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बंद नाक से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

बंद नाक से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

बदलता मौसम और सर्द हवा सर्दी जुकाम को न्यौता देती है। वहीं बंद नाक से भी अक्सर लोग परेशान रहते है। अगर आप भी इसी समस्या से जुझ रहे है, तो हम आपको इस लेख में कुछ ऐसे टिप्स बता रहे है जिन्हें अपनाने के बाद आप बंद की समस्या से राहत पा सकते हैं।
1 भाप लेना - इसके लिए आपको गर्म पानी में खुशबूदार तेल की कुछ बूंदे डालनी हैं। इसके अलावा आप इसमें अयोडीन की कुछ बूंदें या फिर विक्स कैप्सूल भी डाल सकते हैं। अब इस गर्म पानी के बर्तन की ओर चेहरा करके भाप लें। यह नाक खोलने के साथ ही सर्दी में आराम देगा।

2 बंद नाक खोलने का एक और आसान सा तरीका है एक छोटा सा व्यायाम। जी हां, इसके लिए आपको अपनी नाक बंद करके सिर को पीछे की तरह झुकाना है और कुछ समय के लिए सांस को रोककर रखना है। इसके बाद नाक खोलकर सांस लेने में आसानी होगी। इस तरीके को आप दोहरा सकते हैं।
3 गरम पानी - अगर आप सहज हैं तो इसके लिए अपना सिर पीछे की ओर झुकाएं और किसी ड्रॉपर की मदद से हल्के गर्म या गुनगुने पानी की कुछ बूंदे नाक के छिद्रों में डालें। कुछ ही देर में वापस सिर आगे कर लें और इस पानी को निकाल दें।

4 नारियल तेल - नारियल तेल बंद नाक को खोलने का एक बेहतरीन उपाय है। जब भी कभी आपकी नाक बंद हो जाए, तो आप नारियल तेल अंगुली से नाक के अंदर तक लगाएं। या फिर नरियल तेल की कुछ बूंदे नाक में डालें और फिर गहरी सांस लें। कुछ ही देर में आपकी नाक खुल जाएगी। ध्यान रहे की नारियल तेल पिघला हुआ हो।
5 कपूर की महक भी बंद नाक को खोलने का अच्छा तरीका है। आप चाहें तो इसे नारियल तेल के साथ मिलाकर सूंघ सकते हैं, या फिर सादा कपूर सूंघना भी आपको फायदा देगा। इसके अलावा नाक को गर्माहट देकर भी बंद नाक को आसानी से खोल जा सकता है।


ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
 

डीडी नगर में विशाल नि:शुल्क नेत्र एवं स्त्री रोग परीक्षण शिविर का आयोजन 17 जनवरी दिन रविवार को

डीडी नगर में विशाल नि:शुल्क नेत्र एवं स्त्री रोग परीक्षण शिविर का आयोजन 17 जनवरी दिन रविवार को

रायपुर, अल्पकालीन समय में ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर समाज सेवा के क्षेत्र में सतत् उत्कृष्ट कार्य करने वाली अग्रशील सामाजिक संस्था समग्र ब्राह्मण परिषद् एक बार पुनः समाज सेवा की दिशा में अपना योगदान देने जा रही है। संस्था के ज़िला रायपुर इकाई के तत्वावधान में विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा ।
जिसमें सर्वसमाज के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उक्त आयोजन में नेत्र परीक्षण, स्त्री रोग, शुगर व ब्लड प्रेशर की जाँच किए जाने के साथ ही पेशेंट को उचित परामर्श भी दिया जाएगा जिससे लोगों में इन बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी । सामान्य दिखने वाली इन बीमारियों की गंभीरता के बारे में जानकारी होना आवश्यक है वर्ना भविष्य में इनके परिणाम घातक सिद्ध होते हैं. इसी परिप्रेक्ष्य में संस्था द्वारा आयोजित इस शिविर में सभी वर्गों के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना आपेक्षित है। समग्र ब्राह्मण परिषद् के माध्यम से इस मानवीय सेवा में फाफाडीह एवँ न्यू राजेन्द्र नगर स्थित साईं बाबा नेत्र चिकित्सालय तथा महिला चिकित्सालय के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है ।
संगठन के अजय पाठक ने बताया कि इस निः शुल्क शिविर का आयोजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेक्टर 2 डी डी नगर रायपुर में 17 जनवरी 2021 दिन रविवार को प्रातः 10.30 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक किया जा रहा है।


 

माननीय छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा बालको मेडिकल सेंटर में हुआ डायलिसिस मशीन का उद्घाटन

माननीय छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा बालको मेडिकल सेंटर में हुआ डायलिसिस मशीन का उद्घाटन

नया रायपुर, छत्तीसगढ़ की माननीय राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर बालको मेडिकल सेंटर में डायलिसिस मशीन का उद्घाटन किया, जो अस्पताल द्वारा प्रदान किए गए उपकरणों और सेवाओं की सूची में जुडी नवीनतम सुविधा है।
मकर संक्रांति शुभ उत्तरायण काल की शुरुआत का प्रतीक है, और इस पवित्र दिन पर, माननीय राज्यपाल ने कहा की उन्हें बालको मेडिकल सेंटर में जो सुविधाएं कैंसर के मरीज़ों को मिलती देखी, वह उन्होंने आसपास के दूसरे राज्यों में भी नहीं देखी। उन्होंने कहा की यहां उन्होंने मरीज़ों को देखा है जो कैंसर के अंतिम पड़ाव पर है, और उनका इलाज भी संभव हो पा रहा है । माननीय राज्यपाल ने बालको मेडिकल सेंटर के प्रबंधकों को उनके द्वारा किये जाने वाले सामाजिक कार्यों और छत्तीसगढ़ राज्य में इतनी अच्छी कैंसर देखभाल लोगों को देने के लिए सराहा।
अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने अस्पताल के अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और नैदानिक सुविधाओं की सराहना की और कहा कि बालको मेडिकल सेंटर वास्तव में छत्तीसगढ़ के वंचित समुदायों के लिए एक वरदान है, जो अब अपने राज्य में विश्व-स्तर के कैंसर के उपचार का लाभ उठा सकते हैं । माननीय राज्यपाल ने आधुनिक, व्यापक और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल की सराहना की जो यह अस्पताल एक सस्ती कीमत पर प्रदान करता है।

बाद में उन्होंने कैंसर से पीड़ित रोगियों और बच्चों के साथ बातचीत की जिनका इलाज आयुष्मान भारत और डॉक्टर खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत बालको मेडिकल सेंटर में किया जा रहा है। उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों के साथ भी बातचीत की, उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण की सराहना की और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे हर दिन ऐसे ही दयालु देखभाल प्रदान करते रहें।

