BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |
पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट ने दी कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए जानकारी,

पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट ने दी कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए जानकारी,

 नई दिल्‍ली. कोरोना की दूसरी लहर ( covid second wave) में मची तबाही के बाद अब तीसरी लहर (Covid Third Wave) का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा  रही है, वहीं इसको लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि यह लहर बच्‍चों को अपना शिकार बना सकती है| इतना ही नहीं इस लहर में दूसरी लहर के मुकाबले काफी बड़ी संख्‍या में कोरोना के मामले आने की चेतावनी भी दी जा रही है| तीसरी लहर को लेकर अब पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट लॉकडाउन (Lock Down) को कड़ा करने या इसमें छूट देने जैसी चीजें करने के बजाय कुछ तरीके अपनाने की राय दे रहे हैं| ताकि लंबे समय त‍क इन उपायों से पूरी व्‍यवस्‍था को ठीक रखा जा सके और वायरस (Corona Virus) से भी लड़ा जा सके| नेशनल काउंसिल ऑफ डिजीज कंट्रोल (NCDC) से रिटायर्ड और दिल्‍ली के जाने-माने पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल देशभर में पूरी तरह लॉकडाउन खोल देने या लॉकडाउन लगा देने के बजाय कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि हफ्ते-15 दिन की पूरी सख्‍ती और फिर उसके बाद दी जा रही छूट से चीजें खराब हो रही हैं|

वे कहते हैं कि देश में कोरोना की पहली लहर के बाद जब कोरोना के मामलों में कमी आई तो सभी पाबंदियां हटा ली गईं और सभी को पूरी छूट दे दी गई जिसका परिणाम दूसरी लहर के रूप में भयंकर आया. इसी तरह जब कोरोना की तीसरी, चौथी और कई लहरों की चेतावनी दी जा चुकी है तो बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है. साथ ही सबसे ज्‍यादा जरूरी है सरकारों की ओर से स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी इंतजामों के अलावा नियम और तरीके तय करना.

डॉ. सतपाल कहते हैं कि दिल्‍ली में पहले लॉकडाउन और अब लॉकडाउन में दी गई छूट के बाद संभव है कि अगर कोरोना के मामले बहुत नीचे पहुंचे तो सभी चीजों को पूरी तरह खोल दिया जाएगा. अभी भी सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो ट्रेन (Metro Train) की सेवा भी शुरू हो गई है, सरकारी और प्राइवेट दफ्तर खुल गए हैं. रिटेल की दूकानें खुल ही रही हैं. ऐसे में अगर ये कह रहे हैं कि बहुत चीजें बंद हैं और लॉकडाउन है तो उसका फायदा नहीं नजर आ रहा है.

 

 सतपाल कहते हैं कि राज्‍य सरकारों को लॉकडाउन कम से कम छह महीने और लगाना चाहिए या फिर तब तक लगाना चाहिए जब तक कि सभी को कोरोना का टीका नहीं लग जाता. हालांकि इस दौरान पूरी तरह पाबंदियां लगाने की सलाह नहीं दी जा रही बल्कि चीजों को सीमित और समयबद्ध करने की सलाह दी जा सकती है|

 

दफ्तरों के लिए लागू हों ये नियम

 

 डॉ. सतपाल कहते हैं कि दिल्‍ली सहित अन्‍य राज्‍य सरकारें अपने यहां प्राइवेट और सरकारी सभी दफ्तरों को खोल सकती हैं लेकिन इसके लिए समय को बांट दें. जैसे कि सुबह सात बजे से लेकर शाम के पांच बजे तक हर एक या दो घंटे पर ऑफिसों का 20-25 फीसदी स्‍टाफ बुलाया जाए. साथ ही काम के घंटों को भी घटा दिया जाए. इसका फायदा यह होगा कि एक साथ भीड़ नहीं होगी न तो दफ्तरों में न ही सार्वजनिक परिवहन के वाहनों में. वहीं जो प्राइम टाइम की भीड़भाड़ होती है उससे बच पाएंगे और काम भी ठीक तरह से चलेगा|

इसका एक फायदा ये भी होगा कि जो लोग घरों पर रहकर मानसिक रोगी बन रहे हैं वे अपने काम को कम समय में बेहतर करने की कोशिश करेंगे और व्‍यस्‍त रहेंगे और मानसिक कष्‍ट से बचेंगे|

 

बाजार और शराब की दुकानों के लिए तय हो समय

 

दिल्‍ली की केजरीवाल सरकार ने शराब की होम डिलिवरी की बात की है. हालांकि शराब की दुकानों के लिए भी समय तय कर दें. थोक बाजार के काम के लिए तो वैसे भी बहुत ज्‍यादा दुकानें खोलने की जरूरत नहीं होती ऐसे में रिटेल के लिए समय तयह करना होगा.  जैसे कि एक इलाके की कुछ दुकानें सुबह 12 बजे तक खुलेंगी तो उसी इलाके की दूसरी दुकानें दोपहर एक से शाम पांच तक खुलेंगी|

डॉ. सतपाल कहते हैं कि इसका फायदा ये होगा कि सभी हर दिन अपनी दुकानें खोल पाएंगे साथ ही ग्राहकों को भी दिक्‍कत नहीं होगी कि वे बाजार से दुकान बंद होने के चलते खाली लौट आए|

एक बड़ी समस्‍या साप्‍ताहिक बाजारों की भी है. ऐसे में जहां जहां साप्‍ताहिक बाजार लगते हैं उन्‍हें रोजाना की अनुमति संख्‍या बांटकर दी जाए. जैसे कि साप्ताहिक बाजार में 200 स्‍टॉल लगते हैं तो 20-30 स्‍टॉल को रोजाना लगाने की अनुमति दी जाए. ऐसे में सप्‍ताह में एक बार हर स्‍टॉल वाले का नंबर आ जाएगा. इससे उनकी रोजी रोटी भी चलेगी और लोगों को भी एक दिन खरीदारी के लिए भीड़ नहीं लगानी होगी|

 

होटल और सिनेमा हॉल के लिए ये किया जा सकता है उपाय  

 

पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट कहते हैं कि आजकल घरों में बंद रह रहकर लोग साइकेट्रिस्‍ट के पास जा रहे हैं. इनसे बचा जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि अगर होटल में ओपन स्‍पेस है तो वहां लोगों को खाना-खाने की अनुमति दी जाए. जहां ओपन स्‍पेस नहीं है वहां से होम डिलिवरी कराई जा सकती है. इससे ये सब बंद भी नहीं होंगे और लोगों को भी सुविधाएं मिलती रहेंगी. रोजगार भी बना रहेगा और कोरोना से बचाव भी.

