अन्य दवाएं चल रही हो या आप गर्भवती हो तो इसका सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें।
हम में से अधिकतर लोग गाने सुनने के लिए हेडफोन्स या ईयरफोन्स इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हालांकि ईयरफोन्स और हेडफोन्स के नुकसान को लेकर भी कई रिसर्च सामने आ चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं ईयरफोन का इस्तेमाल करना ज्यादा खतरनाक होता है या हेडफोन्स का इस्तेमाल करना।
हालांकि हेडफोंस और ईयरफोंस दोनो आपकी सेहत को कुछ नुकसान पहुंचाते हैं। ईयरफोंस छोटे होते हैं और कानों में आसानी से फिट हो जाते हैं, लेकिन इससे बाहर की आवाज रुकती नहीं है। एक रिसर्च में सामने आया है कि आप बाहर की आवाज को दबाने के लिए इसकी आवाज तेज करते हैं जो कि आपके लिए खतरनाक है। अगर आवाज के अनुसार देखें तो हेडफोंस आपकी सेहत के अनुसार ठीक होते हैं, क्योंकि यह बाहर के साउंड को आसानी से रोक लेते हैं।
वहीं ईयरफोन उस वक्त ज्यादा नुकसान करते हैं जब आप ज्यादा समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। एक साथ 60 मिनट से अधिक गाना सुनना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन अगर आवाज धीरे है तो आप थोड़े ज्यादा समय तक गाने सुन सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि 85 डीबी से अधिक आवाज आपके कानों के लिए खतरनाक होती है।
जहां एक ओर ईयरफोन की तेज आवाज को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, वैसे ही हेडफोन्स में ईयर इंफेक्शन की बात कही जाती है। कई लोगों को मानना है कि हेडफोन्स पूरे कान में गर्मी पैदा कर देते हैं, जिससे बैक्टीरिया की वजह से ईयर इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिए एक रिसर्च में सामने आया है कि हेडफोंस से इंफेक्शन होने का खतरा नहीं होता है।
विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तीव्र मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई) 3.0 की शुरूआत कर दिया गया है,जिसका उद्देश्य उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचने का है जो नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से वंचित या छूट गए हैं। इसका उद्देश्य मिशन मोड में हस्तक्षेप के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पूर्ण टीकाकरण में तेजी लाना है। पहला चरण 22 फरवरी 2021 से 15 दिनों के लिए शुरू किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 19 फरवरी, 2021 को इस अभियान की शुरुआत की और राज्यों और जिलों के अधिकारियों से प्रत्येक बच्चे तक पहुंचने और पूर्ण टीकाकरण लक्ष्य प्राप्त करने का आग्रह किया। इस अभियान में राज्य स्तर पर शीर्ष नेतृत्व द्वारा टीकाकरण कार्यक्रम के स्वामित्व की छूट भी दी गई है। उत्तर प्रदेश में इस अभियान का उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने 21 फरवरी 2021 को किया था। राजस्थान में 22 फरवरी 2021 को इस अभियान का शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने की। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभु राम चौधरी ने 22 फरवरी 2021 को भोपाल में आयोजित एक समारोह में इस कार्यक्रम की शुरुआत की।
जोरहाट जिले में टीकाकरण
15 दिनों (नियमित टीकाकरण और छुट्टियों को छोड़कर) तक चलने वाले इस अभियान में टीकाकरण के दो दौर निर्धारित किए गए हैं। यह देश के 29 राज्यों/केंद्र्रशासित प्रदेशों में पूर्व चिन्हित 250 जिलों/शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। कोविड-19 के दौरान टीके की खुराक से वंचित रह गए बाहरी प्रदेशों के लाभार्थियों और जिन क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हुई,उन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। आईएमआई 3.0 के लिए जारी दिशानिर्देशों के अनुसार जिलों को कम जोखिम वाले 313,मध्यम जोखिम वाले 152 और सबसे ज्यादा जोखिम वाले 250 जिलों में वर्गीकृत किया गया है।
