केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा है कि सरकारी बाल देखभाल संस्थाओं (सीसीआई) में रहने वाले बच्चों को विशेषज्ञों द्वारा देखभाल प्रदान करने की दृष्टि से देश भर में मंत्रालय ने इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स को साथ जोड़ा है। ट्वीट्स की एक श्रृंखला में उन्होंने बताया, "यह बाल संरक्षण सेवाओं के लिए योजना के तहत बच्चों को प्रदान की जाने वाली चिकित्सा देखभाल के अतिरिक्त होगा"। मंत्री ने ट्वीट में यह भी कहा कि "केयर-टेकर्स/ चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर देश के दूरस्थ कोनों से भी बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा इस टेलीमेडिसिन सेवा का लाभ सप्ताह में 6 दिन ले सकेंगे। 2000 से अधिक सीसीआई के हजारों बच्चे इस सेवा के माध्यम से लाभान्वित होंगे"। एक अन्य ट्वीट में, श्रीमती ईरानी ने लिखा, "वर्तमान में विशेषज्ञों की टीमें, जिनके पास 30,000 इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के सदस्यों का मजबूत नेटवर्क है, कमजोर बच्चों को सेवाएं देने के लिए सेंट्रल, जोनल, राज्य और शहरी स्तर पर गठित किए जा रहे हैं। हर सरकारी या सहायता प्राप्त सीसीआई में एक विशेषज्ञ होगा जो आईएपी द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा।" इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और उसके सदस्यों का कमजोर बच्चों को अपनी सेवाएं देने के लिए धन्यवाद करते हुए मंत्री ने ट्वीट किया, "उनकी प्रतिबद्धता और भारत सरकार के दृढ़ प्रयास से सरकारी बाल देखभाल केंद्रों में रहने वाले बच्चों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर होगा।"
रायपुर । कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच कई लोग म्यूकोरमाइकोसिस नाम के फंगल इन्फेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। यह दुर्लभ फंगल इन्फेक्शन है जो किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होती है| कोविड-19 और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इन्फेक्शन और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इस संक्रमण को `ब्लैक फंगस’ के नाम से भी जाना जाता है|
क्या है म्यूकोरमाइकोसिस?
इंडियन काउन्सल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा जारी अड्वाइज़री के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इंफेक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन नायक, आँख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। इस बीमारी में कई लोगों की आंखों की रौशनी चली जाती है वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है।
कोरोना के मरीजों को ज्यादा खतरा
म्यूकोरमाइकोसिस आम तौर पर उन लोगों को तेजी से अपना शिकार बनाती है जिन लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। कोरोना के दौरान या फिर ठीक हो चुके मरीजों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है इसलिए वो आसानी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। खासतौर से कोरोना के जिन मरीजों को डायबिटीज है। शुगर लेवल बढ़ जाने पर उनमें म्यूकोरमाइकोसिस खतरनाक रूप ले सकता है।
यह संक्रमण सांस द्वारा नायक से व्यक्ति के अंदर चला जाता है| जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काम होती है उनको यह जकड़ लेता है|
लक्षण
-नाक में दर्द हो, खून आए या नाक बंद हो जाए
-नाक में सूजन आ जाए
-दांत या जबड़े में दर्द हो या गिरने लगें
-आंखों के सामने धुंधलापन आए या दर्द हो, बुखार हो
-सीने में दर्द
-बुखार
-सिर दर्द
-खांसी
-सांस लेने में दिक्कत
-खून की उल्टियाँ होना
-कभी दिमाग पर भी असर होता है
किन रोगियों में ज्यादा पाया गया है:
-जिनका शुगर लेवल हमेशा ज्यादा रहता है
-जिन रोगियों ने कोविड के दौरान ज्यादा स्टेरॉइड लिया हो
-काफी देर आय सी यू में रहे रोगी
-ट्रांसप्लांट या कैंसर के रोगी
कैसे बचें
-किसी निर्माणधीन इलाके में जाने पर मास्क पहनें
-बगीचे में जाएं तो फुल आस्तीन शर्ट, पैंट व गलब्स पहनें
-ब्लड ग्लूकोज स्तर को जांचते रहें और इसे नियंत्रित रखें
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है हल्के लक्षण दिखने पर जल्दी से डॉक्टर से संपर्क करें| कोविड के रोगियों में अगर बार बार नाक बंद होती हो या नाक से पानी निकलता रहे, गालों पर काले या लाल चकते दिखने लगें, चेहरे के एक तरफ सूजन हो या सुन्न पद जाए, दांतों और जबड़े में दर्द, काम दिखाई दे या सांस लेने में तकलीफ हो तो यह ब्लैक फंगस हो सकता है।
नई दिल्ली, भारत में कोरोना की दूसरी तहर कहर ढहा रही है. इस बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी है सही जानकारी का होना लेकिन कोरोना को लेकर बहुत सी फर्जी खबरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. ऐसी ही एक फेक न्यूज़ में यह दावा किया जा रहा है कि चाय पीने से कोरोना संक्रमण को रोका जा सकता है.
सोशल मीडिया पर इस खबर की जो क्लिप शेयर की जा रही है. उसका शीर्षक है 'खूब चाय पीयो और पिलाओ, चाय पीने वालों के लिए खुशखबरी'. इस फेक न्यूज़ में कहा गया है कि यदि कोई दिन में तीन बार चाय पीता है तो वह कोरोना से संक्रमित नहीं होगा.
भारत सरकार के ट्वीटर हैंडल PIBFactCheck ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी बताया है. PIBFactCheck ने ट्वीट किया, 'एक खबर में दावा किया जा रहा है कि चाय पीने से कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है और इससे संक्रमित व्यक्ति जल्दी स्वस्थ भी हो सकता है. यह दावा फर्जी है. इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि चाय के सेवन से कोविड-19 के संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है.'
एक ख़बर में दावा किया जा रहा है कि चाय पीने से #कोरोनावायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है और इससे संक्रमित व्यक्ति जल्दी स्वस्थ भी हो सकता है।#PIBFactCheck: यह दावा #फर्जी है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि चाय के सेवन से #COVID19 के संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है। pic.twitter.com/Xsg38RD9YD
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) May 9, 2021
Covid-19 Vaccine Registration Online on cowin.gov.in: कोरोना टीका पंजीकरण के लिए बनाए कोविन पोर्टल (CoWin Portal) पर लोगों की परेशानी दूर करने के लिए इसमें एक नया फीचर जोड़ा गया है. दरअसल कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि वैक्सीन की डोज लिए बिना ही पोर्टल पर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट (Vaccination Certificate) जनरेट हो गया. इसमें अब सुधार किया गया है. अब किसी ने भी कोविन पोर्टल पर पंजीकरण किया है और टीकाकरण के लिए स्लॉट चुन लिया है, उसे चार अंकों एक सुरक्षा कोड मिलेगा. खुद को सत्यापित करने के लिए ये कोड वैक्सीनेशन सेंटर पर दिखाना होगा.