सिनेमा हॉल को किसी भी तरह खोलना खतरे पैदा करेगा इसलिए इसका उपाय ढूंढा जा सकता है. इसके लिए तमाम डिजिटल प्‍लेटफॉर्म या टीवी चैनलों पर फिल्मों को दिखाया जा सकता है. साथ ही सिनेमा हॉल मालिकों को इसके लिए कुछ पैसा दिया जाए ऐसी व्‍यवस्‍था बनाई जा सकती है|

 

बच्‍चों के खेलने और बाहर जाने को लेकर किया जा सकता है ये काम

 

स्‍कूल बंद होने के बाद बच्‍चे घरों में रह रहे हैं और ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, इससे न केवल उनकी आंखें और विकास पर असर पड़ रहा है बल्कि वे मानसिक रूप से परेशान भी हो रहे हैं. ऐसे में पार्कों को खोलने का समय बढ़ाया जा सकता है. जब तक तेज धूप नहीं आती तब तक बच्‍चे पेड़-पौधों की छांव और पार्कों में खेल सकते हैं. शाम को भी जल्‍दी पार्क खोले जाएं और देर तक खुले रहें. पार्कों में बुजुर्गों के लिए भी एक समय तय कर दिया जाए. हालांकि इस दौरान सोशल डिस्‍टेंसिंग और मास्‍क का ध्‍यान रखा जाए, बाकि चीजें नॉर्मल चल सकती हैं|

डॉ. सतपाल कहते हैं कि यह वह समय है कि सिर्फ कोरोना से आदमी नहीं मर रहा है. बल्कि स्‍वस्‍थ्‍य और फिट न रहने के चलते कोरोना जैसे वायरस का मुकाबला नहीं कर पा रहा है और नुकसान हो रहा है. इस समय लोगों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से भी स्‍वस्‍थ होना होगा, तभी चीजें ठीक हो पाएंगी|

कोविड-19 टीकाकरण पर ताज़ा जानकारी

कोविड-19 टीकाकरण पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के अंग के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड वैक्सीन निशुल्क प्रदान करके उनका सहयोग कर रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की सीधी खरीद की भी सुविधा दे रही है। टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट और कोविड उचित व्यवहार सहित महामारी के प्रबंधन और उसे रोकने के लिये केंद्र सरकार ने जो समग्र रणनीति बनाई है, टीकाकरण उसका अभिन्न हिस्सा है।

कोविड-19 के उदार और तेज तीसरे चरण का क्रियान्वयन एक मई, 2021 को शुरू हुआ था।

इस रणनीति के तहत केंद्र सरकार हर माह केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला द्वारा मान्यताप्राप्त वैक्सीनों का 50 प्रतिशत निर्माताओं से खरीदती है। इन वैक्सीनों को राज्यों को बिलकुल निशुल्क प्रदान किया जाता है, जैसा पहले भी किया जाता था।

केंद्र सरकार ने अब तक निशुल्क और राज्य सरकारों द्वारा सीधी खरीद की सुविधा के जरिये राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 24 करोड़ (24,65,44,060) से अधिक वैक्सीन की खुराकें मुहैया कराई हैं।

 

 

आज सुबह आठ बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन खुराकों में से खराब होने वाली खुराकों सहित 23,47,43,489 खुराकों की खपत हुई है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास लगाये जाने के लिये अब भी 1.19 करोड़ (1,19, 46,925) से अधिक खुराकें मौजूद हैं। 

8 जून : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

8 जून : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

भारत में 63 दिनों बाद पिछले 24 घंटों में रोजाना एक लाख से कम नए मामले दर्ज हुये।

पिछले 24 घंटों में 86,498 नये मामले दर्ज किये गये, जो 66 दिनों में सबसे कम हैं।

भारत के सक्रिय केस-लोड में और गिरावट दर्ज की गई और वह 13,03,702 रहा।

पिछले 24 घंटों में सक्रिय मामलों में 97,907  की कमी।

अभी तक देश भर में कोविड संक्रमण से कुल 2,73,41,462 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

पिछले 24 घंटों के दौरान 1,82,282 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले लगातार 26वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या अधिक रही।

रिकवरी दर में इजाफा, वह 94.29 प्रतिशत पहुंची।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर वर्तमान में 5.94  प्रतिशत है।

दैनिक पॉजिटिविटी दर 4.62  प्रतिशत तक पहुंची और लगातार 1 दिनों से यह 10 प्रतिशत से कम पर कायम है।

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथअभी तक कुल 36.8 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।

भारत ने देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 23.61 करोड़ टीके लगाये हैं।

क्या कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को है बड़ा खतरा? जानें AIIMS के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने क्या कहा है

क्या कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को है बड़ा खतरा? जानें AIIMS के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने क्या कहा है

नई दिल्ली, कोरोना वायरस की तीसरी लहर क्या बच्चों पर ज्यादा असर करेगी? इसको लेकर इस वक्त हर कोई चर्चा कर रहा है. इस बीच दिल्ली के एम्स अस्पताल के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने साफ कर दिया है कि वैश्विक या भारतीय स्तर पर बच्चों को लेकर ऐसा कोई डेटा नहीं है कि तीसरी लहर का असर बच्चों पर ज्यादा होगा.


रणदीप गुलेरिया ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर में भी जो बच्चे वायरस से संक्रमित हुए हैं वो या तो बेहद कम बीमार हुए या वो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे थे. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आने वाले दिनों में बच्चे कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित होंगे.


संक्रमण के नए मामलों में आ रही तेज़ी से गिरावट


केंद्र सरकार ने कहा कि देश में रोजाना कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार और तेजी से गिरावट आ रही है. हालांकि सरकार ने जोर दिया कि कोविड-19 संबंधी उपयुक्त व्यवहार का पालन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और लहर को आने से रोका जा सके. स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सात मई को चरम स्तर पर पहुंचने के बाद से दैनिक नए मामलों में करीब 79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.


उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर पर कहा कि दैनिक नए मामलों में लगातार और तेजी से गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि भारत में प्रति दस लाख आबादी पर कोरोना वायरस के 20,822 मामले आए और 252 मौतें हुई हैं जो दुनिया में सबसे कम है. भविष्य में कोरोना की किसी और लहर को रोकने के लिए सरकार ने आबादी का टीकाकरण होने तक कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार का पालन करने पर जोर दिया.


उन्होंने कहा कि 3 मई को देश में रिकवरी रेट 81.8 फीसदी था, अब रिकवरी रेट 94.3 फीसदी हो गया है. पिछले 24 घंटों में देश में 1,82,000 रिकवरी हुई हैं. हर राज्य में अब रिकवरी की संख्या प्रतिदिन दर्ज़ किए जा रहे मामलों की संख्या से ज्यादा है.


लव अग्रवाल ने कहा कि जहां 7 मई को देश में प्रतिदिन के हिसाब से 4,14,000 मामले दर्ज किए गए थे, वे अब 1 लाख से भी कम हो गए हैं. पिछले 24 घंटों में 86,498 मामले देश में दर्ज़ किए गए. यह 3 अप्रैल के बाद अब तक एक दिन के सबसे कम मामले हैं. उन्होंने बताया कि 4 मई को देश में 531 ऐसे ज़िले थे, जहां प्रतिदिन 100 से अधिक मामले दर्ज़ किए जा रहे थे, ऐसे ज़िले अब 209 रह गए हैं.