टीकाकरण गतिविधियों के दौरान कोविड से बचाव संबंधी नियमों (सीएबी) की पालन पर जोर दिया गया है। इसके लिए राज्यों से सत्र स्थलों पर भीड़ से बचने के लिए प्रभावी दृष्टिकोण अपनाने और अगर भीड़ से बचने के तरीके प्रभावी नहीं हैं,ऐसे में उन सत्रों का अलग विवरण तैयार करने की योजना बनाने को भी कहा गया है। टीकाकरण सत्र की योजना इस तरह से भी बनाई गई है कि एक समय में 10 से अधिक लाभार्थी सत्र स्थल पर मौजूद न हों।
आईएमआई 3.0 के पहले चरण के दौरान अभियान में उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को केंद्र में रखा जा रहा है,जो कोविड महामारी के कारण टीके की खुराक लेने से चूक गए। 22 फरवरी को शाम 5 बजे तक के आंकड़ों अनुसार लगभग 29,000 बच्चों और 5,000 गर्भवती महिलाओं को टीका लग चुका था (आंकड़े अनंतिम)।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रायोजित आईएमआई 3.0 अभियान को प्रमुख विभागों के सहयोग के साथ इसमें भाग लेने वाले लोगों,नागरिक समाज संगठनों,युवा समूहों और विभिन्न समुदायों के सदस्यों के मजबूत नेटवर्क के माध्यम से मिशन मोड में लागू किया जाएगा। इसे कोविड-19 महामारी के कारण टीकाकरण में आई कमी को पूरा करने के अवसर के रूप में लिया जाएगा।
आपके पेट में जलन, गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याएं होना आम बता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ ऐसी चीजें हैं जो आसानी से आपकी एसिडिटी की समस्या को दूर कर सकती है. चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही सुपरफूड्स के बारे में जो एसिडिटी को कर देंगे छूमंतर.
केला- एसिड से बचने के लिए बनाना बेस्ट एंटी डोट है. पोटैशियम से भरपूर केला बॉडी का पीएच लेवल लो करता है. हाई फाइबर से भरपूर केले को खाने से ना सिर्फ आप एसिडिटी से बच सकते हैं बल्कि से आपको फिट रखने में भी मदद करता है.
खरबूजा- तरबूजा, खरबूजा सभी पानी, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. जो कि एसिडिटी से बचाते हैं और पेट की चिपचिपाहट को मेंटेन करते हैं. ये बॉडी को हाइड्रेट करने से लेकर पीएच लेवल भी बैलेंस करते हैं.
सेब और पपीता- फाइबर से भरपूर सेब और पपीते खाने से भी एसिडिटी से बच सकते हैं.
नारियल पानी- ये रिफ्रेशिंग नैचुरल ड्रिंक टॉक्सिंस को बॉडी से फ्लश करने में मदद करता है. फाइबर कंटेट से भरपूर कोकोनट वाटर बाउल मोमेंट को ठीक रखता है.
ठंडा दूध- ठंडा दूध पीने से भी एसिडिटी की समस्या को दूर किया जा सकता है. दूध पेट में मौजूद एसिड को एब्जॉर्व कर लेता है. इसके साथ गैस्ट्रिक सिस्टम में होने वाली जलन को भी कम करता है. जब भी हार्ट बर्न हो या पेट में जलन लगे तो बिना चीनी का ठंडा दूध पीएं.
ठंडा दही और बटर मिल्क- ठंडा दही और बटर मिल्क पीने का भी फायदा होता है. ये डायजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखता है. इसके साथ ही इसके सेवन से एसिडिटी की समस्या भी दूर हो जाती है.
नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
एक नई रिसर्च चेतावनी देती है कि रात में पांच घंटे से कम सोना डिमेंशिया का खतरा दोगुना कर देता है. बोस्टन के ब्रिघम और महिला अस्पताल के शोधकर्ताओं ने 2 हजार 812 अमेरिकी व्यस्कों के अलावा 65 और 65 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों का डेटा परीक्षण किया. 'बहुत छोटी' नींद का समय पांच घंटे या पांच घंटे से कम के तौर पर परिभाषित किया गया था और 7-8 घंटे के 'अनुशंसित समय' की तुलना में डिमेंशिया का दोगुना खतरा पाया गया.
