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फेफड़ों को रखना चाहते हैं हेल्दी तो इन 4 चीजों से आज से ही बना लें दूरी

फेफड़ों को रखना चाहते हैं हेल्दी तो इन 4 चीजों से आज से ही बना लें दूरी

फेफड़ों के स्वस्थ रहने के लिए हेल्दी डाइट जरूरी है. सिगरेट के धुएं और पर्यावरण के विषाक्त पदार्थों के संपर्क के साथ-साथ एक खराब डाइट से भी फेफड़े कमजोर हो सकते हैं.


फेफड़े ऑक्सीजन को फिल्टर करने का काम करते हैं. हमेशा हेल्दी रहने के लिए फेफड़ों का बिना रुकावट के काम करना जरूरी है. फेफड़ों को सही रखने के लिए सभी पोषक तत्वों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए. आज हम आपको बता रहे हैं कि फेफड़ों को स्वस्थ रखने किन चीजों से दूरी बना लेनी चाहिए.


प्रोसेस्ड मीट
शधकर्ताओं का मानना है कि प्रोसेस्ड मीट को संसाधित करने और संरक्षित करने में उपयोग किए जाने वाले नाइट्राइट फेफड़ों में सूजन और तनाव पैदा कर सकते हैं. बेकन, हैम, डेली मांस, और सॉसेज सभी प्रसंस्कृत मांस की श्रेणी में आते हैं.


बहुत ज्यादा शराब
आपके लीवर के लिए और आपके फेफड़ों के लिए शराब पीना बहुत बुरा है. शराब में सल्फेट्स अस्थमा के लक्षणों को खराब कर सकते हैं, और इथेनॉल आपके फेफड़ों की कोशिकाओं को प्रभावित करता है. बहुत अधिक पीने से निमोनिया और फेफड़ों की अन्य समस्याएं होने की अधिक संभावना है.


बहुत ज्यादा नमक
नमक का ज्यादा सेवन फेफड़ों की समस्याओं को बड़ा सकता है. जो लोग बहुत अधिक नमक खाते हैं, उनमें दीर्घकालिक ब्रोंकाइटिस होने की संभावना अधिक हो सकती है और एक उच्च-सोडियम आहार अस्थमा के लक्षणों को खराब कर सकता है.


सुगन्धित पेय
फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए मीठे शीतल पेय से बचने की कोशिश करें. स्वीट सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने वालों में फेफड़ों की समस्याएं होने की संभावना अधिक हो सकती है. इससे बच्चों में भी अस्थमा होने की संभावना अधिक हो सकती हैं. अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो भी बिना सोचे-समझे सॉफ्ट ड्रिंक पीना आपके फेफड़ों के लिए खराब हो सकते हैं. 

पाचन शक्ति को करना चाहते हैं मजबूत तो इन टिप्स को करें फॉलो

पाचन शक्ति को करना चाहते हैं मजबूत तो इन टिप्स को करें फॉलो

अधिकतर लोग खाना खाने के बाद पेट की समस्या से परेशान रहते हैं जैसे गैस, कब्ज या पेट का खराब होना। इसका सीधा संबध होता है आपके पाचन तंत्र से। यदि आपको पेट की समस्या बार-बार परेशान करती है, तो आपका पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है। यदि आप इस परेशानी से निजात पाना चाहते है, तो आपको पाचन तंत्र को दुरूस्त रखना पड़ेगा। आइए जानते हैं कैसे आप अपने पाचन तंत्र को मजबूत बना सकते है

कुछ लोगों की आदत होती है, की वे जल्दबाजी के चलते खाना बहुत जल्दी-जल्दी खाते है। इस वजह से भोजन को अच्छी तरह से चबाते ही नहीं हैं, इससे खाना आसानी से पचता नहीं है। इसलिए बेहतर है कि खाने को चबा-चबाकर खाएं। इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है

गुनगुना पानी आपके शरीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालता है। इसलिए खाना खाने के बाद अपने पाचन शक्ति को मजबूत रखने के लिए गुनगुना पानी जरूर पीएं।
विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करने से आपकी पाचन शक्ति मजबूत होती है। इसलिए अपनी डाइट में
विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे-
संतरा, कीवी और स्ट्राबेरी, नींबू आदि को शामिल करें।

कुछ लोग खाना खाते समय ढेर सारा खाना लेकर बैठ जाते हैं, जबकि ऐसा करना उचित नहीं है। इसका सीधा असर आपके पाचन तंत्र पर पड़ता हैं। इससे खाना पचाने में दिक्कत हो सकती है, साथ ही पेट संबंधित कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं। इसलिए थोड़ा-थोड़ा खाना ही आपको खाना चाहिए।

 