 

ब्रे़किंग: भारत में मिला कोरोना का नया वैरिएंट, जाने यह कितना है खतरनाक

ब्रे़किंग: भारत में मिला कोरोना का नया वैरिएंट, जाने यह कितना है खतरनाक

नई दिल्ली। भारत में कोरोना संक्रमण के नियंत्रण में आ रहे हालात के बीच डराने वाली खबर आई है। पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने कोरोनावायरस की जिनोम सीक्वेंसिंग में नए वैरिएंट का पता लगाया है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैरिएंट ब्रिटेन और ब्राजील से भारत आए लोगों में पाया गया है। इंस्टीट्यूट ने इसे बी1.1.28.2 नाम दिया है। यह भारत में पाए गए डेल्टा वैरिएंट की ही तरह गंभीर है। इससे संक्रमित लोगों में कोरोना के गंभीर लक्षण दिख सकते हैं। वैरिएंट की स्टडी के बाद पाया गया कि यह लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। इस वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन असरदार है या नहीं, इसके लिए स्क्रीनिंग की जरूरत बताई गई है। इसी इंस्टीट्यूट की एक और स्टडी में बताया गया कि स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन इस वैरिएंट के खिलाफ भी असरदार है और वैक्सीन की दो डोज से जो एंटीबॉडीज बनती हैं। उससे इस वैरिएंट को न्यूट्रिलाइज किया जा सकता है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैरिएंट ब्रिटेन और ब्राजील से भारत आए लोगों में पाया गया है। इंस्टीट्यूट ने इसे बी1.1.28.2 नाम दिया है। यह भारत में पाए गए डेल्टा वैरिएंट की ही तरह गंभीर है। इससे संक्रमित लोगों में कोरोना के गंभीर लक्षण दिख सकते हैं। वैरिएंट की स्टडी के बाद पाया गया कि यह लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। इस वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन असरदार है या नहीं, इसके लिए स्क्रीनिंग की जरूरत बताई गई है। इसी इंस्टीट्यूट की एक और स्टडी में बताया गया कि स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन इस वैरिएंट के खिलाफ भी असरदार है और वैक्सीन की दो डोज से जो एंटीबॉडीज बनती हैं। उससे इस वैरिएंट को न्यूट्रिलाइज किया जा सकता है।

 
भारत के सक्रिय मामले आज गिरकर हुये, इतने ... देखें आकड़े

भारत के सक्रिय मामले आज गिरकर हुये, इतने ... देखें आकड़े

पिछले 24 घंटों में भारत में कोविड के 1,000,636 नये मामले दर्ज किये गये। दो महीनों में यह आंकड़ा सबसे कम है। देश में लगातार 11वें दिन दो लाख रोजाना से कम नये मामले दर्ज किये गये हैं। यह ‘समग्र सरकारी तंत्र’ की भावना के तहत केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सतत प्रयास और सहयोग से मुमकिन हो सका है।
भारत में सक्रिय मामलों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। देश का सक्रिय केस-लोड दूसरे दिन भी 15 लाख से नीचे कायम रहा है। आज उसकी दर 14,01,609 है। सात दिनों से लगातार केस-लोड 20 लाख से नीचे बना हुआ है।

पिछले 24 घंटों में कोविड मामलों में कुल गिरावट 76,190 दर्ज की गई। सक्रिय मामले अब देश के कुल पॉजीटिव मामलों का महज़ 4.85 प्रतिशत हैं।

कोविड-19 संक्रमण से उबरने वाले लोगों की तादाद बढ़ रही है। इसके साथ ही भारत में रोजाना रिकवरी लगातार 25वें दिन भी नये मामलों से अधिक रही। पिछले 24 घंटों के दौरान 1,74,399 लोग कोविड से उबरे हैं।

पिछले 24 घंटों में रोजाना नये मामलों के मुकाबले 73,764 की और रिकवरी दर्ज की गई है। महामारी की शुरूआत से संक्रिमत होने वाले कुल लोगों में से 2,71,59,180 लोग कोविड-19 से स्वस्थ हो चुके हैं। इस आधार पर रिकवरी दर 93.94 प्रतिशत बैठती है, जिसमें लगातार बढ़ोतरी का रुझान बना हुआ है।

देश में पिछले 24 घंटों में कुल 15,87,589 जांचें की गईं। आमूल रूप से देखा जाये, तो भारत में अब तक 36.6 करोड़ (36,63,34,111) से अधिक जांचे हो चुकी हैं।

एक तरफ देश में जांचों को बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ पॉजीटिविटी में लगातार गिरवाट नजर आ रही है। दैनिक पॉजीटिविटी दर आज 6.34 प्रतिशत रही। यह 14वें भी लगातार 10 प्रतिशत से कम पर कायम है।

टीकाकरण के मोर्चे पर देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत 23.27 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी हैं।
आज सात बजे सुबह तक मिली अस्थायी रिपोर्ट के आधार पर 32,68,969 सत्रों के जरिये कुल 23,27,86,482 टीके लगाये गये।

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों को निशुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांचबीमारी का पता लगानेउपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है।

कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है।

रणनीति के तहतहर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50 प्रतिशत खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को कोविड टीके की 24 करोड़ से अधिक खुराक (24,60,80,900) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है। इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 23,11,69,251 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है।

 

 

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.49 करोड़ से ज्यादा (1,49,11,649) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

 

7 जून : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

7 जून : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

भारत में पिछले 24 घंटों में एक लाख दैनिक नए मामले दर्ज हुये, जो 61 दिनों में सबसे कम हैं।

भारत के सक्रिय मामलों में गिरावट दर्ज की गई और वह 14,01,609 रहा।

पिछले 24 घंटों में सक्रिय मामलों में 76,190 की कमी।

अभी तक देश भर में कोविड संक्रमण से कुल 2,71,59,180 रिकवरी हो चुकी है।

पिछले 24 घंटों के दौरान 1,74,399 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले लगातार 25वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।

रिकवरी दर में इजाफा, वह 93.94 प्रतिशत पहुंची।

साप्ताहिक पॉजीटिविटी दर वर्तमान में 6.21 प्रतिशत है।

दैनिक पॉजीटिविटी दर में और गिरावट। वह अब 6.34 प्रतिशत तक पहुंची और लगातार 14 दिनों से यह 10 प्रतिशत से कम पर कायम है।

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 36.6 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।

 

भारत ने देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 23.27 करोड़ टीके लगाये हैं।

 

नहीं बिक रही चीनी वैक्सीन, खाड़ी देशों में सेल्समैन बन आवाज लगा रहे हैं प्रधानमंत्री

नहीं बिक रही चीनी वैक्सीन, खाड़ी देशों में सेल्समैन बन आवाज लगा रहे हैं प्रधानमंत्री