क्या आप रात में 5 घंटे से कम सोते हैं?
नई रिसर्च पूर्व की रिसर्च का समर्थन करती है कि नींद का अभाव अनिवार्य रूप से डिमेंशिया की शक्ल जैसे अल्जाइमर की बीमारी का 'मंच तैयार करती है'. ये रिसर्च संबंध के पीछे वजह की जांच नहीं करती है, लेकिन उचित आराम की कमी दिमाग को टॉक्सिन्स हटाने से रोक सकती है जिससे दिमाग के कार्य में गिरावट होती रहती है.
डिमेंशिया का दोगुना खतरा होने का डर
शोधकर्ता 'तत्काल जरूरत' को दर्शाते हैं, जिससे बुजुर्गों में नींद सुधार की खास सिफारिश की पहचान की जा सके. शोधकर्ता डॉक्टर रेबेका रोबिन्स का कहना है कि नतीजे से नींद की कमी और डिमेंशिया के खतरे के बीच संबंध स्पष्ट होता है और हर रात पर्याप्त नींद हासिल करने में बुजुर्गों की मदद करने के महत्व को दर्शाता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 50 मिलियन लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और करीब 10 मिलियन नए मामले हर साल उजागर होते हैं. अल्जाइमर की बीमारी डिमेंशिया की सबसे आम शक्ल है और डिमेंशिया के मामलों में इसका 60-70 फीसदी योगदान हो सकता है.
यूके अल्जाइमर सोसायटी के मुताबिक, ब्रिटेन में 9 लाख से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे हैं और 2024 तक एक मिलियन आंकड़ा होने का अनुमान है. स्लीप फाउंडेशन का कहना है कि किसी अन्य उम्र के लोगों के मुकाबले बुजुर्गों में नींद की ज्यादा गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं. डिमेंशिया के कई प्रकार होते हैं जिसमें से अल्जाइमर की बीमारी सबसे आम है.
डिमेंशिया वैश्विक चिंता है, लेकिन सबसे ज्यादा अमीर देशों में देखी जाती है. वर्तमान में डिमेंशिया का इलाज नहीं है, लेकिन दवाइयां रफ्तार को धीमा कर सकती हैं. अगर शुरुआती स्तर पर पहचान हो जाए, तो ये ज्यादा प्रभावी इलाज हो सकता है. चीन की एक नई रिसर्च के मुताबिक, पर्याप्त नींद नहीं लेनेवाले बुजुर्गों को दिमागी खराबी और डिमेंशिया का खतरा 25 फीसद ज्यादा होता है.
अक्सर लोग शिकायत करते सुने जाते हैं कि महंगे टूथपेस्ट के इस्तेमाल के बावजूद दांतों में सफेदी और चमक नहीं दिखाई देती. ऐसी स्थिति में दांतों की देखभाल के आसान घरेलू इलाज बहुत मुफीद हो सकते हैं. दांतों को साफ करना हो या चमक बढ़ाना या फिर दुर्गंध दूर करना, दांतों के लिए साधारण और देसी टोटके हाजिर हैं. ये टोटके दांतों और मसूढ़ों के लिए फायदेमंद साबित होंगे.
1- दांत चमकदार बनाने के लिए एक चम्मच खाने का सोडा, एक चम्मच बारीक किया हुआ नमक और पिसा हुआ सुहागा लेकर शीशी में रख लें. उससे अपने दांतों को साफ करें.
2- थोड़ा बेकिंग सोडा में नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें और ब्रश की मदद से उसे दांतों पर अच्छी तरह लगाएं. उससे पहले दांतों को टिशू पेपर से रगड़ कर साफ कर लें.
3- सरसों के तेल में नमक मिलाकर सुबह शाम इस्तेमाल करने से दांतों से खून आना, मसूढ़ों और दांतों के दर्द में आराम पहुंचता है. इसके अलावा दांत चमकदार और मजबूत भी होते हैं.
4- सुबह दांत ब्रश करने से पहले एक चम्मच नारियल का तेल मुंह में डालकर दांतों के आसपास खूब अच्छी तरह घुमाएं और 15 मिनट तक तेल दांतों पर लगा रहने दें. फिर गुनगुने पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें. इस तरह हफ्ते में दो से तीन बार करने दांत साफ और सफेद हो जाएंगा.