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण (Ministry of Health and Family Welfare) ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया है. इसने बताया कि ऐसे कुछ उदाहरण संज्ञान में आए हैं जिसमें लोगों ने कोविन पोर्टल के जरिए टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट लिया था. वो तय समय पर टीका लगवाने नहीं गए, मगर फिर भी उन्हें एसएमएस के जरिए बताया गया कि उन्होंने कोरोना टीके की एक खुराक ले ली है.
अब समस्या से निजात पाने के लिए कोविन पोर्टल में शनिवार से नया फीचर जुड़ जाएगा. जिसमें लाभार्थी को चार अंकों का सुरक्षा कोड मिलेगा. सरकार ने बयान में कहा कि वेरिफिकेशन के बाद अगर लाभार्थी टीका लगवाने के योग्य पाया जाता है तो वैक्सीन की खुराक लेने से पहले टीका सेंटर पर चार अंकों के कोड के लिए पूछा जाएगा. इसके बाद टीकारण की सही स्थिति को रिकॉर्ड करने के लिए कोविन पोर्टल पर इसे दर्ज करेगा.
कोविड वैक्सीन के लिए कैसे करें पंजीकरण-
सबसे पहले ब्राउजर में जाकर cowin.gov.in वेबसाइट खोलें.
अब स्क्रीन पर ऊपर दाईं तरफ Register/Sign In yourself लिखा होगा, वहां क्लिक करें.
इसके बाद Register or SignIn for Vaccination के ठीक नीचे अपना दस अंकों का मोबाइल नंबर टाइप करें,
अब इसके बाद आपको एक ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे एंटर कर दें.
इसके बाद रजिस्ट्रेशन का पोर्टल खुल जाएगा और मांगी गई सभी जानकारी को भर दें.
पहचान पत्र में उसी कार्ड की जानकारी भरें, जिसे आप टीकाकरण के दौरान साथ लेकर जा सकें.
नई दिल्ली। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया त्रस्त है। भारत में कोरना के नए स्ट्रेन ने कहर बरपा दिया है। हर दिन संक्रमण और मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। वहीं कोरोना पीड़ित मरीज ठीक होने के बाद भी चैन की सांस नहीं ले पा रहे हैं।
ऑक्सफोर्ड जर्नल के अध्ययन में पता चला है कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित गंभीर मरीजों में से आधे से ज्यादा हॉस्पिटलाइज्ड मरीजों की रिकवरी के कई दिनों बाद हार्ट फेल हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 का संक्रमण शरीर में इंफ्लेमेशन को अटैक करता है, इससे हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे हार्ट बीट प्रभावित होती है और ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत शुरु हो जाती है।
वही, कोरोना वायरस शरीर के अंदर हमारे ग्राहा सेल्स पर अटैक कर सकता है, जिसे ACE2 रिसेप्टर्स के रूप में जाना जाता है। यह मायोकार्डियम टिशू के भीतर जाकर भी उसे क्षति पहुंचा सकता है। मायोकार्डाइटिस जैसी समस्याएं जो कि हार्ट की मांसपेशियों की इन्फ्लेमेशन है, समय पर इसकी देखभाल न की जाए तो एक समय के बाद हार्ट फेल हो सकता है। दिल की बीमारी वाले मरीजों के लिए ये समस्या जानलेवा हो सकती है।
हार्ट फेल उस समय होता है, जब उसके दिल की मांसपेशियां खून को उतनी कुशलता के साथ पंप नहीं कर पाती जितने की उसे आवश्यकता है। इस स्थिति में संकुचित धमनियां और हाई ब्लड प्रेशर दिल को समुचित पम्पिंग के लिए कमजोर बना देते हैं। ये एक क्रॉनिक समस्या है जिसका समय पर इलाज न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। इस समय सही इलाज की जरुरत होती है।
मेदांता अस्पताल के सर्वेसर्वा डॉ. नरेश त्रेहन का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर में कम आयु के लोग ज्यादा संक्रमित हुए हैं। डॉ. त्रेहन ने बताया कि पिछली बार भी हमने 10-15 प्रतिशत पोस्ट कोविड-19 मरीजों में हार्ट इन्फ्लेमेशन से जुड़ी समस्या देखी थी। लेकिन इस बार ये इन्फ्लेमेटरी रिएक्शन ज्यादा घातक साबित हो रहा है। इसमें कई मरीजों का हार्ट बीट 20-25 प्रतिशत तक चली जाती है।
दिल से संबंधित कोई भी समस्या समझ आए तो बिना देर किए सबसे पहले अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करिए। कोरना से ठीक हुए लोग इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उन्हें दिल से संबंधित किसी भी समस्या को टालना नहीं है, यथासंभव जल्द उपचार करवाएं।
भारत में कोरोना वायरस जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे भी तेज गति से उससे जुड़ीं अफवाहें फैल रही हैं। कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे बड़ी बाधाएं वे अफवाह हैं, जिन्हें लोग सच मान ले रहे हैं और कोरोना के खिलाफ जंग कमजोर पड़ जा रही है। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक ऑडिया काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत में अभी जितनी भी मौतें हो रही हैं उसकी वजह 5जी नेटवर्क की टेस्टिंग है और उसे कोरोना का नाम दिया जा रहा है। इस ऑडियो में दावा किया जा रहा है कि 5जी टेस्टिंग की जानकारी सबको नहीं दी गई है और इसकी वजह से ही लोगों की मौतें अचानक हो जा रही हैं।
हालांकि, जब इस वायरल ऑडियो की पड़ताल की गई तो इस दावे को पूरी तरह से फर्जी पाया गया। PIB की फैक्ट चैक टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे को फर्जी बताया है। पीआईबी ने लिखा है, 'एक ऑडियो मैसेज में दावा किया जा रहा है कि राज्यों में 5g नेटवर्क की टेस्टिंग की जा रही है जिस कारण लोगों की मृत्यु हो रही है व इसे कोविड 19 का नाम दिया जा रहा है।'
हालांकि, PIB की Fact Check टीम ने पाया कि यह दावा फर्जी है। साथ ही टीम ने लोगों से आग्रह किया है कि कोरोना काल में कृपया ऐसे फर्जी संदेश साझा कर के भ्रम न फैलाएं। दरअसल, इस वायरल ऑडियो में दो लोग बातें करते सुने जा सकते हैं, जिसमें एक शख्स कोरोना से हो रही मौतों को 5जी टेस्टिंग का नाम देता दिख रहा है। वह इस ऑडियो में कहता है कि इसी वजह से लोगों का गला सूख रहा है और उसने दावा किया है कि मई तक इसकी टेस्टिंग हो जाएगी तो मौतें भी रुक जाएंगी।