बालको मेडिकल सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस। वेंकटा कुमार ने कहा, “इस अस्पताल को शुरू करने का उद्देश्य उन कैंसर रोगियों को डायलिसिस प्रदान करना है, जिन्हें किडनी की समस्या है । बालको मेडिकल सेंटर हमेशा अपने मरीजों को एक छत के नीचे सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास करता रहा है। हमारे साथ काफी मरीज हैं, जो किडनी की जटिलताओं के साथ क्रोनिक डायबिटिक हैं, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत है। इस सुविधा के जुड़ने से उनके समय और धन दोनों की बचत होगी। आखिरकार, नया रायपुर में लोग, जिन्हें नियमित रूप से डायलिसिस की आवश्यकता होती है और वर्तमान में इसका लाभ उठाने के लिए रायपुर की यात्रा कर रहे हैं, वे भी इसे प्राप्त करने के लिए यहां आ सकते हैं। ”

श्री वेंकटा कुमार ने माननीय राज्यपाल को छत्तीसगढ़ सरकार के साथ अस्पताल की साझेदारी के बारे में भी बताया कि की कैसे बालको मेडिकल सेंटर ने एक प्रभावी कैंसर शिक्षा, रोकथाम और शीघ्र पहचान की मुहिम शुरू की है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ के 12 जिलों में बीएमसी द्वारा संचालित कैंसर स्क्रीनिंग शिविरों की सफलता की सराहना की।

बालको मेडिकल सेंटर, वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन (VMRF), की छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में स्थापित पहली प्रमुख पहल है, जिसमें 170 बेड, अत्याधुनिक ऑन्कोलॉजी देखभाल सुविधा है, जिसमें 50 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। यह पूरे मध्य भारत में सबसे बड़ी और सबसे उन्नत ऑन्कोलॉजी सुविधा है। यह मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे महत्वपूर्ण बीमारी का विश्व स्तरीय उपचार प्रदान करता है। वीएमआरएफ का उद्देश्य भारत की आबादी तक आसानी से उचित और सस्ती कीमत पर अल्ट्रा-मॉडर्न, मल्टी-मॉडेलिटी डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय सुविधाएं लाना है। वर्तमान में, यह तेजी से भारत के ऑन्कोलॉजी स्पेस में एक राष्ट्रीय लीडर के रूप में उभर रहा है, जिसमें चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, विकिरण, रक्तविज्ञान और उपशामक देखभाल शामिल है।
 

क्या आपके बच्चो को भी सताते है बुरे सपने... क्या करें पेरेंट्स

क्या आपके बच्चो को भी सताते है बुरे सपने... क्या करें पेरेंट्स

कई बार बच्चों को जब ठीक से नींद नहीं आती या वे किसी ऐसे दौर से गुजर रहे होते हैं जो उनके उम्र के हिसाब से ठीक नहीं तो आप अपने आस-पास पते हैं कि बच्चा काफी असहज महसूस करता है। बच्‍चों को भी बुरे सपने बहुत सताते हैं। चूंकि, बच्‍चे नादान होते हैं इसलिए उन्‍हें इस मुसीबत से लड़ने का तरीका भी पता नहीं होता है। बुरे सपनों की वजह का आज तक पता नहीं चला है। संभवतः बच्चों को बुरे सपने इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें किसी चीज से डर लगता है या तनाव महसूस करते हैं। अध्ययनों के अनुसार उन्हीं बच्चों को ज्यादा बुरे सपने आते हैं, जो हाइपरएक्टिव हैं, पढ़ाई में कमजोर हैं या बहुत ज्यादा गुस्सैल हैं। इसके अलावा यह भी पता चला है कि जिन बच्चों को सोने में तकलीफ होती है, आर्थिक परेशानी है, घर का माहौल सही नहीं है और एकाएक उनके जीवन में कोई बुरी दुर्घटना हो गई है तब बुरे सपने आ सकते हैं।
बच्चों को बुरे सपने आने के लक्षण
बच्चे को सपने में दर्द, खौफ, तनाव और स्ट्रेस होता है।
बच्चा बुरे सपने के कारण अचानक नींद से बीच रात उठ जाता है।
बच्चा बुरे सपने की सारी डिटेल्स बता सकता है।
बच्चा यदि सपने में ज्यादा उग्र, गुस्सा हो जाता है तो उसे डाॅक्टर के पास लेकर जाएं। बच्चा अपने बिस्तर पर जाने से डरने लगे, तो डाॅक्टर को दिखाएं। दिनों दिन उसके सपने बद से बदतर होते जा रहे हैं, तो लापरवाही न करें। यहां तक सपनों के कारण बच्चा दिन में डरा रहता है।

डाॅक्टर बच्चे की पूरी जांच करते हैं। इस दौरान उससे कुछ सवाल पूछते हैं जैसे-
सपना किस समय आता है
सपना किससे संबंधित है
दिन के दौरान नींद में भी क्या वही डरावने सपने आते हैं
भयानक समय के दौरान लक्षणों का नजर आना
बुरे सपने के दौरान बच्चे की एक ही जैसी एक्टिविटी का होना।
कहते हैं सपने अक्सर हमारे साथ हो रही घटनाओं पर आधारित होते हैं। समय के साथ-साथ बच्चे में बुरे सपने आने बंद हो जाते हैं। अगर यह पता चले कि बच्चे को आ रहे बुरे सपने उसे साइकोलॉजिकली और न्यूरोलॉजिकली प्रभावित नहीं करेंगे तो आप उसके बुरे सपनों को कुछ इस प्रकार कम कर सकती हैं। बच्चे को बुरे सपने से छुटकारा दिलाना है, तो उसके सोने का समय फिक्स करें। यदि बच्चा 3 से 5 साल के बीच का है, तो वह कम 10 से 13 घंटे की नींद जरूर ले। 6-13 साल के बच्चों को 9 से 12 घंटे की नींद और किशोर यानी 14-17 साल के बच्चों को 8 से 10 घंटे की नींद आवश्यक है। बिना रुकावट नींद लेना बच्चे के बुरे सपने को रोक सकता है।
 

मजबूत और खुबसूरत बाल चाहते हैं तो इन 5 चीजों का करें सेवन, होंगे बालों पर बहुंत फायदे

मजबूत और खुबसूरत बाल चाहते हैं तो इन 5 चीजों का करें सेवन, होंगे बालों पर बहुंत फायदे

बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिए आप क्या कुछ नहीं करते। हेयर स्पा, तेल मालिश एवं अलग-अलग सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल भी। लेकिन कुछ आहार भी आपके बालों की खूबसूरती और मजबूती को लौटा सकते हैं बगैर किसी झंझट के। जानिए यह 5 आहार जिन्हें खाने से आपके बालों की सारी समस्याएं हल हो सकती हैं।

1 गाजर -
लाल-मीठी गाजर स्वाद के साथ आपको सेहत और सौंदर्य भी देती है। यह विटामिन ए का एक अच्छा स्त्रोत है साथ ही इसमें मौजूद कैरोटीन आपके बालों और आंखों को सुरक्षित और खूबसूरत बनाए रखता है। यह आपके बालों को जड़ से मजबूती प्रदान करेगी।