5- सुबह ब्रश करने के बाद, सेब के सिरका में बराबर मात्रा में पानी डालकर कुल्ला करने से दांतों की बदबू मिनटों में खत्म हो जाती है. सिरका हफ्ता में दो बार से ज्यादा इस्तेमाल न करें.
6- संतरे के सूखे छिलके के साथ तेजपत्ता बारीक पीस कर रख लें. अब उस पाउडर को अंगुली की मदद से दांत की सफाई करें. घरेलू टूथ पाउडर दांतों के लिए निहायत मुफीद है.
7- एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच नारियल तेल में 2-3 कतरा पुदीना का तेल मिश्रित कर लें. अब उस मिश्रण को सामान्य टूथपेस्ट की तरह इस्तेमाल करें. ये घरेलू टोटका दांखों की देखभाल के साथ सफेदी भी लौटाता है.
8- ताजा एलोवेरा जूस या उससे तैयार जेल दांतों पर रगड़ें. फिर ब्रश से मसाज कर कुल्ली कर लें. ये काम आप ब्रश करने के बाद भी दोहरा सकते हैं. चंद हफ्तों में आपके चेहरे पर मुस्कुराहट सफेद जगमगाते दांतों से सज जाएगी.
Note: यह खबर रिसर्च और मान्यताओं के आधार पर लिखी गई है. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
कैंसर सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है. कैंसर से पीड़ित व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहता है. ऐसे में हर कोई सोचता है कि किसी भी तरह इस गंभीर बीमारी की चंगुल में न आए. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो कैंसर के खतरे को कम करता है.
- कैंसर के खतरे को कम करना है तो खाने में हरी सब्जियां जरूर खाएं. खासकर फूलगोभी और ब्रोकली का सेवन जरूर करना चाहिए. यह हरी सब्जियां कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है.
-फलों का सेवन करने से आपकी सेहत अच्छी रहती है. जिन फलों से विटामिन सी और फाइबर मिलते हैं उनको खाने से आपकी सेहत बेहतरीन रह सकती है और कैंसर का खतरा कम हो जाता है.
- हल्दी का सेवन भी कैंसर के खतरे को कम करता है. यह कीमोथैरेपी का असर बढ़ाने में मददगार है.
-अदरक भी कैंसर के खतरे से बचाने में सहायक है. इतना ही नहीं अदरक कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से जो परेशानी होती है उसमें भी मददगार साबित होती है.
-आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लहसुन और प्याज भी कैंसर को खत्म करने में मदद करता है. इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी बड़ी आंत, स्तन फेफड़े की कोशिकाओं को नष्ट करता है.
Note: यह खबर रिसर्च और मान्यताओं के आधार पर लिखी गई है. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
अगर आप वजन में कमी लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो जरूर आपने अपनी डाइट से फैट हटा दिया होगा और पहला नंबर घी का आता है. लेकिन क्या होगा जब आपको पता चले कि जिस घी को आपने छोड़ा है, उसमें न सिर्फ बहुत ज्यादा पोषण संबंधी स्वास्थ्य फायदे हैं बल्कि आपको वजन घटाने में भी मदद मिल सकती है. आपने बिल्कुल ठीक सुना. घी अतिरिक्त वजन बढ़ाने का जिम्मेदार नहीं बल्कि ये ज्यादा वजन से छुटकारा दिलाने में मदद करता है.
क्या घी का सेवन घटाता है शरीर का वजन?
ज्यादातर भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल किया जानेवाला घी 99.9 फीसद फैट होता है. घी सैचुरेटेड फैट से तैयार किया जाता है और इस तरह कमरे के तापमान पर रखने से खराब नहीं होता है. घी गाय, बकरी, भेड़, भैंस के दूध से बनाया जा सकता है. हालांकि, ज्यादातर गाय के दूध का इस्तेमाल कर तैयार किया जाता है. घर पर बनाया गया घी फॉस्फोलिपिड की मौजूदगी के चलते ज्यादा समय तक सुरक्षित रहता है जबकि व्यावसायिक रूप से तैयार घी में ये नदारद रहता है.