एक ऑडियो मैसेज में दावा किया जा रहा है कि राज्यों में 5g नेटवर्क की टेस्टिंग की जा रही है जिस कारण लोगों की मृत्यु हो रही है व इसे #Covid19 का नाम दिया जा रहा है। #PIBFactCheck: यह दावा #फ़र्ज़ी है। कृपया ऐसे फ़र्ज़ी संदेश साझा कर के भ्रम न फैलाएँ। pic.twitter.com/JZA9o5TuRv
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) May 6, 2021
मगर हकीकत यह है कि कोरोना से हो रहीं मौतें और 5जी नेटवर्क की टेस्टिंग का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। कहीं से भी ऐसा कोई वैज्ञानिक दावा नहीं है कि 5जी टेस्टिंग की वजह से लोगों की मौतें हो रही हैं। इसलिए आप सभी पाठकों से आग्रह है कि ऐसे वायरल संदेशों कहीं भी फॉरवर्ड न करें और अफवाहों से बचें और कोरोना के खिलाफ जंग में डटे रहें।
नई दिल्ली। मशहूर टीका विशेषज्ञ गगनदीप कांग ने कहा है कि कोरोनावायरस (Coronavirus) मामलों में मौजूदा वृद्धि मई के मध्य से आखिर तक नीचे आ सकती है। कांग ने कहा कि कोरोनावायरस मामलों में एक या दो और उछाल आ सकती है लेकिन शायद यह वर्तमान दौर जैसा बुरा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि फिलहाल यह उन क्षेत्रों में जा रहा है जहां वह पिछले साल नहीं पहुंचा यानी मध्य वर्ग को अपना शिकार बना रहा है, ग्रामीण क्षेत्र में अपना पैर पसार है लेकिन वायरस के जारी रहने के आसार कम हैं। टीके के बारे में डर दूर करते हुए उन्होंने कहा कि वे प्रभावी हैं और टीकाकरण अभियान में तेजी लाने की जरूरत है।
कांग ने कोरोनावायरस की जांच में गिरावट पर चिंता प्रकट की और कहा कि (कोविड-19) के मामलों का अनुपात जांच से प्राप्त आंकड़ों से कहीं ज्यादा हैं। उन्होंने भारतीय महिला प्रेस कोर द्वारा आयोजित वेबीनार में एक सवाल के जवाब में कहा, विभिन्न मॉडलों के अनुसार (मामलों के नीचे आने का) सबसे सही अनुमान माह के मध्य और आखिर के बीच कहीं हैं।
हालांकि कुछ मॉडलों के अनुसार यह जून के प्रारंभ में होगा, लेकिन हम जो देख रहे हैं, उसके अनुसार यह मई के मध्य से आखिर तक (का अनुमान) है। वायरस की लहरों के बारे में अनुमान के संबंध में कांग ने कहा कि कोई भी व्यक्ति यह अनुमान लगाने के लिए (वायरस की) किस्म की विशेषता और महामारी की विभिन्न बातों का इस्तेमाल कर सकता कि किसी खास स्थान पर क्या होने जा रहा है बशर्ते कि आंकड़ा गणितीय प्रतिमान फलक के स्तर पर उपलब्ध हो।
जब उनसे इस वायरस के भविष्य के बारे में पूछा गया तो उन्हेांने कहा, यह वाकई बुरे फ्लू वायरस की भांति मौसम सापेक्ष हो जाएगा। यह अधिक मौसम सापेक्ष जैसा कुछ हो जाएगा, यह शांत हो जाएगा और यह कि लोग बार-बार की प्रतिरोधकता एवं टीकाकरण के कारण एक निश्चित स्तर तक प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर लेंगे।(भाषा)
Covid-19 Test Kits Video: कोरोना की दूसरी लहर के बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें टेस्ट किट की पैकेजिंग करते लोग दिख रहे हैं. इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कोविड टेस्ट किट की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं.कोरोना अपडेट: प्रदेश में आज 10894 ने जीती कोरोना से जंग, कुल 13846 नए मरीज मिले 212 मृत्यु भी, देखे जिलेवार आकड़े
वीडियो में दिख रहा है कि कोरोना सैंपल लेने के लिए जिस कॉटन स्टिक का इस्तेमाल किया जाता है, उसे छोटे-छोटे बच्चे पैक कर रहे हैं.
लोगों के मन में शंका ये है कि जिस टेस्ट किट से कोविड के होने या ना होने का पता चलता है उसे इतनी लापरवाही से बनाया जा रहा है.
जिस जगह और जिस तरीके से टेस्ट किट तैयार हो रहे हैं, वहां की साफ-सफाई को लेकर भी लोग आशंकित हैं.बड़ी खबर: ज्वेलर्स से करोड़ों जब्ती मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका ख़ारिज...
दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो उल्हासनगर का है. वीडियो में एक महिला और 4-5 बच्चे कोरोना टेस्ट किट पैक करते दिख रहे हैं.
देखें वीडियो-
#Ulhasnagar में
— sunilkumar singh (@sunilcredible) May 5, 2021
ऐसे पैक की जा रही है #Covid SwabTest Kit !! @umc_covid19 कर ही है जांच।@CMOMaharashtra @OfficeofUT@rajeshtope11 @Dev_Fadnavis pic.twitter.com/4SfB8H0hCP
लोग इस वीडियो पर कमेंट करते हुए कह रहे हैं कि पैकिंग करते समय न तो इन्होंने ग्लव्स पहने हैं और न ही मास्क लगाया है. ऐसे में अगर ये खुद ही इंफेक्टिड हों और किट भी पैक कर रहे हों तो भगवान ही मालिक है…
देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर जारी है. भारत में रोजाना 3 लाख से ज्यादा नए केस सामने आए रहे हैं. हर दिन कोरोना को लेकर कुछ न कुछ नया सुनने को आता रहता है. हाल में ऐसी अफवाहें थी कि शराब पीने से कोरोना वायरस नहीं होता. हालांकि यह अफवाह है. कोविड पर पंजाब की विशेषज्ञ समिति के प्रमुख डॉ. केके तलवार ने बुधवार को लोगों से सोशल मीडिया पर चल रही उन अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा जिनके मुताबिक शराब कोरोना वायरस से सुरक्षा प्रदान कर सकती है. राज्य में कोविड-19 से करीब चार लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं.
उन्होंने कहा कि ज्यादा शराब पीने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है और इससे उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है. तलवार ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पढ़ा कि शराब का सेवन वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकता है. उन्होंने कहा, ‘इस तरह की गलत धारणा से गंभीर समस्या पैदा हो सकती है.’ उन्होंने कहा, ‘अगर लोग ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन करेंगे तो उनके संक्रमित होने का खतरा ज्यादा रहता है.’