2 पालक -

पालक का सेवन करना बहुत फायदेमंद है। सेहत के साथ ही यह आपके बालों को झड़ने से भी रोकेगी। आयरन से भरपूर होने के कारण इसक सेवन आपकी इस समस्या को बिल्कुल खत्म कर देगा।


3 शकरकंद -

शकरकंद जिसे स्वीट पोटेटो भी कहते हैं, विटामिन ए से भरपूर होता है जो आपके बालों को मजबूती देकर झड़ने से रोकता है, साथ ही जड़ों में मौजूद तेल को भी सुरक्षित रखता है, जिससे आपके बालों को पोषण मिलता रहता है।

4 दही -

दही खाने से भी बालों का झड़ना रुकता है और इससे बाल खूबसूरत व चमकदार बनते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन बी 6 और विटामिन डी आपके बालों में जान लाकर उन्हें सजीव करता है।

5 किशमिश -

बालों की लंबाई नहीं बढ़ने से परेशान न हों, क्योंकि किशमिश खाने से आपके बालों का विकास तेजी से होता है।इसमें आयरन के साथ-साथ मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो आपके बालों को पोषण देते हैं।

 

ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

 

ब्लड शुगर लेवल कम करता है सेब के सिरके का इस्तेमाल, वजन कम करने में भी है मददगार, जानें और कई फायदे

ब्लड शुगर लेवल कम करता है सेब के सिरके का इस्तेमाल, वजन कम करने में भी है मददगार, जानें और कई फायदे

सेब का सिरका लोकप्रिय एक देसी उपाय है. लोगों ने वर्षों इसका इस्तेमाल पकवान और इलाज में किया है. कई रिसर्च से ये बात साबित हुई है कि सेब का सिरका वजन कम करने और पाचन में मुफीद होने के साथ बहुत सारे फायदे पहुंचाता है. एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के चलते ये कोलेस्ट्रोल घटाता है, ब्लड शुगर लेवल कम करता है और डायबिटीज के अन्य लक्षणों को सुधारता है. आप सबूत आधारित ड्रिंक के फायदे जानकर इस्तेमाल करने पर मजबूर हो जाएंगे.


ब्लड शुगर लेवल कम करता है-

सेब के सिरके में मौजूद असेटिक एसिड एंजाइम को रोकता है. इससे स्टार्च को पचाने में मदद मिलती है. एक रिसर्च में बताया गया है कि सिरका स्टार्च युक्त भोजन जैसे ब्रेड या पास्ता खाने के बाद भी ब्लड शुगर और इंसुलिन रिस्पॉन्स को स्पष्ट तौर पर कम कर सकता है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो डॉक्टर की सलाह से इस्तेमाल करें. सिरका डायबिटीज के इलाज को प्रभावित कर सकता है और इसलिए बिना मशविरा के नहीं पीना चाहिए.


वजन कम करने में है मददगार-

भोजन से पहले सिरके का इस्तेमाल भूख को दबा सकता है और इस तरह आपकी कैलोरी का सेवन कम हो जाता है. 12 सप्ताह के रिसर्च से पता चला है कि जिन लोगों ने सेब के सिरके का रोजाना इस्तेमाल किया, उनका वजन कम हो गया, बॉडी मास इंडेक्स, कमर की परिधि, ट्राइग्लिसराइड लेवल और आंत की चर्बी घट गए.


कोलेस्ट्रोल लेवल कम करता है-

2018 में एक रिसर्च से खुलासा हुआ था कि सिरका पीने से कोलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसराइड घट गया. हालांकि, अभी खोज को साबित करने के लिए और रिसर्च की जरूरत है. लेकिन हाई कोलेस्ट्रोल लेवल से पीड़ित लोग सेब के सिरके को आजमा सकते हैं. लेकिन सिरका को अपनी डाइट का हिस्सा बनाने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना न भूलें.


स्किन की सेहत को बढ़ाता है-

सेब का सिरका स्किन की समस्याओं जैसे खुजली का आम इलाज है. हमारी स्किन स्वभाव में थोड़ी एसिडिक होती है. एंटीबैक्टीरियल गुण होने के चलते सेब का सिरका खुजली और अन्य स्किन समस्याओं से जुड़े स्किन संक्रमण रोकने में मदद कर सकता है. कुछ लोग पतला सेब साइडर सिरका का उपयोग फेसवाश या टोनर में करते हैं. उनका मानना है कि ये बैक्टीरिया को मार सकता है और धब्बों को रोक सकता है.


नुकसानदेह बैक्टीरिया कर सकता है खत्म-

सिरका बैक्टीरिया को मार सकता है. लोग सिरके को सफाई और डिसइंफेक्टिंग के काम में परंगारत रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं. उससे नेल फंगस, जूं और कान के संक्रमण का इलाज किया जा रहा है. पुराने जमाने में, लोग सिरके का इस्तेमाल जख्मों को साफ करने में करते थे. 

अगर आपको भी होती है ठंड में एलर्जी? तो ये 5 जरूरी बातें जरूर जान लें

अगर आपको भी होती है ठंड में एलर्जी? तो ये 5 जरूरी बातें जरूर जान लें

ठंड का मौसम सर्दी जुकाम के साथ-साथ एलर्जी को भी आमंत्रण देता है। इससे बचाव करके आप इन दिनों कई स्वास्थ्य समस्याओं से आसानी से बच सकते हैं। जानिए एलर्जी से बचने के लि‍ए यह 5 जरूरी चीजें ...
1 विटामिन सी –
विटामिन सी से भरपूर चीजों का सेवन आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगा। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है जो इम्यून पावर बढ़ाकर आपको एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाता है।

2 विटामिन डी –
ठंड में अस्थमा जैसी बीमारियों औैर अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनने वाली एलर्जी से निपटने के लिए यह फायदेमंद है। विटामिन डी आपको सुबह की धूप, फैटी फिश, अंडे से प्राप्त हो सकता है।
3 लहसुन –
लहसुन आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटी फंगल और एंटी बायोटिक तत्व न केवल एलर्जी से बचाएंगे, बल्कि गर्माहट भी देंगे। रोज लहसुन की दो से तीन कलियां चबाना फायदेमंद होगा।

4 अदरक –
किसी भी तरह से अदरक का सेवन, आपकी प्रतिरोधक क्षतमा बढ़ाने और एलर्जी से दूर रखने में बेहद सहायक साबित होगी। ठंड के दिनों में बदरक की चाय का सेवन भी लाभकार होगा।
5 सेब का सिरका –
गर्म या गुनगुने पानी में एक चम्मच सेब का सिरकस मिलाकर रोजाना सेवन करें। आप चाहें तो इसमें शहद और नींबू भी मिला सकते हैं। ये चीजें एलर्जी के साथ ठंड की समस्याओं से आपको बचाए रखेंगी।

 

शरीर में इस एसिड की अधिकता हो सकती है प्रोस्टेट कैंसर के संकेत, ऐसे करें परहेज

शरीर में इस एसिड की अधिकता हो सकती है प्रोस्टेट कैंसर के संकेत, ऐसे करें परहेज

शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि हाइपरयूरिसेमिया का लक्षण प्रोस्टेट कैंसर का भी संकेत हो सकता है। प्रोस्टेट अखरोट के साइज की एक ग्लैंड है जो मेल रिप्रोडक्टिव मेल ऑर्गन का एक हिस्सा है। ये यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) के पास यूरिनरी ब्लैडर के पास स्थित होती है।