घी में फैटी एसिड संरचना को समझने के लिए रिसर्च किया गया. पाया गया कि घी डोकोसैक्सिनोइक एसिड का अच्छा स्रोत है. डोकोसैक्सिनोइक एसिड सबसे लोकप्रिय ओमेगा-3 फैटी एसिड है. ओमेगा-3 फैटी एसिड जरूरी फैट है जिसे हमें अपने डाइट से सेवन की जरूरत होती है क्योंकि हमारा शरीर उसे नहीं पैदा कर सकता.
डोकोसैक्सिनोइक एसिड खास स्थितियों जैसे कैंसर, हार्ट अटैक, इंसुलिन प्रतिरोध, जोड़ों के दर्द का खतरा कम करने में मदद कर सकता है. आयुर्वेद के मुताबिक, घी लंबी उम्र करने में योगदान देता है और बहुत सारी बीमारियों से शरीर की सुरक्षा करता है. इसके अलावा, माना जाता है कि घी जोड़ों को पोषण और चिकनाई देता है और फैट में घुलनशील पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है. रोजाना एक या दो छोटा चम्मच घी की उचित मात्रा है.
न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर मानसी छतरथ के मुताबिक, सलाह दी जाती है कि अगर आप वजन में कमी लाने का प्रयास कर रहे हैं, तो घी का सेवन करें क्योंकि ये अमीनो एसिड में समृद्ध है और फैट सेल्स के आकार को छोटा करने में मदद करता है. मानसी आगे बताती हैं कि घी में करीब 99.9 फीसद फैट होने की वजह से, मात्रा पर जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि दो चम्मच से ज्यादा की सिफारिश नहीं की जाती है. अगर आप ओमेगा-3 के अन्य स्रोत जैसे अलसी, अखरोट या मछली के तेल का सेवन कर रहे हैं, तो आपको ओमेगा-3 के स्रोत के तौर पर घी की जरूरत नहीं होगी.
वजन में कमी लाने के लिए घी का इस्तेमाल
विशेषज्ञों का कहना है कि घी ओमेगा-3 फैट्स और ओमेगा-6 फैट्स में समृद्ध होता है और ये वजन घटाने के लिए बहुत अच्छा हो सकता है. घी आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर होता है जो फैट सेल्स का आकार छोटा कर सकता है. इसके अलावा, घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड आपके इंच को कम करने में मदद कर सकता है और आखिरकार अतिरिक्त वजन कम करने में आपको मदद मिल सकती है.
Garlic Tea: चाय का नाम लेते ही अदरक वाली चाय याद आती है. उसकी खुशबू, स्वाद के कहने ही क्या. कुछ लोग हेल्थ के लिहाज से ग्रीन टी, ब्लैक टी आदि पीना पसंद करते हैं. पर क्या आपने कभी लहसुन की चाय पी है? अगर नहीं तो आज से ही पीना शुरू करें. कैसे बनेगी और इसके फायदे क्या हैं, हम बताते हैं.
लहसुन वाली चाय (garlic tea) कैसे बनेगी, ये जानने से पहले आपको लहसुन की चाय के फायदे जानने चाहिए.
लहसुन कई गुणों से युक्त होता है. इसमें जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं. इसलिए इसकी चाय सेहत के लिए फायदेमंद होती है.
ये चाय डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद है. इससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है. इसमें चयापचय बढ़ाने वाले गुण होते हैं. जो वजन घटाने में कारगर है.
इस चाय को पीने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित होता है. इसलिए दिल से जुड़ी बीमारियों में भी ये लाभदायी है.
इससे शरीर में इम्युनिटी सुधरती है. लहसुन की चाय शरीर से सूजन कम करती है.
कैसे बनाएं लहसुन वाली चाय
– एक कप पानी लें. लहसुन की एक-दो कलियां कूटकर डाल दें. पानी में उबाल आने दें.
– इस पानी में एक चम्मच काली मिर्च डाल दें. चुटकी भर नमक भी डाल सकते हैं.
– पांच मिनट तक चाय को उबलने दें. फिर गैस बंद कर दें.