तलवार ने बताया कि यह सुझाव गलत है कि शराब के सेवन से कोरोना वायरस मर सकता है. उन्होंने हालांकि कहा कि बहुत कम मात्रा में शराब के सेवन से कोई नुकसान नहीं है. तलवार ने कहा कि वैज्ञानिक पर्यवेक्षण के आधार पर यह अनुशंसा की जाती है कि लोगों को कोविड रोधी टीका लगवाने से दो दिन पहले और दो दिन बाद तक शराब के सेवन से बचना चाहिए.
केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने आज कहा कि देश में रेमडेसिविर का उत्पादन तेज गति से बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ कुछ ही दिनों में भारत ने रेमडेसिविर की तीन गुना उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है और हम जल्द ही बढ़ती हुई मांग को पूरा कर पाएंगे। 12 अप्रैल, 2021 को उत्पादन क्षमता 37 लाख थी जो चार मई, 2021 को बढ़कर 1.05 करोड़ हो गयी।
श्री मंडाविया ने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए रेमडेसिविर का उत्पादन करने वाले संयंत्रों की संख्या भी 20 (12 अप्रैल, 2021) से बढ़कर 57 (04 मई, 2021) हो गयी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार कोरोना से लड़ने के लिएअथक प्रयास कर रही है।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच दुनिया इस महामारी का विकराल रूप देख रही है। वहीं, इस बार कोरोना के इन लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ ऐसी वजह है, जिसकी वजह से इस बीमारी का डरावना रूप देखने को मिला। कोरोना के मरीजों में ऑक्सीजन लेवल की कमी होने के कारण उनकी हालत तेजी से बिगड़ती है। ऐसे में सभी लोग शरीर में ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने के लिए डाइट का खास ख्याल रख रहे हैं। आइए, जानते हैं ऑक्सीजन को बनाए रखने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
इन चीजों के सेवन से बना रहा है ऑक्सीजन लेवल
शरीर में ऑक्सीजन लेवल बनाए रखने के लिए आयरन, कॉपर, विटामिन ए, विटामिन बी2, विटामिन बी3, विटामिन बी5, विटामिन बी6, विटामिन बी9 और विटामिन 12 की जरूरत होती है।
विटामिन बी12 के स्रोत-
मांसाहारी स्रोत - ऑर्गन मीट (लीवर), चिकन, टूना फिश और अंडे।
शाकाहारी स्रोत- मशरूम, आलू, एवोकाडो, मूंगफली, ब्रोकली, ब्राउन राइस और पनीर आदि।
विटामिन बी2-
मांसाहारी स्रोत - अंडे, ऑर्गन मीट (किडनीलीवर)।
शाकाहारी स्रोत- दूध, दही, ओट्स, बादाम, बींस और टमाटर।
विटामिन ए-
मांसाहारी स्रोत - आर्गन मीट, टूना फिश और अंडे में मिलता है।
शाकाहारी स्रोत- गाजर, शकरकंद, लौकी, आम, वनीला आइसक्रीम और पालक।
आयरन-
मांसाहारी स्रोत - ओएस्टर, चिकन, बत्तख और बकरे के मीट में।
शाकाहारी स्रोत- बींस, गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, दालें और मटर।
कॉपर-
मांसाहारी स्रोत - ओएस्टर (सीप), क्रैब और टर्की।
शाकाहारी स्रोत- चॉकलेट, तिल, काजू, आलू, शिताके मशरूम।
Disclaimer- इस आलेख में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है। हालांकि, हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। यह लेख केवल आपकी जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है।
नई दिल्ली, देश में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर का हमला तेज हो गया है. बेलगाम कोरोना के चलते देश में पिछले एक सप्तानह से हर दिन कोरोना के तीन लाख से ज्यानदा नए केस सामने आ रहे हैं. कोरोना की दूसरी लहर में इस बात के संकेत मिले हैं कि वायरस न केवल फेफड़ों (Lungs) पर हमला करता है, बल्कि कोरोना के हमले से शरीर के कई अंग भी प्रभावित होते हैं.
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे-जैसे शरीर पर कोरोना वायरस का हमला बढ़ता है वैसे वैसे ये शरीर के इम्यूभन सिस्टेम को कमजोर करने लगता है और शरीर के अन्य़ अंगों पर हमला करने लगता है. वायरस दूसरे बॉडी पार्ट्स में सूजन पैदा कर रहा है. अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाइपरटेंशन या मोटापे की समस्या है तो फिर कोरोना का शरीर पर असर और ज्यादा होता है.
ऐसे में जरूरी है कि अगर आपको अपनी शरीर में इस तरह की कोई दिक्कीत दिख रही है तो उसे नजरअंदाज करने की भूल न करें...
वायरस दिल पर करता है बड़ा हमला :
जिन लोगों को पहले से हार्ट की बीमारी है या फिर जिनका मेटाबोलकि सिस्टकम खराब है उन लोगों के कोरोना के चपेट में आने का खतरा ज्याजदा होता है. SARs-COV-2 वायरस कोरोना मरीजों के दिल की मांसपेशियों में सूजन बढ़ा देता है. कोरोना पर नजर रखने वाले डॉक्टारों का कहना है कि कोरोना के लगभग एक चौथाई मरीज, जिन्हेंज गंभीर लक्षण के बाद अस्पटताल में भर्ती कराया गया था.
न्यूरोलॉजिकल की बढ़ रही समस्या :
इस बार के कोरोना में कोविड मरीजों में सिर दर्द, चक्क,र आना, धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण सामने आए हैं. JAMA न्यूरोलॉजी में छपी एक स्टडी के मुताबिक, वुहान में अस्पताल में भर्ती 214 में से एक तिहाई कोरोना के मरीजों में न्यूरोलॉजिक लक्षण पाए गए थे. बताया जाता है कि कोरोना का ये असर काफी लंबे समय तक बना रहता है.
किडनी पर हमला कर सकता है वायरस :
कोरोना का असर अगर लंबे समय तक किसी के शरीर में रह जाए तो किडनी की समस्याह बढ़ जाती है. SARS-CoV-2 कोशिकाओं पर बड़ा हमला करता है, जिसकी वजह से किडनी समेत कई अंगो की कोशिकाएं संक्रमित हो जाती हैं. वायरस किडनी में पहुंचने के बाद सूजन कर देता है जिसका असर किडनी के टिश्यू पर भी पड़ता है. इसकी वजह से यूरीन की मात्रा कम हो जाती है.