प्रोस्टेट ग्लैंड से सेमिनल फ्लूईड निकलता है जिसमें एंजाइम, प्रोटीन और मिनरल्स होते हैं। ये तत्व स्पर्म्स यानि शुक्राणुओं को सुरक्षित रखने में मददगार हैं, साथ ही उन्हें पोषण देते हैं। आमतौर पर पुरुषों को 50 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानियां उत्पन्न होती हैं। नॉर्मल प्रोस्टेट तकरीबन 3 सेंटीमीटर मोटा, 4 सेंटीमीटर चौड़ा होता है जिसका वजन 20 ग्राम के करीब होता है। हालांकि, इस उम्र के लोगों में प्रोस्टेट का साइज भी बड़ा होने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल टर्म में बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लाज़िया (BPH) कहते हैं।

इस परेशानी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं जिन्हें अनदेखा करने पर लोगों के दैनिक कार्य भी बाधित हो सकते हैं। इससे लोगों का लाइफस्टाइल प्रभावित होता है। बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लाज़िया के सामान्य लक्षणों में पेशाब में परेशानी, बार-बार पेशाब आना, इसमें खून आना, इस दौरान जलन होना, रात में ज्यादा पेशाब लगना शामिल है। इसके अलावा, जिन लोगों को यूरिन फ्लो में रुकावट आती है उन्हें भी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

उम्र बढ़ने के साथ ही लोगों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी बढ़ने लगता है। ऐसे में बीपीएच के लक्षण सामने आने पर लोगों को जागरुक होकर चिकित्सक के पास जाना चाहिए। हालांकि, इस तरह के कैंसर और बीपीएच में अंतर करने के लिए रेक्टल जांच एवं सीरम पीएसए जांच कराने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट, एमआरआई, ट्रांस रेक्टल अल्ट्रासाउंड स्कैन, बोन स्कैन और पैक स्कैन करवाकर भी प्रोस्टेट के साइज चेक किया जा सकता है।

डॉक्टर के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन न कम और न ज्यादा करें। शराब से दूरी बनाएं और कॉफी ज्यादा पीने से भी परहेज करें। खासकर जिन लोगों को रात में पेशाब अधिक लगती है, उन्हें सोने से दो घंटे पहले कुछ भी पीने से बचना चाहिए। मोटापा पर काबू करें और बैलेंस्ड डाइट लें।

 

ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

पाचन को दुरुस्‍त रखना चाहते हैं तो रात में इन 5 चीजों का करें सेवन

पाचन को दुरुस्‍त रखना चाहते हैं तो रात में इन 5 चीजों का करें सेवन

आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि रात के भोजन व डिनर में हमेशा हल्का व कम ही खाना चाहिए। इसका कारण ये होता है कि हल्का भोजन रात में आसानी से पचता है। हम आपको 5 ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आपको रात के भोजन में जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि ये आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करती है -
1 छाछ

रात के खाने में दही की जगह छाछ, रायता या लस्सी पीना बेहतर होता है। इससे पेट में ठंडक बनी रहती है और पाचन क्रिया भी दुरुस्‍त हो जाती है।

2 हरी पत्‍तेदार सब्‍जी

रात के खाने में हरी पत्‍तेदार सब्‍जियों को जरूर शामिल करना चाहिए, क्योंकि इनमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। जिन्हें रात में खाने से सेहत और पाचन दोनों दुरुस्‍त रहते है।
3 अदरक

अदरक में कई पौष्टिक गुण पाए जाते है, जिसे किसी भी रूप में रात के भोजन में शामिल करने से फायदा होता है। चाहे आप अदरक को अचार, सलाद या फिर अन्य किसी रूप में डिनर में शामिल करे, ये पाचन क्रिया को दुरूस्‍त करने में मदद करता है।

4 लो फैट मिल्‍क

रात के भोजन के कुछ देर बाद या सोने से पहले गुनगुना दूध पीने से अच्छी नींद आती है। साथ ही लो फैट दूध में प्रोटीन के साथ गुड फैट भी होता है, जो फायदेमंद होता है।
5 शहद

रात में चीनी खाने से बचाना चाहिए और उसकी जगह शहद का इस्तेमाल करें। इससे बॉडी का मेटाबॉलिज्‍म ठीक रहता है। 


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अगर आप डायबिटीज के रिस्क पर हैं तो जानिए क्या जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए

अगर आप डायबिटीज के रिस्क पर हैं तो जानिए क्या जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए

डायबिटीज या मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जो आपके शरीर की रक्त शर्करा के उपयोग के तरीकों को प्रभावित करती है. इस स्थिती में ब्लड शुगर लेवल को हेल्दी तरीके से मैनेज करना जरूरी है. मल्टीपल फैक्टर्स आपको डायबिटीज के हाई रिस्क में डाल सकते हैं. ये परिवर्तनीय और गैर-परिवर्तनीय दोनों हो सकते हैं. इनमें से कुछ में अनहेल्दी वजन, गतिहीन जीवन शैली, उच्च रक्तचाप, गैस्टेशनल डायबिटीज, प्री डायबिटीज, खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर और फैमिली हिस्ट्री शामिल हैं. 45 वर्ष से अधिक आयु के लोग और पीसीओएस से पीड़ित लोग भी ज्यादा रिस्क में हैं. अगर आपका ऊपर दिए गए एक भी रिस्क फैक्टर्स को लेकर इलाज किया गया है तो आपको इस बीमारी को ज्यादा बढ़ने से बचाने के लिए जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए.


एक्सपर्ट्स के मुताबिक डायबिटीज मेलिटस के लिए दो रिस्क फैक्टर्स की कैटेगिरी हैं.

1-गैर-परिवर्तनीय रिस्क फैक्टर्स जैसे डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री (आनुवांशिक), बढ़ती उम्र, गैस्टेशनल डायबिटीज की पुरानी हिस्ट्री, जैसा कि नाम से पता चलता है कि इन फैक्टर्स को संशोधित नहीं किया जा सकता है.


2- मोटापा या अधिक वजन होना, गतिहीन जीवन शैली, अधिक भोजन करना, तनाव, उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल का स्तर, धूम्रपान आदि भी रिस्क फैक्टर्स हैं. सभी को इन फैक्टर्स को संशोधित करके रिस्क फैक्टर्स की संख्या कम रखने की कोशिश करनी चाहिए.


अगर आप डायबिटीज के रिस्क पर हैं तो आपको हेल्दी रहने के लिए इन टिप्स को फॉलो जरूर करना चाहिए.