चीनी वैक्सीन को खरीदार नहीं मिल रहे हैं तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने 'सदाबहार दोस्त' के लिए सेल्समैन की भूमिका में आ गए हैं। खुद उनके ही मंत्री ने इसकी पोल खोल दी है। पाकिस्तान के बड़बोले गृहमंत्री शेख राशिद ने रविवार को कहा कि सऊदी अरब और खाड़ी के दूसरे देशों में चीनी वैक्सीन की अस्वीकार्यता के मामले को प्रधानमंत्री इमरान खान खुद देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इमरान इन देशों से गुजारिश कर रहे हैं कि चीनी वैक्सीन खरीदें
इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख राशिद ने कहा, ''उन्होंने (पीएम इमरान) कैबिनेट को बताया है कि वह खाड़ी के देशों के साथ संपर्क में हैं। सिनोफार्मा एक बेहतरीन वैक्सीन है और मैं इस मामले में चीनी सहयोग को सैल्यूट करता हूं।'' चाइनीज कंपनी की ओर से तैयार सिनोफार्मा कोविड-19 वैक्सीन को पिछले महीने ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूर किया है।
WHO से मंजूरी मिल जाने के बावजूद चीनी वैक्सीन के असर और प्रभाव को लेकर चिंताएं बरकरार है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खुद चीन के सेंट्रल फॉर डिजिज कंट्रोल (CDC) ने अप्रैल में स्वीकार किया था कि यह वैक्सीन बहुत अधिक प्रभावी नहीं है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। CDC के डायरेक्टर जॉर्ज गाओ ने कहा था कि समस्या के समाधान के लिए चीन को वैक्सीन बदलना होगा, क्योंकि मौजूदा टीके बहुत प्रभावी नहीं हैं।
गाओ का बयान सार्वजनिक होने के बाद यह चाइनीज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, बाद में बीजिंग ने इस पर पर्दा डालने की कोशिश में कहा कि CDC चीफ के बयान को संदर्भ से अलग पेश किया जा रहा है। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने गुरुवार को कहा कि बीजिंग अब तक 80 देशों को चिकित्सा सहायता भेज चुका है और दुनिया में 43 देशों को 30 करोड़ डोज टीकों की आपूर्ति की है।
 

कोविड के कुछ टेस्ट क्यों देतें हैं गलत रिपोर्ट, जाने क्या है इसका कारण

कोविड के कुछ टेस्ट क्यों देतें हैं गलत रिपोर्ट, जाने क्या है इसका कारण

नई दिल्लीमेलबर्न में कोरोना वायरस संक्रमण के मौजूदा प्रकोप से पूर्व में जोड़े गए कोविड-19 के दो मामलों को अब गलत तरीके से पॉजिटिव (संक्रमित) बताए गए मामलों के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया है। ये मामले विक्टोरिया के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं हैं जबकि इन मामलों से जोड़े गए कई जोखिम स्थलों को भी हटा दिया गया है। 

बनी रहती है फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट का आशंका

कोविड-19 के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 वायरस की पहचान करने के लिए मुख्य और “स्वर्ण मानक जांच रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) जांच है। आरटी-पीसीआर जांच अत्यधिक विशिष्ट है। इसका अर्थ यह है कि अगर कोई सचमुच संक्रमित नहीं है तो इस बात की अत्यधिक संभावना है कि जांच परिणाम नेगेटिव ही आएंगे। यह जांच बहुत संवेदनशील भी है। इसलिए अगर कोई सचमुच वायरस से संक्रमित है तो इस बात की भी संभावना अधिक है कि जांच परिणाम पॉजिटिव आएगा। लेकिन भले ही जांच अत्यधिक विशिष्ट है, लेकिन इस बात की थोड़ी सी आशंका रहती है कि किसी व्यक्ति को अगर संक्रमण न हो तो भी जांच परिणाम में वह पॉजिटिव यानी संक्रमित दिखे। इसको “फॉल्स पॉजिटिव कहा जाता है”।

कैसे काम करती है आरटी-पीसीआर जांच?

इसे समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आरटी-पीसीआर जांच काम कैसे करती है। कोविड काल में ज्यादातर लोगों ने पीसीआर जांच के बारे में सुना है लेकिन यह काम कैसे करती है यह अब भी कुछ हद तक रहस्य जैसा है। आसान और कम शब्दों में समझने की कोशिश की जाए तो नाक या गले से रूई के फाहों से लिए गए नमूनों (स्वाब सैंपल) में से आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड, एक प्रकार की आनुवांशिक सामग्री) को निकालने के लिए रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इसमें किसी व्यक्ति के आम आरएनए और अगर सार्स-सीओवी-2 वायरस मौजूद है तो उसका आरएनए शामिल होता है। इस आरएनए को फिर डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) में बदला जाता है- इसी को “रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज (आरटी) कहा जाता है। वायरस का पता लगाने के लिए डीएनए के छोटे खंडों को परिवर्धित किया जाता है। विशेष प्रकार के प्रतिदीप्त (फ्लोरोसेंट) डाई की मदद से, किसी जांच की नेगेटिव या पॉजिटिव के तौर पर पहचान की जाती है जो 35 या उससे अधिक परिवर्धन चक्र के बाद प्रकाश की चमक पर आधारित होता है। 

क्यों आती है फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट

 

गलत पॉजिटिव परिणाम क्यों आते हैं, इसके पीछे मुख्य कारण प्रयोगशाला में हुई गलती और लक्ष्य से हटकर हुई प्रतिक्रिया है यानी परीक्षण किसी ऐसी चीज के साथ क्रॉस रिएक्ट कर गया जो सार्स-सीओवी-2 नहीं है। प्रयोगशाला में हुई गलतियों में लिपिकीय त्रुटियां, गलत नमूने की जांच करना, किसी दूसरे के पॉजिटिव नमूने से अन्य नमूने का दूषित हो जाना या प्रयोग किए गए प्रतिक्रियाशील द्रव्यों के साथ समस्या होना (जैसे रसायन, एंजाइम और डाई)। जिसे कोविड-19 हुआ हो और वह ठीक हो गया हो वह भी कभी-कभी जांच में संक्रमित दिखता है।

गलत पॉजिटिव दर

ऐसे गलत परिणाम कितने आम हैं, इन्हें समझने के लिए हमें गलत पॉजिटिव दर को देखना होगा यानी जिन लोगों की जांच हुई और जो संक्रमित न होने के बावजूद पॉजिटिव पाए गए उनका अनुपात। हाल के एक प्रीप्रिंट (ऐसा पत्र जिसकी समीक्षा नहीं हुई या अन्य अनुसंधानकर्ताओं ने जिसका स्वतंत्र रूप से प्रमाणीकरण न किया हो) के लेखकों ने आरटी-पीसीआर जांच के लिए गलत पॉजिटिव दरों पर साक्ष्यों की समीक्षा की। उन्होंने कई अध्ययनों के जांच परिणामों को मिलाया और यह दर 0-16.7 प्रतिशत पाई। इन अध्ययनों में से 50 प्रतिशत अध्ययनों में यह दर 0.8-4.0 प्रतिशत तक पाई गई थी।

गलत नेगेटिव दर 

आरटी-पीसीआर जांच में गलत नेगेटिव दरों पर की गई एक व्यवस्थित समीक्षा में गलत नेगेटिव दर 1.8-5.8 प्रतिशत पाई गई। हालांकि, समीक्षा में माना गया कि ज्यादातर अध्ययनों की गुणवत्ता खराब थी। इस लेख के लेखक के अनुसार कोई जांच एकदम सटीक नहीं है। उदाहरण के लिए अगर आरटी-पीसीआर जांच में गलत पॉजिटिव पाए जाने की दर चार प्रतिशत मानी जाए तो प्रत्येक 1,00,00 लोग जो जांच में नेगेटिव पाए गए हैं और जिन्हें सच में संक्रमण नहीं है, उनमें से 4,000 गलत तरीके से पॉजिटिव आ सकते हैं। समस्या यह है कि इनमें से ज्यादातर के बारे में हमें कभी पता नहीं चलेगा। संक्रमित मिलने वाले व्यक्ति को पृथक-वास में रहने को कहा जाएगा और उससे संपर्क में आया हर व्यक्ति यह मान लेगा कि उसमें बिना लक्षण वाली बीमारी है।