ब्लड क्लॉट का भी बना रहता है खतरा :
कोरोना की वजह से शरीर में सूजन हो जाती है, जिसकी वजह से कई लोगों में खून के थक्केा बनने लगते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ACE2 रिसेप्टर्स से जुड़ने के बाद SARS-COV-2 वायरस रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है. इसकी वजह से बनने वाला प्रोटीन ब्लड क्लॉटिंग बढ़ाता है. खून के थक्कें बन जाने के कारण फेफड़ों पर सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.
कोविड महामारी के स्रोत का पता लगाने के प्रयास लगातार जारी हैं। हाल ही में सीएनएन द्वारा प्रसारित साक्षात्कार में एक प्रमुख वैज्ञानिक सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल के पूर्व निदेशक और वायरोलॉजिस्ट रॉबर्ट रेडफील्ड ने बिना किसी प्रमाण के दावा किया कि सार्स-कोव-2 वुहान की प्रयोगशाला से निकला है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह मात्र एक निजी राय है। इसके दो दिन बाद कुछ अन्य लोगों (डबल्यूएचओ और चीन सरकार की टीम) ने वायरस के वन्यजीवों से फैलने की बात कही जिसकी शुरुआत चमगादड़ों से हुई है। इसमें भी कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि वुहान की प्रयोगशाला में किसी को भी ऐसा कोरोनावायरस नहीं मिला है जिसे बदलकर ज़्यादा फैलने वाला बनाया गया हो और फिर उसने बदलते-बदलते सार्स-कोव-2 जैसा रूप लेकर वहां किसी कर्मचारी को संक्रमित कर दिया हो। इसी तरह किसी को जंगली जीवों में कोरोनावायरस के प्रमाण भी नहीं मिले हैं जो एक से दूसरे जंतु में आगे बढ़ते-बढ़ते उत्परिवर्तित होकर सार्स-कोव-2 के समान हो गया हो और फिर मनुष्यों में प्रवेश कर गया हो।
अभी तक ये दोनों ही विचार प्रमाण-विहीन हैं और दोनों ही संभव हैं।
फिर भी इन दोनों विचारों के सही होने की संभावना बराबर नहीं है। देखा जाए तो प्रयोगशाला से वायरस के निकलने की कोई एक या शायद कुछ मुट्ठी भर घटनाएं हो सकती हैं जबकि वन्यजीवों से वायरस के फैलने के अनेकों अवसर होंगे।
रेडफील्ड की अटकल है कि किसी भी वायरस के लिए इतने कम समय में जीवों से मनुष्यों में प्रवेश करने की कुशलता हासिल करना बिना प्रयोगशाला के संभव नहीं है। लेकिन एक बार में इतनी बड़ी छलांग बहुत बड़ी बात होगी। स्वयं रेडफील्ड ने कहा है कि यह वायरस हमारी जानकारी में आने के कई महीनों पहले से प्रसारित हो रहा था। यानी मनुष्यों तक पहुंचने से पहले एक लंबी अवधि रही होगी जो इस वायरस के वन्यजीवों से फैलने का संकेत देती है।
वन्यजीवों से वायरस के फैलने का विचार इस बात पर टिका है कि चीन में करोड़ों चमगादड़ हैं और उनका मनुष्यों समेत अन्य जीवों से खूब संपर्क होता है। अत:, वायरस के मनुष्यों में प्रवेश करने के कई मौके हो सकते हैं। मूल रूप में तो यह वायरस मनुष्यों में खुद की प्रतिलिपि तैयार करने में अक्षम होता है। लेकिन मनुष्यों को संक्रमित करने के पहले इसे विकसित होने के लाखों मौके मिले होंगे। गौरतलब है कि चमगादड़ अक्सर कई जीवों जैसे पैंगोलिन, बैजर, सूअर, एवं अन्य के संपर्क में आते हैं जिससे ये मौकापरस्त वायरस इन प्रजातियों को आसानी से संक्रमित कर देते हैं। चमगादड़ कॉलोनियों में रहते हैं इसलिए विभिन्न प्रकार के कोरोनावायरस के मिश्रण की संभावना होती है और उन्हें अपने जींस को पुनर्मिश्रित करने का पूरा मौका मिलता है। यहां तक कि एक अकेले चमगादड़ में भी विभिन्न कोरोनावायरस देखे गए हैं।
इन वायरसों को मेज़बानों के बीच छलांग लगाने के लिए कई महीनों का समय मिलता है। इसी दौरान वे उत्परिवर्तित भी होते रहते हैं। एक बार मनुष्यों में प्रवेश करने पर उन वायरस संस्करणों को वरीयता मिलती है जो मानव कोशिकाओं को संक्रमित करके अपनी प्रतिलिपियां बनाने की क्षमता रखते हैं। जल्द ही वे कोशिकाओं को इस स्तर तक संक्रमित कर देते हैं कि लोग बीमार होने लगते हैं। तब जाकर एक नई बीमारी प्रकट होती है। यह वही अवधि होती है जिसे रेडफील्ड ने माना है कि वायरस प्रसारित होता रहा है।
वास्तव में हम कोरोनावायरस के विकास में यह घटनाक्रम देख भी रहे हैं। इसमें काफी तेज़ी से उत्परिवर्तन हो रहे हैं (E484K और 501Y जैसे) जो वायरस को और अधिक संक्रामक बनाते हैं। युनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वायरोलॉजिस्ट एडम लौरिंग के अनुसार ये परिवर्तन प्राकृतिक रूप से हो रहे हैं। जिसका कारण यह है कि वायरस को लाखों संक्रमित व्यक्तियों में उत्परिवर्तन के लाखों अवसर मिल रहे हैं।
तो किसे सही माना जाए? रेडफील्ड की प्रयोगशाला से रिसाव की परिकल्पना को जो मात्र एक संयोग पर निर्भर है? या फिर वन्यजीवों से प्रसारित होने की परिकल्पना को जिसे लाखों अवसर मिल रहे हैं? हालांकि दोनों ही संभव हैं लेकिन एक की संभावना अधिक मालूम होती है। इसीलिए, अधिकांश वैज्ञानिकों को वन्यजीवों के माध्यम से इस वायरस के फैलने के आशंका अधिक विश्वसनीय लगती है।
वायरस की उत्पत्ति का सवाल महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी महामारी के शुरू होने की जानकारी मिल सकती है ताकि भविष्य में इस तरह की स्थितियों को रोका जा सके। आज भी कई रोग पैदा करने वाले वायरस हमारे बीच मौजूद हैं जो महामारी का रूप ले सकते हैं।
-स्रोत फीचर्स
नई दिल्ली: कोरोना को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. अस्पतालों के बाहर इलाज के लिए भटक रहे मरीजों के अलावा बड़ी संख्या में कोरोना के ऐसे भी शिकार हैं जो घरों में बंद हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे ही कोरोना के हल्के और बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं.