दिन में 30 मिनट के लिए एक्सरसाइज जरूर करें, आप स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, एरोबिक्स और वेट ट्रेनिंग कर सकते हैं.
एक स्वस्थ आहार लें जिसमें अधिक फाइबर (सब्जियां, सलाद), प्रोटीन (दालें, सोया) हो और कम प्रोसेस्ड और तैलीय खाद्य पदार्थ (मैदा, जूस, मिठाई) लें.
यदि आपका वजन ज्यादा है तो नियमित रूप से व्यायाम और अपनी डाइट को कंट्रोल कर वजन कम करें.
रेग्यूलर एक्सरसाइज और मेडिटेशन कर तनाव कम करें साथ ही 7 से आठ घंटे की नींद जरूर लें.
स्मोकिंग छोड़ दें और एल्कोहल का भी सेवन कम करें.
यदि डॉक्टर सलाह देते हैं तो लाइफस्टाइल और मेडिसन में बदलाव कर कोलेस्ट्रॉल लेवल और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें.


इन टिप्स को फॉलो करने के साथ ही हेल्दी ब्लड शुगर मेंटेन करने के लिए अपने डॉक्टर से लगातार संपर्क में रहें. 

अगर आपके में भी ये 7 लक्षण दिखाई दे रहे है तो हो सकता शरीर में कहीं कुछ गड़बड़ है

अगर आपके में भी ये 7 लक्षण दिखाई दे रहे है तो हो सकता शरीर में कहीं कुछ गड़बड़ है

सेहतमंद शरीर हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है और स्वस्थ रहने के लिए सही दिनचर्या से लेकर खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. ज्यादातर लोग खुद पर ध्यान देना तब शुरू करते हैं, जब उन्हें अपनी किसी बीमारी का पता चलता है. बिना किसी बीमारी के भी शरीर के कुछ लक्षण ऐसे हैं जो ये बताते हैं कि आप अंदर से स्वस्थ नहीं हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में.
खराब स्किन-
आपकी स्किन भी आपके सेहत के बारे में बहुत कुछ बताती है. मुंहासे की समस्या को खराब लाइफस्टाइल, हाइजीन, नींद, पाचन और खान-पान से जुड़ा माना जाता है. इन लक्षणों की पहचान कर अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार करें.
आंखों का साफ न होना-
आंखों में चमक ना होना भी कई बातों की तरफ इशारा करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आंखों के ऊतकों का सफेद होना स्वस्थ आंखों की निशानी है. अगर आपकी आंखे पीली रहती हैं तो ये गॉलब्लैडर, लिवर या पैंक्रियास की समस्या से जुड़ा हो सकता है. वहीं, आंखों का लाल होना भी खराब सेहत का संकेत देता है जैसे कि नींद ना पूरी होना या आंखों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना.
नाखून का रंग और बनावट-
नाखूनों के आकार, बनावट और रंग से भी सेहत के बारे में पता लगाया जा सकता है. नाखूनों का पीला होना बताता है कि आपके शरीर में सही ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो रहा है और फ्लूड की मात्रा ज्यादा नहीं बन रही है. हालांकि, कुछ मामलों में ये स्मोकिंग या खराब नेलपॉलिश की वजह से भी हो सकता है. अगर आपके नाखून सही तरीके से नहीं बढ़ते हैं तो आपमें न्यूट्रिशन की कमी हो सकती है.
खर्राटे लेना-
जोर-जोर से खर्राटे लेना किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है. स्लीप एपनिया, मोटापा, दिल से जुड़ी बीमारी और स्ट्रोक जैसी हेल्थ कंडीशन की वजह से भी खर्राटे आते हैं. ज्यादातर लोग खर्राटों को आम लक्षण समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ये एक संकेत हैं कि आप पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं. अगर आप भी अक्सर खर्राटे लेते हैं तो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
पेट में गैस बनना-
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक स्वस्थ व्यक्ति औसतन प्रतिदिन 10 से 20 बार गैस पास करता है. अगर आपको इससे ज्यादा बार और लगातार गैस बनती है तो ये एक संकेत हो सकता है कि आप उतने स्वस्थ नहीं हैं जितना आप सोचते हैं. हालांकि, खाने-पीने की कुछ चीजें भी गैस बनाने का काम करती हैं लेकिन ये सेहत से भी जुड़ा हो सकता है. लैक्टोज इंटॉलरेंस, खराब पाचन और सीलिएक बीमारी में भी शरीर में बहुत ज्यादा गैस बनती है.
यूरीन का रंग-
आपके यूरीन का रंग भी बताता है कि आप कितने स्वस्थ हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक, यूरीन के रंग और स्मेल से कई बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. अगर आपके यूरीन का रंग बहुत गाढ़ा है और इससे गंध आती है तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
हमेशा थकान लगना-
नींद ना पूरी होने या बहुत ज्यादा काम करने से भी थकावट होती है. इसके अलावा डिहाइड्रेशन, आयरन की कमी, एक्सरसाइज ना करने और बहुत ज्यादा मीठा खाने से भी थकान होने लगती है. अगर आपको अक्सर थकान रहती है तो इन संकेतों पर गौर करना चाहिए.

ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

घी खाने वाले हो जाइये सावधान, ये फायदेमंद के साथ-साथ है बहुंत नुकसान दायक, जाने कैसे

घी खाने वाले हो जाइये सावधान, ये फायदेमंद के साथ-साथ है बहुंत नुकसान दायक, जाने कैसे

सेहत बनाने की जब बात चलती है तो सबसे पहले घी का नाम ही जेहन में उभरता है. घी के फायदे सभी जानते हैं. इसे सेहत का खजाना माना जाता है. हालांकि इसके कुछ नुकसान भी हैं जिन पर कम बात होती है. आज हम घी से होने वाले नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं.

  • गर्भवती महिलाओं के लिए लेबर पेन से पहले तो घी फायदेमंद है लेकिन प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ये घातक हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के शुरू के कुछ महीनों में घी खाने से बचें।
  • अगर आपको घी बहुत पसंद हैं तो सावधान हो जाएं. घी अधिक खाने से अपच और लूज-मोशन की समस्या हो सकती है.
  • सर्दी या कफ की जब शिकायत हो तो घी से दूरी बना लेनी चाहिए. घी के सेवन से कफ बनने लगता है और यह समस्या बहुत बढ़ सकती है.
  • घी को शहद के साथ खाने से बचना चाहिए. यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.

ऐसे जाने घी नकली है या असली
क्या कभी आपने सोचा है कि जो घी आप खा रहे हैं वह असली ही है. दरअसल खाने की चीजों में मिलावट आज एक बड़ी समस्या बन गई है. मिलावटी चीजें हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. मिलावट वाला घी भी हमारे शरीर को के लिए नुकसानदायक है.

कई लोग घी घर में ही बनाते हैं लेकिन जो लोग घी बाजार से खरीदते हैं उन्हें यह जरूर जांचना चाहिए कि उनका घी असली है नकली.