कोई व्यक्ति जो गलत जांच के कारण संक्रमित बताया जाता है उसे मजबूरन पृथक-वास में रहना पड़ता है। किसी को अगर यह बताया जाए कि आपको घातक बीमारी है तो यह बहुत तनाव देने वाला होता है खासकर बुजुर्गों के लिए क्योंकि उनका स्वास्थ्य पहले से जोखिमों से भरा होता है। इसी तरह गलत नेगेटिव परिणाम भी स्पष्ट रूप से बहुत चिंताजनक हैं क्योंकि संक्रमित लोगों का समुदाय में यूं ही घूमना-फिरना खतरनाक हो सकता है।  कुल मिलाकर कहा जाए कि फॉल्स नेगेटिव या फॉल्स पॉजिटिव दोनों ही परिणाम समस्या खड़ी करने वाले हैं।

 

Source: Hindustan News

कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में, भारत सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निशुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराने के जरिये उनकी सहायता करती रही है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा टीकों की प्रत्यक्ष खरीद को भी सुगम बनाती रही है। टीकाकरण टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट एवं कोविड समुचित बर्ताव के साथ साथ महामारी के नियंत्रण तथा प्रबंधन के लिए भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अंतरंग हिस्सा है।

कोविड-19 टीकाकरण की उदार और त्वरित चरण-3 रणनीति का कार्यान्वयन 1 मई 2021 से आरंभ हुआ है।

इस रणनीति के तहत, प्रत्येक महीने किसी भी विनिर्माता की सेंट्रल ड्रग लैबोरेट्ररी (सीडीएल) स्वीकृत टीकों के 50 प्रतिशत की खरीद भारत सरकार द्वारा की जाएगी। यह राज्य सरकारों को पूरी तरह निशुल्क रूप से इन टीकों को उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसाकि यह पहले से ही करती रही है।

भारत सरकार ने अभी तक निशुल्क श्रेणी और प्रत्यक्ष राज्य खरीद श्रेणी के जरिये राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 24 करोड़ से अधिक (24,60,80,900) टीके उपलब्ध कराये हैं।

इनमें से, अपव्यय सहित कुल उपभोग 22,96,95,199 टीकों (आज सुबह 8 बजे तक उपलब्ध डाटा के अनुसार) का हुआ है।

 

 

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी भी लगाये जाने के लिए 1.63 करोड़ से अधिक (1,63,85,701) कोविड टीके उपलब्ध हैं।

 

6 जून : कोविड-19 अपडेट

6 जून : कोविड-19 अपडेट

भारत ने पिछले 24 घंटों में 1.14 लाख दैनिक नए मामले दर्ज कराये जो 60 दिनों में सबसे कम है

निरंतर गिरावट के रुझान के साथ, भारत के दैनिक नए मामले लगातार 10 दिनों से 2 लाख से कम हैं

भारत के सक्रिय मामले 15 लाख से नीचे हैं, आज यह 14,77,799 हैं

पिछले 24 घंटों में सक्रिय मामलों में 77,449 की कमी

अभी तक देश भर में कोविड संक्रमण से 2.69 करोड़ से अधिक व्यक्ति रिकवर हो चुके हैं

पिछले 24 घंटों के दौरान 1,89,232 रोगी स्वस्थ हुए

पिछले लगातार 24 दिनों से दैनिक नए मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही

राष्ट्रीय रिकवरी दर में निरंतर स्थिर वृद्धि बरकरार, आज यह 93.67 प्रतिशत तक पहुंची

साप्ताहिक पोजिटिविटी दर वर्तमान में 6.54 प्रतिशत है

दैनिक पोजिटिविटी दर और गिर कर 5.62 प्रतिशत तक आई, लगातार 13 दिनों से यह 10 प्रतिशत से कम है

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 36.4 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं

 

भारत ने 23 करोड़ से अधिक की टीकाकरण कवरेज  उपलब्धि हासिल की, अभी तक 23.13 करोड़ टीके लगाये जा चुके हैं

 

अगर तेजी से घट रहा है आपका वजन, तो हो जाएं सावधान...

अगर तेजी से घट रहा है आपका वजन, तो हो जाएं सावधान...

नई दिल्ली। अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के बाद भारत में एक और नए कोरोना वैरिएंट का खुलासा हुआ है जो सात दिन में ही मरीज का वजन कम कर सकता है। वायरस का यह वैरिएंट ब्राजील में सबसे पहले मिला था लेकिन वहां से एक ही वैरिएंट के भारत में आने की पुष्टि की गई थी। अब वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ब्राजील से एक नहीं बल्कि दो वैरिएंट भारत में आए हैं और ये दूसरा वैरिएंट बी .1.1.28.2 काफी तेज है।
सीरियाई हैमस्टर (एक प्रजाति का चूहा) में परीक्षण से पता चला है कि संक्रमित होने के सात दिन में ही इस वैरिएंट की पहचान हो सकती है। यह वैरिएंट तेजी से शरीर का वजन कम कर सकता है और डेल्टा की तरह ये भी ज्यादा गंभीर और एंटीबॉडी क्षमता कम कर सकता है।
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) की डॉ. प्रज्ञा यादव ने बताया कि बी.1.1.28.2 वैरिएंट बाहर से आए दो लोगों में मिला था। जिसकी जीनोम सीक्वेसिंग करने के बाद परीक्षण भी किया ताकि उसके असर के बारे में हमें पता चल सके। अभी तक भारत में इसके बहुत अधिक मामले नहीं है। जबकि डेल्टा वैरिएंट सबसे ज्यादा मिल रहा है। हालांकि सतर्कता बेहद जरूरी है क्योंकि एंटीबॉडी का स्तर भी कम करता है जिसके चलते दोबारा से संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि इसी साल जनवरी में कोरोना वायरस के पी1 वंश का पता चला जिसे 20जे/501वाईवी3 नाम से भी जाना जाता है। इसमें 17 तरह के स्पाइक प्रोटीन पर बदलाव देखे गए थे जिनमें एन501वाई, ई484के और के417एन शामिल हैं। इसी दौरान पी2 वंश भी भारत में आया था जिसके बारे में अब पता चला है। इस वायरस के स्पाइक प्रोटीन में ई484के नामक अमीनो एसिड बदलाव मिला है लेकिन इसमें एन501वाई और के417एन नामक परिवर्तन नहीं हैं। चूंकि सरकार ने विदेश यात्रा से लौटे सभी यात्रियों के सैंपल की जीनोम सिक्वेसिंग को अनिवार्य किया है। इसीलिए हमें नए वैरिएंट के बारे में पता भी चल गया।
 नौ में से तीन सीरियाई हैमस्टर की मौत
विदेश यात्रा से लौटे 69 और 26 वर्षीय दो लोगों के सैंपल की सिक्वेसिंग की गई थी। रिकवरी होने के तक ये दोनों रोगियों में लक्षण नहीं था लेकिन इनके सैंपल की सीक्वेसिंग के बाद जब बी.1.1.28.2 वैरिएंट का पता चला तो उसका नौ सीरियाई हैमस्टर पर सात दिन के लिए परीक्षण किया। इनमें से तीन की मौत शरीर के अंदुरुनी भाग में संक्रमण बढ़ने से हुई। इस दौरान फेफड़े की विकृति के बारे में भी पता चला और साथ ही एंटीबॉडी का स्तर कम होने के बारे में भी जानकारी मिली है।
 इंसान-सीरियाई हैमस्टर पर अलग परिणाम
इस अध्ययन में यह देखने को मिला है कि जिन दो लोगों में यह वैरिएंट मिला, वे बिना लक्षण वाले थे लेकिन जब इस वैरिएंट से सीरियाई हैमस्टर को संक्रमित किया तो गंभीरता के बारे में पता चला। वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस के ज्यादातर परीक्षण सीरियाई हैमस्टर पर हो रहे हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर बी.1.1.28.2 से जुड़े मामले बढ़ते हैं तो इसका असर इंसानों पर काफी गंभीर हो सकता है।
 