-होम आइसोलेशन में रहने पर 10 दिन बाद अगर लगातार 3 दिन तक लक्षण ना दिखे तो दोबारा टेस्ट की जरूरत नहीं है
-घर पर रहने वाले मरीज रेमडेसिविर इंजेक्शन न लगाएं, अस्पताल में ही लगाएं
-मामूली लक्षण में मरीजों को स्टेरॉयड नहीं दिया जाए
-60+ उम्र के कोरोना पॉजिटिव अगर हाइपरटेंशन, डाइबिटीज, दिल, फेफड़े या गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं तो डॉक्टर से पूछकर ही आइसोलेशन में रहें
-घर पर रहने वाले मरीज दिन में दो बार भाप लें और गर्म पानी से गरारा करें
साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने खास हिदायत दी है कि घर पर रहने वाले कोरोना संक्रमितों का ऑक्सीजन लेवल 94 से ऊपर रहना चाहिए.
नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के विश्वव्यापी कहर के बीच ‘आयुष 64’ दवा हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की एक किरण के रूप में उभरी है। देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फॉर्मूला आयुष 64, लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के लिए मानक उपचार की सहयोगी (adjunct to standard care) के तौर पर लाभकारी है। उल्लेखनीय है कि आयुष 64 मूल रूप से मलेरिया की दवा के रूप में वर्ष 1980 में विकसित की गई थी तथा कोविड 19 संक्रमण हेतु पुनरुद्देशित (repurpose) की गई है।
हाल ही में आयुष मंत्रालय तथा-सीएसआईआर द्वारा हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में आयुष 64 की प्रभावकारिता और इसके सुरक्षित होने का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक और गहन बहु-केंद्र नैदानिक (क्लीनिकल) परीक्षण पूरा किया गया है।
आयुष 64, सप्तपर्ण (Alstonia scholaris), कुटकी (Picrorhiza kurroa), चिरायता (Swertia chirata) एवं कुबेराक्ष (Caesalpinia crista) औषधियों से बनी है। यह व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर बनाई गयी है और सुरक्षित तथा प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है। इस दवाई को लेने की सलाह आयुर्वेद एवं योग आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga)’ द्वारा भी दी गयी है जोकि आईसीएमआर की कोविड प्रबंधन पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स (National Task Force on COVID Management) के निरीक्षण के बाद जारी किया गया था।
पुणे के सेंटर फॉर रूमेटिक डिसीज के निदेशक और आयुष मंत्रालय के ‘आयुष मंत्रालय-सीएसआईआर सहयोग’ के मानद मुख्य नैदानिक समन्वयक डॉ. अरविंद चोपड़ा ने बताया कि परीक्षण तीन केंद्रों पर आयोजित किया गया था। इसमें KGMU, लखनऊ; DMIMS, वर्धा और BMC कोविड केंद्र, मुंबई शामिल रहे तथा प्रत्येक केंद्र में 70 प्रतिभागी शामिल रहे। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि आयुष 64 ने मानक चिकित्सा (Standard of Care यानी एसओसी) के एक सहायक के रूप में महत्वपूर्ण सुधार प्रदर्शित किया। और इस तरह इसे एसओसी के साथ लेने पर अकेले एसओसी की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने की अवधि भी कम देखी गई। उन्होंने यह भी साझा किया कि सामान्य स्वास्थ्य, थकान, चिंता, तनाव, भूख, सामान्य हर्ष और नींद पर आयुष 64 के कई महत्वपूर्ण, लाभकारी प्रभाव भी देखे गए। निष्कर्ष रूप में डॉ. चोपड़ा ने कहा कि इस तरह के ‘नियंत्रित दवा परीक्षण अध्ययन’ ने स्पष्ट सबूत दिए हैं कि आयुष 64 को कोविड -19 के हल्के से मध्यम मामलों का उपचार करने के लिए मानक चिकित्सा के सहायक के रूप में प्रभावी और सुरक्षित दवा के रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो रोगी आयुष 64 ले रहे हैं, उनकी निगरानी की अभी भी आवश्यकता होगी ताकि अगर बीमारी और बिगड़ने की स्थिति हो तो उसमें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ऑक्सीजन और अन्य उपचार उपायों के साथ अधिक गहन चिकित्सा की आवश्यकता की पहचान की जा सके।
आयुष नेशनल रिसर्च प्रोफेसर तथा कोविड-19 पर अंतर-विषयक आयुष अनुसंधान और विकास कार्य बल (Inter-disciplinary Ayush Research and Development Task Force on COVID-19) के अध्यक्ष डॉ. भूषण पटवर्धन ने कहा कि आयुष 64 पर हुए इस अध्ययन के परिणाम अत्यधिक उत्साहजनक हैं और आपदा की इस कठिन घड़ी में ज़रूरतमंद मरीज़ों आयुष 64 का फायदा मिलना ही चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति (Ayush-CSIR Joint Monitoring Committee) ने इस बहु-केंद्रीय परीक्षण की निगरानी की थी। स्वास्थ्य शोध विभाग के पूर्व सचिव तथा आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी एम कटोच इस समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष 64 पर हुए इन नैदानिक अध्ययनों (clinical studies) की समय-समय पर एक स्वतंत्र संस्था 'डेटा और सुरक्षा प्रबंधन बोर्ड' (Data and Safety Management Board यानी डीएसएमबी) द्वारा समीक्षा की जाती थी।
डॉ. पटवर्धन के दावे की पुष्टि करते हुए आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ वीएम कटोच ने बताया कि समिति ने आयुष 64 के अध्ययन के परिणामों की गहन समीक्षा की है। उन्होंने कोविड-19 के लक्षणविहीन संक्रमण, हल्के तथा मध्यम संक्रमण के प्रबंधन के लिए इसके उपयोग की संस्तुति की। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस निगरानी समिति ने आयुष मंत्रालय से सिफारिश की है कि वह राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों / नियामकों (Regulators) को आयुष 64 के इस नये उपयोग (Repurposing) के अनुरूप इसे हल्के और मध्यम स्तर के कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में उपयोगी के तौर पर सूचित करे।
केंद्रीय आयुर्वेदीय अनुसन्धान संस्थान (CCRAS) के महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने विस्तार से बताया कि CSIR-IIIM, DBT-THSTI, ICMR-NIN, AIIMS जोधपुर और मेडिकल कॉलेजों सहित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़; किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ; गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नागपुर; दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नागपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आयुष 64 पर अध्ययन जारी हैं। अब तक मिले परिणामों ने हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमणों से निबटने में इसकी भूमिका स्पष्ट तौर पर जाहिर की है। उन्होंने यह भी बताया कि सात नैदानिक (क्लीनिकल) अध्ययनों के परिणाम से पता चला है कि आयुष 64 के उपयोग से संक्रमण के जल्दी ठीक होने (Early clinical recovery) और बीमारी के गंभीर होने से बचने के संकेत मिले हैं।