ये हैं घी की शुद्धता को जांचने की कुछ आसान तरीके:-

  • एक बर्तन में एक चम्मच घी डाले फिर इसमें एक चुटकीचीनी और थोड़ा सा हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालकर इन्हें अच्छे से मिला लें. इसके बाद अगर घी का रंग बदलकर लाल हुआ तो यानी ये नकली घी है.
  • घी में 4-5 बूंदे आयोडीन की डालें और फिर दोनों चीजों को मिला लें. इसके बाद अगर घी नीले रंग का हुआ, तो मतलब इसमें आलू की मिलावट की गई है.
  • अपने हाथों की उल्टी तरफ घी लगाएं और फिर दोनों हाथों को आपस में रगड़ लें. अगर घी के अंदर से दाने निकले तो ये नकली घी की पहचान है.
  • पहले हाथों पर घी लगाएं और फिर 15 मिनट बाद उसे सूंघे,  अगर आपको घी में खूशबू आना बंद हो जाए, तो यानी ये नकली घी है.

 

ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

सर्दी में ब्लड शुगर लेवल को कैसे करें प्रभावी तरीके से काबू, जानिए ये हैं सरल टिप्स

सर्दी में ब्लड शुगर लेवल को कैसे करें प्रभावी तरीके से काबू, जानिए ये हैं सरल टिप्स

डायबिटीज रोगियों को ब्लड शुगर लेवल के सेहतमंद प्रबंधन की जरूर होती है. सेहतमंद डाइट और जीवन शैली ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. सर्दी के मौसम में गर्म ड्रिंक्स और स्वादिष्ट भोजन में शामिल होने की संभावना ज्यादा रहती है. गैर सेहतमंद फूड्स के ज्यादा खाने से ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है. इसके अलावा, सर्दी के मौसम में आप बिस्तर के अंदर और शारीरिक गतिविधियों से दूर रहना पसंद करते हैं.


ये सभी फैक्टर ठंडे तापमान के दौरान डायबिटीज के प्रबंधन को ज्यादा मुश्किल बना देते हैं. वक्त रहते एहतियात आपकी पेचीदगियों को दूर करने में मदद कर सकता है और सेहतमंद ब्लड शुगर लेवल बनाए रखता है. इस सर्दी के मौसम में आसान एहतियात का पालन करें और प्रभावी तरीके से डायबिटीज को नियंत्रित करें. आपको आसानी के लिए चंद टिप्स का जानना कारगर होगा.


व्यायाम को न छोड़ें
शारीरिक व्यायाम ब्लड शुगर लेवल के सेहतमंद नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. आपको व्यायाम पर बहुत ज्यादा समय खर्च करने की जरूरत नहीं है. जोरदार व्यायाम अचानक ब्लड शुगर में गिरावट का कारण बन सकता है. इससे बचने के लिए आप धीमी शुरुआत कर सकते हैं और सेहतमंद ब्लड शुगर के लिए डॉक्टर से नियमित मुलाकात करें.
तनाव का प्रबंध करें
घर में रहते हुए काम, शारीरिक गतिविधि की कमी, संक्रमण का खौफ और अंदर ठहरना तनाव में योगदान कर सकते हैं. तनाव के उच्च स्तर से भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है. इसलिए डायबिटीज को प्रभावी तरीके से निंयत्रित करने के लिए तनाव प्रबंधन रणनीतियों को अपनाएं.


नियमित ब्लड शुगर लेवल चेक करें
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो आपको नियमित अपना ब्लड शुगर लेवल चेक कराते रहना चाहिए. इससे आपको प्रमुख उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद मिलेगी और समय रहते काबू कर पाएंगे. अगर ब्लड शुगर लेवल में कोई बड़ा बदलाव दिख रहा है, तो डॉक्टर से मुलाकात कर मदद लें.


गर्म रहें और पैरों को सेहतमंद रखें
कपड़ों के ज्यादा परत, गर्म खाना जैसे सूप का इस्तेमाल कर खुद को गर्म रखें. इसके अलावा, अपने पैरों की देखभाल करें क्योंकि डायबिटीज पैर की पेचीदगी के खतरे को बढ़ाती है. इसलिए उसे साफ और नम बनाए रखें. बेकाबू ब्लड शुगर लेवल से कई स्वास्थ्य समस्याएं जुड़ी हुई हैं. ये उसी तरह आपके अंगों को प्रभावित कर सकता है. पुरानी स्थिति के निरंतर प्रबंधन से डायबिटीज के रोगियों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है.


ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

हेल्थ टिप्स: 1 महीने पहले से नजर आने लगते हैं हार्ट अटैक के ये 6 लक्षण

हेल्थ टिप्स: 1 महीने पहले से नजर आने लगते हैं हार्ट अटैक के ये 6 लक्षण

हार्ट अटैक अचानक कभी भी आ सकता है, लेकिन कुछ लक्षण हैं, जो हार्ट अटैक के 1 महीने पहले नजर आने लगते हैं। अगर आपको भी नजर आते हैं यह 6 लक्षण तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आप हार्ट अटैक के शि‍कार हो सकते हैं। अभी जानिए इन लक्षणों को, ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके-

सीने में असहजता –
यह दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है। सीने में होने वाली किसी भी प्रकार की असहजता आपको दिल के दौरे का शि‍कार बना सकती है। खास तौर से सीने में दबाव या जलन महसूस होना। इसके अलावा भी अगर आपको सीने में कुछ परिवर्तन या असहजता का अनुभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से सलाह लें।
थकान –
बगैर किसी मेहनत या काम के थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है। जब हृदय धमनियां कोलेस्ट्रॉल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधि‍क मेहनत करने की आवश्यकता होती है, जिससे जल्द ही थकान महसूस होने लगती है। ऐसी स्थि‍ति में कई बार रात में अच्छी खासी नींद लेने के बाद भी आप आलस और थकान का अनुभव करते हैं, और आपको दिन में भी नींद या आराम की जरुरत महसूस होती है।
सूजन –
जब दिल को शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए अधि‍क मेहनत करनी पड़ती है, तो शि‍राएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका असर खास तौर से पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्से में सूजन के रूप में नजर आने लगता है। इसके कभी-कभी होंठों की सतह पर नीला होना भी इसमें शामिल है।

सर्दी का बना रहना –
लंबे समय तक सर्दी या इससे संबंधि‍त लक्षणों का बना रहना भी दिल के दौरे की ओर इशारा करता है। जब दिल, शरीर के आंतरिक अंगों में रक्तसंचार के लिए ज्यादा मेहनत करता है, तब रक्त के फेफड़ों में स्त्रावित होने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी में कफ के साथ सफेद या गुलाबी रंग का बलगम, फेफड़ों में स्त्रावित होने वाले रक्त के कारण हो सकता है।
चक्कर आना -
जब आपका दिल कमजोर हो जाता है, तो उसके द्वारा होने वाला रक्त का संचार भी सीमित हो जाता है। ऐसे में दिमाग तक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे निरंतर चक्कर आना या सिर हल्का होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार एक गंभीर लक्षण है, जिस पर आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए।

सांस लेने में कठिनाई -
इनके अलावा सांस लेने में अगर आपको किसी प्रकार का परिवर्तन या कमी का एहसास होता है, तो यह भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है। जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जितनी आवश्यकता होती है। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता है, तो बगैर देर किए डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

नोट: इन 6 लक्षणों में से किसी लक्षण के सामने आने या महसूस होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं या फिर यथासंभव सलाह लें ...