कोरोना में इस तरह बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, डाइट में शामिल करें ये चीजें

कोरोना में इस तरह बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, डाइट में शामिल करें ये चीजें

कोरोना वायरस या फिर बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बच्चों को बचाना बहुत जरूरी है. छोटे बच्चों की इम्यूनिटी ( Immunity) काफी कमजोर होती है, ऐसे में किसी भी वायरस का संक्रमण उन्हें प्रभावित कर सकता है. वहीं कोरोना वायरस ( Coronavirus) की तीसरी लहर आने की बात भी की जा रही है, जिसे सभी के लिए काफी खतरनाक बताया जा रहा है. ऐसे में बच्चों का भी खास ख्याल रखने की जरूरत है. आप अपने बच्चों की डाइट (Diet) में ऐसी चीजें शामिल कर सकते हैं जिससे बच्चों की इम्यूनिटी स्ट्रांग हो जाएगी.


सीजनल फल-सब्जी- बच्चों की इम्यूनिटी उनके खान-पान से बढ़ाने की कोशिश करें. बच्चों के खाने में सीजनल फल और सब्ज़ियां शामिल करनी चाहिए. इससे उनकी इम्यूनिटी और स्ट्रांग होगी. गर्मी में आप आम, अमरूद, आंवला, ब्रोकली और कटहल जैसी चीजें खिला सकते हैं. इन फूड्स से बच्चों की इम्यूनिटी स्ट्रांग होती है और ग्रोथ भी अच्छी होती है.


मुरब्बा-अचार-चटनी- बच्चों को सॉस और जैम काफी पसंद होते हैं. ऐसे में आप बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए आंवला, नींबू, करौंदा की चटनी दे सकते हैं. आप इन चीजों से बने मुरब्बा, अचार और जैम भी खिला सकते हैं. इनका खट्टा-मीठा स्वाद बच्चों को काफी पसंद आएगा और एनर्जी भी मिलेगी.


हेल्दी ब्रेकफास्ट दें-
बच्चों को नाश्ते में मैगी, पास्ता, बर्गर देने की बजाय उन्हें घर का बना कुछ अच्छा खाना खिलाएं. आप बच्चों को घी और गुड़ के साथ रोटी, हलवा, बेसन और राजगीरा के लड्डू खाने को दे सकते हैं. शाम को शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन्स का लेवल कम होता है. आप बच्चों को ताकत देने के लिए इस तरह का खाना दे सकते हैं.


खाने में दाल-चावल भी शामिल करें- बच्चों के हर मील को आपको अच्छी तरह प्लान करने की जरूरत है. आपको रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए और एनर्जी देने के लिए खाने में दाल- चावल भी शामिल करने चाहिए. बच्चों को दही और सेंधा नमक डालकर चावल खाने को दें. साथ ही दाल और घी के साथ भी चावल खाने के लिए दें. चावल विटामिन बी का भी बेहतर सोर्स और इसमें अमीनो एसिड भी पाया जाता है. इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन भी दूर होता है. 

बड़ी खबर : प्रदेश के इस जिले में मिला सबसे ज्यादा कोरोना का डेल्टा वैरियंट, वैज्ञानिक भी हुए हैरान

बड़ी खबर : प्रदेश के इस जिले में मिला सबसे ज्यादा कोरोना का डेल्टा वैरियंट, वैज्ञानिक भी हुए हैरान

वाराणसी | कोरोना की दूसरी लहर लगभग समाप्ति की ओर है और ऐसे में बीएचयू के वैज्ञानिकों का शोध सामने आया है. इस शोध के नतीजे चौंकाने वाले हैं. यूपी के वाराणसी में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियंट सबसे ज्यादा मिले हैं. इसके साथ ही शोध में दक्षिण अफ्रीका का भी म्यूटेंट मिला है. अब वैज्ञानिक तीसरी संभावित लहर और उसके प्रभाव को लेकर शोध में जुट गए हैं.

130 नमूनों का सीक्वेंस लिया गया
आपको बता दें कि, जब कोरोना की दूसरी लहर ने ताण्डव मचाना शुरू किया, तब बीएचयू के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गयी और तीस लोगों की टीम तैयार हुई. बाकायदा नमूनों पर गहन अध्ययन शुरू हुआ. वाराणसी सहित मिर्जापुर और अन्य जिलों के नमूनों को लिया गया. अध्ययन में 130 नमूनों का सीक्वेंस किया गया.

डेल्टा वैरियंट सबसे ज्यादा
बीएचयू और सीएसआईआर सेल्युलर,सीसीएमबी हैदराबाद ने वाराणसी और आस पास के क्षेत्रों के कोरोना वायरस वैरिएंट के जीनोम को सीक्वेंस किया गया इसके बाद आये नतीजों में डेल्टा वैरिएंट सबसे ज्यादा मिलने की बात सामने आई है. अब कोरोना के आतंकी स्वरूप को लेकर शोध जारी है और बीएचयू के वैज्ञानिकों की माने तो जल्द ही इस पर भी कामयाबी हासिल होगी.