रायपुर | आज के समय मे संक्रमित लॉगो का ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर रहा है और ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए त्राहि-त्राहि मची है ऐसे समय में होम्योपैथी कारगर साबित हो रही है होम्योपैथी दवाओं से ऑक्सीजन के तेजी से नीचे आने की प्रक्रिया संभल जा रही है ऑक्सीजन लेवल एकदम से नहीं गिर रहा है लगभग 300 से अधिक मरीजों पर यह प्रयोग डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी द्वारा लिली चौक पुरानी बस्ती स्थित त्रिवेदी होम्योपैथी क्लीनिक में किया गया है।
डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी ने बताया कि पिछले बार का संक्रमण इस बार से संक्रमण काफी ज्यादा खतरनाक दिख रहा और यह सीधा फेफड़ों पर असर करता है,जिसका एक मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा इम्युनिटी बढ़ाने की दवाई लेना भी है,तेज बुखार के साथ हाथ पैरों व सर में असहनीय दर्द,खासी आना,कमजोरी गला सुखना ,ठंड लगना के साथ अन्य कई लक्षण है व मानसिक रूप से लोग डर व सहम चुके और मानसिक प्रेशर बढऩे से कई लोगो की आंतरिक शक्ति कमजोरी हो रही, लेकिन होम्योपैथी में लक्षणों ( शारीरिक व मानसिक) के मिलान के आधार पर चुनी हुई औषधि देने से चमत्कारिक परिणाम सामने आ रहे हैं कई ऐसे मरीज हैं जिनका ऑक्सीजन लेवल 70 से 75 तक था और आज वह नॉर्मल है वह एकदम स्वस्थ है अपने सारा काम कर रहे हैं। होम्योपैथी में एक नहीं सैकड़ों दवाइयां उपलब्ध है जो ऑक्सीजन की कमी को दूर करने में सहयोग कर सकती हैं इसमें कृतिम ऑक्सीजन पर निर्भरता कम होगी उन्होंने यह बताया कि कोरोनावायरस से बचाव के इलाज में होम्योपैथी को शामिल करने से अस्पताल पर दबाव कम होगा जिससे इलाज में आसानी होगी और साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए होम्योपैथिक की आर्सेनिक एल्बम 30 दवा हर महीने में 3 दिन तीन खुराक तक लगातार ले सकते हैं जिससे कि कहीं न कहीं इस महामारी लडऩे के लिए हमारे अंदर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी वह हम काफी हद तक बच पाएंगे। आगे चर्चा करते हुवे उन्होंने यह भी बताया कि होमियोपैथी में लक्षणों में मिलान के आधार पर दवाईये दी जाती है किसी भी बीमारी के लिए पहले से कोई दवाई नही होती है अत: फेसबुक और व्हाट्सअप पर मैसेज पढ़कर दवाई लेने न दौड़े अपने नजदीकी चिकित्सक से जरूर संपर्क करे।
Covid-19 Alert: देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है. कोरोना के रोजाना मामले तीन लाख को पार कर रहे है और हजारों लोगों की रोज मौत हो रही है. ऐसे में कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण से बचने के लिए आपका मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और हाथों को बार-बार साफ करना और हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना शामिल है. कोरोना इंफेक्श न (Corona Infection) से बचने के लिए हाथों को साबुन या हैंडवॉश से अच्छी तरह से धोना बेहद जरूरी है. बच्चों को भी हमें हाथ धोने के जरूरत को बताने की आवश्यकता है.
हमें किसी भी बीमारी या इंफेक्शजन से बचने के लिए हाथों को ठीक से साफ करना चाहिए. यह आदतें हम घर में ही सीखते है. आपको हम बताते हैं कि हाथों को साफ रखने के क्या फायदे है और हाथों हाइजीन को आप कैसे मेंटेन कर सकतें है.
इन चीजों को करने से पहले हाथ धोना है बेहद जरूरी
1. फल और सब्जियों को काटने या पकाने से पहले आप हाथ अच्छे से धोएं.
2. खाने से पहले हाथ ठीक से धोएं.
3. अगर आप किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल कर रहे है तो हाथों को साफ रखना बहुत जरूरी है.
4. घाव का इलाज या दवाई लगाने से हाथों को ठीक से साफ करें.
5. आखों में कॉन्टेक्ट लेंस लगाने या हटाने से पहले भी हाथों को साफ करें.
6. खाना बनाने से पहले हाथ धोएं.
7. टॉयलेट का इस्तेमाल करने या बच्चों का डायपर चेंज करने के बाद हाथों को साबुन से धोएं.
8. खांसने या छींकने के बाद भी हाथों को धोएं.
9. जानवर को चारा देने के बाद हाथों को धोएं.
10. कचरा छूने के बाद हाथों को साफ जरूर करें
हाथों को कैसे करें साफ
कई बार हमारे साथ ऐसा होता है जब हमारे पास साबुन और पानी नहीं होता की हम हाथों को साफ करें ऐसे में हैंड सैनिटाइजर से आप अपने हाथों को साफ कर सकतें है. सबसे पहले आप 60 प्रतिशत अल्कोैहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का यूज करें. सबसे पहले आप हैंड सैनिटाइजर पर्याप्त मात्रा में लें और हाथों को एक साथ रगड़ें, पूरे हाथों को कवर करें. हाथ को तब तक कवर करके रखें जब तक की हाथ पूरी तरह से सुख ना जाएं.
Remdesivir Real Or Fake: देश भर में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर के कारण हाहाकार मचा है. गंभीर मरीजों के ईलाज के लिए डॉक्टर्स रेमेडिसविर (Remdesivir) इंजेक्शन की मांग कर रहे हैं. पर इस बीच इसकी कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं. कुछ लोग नकली रेमेडिसविर बेच रहे हैं, ये भी पता चला. ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर कैसे इस इंजेक्शन के असली या नकली होने की पहचान की जाए.
अगर आपके मन में भी इसी तरह का सवाल है तो ये खबर आपके बेहद काम की है. दरअसल, अब आप असली और नकली दवा की बेहद आसानी से पहचान कर सकते हैं.
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी और IPS अफसर मोनिका भारद्वाज ने इससे संबंधित ट्वीट किया है. ये काफी वायरल भी हो रहा है.
उन्होंने ट्वीट में इस बात की जानकारी दी है कि असली व नकली दवा में क्या फर्क दिखता है. उन्होंने रेमेडिसविर के पैकेट के ऊपर कुछ गलतियों के बारे में बताया है, जिन पर गौर करके ही आप असली और नकली रेमेडिसविर के बीच फर्क को जान सकते हैं.