आपको बीमारियों से कोसो दूर रखने में माहिर हैं ये 10 पौष्टिक मेवे

आपको बीमारियों से कोसो दूर रखने में माहिर हैं ये 10 पौष्टिक मेवे

सर्दियों में लोग अक्सर ड्राई फ्रूट्स खाना पसंद करते हैं. क्योंकि ये फाइबर और प्रोटीन के बेहतरीन सोर्सेज में से एक माने जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने का काम करते हैं. लेकिन इन ड्राई फ्रूट्स की खूबियाँ यहीं ख़त्म नहीं होती, ये सूखे मेवे डायबिटीज, दिल से जुड़ी बीमारी और कब्ज जैसे परेशानी के लिए किसी रामबाण उपाय से कम नहीं. और तो और, मिनरल्स, पोटैशियम और मैग्निशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर ड्राई फ्रूट्स वज़न घटाने में भी मददगार होते हैं. इसके अलावा, ड्राई फ्रूट्स में मौजूद वसा, ओमेगा 3, विटामिन ई, सेलेनियम और प्रोटीन जैसे तत्व बॉडी को एनर्जी देने के साथ साथ त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. ऐसे में रोजाना एक मुट्ठी ड्राई फ्रूट्स खाना आपकी सेहत को बूस्ट कर सकता है. इसलिए हम आपके लिए लाए हैं उन 10 न्यूट्रीशस मेवों की जानकारी जिन्हें रोज़ नियमित रूप से खाकर आप खुद को हेल्दी रखते हुए बीमारियों के खतरे से बचा सकते हैं.


1.बादाम
बादाम वेट लॉस के लिए सबसे अच्छा ड्राई फ्रूट है. ये मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ावा देने, खराब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल से लड़ने और खराब लिपिड में कटौती करने का काम करता है. जो वज़न घटाने वाले लोगों के लिए फायदेमंद है. साथ ही, बादाम प्रोटीन, क्रोम सेप्टेट फैट यानी मोनो-संतृप्त वसा और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होने के कारण भूख को कंट्रोल करता है और वेट लॉस के प्रोसेस में मदद करता है. बादाम में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है. 100 ग्राम बादाम में केवल 576 किलो कैलोरी होती है.


2. किशमिश
अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं, तो आपको किशमिश खाने से बचना चाहिए. पर अगर वजन घटाना चाह रहे हैं, तो किशमिश खाना फायदेमंद है. किशमिश में आयोडीन की काफी मात्रा होती है. 100 ग्राम किशमिश में, केवल 0.5 ग्राम फैट और 299 किलो कैलोरी होती है.


3. अखरोट
अखरोट कई पोषक तत्वों की भरमार है. 100 ग्राम अखरोट में 38.08 ग्राम आमेगा 6 पाया जाता है. जो शरीर के फैट को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, अखरोट में विटामिन बी, बिटामिन सी, बिटामिन के, विटामिन बी2 आदि तत्व पाए जाते हैं. ये इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं और सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. अखरोट की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को नैचुरली गर्मी मिलती है.


4.पिस्ता
पिस्ता में भरपुर मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं जो, ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. इसके एंटीऑक्सिडेंट शरीर के एक्स्ट्रा फैट से लड़ने और आपके मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देने में भी कारगार हैं. इसके अलावा, ये हाई फाइबर से भरपूर है, जो आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करवाता है और डाइजेशन को बेहतर बनाता है.


5.खजूर
स्वाद में भरपूर और वजन घटाने में माहिर है खजूर. ऐसा इसलिए क्योंकि खजूर में हाई फाइबर कंटेंट होते हैं, जो आपको भरा हुआ महसूस करवा के भूख को दबाने में मदद करते हैं. खजूर आपके शरीर में विटामिन बी 5 की कमी को दूर करता है. बता दें कि, विटामिन बी 5 आपकी सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए जाना जाता है.


6.काजू
काजू मैग्नीशियम से भरपूर होता है जो वज़न घटाने में बहुत कारगर है. ऐसा इसलिए क्योंकि मैग्नीशियम शरीर में फैट और कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म को रेगुलेटेड करने में मदद करता है. जिससे वेट लॉस प्रोसेस में तेज़ी आती है.


7.खुबानी
खुबानी, खाने के कम से कम 5 घंटे बाद तक आपको भूख लगने से रोक सकती है. इसके अलावा, ये आपके शरीर को मैग्नीशियम तत्व से भरती है जो फैट के मेटाबोलिज्म को कंट्रोल करता है. खुबानी में थोड़ा मीठा स्वाद होता है और आप इन्हें पकाते समय कुछ खास मिठाइयों में मिला सकते हैं. लेकिन डायबिटीज के पेशेंट को इसे खाने से बचना चाहिए.


8.अंजीर
अंजीर खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम मज़बूत होता है और आपको कब्ज की समस्या से छुटकारा भी मिल सकता है. इसलिए रोजाना शहद के साथ सिर्फ दो-तीन अंजीर ज़रूर खाएं.