 

4 जून :  कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

4 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 मामलों के घटने का चलन बरकरार; सक्रिय मामले और घटकर 16,35,993 हुए; लगातार आठवें दिन दो लाख से कम
पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों में 77,420 की कमी आयी
पिछले 24 घंटे में 1.32 लाख दैनिक नये मामले दर्ज किए गए, देश में दैनिक नये मामलों के घटने का चलन बरकरार
देश में अब तक कुल 2.65 करोड़ लोग कोविड-19 से उबरे
पिछले 24 घंटे में बीमारी से 2,07,071 लोग उबरे
लगातार 22वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा
नियमित वृद्धि के साथ रिकवरी रेट बढ़कर 93.08 प्रतिशत हुआ
साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट इस समय 7.27 प्रतिशत
दैनिक पॉजिटिविटी रेट गिरकर 6.38 प्रतिशत हुआ, लगातार 11वें दिन 10 प्रतिशत से कम
जांच की क्षमता में काफी वृद्धि – अब तक कुल 35.7 करोड़ जांच की गयी
राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लोगों को टीके की 22.41 करोड़ खुराक दी गयीं

तीसरी लहर में बच्चों व गर्भवतियों को हो सकता है ज्यादा खतरा, एमसीएच में तैयार हो रहा पीडियाट्रिक आईसीयू

तीसरी लहर में बच्चों व गर्भवतियों को हो सकता है ज्यादा खतरा, एमसीएच में तैयार हो रहा पीडियाट्रिक आईसीयू

रायगढ़। कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिए डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल (मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल) को तैयार किया जा रहा है। इसमें नवजात से 14 साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा हो सकता है ऐसी सम्भावना जताई जा रही है। इसके मद्देनजर कोविड डेडिकेटेड अस्पताल में सभी जरूरी संसाधन जुटाए जा रहे हैं। कोविड के सामान्य या हल्के गंभीर मरीजों को अब मेडिकल कॉलेज कोविड यूनिट में रखा जाएगा। इसके लिए एमसीएच में विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। बीते सप्ताह और दो दिन पहले इस संदर्भ में राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उच्चाधिकारियों ने तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार संक्रमण की दूसरी लहर में इंफेक्शन बहुत ज्यादा हुआ है। पहले और दूसरे दौर के संक्रमण में बच्चों के संक्रमित होने की दर एक ही जैसी थी तो यह नहीं कहा जा सकता कि कोरोना संक्रमण की दर दूसरे दौर में बच्चों में ज्यादा हुई क्योंकि मामले भले ही बढ़े हों पर दर एक जैसी ही थी। इसलिए संभावित कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही है।
इन तैयारियों के पीछे स्वास्थ्य महकमा यह भी कहता है कि 18 साल से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है पर जिन्हें अब तक वैक्सीन लगाने के निर्देश नहीं मिले हैं उनमें बच्चे और गर्भवती महिलाएं हैं। एमसीएच के प्रभारी और कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. वेद प्रकाश घिल्ले बताते हैं, “कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों को लेकर राज्य स्वास्थ्य विभाग से निर्देश मिले हैं जिसके अनुसार मानव संसाधन, मशीन, बेड और दवाइयों का इंतजाम किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के शिशु और स्त्री रोग विभाग से तैयारियों के संदर्भ में जानकारी मांगी गई है। दोनों विभाग के डॉक्टरों ने पूरा प्लान बनाकर प्रबंधन को दिया है। वर्तमान में एमसीएच में नवजात शिशु के पांच बेड और गायनिक वार्ड के लिए अभी 25 बेड हैं। संभावित तीसरी लहर की आशंकाओं को देखते हुए इसे बढ़ाकर 50 बेड की प्लानिंग की गई है। इसके अलावा कुछ जरूरी उपकरण भी मांगे गए हैं। हॉस्पिटल में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को भी बढ़ाने के लिए कहा गया है।
00 बच्चों के लिए 52 बेड और 38 डॉक्टर की आवश्यकता
मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मणेश्वर सोनी ने बताया, “नियोनटाल इन्टेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) यानी नवजात बच्चों के लिए गहन चिकित्सा इकाई के 12 बेड, पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) यानी छोटे बच्चों के लिए 10 बेड और 30 बेड आक्सीजनयुक्त कम गंभीर बच्चों के लिए बनाने के लिए कहा गया है। यहां शून्य से लेकर 14 साल के तक बच्चों का इलाज किया जाएगा। गंभीर बच्चों के साथ उनकी माताओं के रहने की यहां व्यवस्था की जाएगी। बीमार मां के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी। बच्चों के लिए तैयार हो रहे इस 52 बेड की इकाई में 8 बच्चों के डॉक्टर, 30 मेडिकल ऑफिसर (जेआर), 50 स्टाफ नर्स की आवश्यकता और कार्य संचालन के जरूरत के अनुसार वर्ग-3 और वर्ग-4 के कर्मियों के टीम की मांग की है।
00 पालक रहें बेहद सतर्क :डॉ. लक्ष्मणेश्वर सोनी
डॉ. लक्ष्मणेश्वर सोनी ने कहा “पालकों को अपना पहले ख्याल रखना होगा। बच्चों के लिए पालक ही संक्रमण का स्त्रोत है क्योंकि स्कूल और खेल के मैदान के बंद होने से बच्चे घर में ही हैं। जो आने-जाने वाले हैं वह पालक ही है। उनके साथ ही संक्रमण आता है। पालक सैनेटाइजर, हैंडवाश, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का इस्तेमाल करें। देखने में आया है कि बच्चों में साइटोकाइन स्टॉर्म यानी बड़ी बीमारी उनकी इम्युनिटी (इम्युनो मॉडुलेशन) की वजह से बच जा रहे हैं। यह बच्चों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर रही है। अभी यही उम्मीद करेंगे कि आगे भी स्थिति ऐसी बनी रहे”।
सेकेंड वेव के बाद ऐसा देखा गया है कि मां-पिता संक्रमित हो रहे हैं पर बच्चों का टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। ऐसे बच्चों में बुखार आता है जो एक दो दिन में ठीक हो जाता है। इन बच्चों में वायरस तो अंदर है और वह प्रतिक्रिया कर रहा है जिसे हम मल्टी सिस्टम इनफैंट्री सिंड्रोम इन चाइल्ड (एमआईएससी) कहते हैं ऐसे केसेस के साथ बच्चे राज्य में देखे जा रहे हैं पर जिले में अभी तक एक भी ऐसा केस नहीं मिला है। ये ऐसे बच्चे हैं जो कोरोना टेस्ट से छूट गए थे या इनका जांच नहीं हो पाई थी लेकिन इनमें कोरोना वायरस था। बच्चों को अभी भी बचाया जा सकता है क्योंकि वह घर में ही है।“
 

कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 मामलों के घटने का चलन बरकरार; सक्रिय मामले और घटकर 17,13,413 हुए

पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों में 80,232 की कमी आयी

पिछले 24 घंटे में 1.34 लाख दैनिक नये मामले दर्ज किए गए, देश में दैनिक नये मामलों के घटने का चलन बरकरार

देश में अब तक कुल 2.64 करोड़ लोग कोविड-19 से उबरे

पिछले 24 घंटे में बीमारी से 2,11,499 लोग उबरे

लगातार 21वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

नियमित वृद्धि के साथ रिकवरी रेट बढ़कर 92.79 प्रतिशत हुआ

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट इस समय 7.66 प्रतिशत
दैनिक पॉजिटिविटी रेट गिरकर 6.21 प्रतिशत हुआ, लगातार 10वें दिन 10 प्रतिशत से कम
जांच की क्षमता में काफी वृद्धि– अब तक कुल 35.3 करोड़ जांच की गयी
राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लोगों को टीके की 22.10 करोड़ खुराक दी गयीं; पिछले 24 घंटे में 22 लाख से ज्यादा लोगों को टीके दिए गए

 

रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा : कोरोना पुरुषों को बना रहा है नपुंसक, जाने कैसे

रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा : कोरोना पुरुषों को बना रहा है नपुंसक, जाने कैसे

नई दिल्ली, कोरोना वायरस  के संक्रमण से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है. इस खतरनाक वायरस का असर न सिर्फ लोगों के फेफड़ों पर होता है बल्कि शरीर के कई अंगों को ये तबाह कर देता है. मसलन कोरोना से ठीक होने वाले मरीज लंबे वक्त तक अस्पतालों के चक्कर काटते रहते हैं. ये वायरस फेफड़ों के अलावा मरीजों के हार्ट, किडनी और लिवर को खासा नुकसान पहुंचा रहा है. हाल में दुनिया में कोरोना की चपेट में आने वालों लोगों पर कई तरह की रिसर्च हुई हैं. इसके तहत पता चला है कि ये वायरस लोगों की सेक्स लाइफ भी खराब कर रहा है.