Attention!!
— Monika Bhardwaj (@manabhardwaj) April 26, 2021
Lookout for these details before buying Remdesivir from the market. pic.twitter.com/A2a3qx5GcA
— Monika Bhardwaj (@manabhardwaj) April 26, 2021
कुछ खास बातें जिन पर ध्यान देना है, वे हैं-
1. नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले ‘Rx’ नहीं है.
2. असली इंजेक्शन के पैकेट पर ‘100 mg/Vial’ लिखा है, जबकि नकली पैकेट पर ‘100 mg/vial’ लिखा है. यानी स्पेलिंग नहीं कैपिटल लेटर का फर्क है, गौर करें.
3. असली पैकेट पर जहां ‘For use in’ लिखा है तो वहीं नकली पैकेट पर ‘for use in’ है. यहां भी लेटर का झोल है.
4. असली रेमेडिसविर इंजेक्शन के पैकेट के पीछे वॉर्निंग लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट में काले रंग में.
नई दिल्ली. देशभर में एक मई से कोरोना टीकाकरण का अगला चरण शुरू होने जा रहा है. इसी शनिवार से 18 साल से 44 साल के लोग भी कोरोना का टीका लगवाने के पात्र होंगे. इससे पहले 45 साल से ऊपर के लोग ही टीका लगवा सकते थे. 18 से 44 की उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए आज शाम 4 बजे से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. सरकार ने साफ किया है कि इन लोगों को वॉक-इन यानी सीधा टीका केंद्रों पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा नहीं मिलेगी. बता दें कि रजिस्ट्रेशन करने के लिए आप कोविन पोर्टल या फिर आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. टीकाकरण के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ही मान्य किया गया है.
क्या है प्रोसेस?
कोरोना वैक्सीनेशन के लिए 18-44 साल के लोग आज से कोविन पोर्टल या फिर आरोग्य सेतु एप पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. Cowin ऐप पर या फिर cowin.gov.in वेबसाइट पर जाकर आपको सबसे पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस ऐप या वेबसाइट पर जाकर आपको अपना मोबाइल नंबर फीड करना होगा. मोबाइल नंबर पर डालने पर आपको एक OTP दिया जाएगा. इस OTP को वैरिफाई कराना होगा. इसके बाद आप वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन पेज तक पहुंच जाएंगे. यहां पर आपको फोटो आईडी प्रूफ की जानकारी डालनी होगी. फोटो आईडी प्रूफ के तौर पर आप आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट या फिर पेंशन की पासबुक सिलेक्ट कर सकते हैं. इसके बाद आपको आईडी प्रूफ का नंबर, अपना नाम, जेंडर और बर्थ ईयर डालना होगा. सारी जानकारी भरने के बाद आपको रजिस्टर बटन पर क्लिक करना होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद आप पसंदीदा वैक्सीनेशन सेंटर चुन सकते हैं. यहां आपको वैक्सीनेशन डेट और टाइमिंग की जानकारी मिल जाएगी. इसी तरह से आप आरोग्य सेतु ऐप पर भी वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.
Coronavirus की दूसरी लहर से देश में हालात अब बेकाबू होते जा रहे हैं. वहीं ऑक्सीजन को लेकर कई जगहों पर हाहाकार मचा है. कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है और वो जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है. ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण कई मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है. ऐसी भयंकर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सांस लेने में जिन मरीजों को तकलीफ हो रही है, उनके लिए प्रोनिंग के कुछ आसान तरीके सुझाए हैं, जिसे प्रयोग में लाकर कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन लेवल को सुधारा जा सकता है.
कैसे करें Proning
मरीज को पेट के बल लिटा दें.
गर्दन के नीचे एक तकिया रखें फिर एक या दो तकिये छाती और पेट के नीचे बराबर रखें और दो तकिये पैर के पंजे के नीचे रखें.
30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक इस पोजीशन में लेटे रहने से मरीज को फायदा मिलता है.
ध्यान रहे हर 30 मिनट से दो घंटे में मरीज के लेटने के पोजिशन को बदलना जरूरी है.
उसे पेट के बल लिटाने के बाद इसी समयावधि के बीच बारी-बारी दाईं और बाईं तरफ करवट करके लिटाएं.
इसके बाद मरीज को बैठा दें और फिर उसे पेट के बल लिटा दें.
इस प्रक्रिया में फेफड़ों में खून का संचार अच्छा होने लगता है और फेफड़ों में मौजूद फ्लूइड इधर-उधर हो जाता है, जिससे लंग्स में ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती रहती है. ऑक्सीजन का लेवल भी नहीं गिरता है.
क्या होती है Proning
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक,
प्रोनिंग एक तरह की प्रक्रिया है जिससे मरीज अपना ऑक्सीजन लेवल खुद ही सुधार सकता है.
ऑक्सीजनाइजेशन तकनीक में ये प्रक्रिया 80 प्रतिशत तक कारगर है.
इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए आप पेट के बल लेट जाएं.
मेडिकली भी ये प्रूव हो चुका है कि प्रोनिंग करने से सांस लेने में हो रही तकलीफ में आराम मिलता है.
इससे ऑक्सीजन लेवल में सपोर्ट मिलता है.
होम आइसोलेशन में कोरोना मरीजों के लिए प्रोनिंग काफी मददगार है.
प्रोन पोजीशन सुरक्षित है और इससे खून में ऑक्सीजन लेवल के बिगड़ने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है.
इससे आईसीयू में भी भर्ती मरीजों में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं.
वेंटिलेटर नहीं मिलने की स्थिति में यह प्रक्रिया सबसे अधिक कारगर है.
कब करें प्रोनिंग…
प्रोनिंग तब करें जब कोरोना मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और ऑक्सीजन लेवल 94 से कम हो जाए.
अगर आप होम आइसोलेशन में हैं तो समय-समय पर अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें.
इसके अलावा, बुखार, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर भी समय-समय पर मापते रहें.
समय पर सही प्रक्रिया के साथ प्रोनिंग कई लोगों की जान बचाने में मददगार है.
ऐसी स्थिति में ना करें Proning
खाना खाने के तुरंत बाद ही प्रोनिंग प्रक्रिया न करें.
खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही इस प्रक्रिया को अपनाएं.
अगर आप प्रेगनेंट हैं तो ना करें.
गंभीर कार्डिएक कंडीशन है या शरीर में स्पाइनल से जुड़ी कोई समस्या या फ्रैक्चर हो तो इस प्रक्रिया को न अपनाएं.
ऐसी स्थिति में Proning से आपको नुकसान हो सकता है।



