9.चिरौंजी
चिरौंजी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. जो शरीर की कमजोरी को दूर और इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करता है. साथ ही, सर्दी-जुकाम में इसका सेवन बेहद ही फायदेमंद माना जाता है.


10.प्रूनस
प्रूनस को आमतौर पर सूखे प्लम भी कहा जाता है. ये हाई फाइबर से भरपूर होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इसे खाने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और बॉडी डिटॉक्स हो जाती है. इसके अलावा, ये वज़न घटाने में भी कारगर होते हैं.

 

तेजी से शरीर का भार घटाने के लक्ष्य में मदद कर सकते हैं ये फल, जानिए कैसे

तेजी से शरीर का भार घटाने के लक्ष्य में मदद कर सकते हैं ये फल, जानिए कैसे

वजन में बढ़ोतरी करना बहुत ही आसान है मगर बढ़े हुए वजन में कमी लाना और उसे सेहतमंद तरीके से संतुलित रखना एक कठिन काम है. उसको हासिल करने के लिए अगर फलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाए तो चंद दिनों में अपेक्षित नतीजे मिल सकते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि वजन संतुलित रखने या बढ़े हुए भार को कम करने के लिए रोजाना अपने फूड में ज्यादा से ज्यादा फाइबर, मिनरल और विटामिन शामिल करना चाहिए.


उनकी सलाह है कि कार्बोहाइड्रेट्स, जंक फूड से बचते हुए दिन में 30 मिनट का व्यायाम या चहलकदमी लाजिमी करना चाहिए. उनका कहना है कि फलों में कैलोरी कम और विटामिन, मिनरल और फाइबर ज्यादा पाया जाता है.


फल आपकी सेहत के लिए जरूरी भी हैं और वजन में तेजी से कमी लाने में अहम भूमिका भी निभाते हैं. फलों की डाइट को अपनाने से शरीर को वांछित हर तरह के पोषण हासिल होते हैं और डाइटिंग के कारण होनेवाली कमजोरी भी नहीं होती.

नींबू
नीबूं का संबंध तीखे फलों के परिवार से है. उसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. नींबू मेटाबोलिज्म तेज करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और फैट को भी पिघलाता है. मोटापे के शिकार लोगों को रोजाना एक नींबू इस्तेमाल करना चाहिए. नींबू को सलाद या सालन पर निचोड़कर या नींबू पानी बनाकर सेवन किया जा सकता है. नींबू पानी में ज्यादा नमक और चीनी को न मिलाएं. गुनगुने पानी में नींबू का साथ मिल जाने से फायदा और बढ़ जाता है.

ग्रेप फ्रूट
ग्रेप फ्रूट जैसे संतरा केमिकल गुणों के चलते मोटापे पर काबू पाने के लिए शानदार फल है. विटामिन सी से भरपूर उस फल से इंसुलिन की सतह संतुलित रहने में मदद मिलती है. जिसके नतीजे में शरीर के फैट जमने की प्रक्रिया में कमी आती है और शारीरिक वजन भी कम होता है. संतरे में बहुत कम कैलोरी पाया जाता है जबकि उसमें मौजूद फाइबर से पेट को भरने में मदद मिलती है और देर तक भूख का एहसास नहीं होता.

सेब, नाशपाती
सेब और नाशपाती दोनों में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है. छिलकों के साथ दोनों फलों को खाने से अतिरिक्त फाइबर मिलता है. ये पेट को ज्यादा देर तक भरा रखने में मदद पहुंचाता है. उनके जूस की बजाए फल को खाना शरीर में अतिरिक्त फैट को जमने नहीं देता है.

शकरकंद
सर्दियों में शकरकंद बहुतायत के साथ पाया जाता है. शकरकंद एक स्वादिष्ट फल है. उसे उबाल कर या भून कर दोनों तरीके से खाया जाता है. उसमें भी भरपूर फाइबर और कैलोरी कम पाई जाती है. उसके अलावा, पोटैशियम, बीटा कैरोटीन, विटामिन सी हासिल होता है. ये सब मोटापा से निजात दिलाने में मदद करते हैं.

तरबूज
तरबूज में पोटैशियम की मात्रा में काफी ज्यादा होती है. आम तौर से व्यस्क शख्स के शारीरिक वजन का 50-60 फीसद हिस्सा पानी पर आधारित होता है. उससे ज्यादा मात्रा होने को पानी का वजन कहा जाता है. ये पेट फूलने और सूजन का कारण बन कर लोगों को ज्यादा मोटा दिखाता है. एक शोध में बताया गया है कि तरबूज का शरबत पीने से शरीर का फैट घुलता है और कोलेस्ट्रोल की सतह में भी कमी आती है.