 

अगर सोते समय आपके मुंह से निकलती है लार तो ये टिप्स है आपके लिए, जरूर आजमाएं

अगर सोते समय आपके मुंह से निकलती है लार तो ये टिप्स है आपके लिए, जरूर आजमाएं

अगर आप सोते समय मुंह से निकलने वाली लार से परेशान है, तो हम आप इस लेख में कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं... तो आइए जानते हैं कैसे आप आसानी से इस समस्या से निपट सकते हैं।
लार की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो आंवला का पाउडर का उपयोग आपकी इस समस्या से राहत दिला सकता है। जी हां अगर आप खाना खाने के बाद गुनगुने पानी में आंवला का पाउडर मिलाकर इसका सेवन करते है, तो कुछ ही दिनों में लार की समस्या दूर हो जाएंगी।

फिटकरी के बारे में तो आप जानते ही होंगे अधिकतर घरों में फिटकरी मौजूद भी होती है। चलिए अब जानते हैं कि आपको फिटकरी का इस्तेमाल करना कैसे हैं? आपको बस पानी में फिटकरी को अच्छे से मिलाकर दिन में एक से दो बार इसका कुल्ला करना है। ऐसा करने से लार की समस्या से आपको राहत मिलेंगी।
मुंह की लार से राहत पाने के लिए दालचीनी का उपयोग भी काफी फायदेमंद होता है। आपको बस दालचीनी की चाय बनाना है। और इसमें आधा चम्मच शहद मिलाना है। अब इसका नियमित रूप से सेवन करें। धीरे-धीरे लार की समस्या अपने आप ही गायब हो जाएंगी।

लार की परेशानी से राहत पाने के लिए तुलसी का पत्ता भी काफी कारगर उपायों में से एक हैं। इसके लिए आप दिन में दो से तीन बार तुलसी के पत्ते का सेवन करें। इससे बहुत जल्द आपको लार से छुटकारा मिलेगा।
ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
 

क्या ग्रीन टी सेहत के लिए सचमुच फायदेमंद है? जानिए

क्या ग्रीन टी सेहत के लिए सचमुच फायदेमंद है? जानिए

ग्रीन टी का पीना निश्चित रूप से सेहतमंद है. कुछ लोगों का तो यहां तक दावा है कि कि इसके नियमित सेवन से वजन कम होने में मदद मिल सकती है. ग्रीन टी दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय ड्रिंक्स में से एक है. इसलिए सबसे ज्यादा उस पर रिसर्च भी हो रहा है. इससे पहले उसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य को होनेवाले फायदों पर रिसर्च किया गया है. शोधकर्ताओं ने जानने की कोशिश की है कि कैसे ग्रीन टी का नियमित सेवन दिमाग, दिल और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए मुफीद हो सकता है. ग्रीन टी की अप्रत्याशित लोकप्रियता के पीछे कुछ कारण हैं.


ग्रीन टी से स्वास्थ्य को मिलनेवाले फायदे
1. ब्लड शुगर नियंत्रण- ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट का एक किस्म कैटेचिन पाया जाता है. ये ब्लड शुगर लेवल को कम करनेवाला पाया गया है. ग्रीन टी का इस्तेमाल पाचन एंजाइमों को रोकता है जिससे रक्त प्रवाह में शुगर का स्राव धीमा हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों को ग्रीन टी पीना सुरक्षित है लेकिन इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है.


ये बात सही है कि ग्रीन टी कैफीन मुक्त नहीं है और इसके इस्तेमाल से आपको ज्यादा सतर्क होने का एहसाल मिल सकता है. रात या शाम के मुकाबले ग्रीन टी को दिन में पीना बेहतर है. कैफीन के रोजाना डोज के लिए कॉफी की तुलना में ये बेहतर विकल्प हो सकता है.


2. ग्रीन टी मूड को ठीक कर सकता है- फाइटोमेडिसीन में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन टी के सेवन का संबंध कम चिंतित महसूस करने से जुड़ा है. ग्रीन टी में एल थेनाइन की मौजूदगी की पहचान मूड ठीक करने वाले एक यौगिक की होती है.


3. ये आपके दिमाग के लिए ठीक है- ग्रीन टी में कैटेचिन एंटी ऑक्सीडेंट और पॉलीफेनोल का एक किस्म है जो आपके दिमागी सेहत के लिए मुफीद हो सकता है. ये फ्री रेडिकल्स के चलते क्षति से शरीर को सुरक्षा मुहैया कराता है. ग्रीन टी पर 21 अलग रिसर्च से खुलासा हुआ कि ग्रीन टी के पीने से याद्दाश्त और ध्यान में सुधार हो सकता है.


4. दिल की सेहत के लिए अच्छा है- कैटेचिन के साथ ग्रीन टी में फ्लॉओनॉल होता है. ये भी एंटी ऑक्सीडेंट का एक किस्म है जो खराब कोलेस्ट्रोल को कम कर सकता है. इसके बदले आपके दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है.


इन तमाम फायदों को देखकर कहा जा सकता है ग्रीन का सेवन सिर्फ मध्यम मात्रा में किया जाना चाहिए. आप सुनिश्चित करें कि ऑर्गेनिक और ग्रीन टी की प्राकृतिक शक्ल आपके हाथ में हो क्योंकि बाजार में इसकी कई किस्में पाई जाती हैं.

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अगर आपके मुंह से भी आती है दुर्गंध, तो इन बातों का रखें ख्याल

अगर आपके मुंह से भी आती है दुर्गंध, तो इन बातों का रखें ख्याल

अगर आप मुंह से दुर्गंध आने की समस्या से परेशान है, तो आप कुछ आसान से उपाय आजमाकर इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं, जी हां मुंह से दुर्गंध आने की वजह से कई बार शर्मिदगी भी होती है। और लोग आपसे दूर भगने लगते है, अगर आप भी इन समस्या से निजात पाना चाहते हैं, तो हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे है जिनका सेवन कर आप इन समस्या से राहत पा सकते है।


दही के सेवन से आप मुंह से दुर्गंध की समस्या से निजात पा सकते है। सादा दही खाने से मुंह में अच्छे जीवाणु जन्म लेते हैं, जिससे की बुरे जीवाणुओं की संख्या कम हो जाती है। कम से कम एक सप्ताह तक आप यदि आप सादे दही का सेवन करते है तो मुंह से दुर्गंध अपने आप धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।

दालचीनी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसमें रोगाणुरोधी तत्व मौजूद होते है। दालचीनी के सेवन से मुंह से आने वाली बदबू को कम कर देता है। इसके साथ ही दालचीनी के सेवन से दांत स्वस्थ भी रहते हैं।