कोरोना आखिर लोगों की सेक्स करने की क्षमता पर किस तरह असर डाल रहा है इसको लेकर इस साल मार्च में रिसर्च के नतीजे छपे थे. इसमें लिखा था कि जिन पुरुषों को कोरोना हो रहा है वो 'इरेक्टाइल डिस्फंक्शन 'की शिकायत कर रहे हैं. भारत में आम बोलचाल की भाषा में इसे नपुंसकता भी कहते हैं. ऐसे लोगों में सेक्स के दौरान इरेक्शन नहीं होता है.

क्या कहती हैं रिसर्च?

हाल ही में इटली के पुरुषों पर एक रिसर्च किया गया. इसमें पता चला कि कोरोना वायरस लोगों के कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को तबाह कर देता है. कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के तहत ही इंसानों के शरीर के खून के जरिए कोशिकाओं के बीच पोषक तत्व और ऑक्सीजन की सप्लाई होती है. रिसर्च के मुताबिक इसके चलते ही इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्या आ रही है. वर्ल्ड जर्नल ऑफ मेन्स हेल्थ में प्रकाशित एक दूसरे अध्ययन में ये पाया गया कि पुरुषों में शुरुआती संक्रमण के बाद लंबे समय तक कोरोना वायरस लिंग (Penis) में मौजूद रहता है. लिहाज़ा इससे भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो जाती है.

क्या कहते हैं भारत के डॉक्टर?

फिलहाल इस तरह की रिसर्च भारत में नहीं हुई हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से ठीक होने वाले मरीज़ इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी परेशानियों के साथ उनके पास आ रहे हैं. डीएनबी-यूरोलॉजी के डॉक्टर एसएस वासन ने मीडिया को बताया, 'मेरे पास ऐसे 8 से 9 मरीज आए हैं, जिन्होंने कोविड से ठीक होने के बाद इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या के बारे में बताया है. हालांकि अभी हमलोग पक्के तौर पर ये नहीं कह सकते कि ये कोरोना के चलते हुआ है. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन वास्तव में COVID-19 से होता है, इसके लिए हमें और अध्ययन करने की जरूरत है. अब तक, हमने प्रश्नों पर आधारित अध्ययन देखे हैं. लेकिन हमें और अधिक ठोस वैज्ञानिक प्रमाण की आवश्यकता है.'

महामारी ने खराब की सेक्स लाइफ

दिल्ली स्थित एक और एंड्रोलॉजिस्ट डॉक्टर गौतम बंगा ने मीडिया को बताया, 'ये महामारी ही कई समस्याएं लेकर आई है. पिछले साल कोरोना के चलते लोगों को वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ा. अपनों को खोने के दुख और अकेलेपन का सामना ये ऐसी चीजें है जिसके चलते खुद ब खुद लोगों को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो रही हैं.' डॉक्टर बंगा ने आगे बताया कि उनके अनुभव के मुताबिक कोरोना महमारी ने 20-30 साल के लोगों की सेक्स लाइफ खराब कर दी है. सोशल न होने के चलते सिंगल रहने वाले लोगों को सेक्स के लिए पार्टनर नहीं मिल रहे हैं. डॉक्टर ने आगे बताया कि जो लोग शादी शुदा हैं वो वर्क फ्रॉम होम के चलते काफी दवाब में  हैं. ऐसे लोग लंबे वक्त तक काम के चलते सेक्स नहीं कर पाते हैं.

Source: News18

वैक्सीन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र ने जाने कौन से कदम उठाये

वैक्सीन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र ने जाने कौन से कदम उठाये

पूरी पात्र आबादी का जल्द से जल्द टीकाकरण करने के उद्देश्य से केंद्र की मदद से देश में घरेलू टीकों का उत्पादन लगातार तेज किया जा रहा है। इस पहल के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग आत्मनिर्भर भारत 3.0 मिशन कोविड सुरक्षा के तहत तीन सार्वजनिक उद्यमों को मदद कर रहा है। ये उद्यम हैं:

हैफकाइन बायोफर्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मुंबई,
इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड, हैदराबाद और
भारत इम्यूनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल लिमिटेड, बुलंदशहर, उ.प्र।
हैफकाइन बायोफार्मा, 122 साल पुराने हैफकाइन इंस्टीट्यूट की एक शाखा के रूप में निकला महाराष्ट्र राज्य का सार्वजनिक संस्थान है जो भारत बायोटेक लिमिटेड, हैदराबाद के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व्यवस्था के तहत कोवैक्सिन टीका बनाने के लिए तैयारी कर रहा है। टीके का उत्पादन कंपनी के परेल स्थित कॉम्प्लेक्स में होगा।हैफकाइन बायोफार्मा के प्रबंध निदेशक डॉ. संदीप राठौड़ ने कहा कि कंपनी का एक साल में कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ खुराक का उत्पादन करने का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि “कोवैक्सिन के उत्पादन के लिए हैफकाइन बायोफार्मा को केंद्र द्वारा 65 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र सरकार द्वारा 94 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है”। उन्होंने कहा कि “हमें आठ महीने का समय दिया गया है इसलिए काम को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। चिकित्सक से आइएएस बने राठौड़ ने बताया कि वैक्सीन उत्पादन प्रक्रिया में दो चरण शामिल हैं - दवा का पदार्थ बनाना और अंतिम दवा उत्पाद। दवा का पदार्थ बनाने के लिए हमें बायो सेफ्टी लेवल 3 (बीएसएल 3) सुविधा बनाने की जरूरत है, जबकि हैफकाइन में पहले से ही फिल फिनिश की सुविधा उपलब्ध है। बीएसएल 3 एक सुरक्षा मानक है जो ऐसी सुविधाओं पर लागू होता है जहां काम में रोगाणु शामिल होते हैं जो श्वसन मार्ग से शरीर में प्रवेश करके गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं।

बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव तथा ' बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस कौंसिल की अध्यक्ष डॉ. रेणू स्वरूप कहती हैं कि “सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति का उपयोग करके वैक्सीन उत्पादन की क्षमता बढ़ाने से हमारे देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान के लिए टीकों की उत्पादन क्षमता वृद्धि का एक लंबा रास्ता तय होगा”'।