– चाय को छान लें.
रायपुर, विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर बालको मेडिकल सेंटर कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए कटिबद्ध है। मध्य भारत का सुप्रसिद्ध एवं सर्व सर्वसुविधायुक्त, आधुनिक कैंसर अस्पताल, बालको मेडिकल सेंटर इस वर्ष "योगाथॉन" का आयोजन कर रहा है।
इस अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए बालको मेडिकल सेंटर के मुख्य परिचालन अधिकारी एस. वेंकट कुमार ने कहा, “हम कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम समय समय पर स्क्रीनिंग कैंप लगाकर कैंसर की जांच एवं शीघ्र निदान करते है। हमारी विभिन्न स्वास्थ्य वार्ताओं के माध्यम से, हम जागरूकता पैदा करते हैं और शुरुआती जांच को प्रोत्साहित करते हैं। विश्व कैंसर दिवस पर बालको मेडिकल सेंटर इस वर्ष "योगाथॉन" का आयोजन कर रहा है। जिसके माध्यम से हम लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और योग के माध्यम से तनाव-मुक्त जीवन शैली को अपनाने का सन्देश देना चाहते हैं।
यह योगाथॉन सुबह 6 बजे रायपुर में अनुपम गार्डन में आयोजित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त बालको मेडिकल सेंटर 4-8 फरवरी 2021 तक मुफ्त कैंसर जांच शिविर का भी आयोजन कर रहे है, जिसके अंतर्गत पैप स्मीयर, एफ. एन. ए. सी., ब्रश सायटोलाजी, डिजिटल मैमोग्राफी एवं कैंसर, स्त्री रोग, एवं आहार विशेषज्ञ द्वारा परामर्श का लाभ लोगों को मिलेगा। इसके इलावा जिला अस्पताल, कालीबाड़ी में भी हमारे द्वारा निःशुल्क कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। स्तन एवं बच्चेदानी के कैंसर पर बालको मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों द्वारा एस. बी. आइ. के लेडीज क्लब में व्याख्यान भी दिया जायेगा। शाम को माई एफ.एम. 94.3 के साथ मिलकर मैग्नेटो मॉल में एक सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जायेगा।“

इस अवसर पर, बालको मेडिकल सेंटर में नए मेडिकल डायरेक्टर का भी आगमन हुआ है। डॉक्टर प्रोफेसर अनुराग श्रीवास्तव जी ने बालको मेडिकल सेंटर में हाल ही में बतौर मेडिकल डायरेक्टर कार्य प्रभार संभाला है। सर्जिकल क्षेत्र में 42 सालों के अनुभवी, डॉक्टर श्रीवास्तव पहले एम्स, नई दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जिकल डिसिप्लिन्स के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से उन्होंने कहा, "कैंसर एक बिमारियों का गुट हैं जिसमें क्रमादेशित कोशिकाओं की मृत्यु की क्षमता दोषपूर्ण हो जाती है और वे लगातार विभाजित होते रहते हैं। उन्होंने कैंसर के विभिन्न कारणों को समझाया जिसमें तम्बाकू का सेवन सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, गतिहीन जीवन शैली, मोटापा और बढ़ती उम्र अन्य कारक हैं। उन्होंने भगवद् गीता से सिखाया कि कैसे हमारे पूर्वजों ने स्वस्थ सात्त्विक भोजन की आदतों का पालन किया और स्वस्थ रहने के लिए शराब और तम्बाकू जैसे व्यसनों से दूर रहना सिखाया।“
कैंसर उपचार में विभिन्न उन्नत के बारे में बताते हुए, जो बालको मेडिकल सेंटर प्रदान करता है, चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख डॉ। जयेश शर्मा ने कहा, “हम यहां विभिन्न प्रकार के कैंसर का इलाज करते हैं। जब शुरुआती अवस्था में रोगी हमारे पास आते हैं तो हम खुश हो जाते हैं, क्योंकि तब कैंसर के पूर्णः ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है। हाल ही में हमने एक युवा महिला का इलाज किया है, जिसे डर था कि उसे स्टेज 4 कैंसर है और उसके जीने की कोई उम्मीद नहीं है, लेकिन उन्नत और सटीक नैदानिक सुविधाओं के कारण जो हमारे यहां उपलब्ध हैं, यह पाया गया कि उसे स्टेज 1 कैंसर है और अब वह सफलतापूर्वक इलाज के बाद पूर्णतः स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। इसी प्रकार हमने एक 95 वर्षीया वृद्ध का भी कैंसर का इलाज किया है जो अभी पूरी तरह से स्वस्थ है।“
बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) के बारे में:
बालको मेडिकल सेंटर, वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की पहली प्रमुख पहल, जो कि नया रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्थापित की गई है, में 170 बेड, अत्याधुनिक तृतीयक देखभाल ऑन्कोलॉजी सुविधा है, जिसमें 50 से अधिक शल्य चिकित्सा, विकिरण, हेमटोलॉजिकल और उपशामक देखभाल विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। यह पूरे मध्य भारत में सबसे बड़ी और सबसे उन्नत ऑन्कोलॉजी सुविधा है। VMRF का उद्देश्य भारत की आबादी तक उचित और सस्ती कीमत पर आसान पहुंच के भीतर अल्ट्रा-मॉडर्न, मल्टी-मॉडेलिटी डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय सुविधाएं लाना है।
कब्ज एक ऐसी बीमारी है जो अगर लग जाए तो आसानी से पीछा नहीं छोड़ती. यह कई बीमारियों की जड़ भी है. शुरुआत में लोग कब्ज की समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है. कब्ज को संयमित खान-पान, व्यायाम के द्वारा हराया जा सकता है. आज हम आपको उन फूड्स के बारे में बता रहे हैं जो जिनकी वजह से कब्ज होती है.
शराब
शराब का सेवन स्वास्थ्य के हानिकारक है. शराब कब्ज का भी कारण बनती है विशेष रूप से जब बड़ी मात्रा में शराब का सेवन किया जाता है, तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. ये प्रभाव कब्ज के जोखिम को बढ़ा सकता है. ये प्रभाव व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं.
प्रोसेस्ड अनाज
प्रोसेस्ड अनाज और उनके उत्पाद, जैसे कि सफेद चावल, सफेद पास्ता, और सफेद ब्रेड भी कब्ज का कारण है. इनमें साबुत अनाज की तुलना में कम फाइबर होते हैं, जो आम तौर पर अधिक कब्ज बनाते हैं.
डेयरी प्रोडक्ट्स
अगर आप रोजाना ज्यादा मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करते हैं तो आपको कब्ज इनसे भी हो सकती है. गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन के प्रति संवेदनशीलता के कारण शिशु, बच्चे और बच्चे विशेष रूप से जोखिम में दिखाई देते हैं.
रेड मीट
लाल मांस के सेवन से भी कब्ज होती है. यह आमतौर पर वसा में उच्च और फाइबर में कम होता है. यह पोषक तत्व संयोजन कब्ज के जोखिम को बढ़ा सकता है.
लस युक्त खाद्य पदार्थ
कब्ज से बचने के लिए ग्लूटेन वाले फूड्स से परहेज करने की जरूरत है. ग्लूटेन एक प्रोटीन है जो अनाज में पाया जाता है जैसे कि गेहूं, जौ, राई, स्पेल्ड, कामोट. कुछ लोग कब्ज का अनुभव कर सकते हैं जब वे खाद्य पदार्थ खाते हैं जिसमें लस होता है. यह एक स्थिति है जिसे ग्लूटेन असहिष्णुता या सीलिएक रोग के रूप में जाना जाता है.
तला हुआ भोजना या फास्ट फूड
तले हुए खाना या फास्ट फूड वसा में उच्च और फाइबर में कम होते हैं. यह संयोजन पाचन को धीमा कर सकता है. चिप्स, कुकीज, चॉकलेट और आइसक्रीम जैसे फास्ट फूड स्नैक्स के साथ अधिक फाइबर युक्त स्नैक विकल्पों को बदल सकते हैं. इनकी बजाय आप फल और सब्जियों का सेवन करें.





