अगर आप अदरक का नियमित सेवन करते है, तो मुंह से दुर्गंध की समस्या से जल्द छुटकारा मिल सकता है। अदरक के सेवन से पाचन तंत्र भी अच्छी रहता है।

मुंह के दुर्गध से छुटकारा पाने के लिए सौंफ का नियमित सेवन करें। खाना खाने के बाद नियमित रूप से सौंफ खाने से मुंह की दुर्गंध से राहत मिलती है। इसके नियमित सेवन से मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाती है।

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सफेद बालों की समस्या से पाएं निजात, अपनाएं ये खास टिप्स

सफेद बालों की समस्या से पाएं निजात, अपनाएं ये खास टिप्स

चमकते और सुंदर बालों की चाहत रखते है तो घर में रखी चायपत्ती आपकी ये इच्छा पूरी कर सकती है। चायपत्ती का पानी बालों में लगाने से आपको शाइन करते हुए बाल तो मिलेंगे ही साथ ही आज के युवा वर्ग की सबसे बड़ी समस्या 'सफेद बालों की समस्या' से भी निजात मिलेगा।

आइए जानें कैसे-

1. थोड़े पानी में 6 चम्मच चायपत्ती को मिलाए और अच्छी तरह से उबालें। लगभग 30 मिनट तक उबालें।

2. जब यह चायपत्ती का पानी ठंडा हो जाए तब इसे छान लें।

3. अब इस पानी को आप अपने बालों में लगाएं, आप इस पानी में चाहे तो कॉफी भी मिला सकती हैं।

4. ऐसा करने पर आपको सफेद बालों की समस्या से निजात तो मिलेगा ही, साथ ही कई और फायदे भी होंगे जैसे बालों का झड़ना कम होगा, बालों की ग्रोथ अच्छी होगी और बालों का रूखापन कम होगा।


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इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर शिमला मिर्च खाने के हैं अनेक फायदे, यहां जानें

इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर शिमला मिर्च खाने के हैं अनेक फायदे, यहां जानें

शिमला मिर्च का इस्तेमाल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में किया जाता है. शिमला मिर्च लाल, पीले और हरे जैसे विभिन्न रंगों में उपलब्ध हैं. यह विटामिन से भरपूर होते हैं और कई बीमारियों का एक प्रभावी इलाज हैं. विभिन्न औषधीय गुणों के साथ शिमला मिर्च कुछ स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए भी एक बढ़िया घटक है. ये अपने कई स्वास्थ्य लाभों के लिये जानी जाती है. यह विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों से समृद्ध है. यहां शिमला मिर्च खाने के कुछ स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया गया है, जिसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए.


आंखें और त्वचा के लिए अच्छा
शिमला मिर्च का सेवन त्वचा को साफ रखने में मदद करता है. ये फुंसियों को रोकता है. इसमें विटामिन ए होता है, जो आंखों के लिए अच्छा होता है और आंखों की बीमारियों को रोकने में मदद करता है.


दिल के स्वास्थ्य के लिये लाभदायक
लाल शिमला मिर्च में मौजूद लाइकोपीन एक फाइटोन्यूट्रिएंट आपके दिल को स्वस्थ रखता है. ये वनस्पति फोलेट और विटामिन बी 6 का एक समृद्ध स्रोत है. जो होमोसिस्टीन के स्तर को कम करता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है.


पाचन में सुधार करता है
अगर आप वजन करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको शिमला मिर्च की तरफ रुख करना चाहिए. शिमला मिर्च खाने से आपको फैट बर्न करने और वजन कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे आपके पाचन में भी सुधार होगा.


बालों की ग्रोथ में मददगार
शिमला मिर्च बालों की ग्रोथ में बेहद मददगार है. यह बालों को झड़ने से रोकता है और आपको घने बालों को बनाए रखने में मदद करता है.


कैंसर के खतरे को कम करता है
शिमला मिर्च कैंसर के खतरे को कम करती है क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. शिमला मिर्च में मौजूद एंजाइम एसोफैगल और गैस्ट्रिक कैंसर की रोकथाम में भी मदद करते हैं.


इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार
लाल शिमला मिर्च में विटामिन सी की मात्रा काफी अधिक होती है. ये इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार है.


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क्या आपको गैस, कब्ज और पाचन की हैं समस्याएं? इन जड़ी-बूटियों और मसालों के हैं हैरतअंगेज लाभ

क्या आपको गैस, कब्ज और पाचन की हैं समस्याएं? इन जड़ी-बूटियों और मसालों के हैं हैरतअंगेज लाभ

समारोह में या घर पर स्वादिष्ट, चटपटा या जायकेदार खाना किसे अच्छा नहीं लगता. लेकिन अगर ज्यादा खा लिया जाए, तो उत्सव का जोश ठंडा पड़ जाता है. आपको कब्ज, गैस, ऐंठन या ब्लोटिंग की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. कब्ज, ब्लोटिंग और गैस पाचन संबंधी समस्याएं हैं और ये पेट से जुड़ी हैं.


समस्याओं के दूर करने में मसाले और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल मददगार हो सकता है. सेहतमंद आंत को बढ़ाने के लिए आप उसे अपनी डाइट में शामिल करें. उससे आपकी परेशानियों में कुछ कमी होने में मदद मिलेगी.


तीन मसाले और तीन जड़ी-बूटियों के पाचन लाभ जबरदस्त हैं. उसे आप अपनी रोजाना की जिंदगी में मेन्यू का हिस्सा बना सकते हैं. अगर आप अपरिचित सामग्रियों जैसे सिंहपर्णी की जड़ से भयभीत हैं, तो चाय बनाने के लिए उसका इस्तेमाल करें. आप गर्म पानी में चाय के साथ शामिल कर जरूरत महसूस होने पर पी सकते हैं. अदरक और हल्दी थोड़ा ज्यादा मशहूर हैं. उसका इस्तेमाल चिकन सूप में भी होता है.


हल्दी
आंत्र की नियमितता और गतिशीलता को बढ़ाती है
कब्ज को रोकती है


अदरक
जी मिचलाने में राहत पहुंचाता है
पाचन तंत्र में गतिशलीलता को सुधारने के लिए अदरक पित्त और लार उत्पादन बढ़ाता है
बेचैनी को कम करने के लिए पाचन क्षेत्र में मांसपेशियों को ढीला करता है


इलायची
पाचन को उत्तेजित करता है
आंत के खराब बैक्टीरिया और संभावित अल्सर को रोकने में मदद करता है
पाचन और मेटाबोलिज्म को ज्यादा तेज कर सकता है


सिंहपर्णी की जड़
पाचन एंजाइमों को बढ़ाता है
पाचन क्षेत्र को शांत करता है
लीवर को डिटॉक्सीफाई करता है
ब्लोटिंग को कम करता है


पुदीना

पाचन की गड़बड़ी के लक्षणों को राहत देने में मदद करता है
गैस और ब्लोटिंग को घटाता है


कैमोमाइल
पाचन क्षेत्र को ढीला करने में मदद करता है
ऐंठन को रोकता है
आसान पाचन गतिशीलता को बढ़ावा देता है