पपीता
पपीता मोटापे से छुटकारा के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. फाइबर से भरपूर होने के चलते पपीता खाने की आदत पेट को ज्यादा देर तक भरे रखती है. इसके अलावा असमय खाने की इच्छा से भी निजात मिलती है. पपीते में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर के वजन में कमी लाते हैं जो तोंद पर जमी चर्बी को घुलाने की राह में सबसे बड़ी बाधा है. ये फल पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाने में मुफीद है.

 

आज है वर्ल्ड एड्स डे, जानें एड्स और एचआईवी में क्या है फर्क और क्या हैं इससे बचाव के तरीके

आज है वर्ल्ड एड्स डे, जानें एड्स और एचआईवी में क्या है फर्क और क्या हैं इससे बचाव के तरीके

नई दिल्ली, विश्वभर में एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 01 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day)) मनाया जाता है. एड्स एक लाइलाज बीमारी है. इसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है. बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. यह बीमारी, ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (HIV) वायरस के संक्रमण से होती है.
एचआईवी एक वायरस है. यह वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर अटैक करके टी सेल्स को खत्म करता है. इससे व्यक्ति का शरीर नॉर्मल बीमारियों से भी लड़ने में सक्षम नहीं रह पाता है. समय पर एचआईवी का इलाज नहीं होने से इसका इंफेक्शन बढ़ता है और एड्स का कारण बन जाता है.


एचआईवी और एड्स में क्या फर्क है

एचआईवी एक वायरस है. यह सीधे इम्यून सिस्टम की टी सेल्स पर अटैक करता है जबकि एड्स ( Acquired Immunodeficiency Syndrome) एक मेडिकल सिंड्रोम है. एचआईवी इंफेक्शन होने के बाद सिंड्रोम बनता है. एचआईवी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, लेकिन एड्स नहीं फैलता है.


ऐसे फैल सकता है एचआईवी

एचआईवी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कई तरह से फैल सकता है. यह संक्रमित खून चढ़ाने, सं‍क्रमित सुई के इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से हो सकता है. इसके साथ ही गर्भस्थ महिला से उसके होने वाले बच्चों और शिशु को स्तनपान से भी यह इंफेक्शन हो सकता है.


एचआईवी से ऐसे बचें

एचआईवी से बचने के लिये जागरूकता जरूरी है. नई सीरिंज से ही इंजेक्शन लगवाएं, सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. खून चढ़वाने से पहले संक्रमण की जांच करा लें. इसके साथ ही हमेशा नई ब्लेड से ही शेविंग कराएं.


एचआईवी को लेकर भ्रांति

एचआईवी फैलने को लेकर लोगों में कई गलत धाराणाएं हैं. मच्छर के काटने ,एचआईवी संक्रमित से हाथ मिलाने, साथ खाना खाने, बात करने और एक शौचालय के कई लोगों के इस्तेमाल करने से एचआईवी नहीं फैलता हैं.


1988 से बनया जा रहा एड्स डे

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम में काम करने वाले थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू ने विश्व एड्स दिवस की कल्पना 1987 में की थी. इसके बाद वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाना शुरू किया गया. इसके साथ ही हर साल 'एड्स डे' की थीम रखी जाती है. 2020 के 'एड्स डे' की थीम 'एचआईवी/एड्स महामारी समाप्त करना: लचीलापन और प्रभाव' रखी गई है. 

जान लें सर्दियों में अमरूद खाने के फायदे, पेट की परेशानियां होंगी छूमंतर

जान लें सर्दियों में अमरूद खाने के फायदे, पेट की परेशानियां होंगी छूमंतर

अमरूद का नाम लेते ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. शायद ही ऐसा कोई हो, जिसे अमरूद पसंद न हो. खट्टे-मीठे अमरूद न सिर्फ स्वाद में अच्छे लगते हैं बल्कि आयुर्वेद में अमरूद के बीजों को गुणकारी बताया गया है. अमरूद में भरपूर विटामिन सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन होता है. आइए जानते हैं कि अमरूद के फायदों के बारे में.
पेट दर्द से दिलाए मुक्ति
पेट दर्द की समस्या गलत खानपान के वजह से होती है. यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि खान-पान में अनियमितता के चलते पेट दर्द की समस्या आम है. इसे ठीक करने के लिए नमक के साथ पके हुए अमरूद का सेवन करना चाहिए, इससे पेट दर्द ठीक हो सकता है. इसके अलावा अमरूद के बीज पेट साफ करने में भी मदद करते हैं.
कब्ज की समस्या दूर करता है अमरूद
जिन्हें ज्यादातर कब्ज की समस्या बनी रहती है, उन्हें नाश्ते में रोज अमरूद का सेवन करना चाहिए. कब्ज की समस्या अधिक होने पर सुबह और शाम दोनों समय अमरूद खाना फायदेमंद हो सकता है.
पेचिश रोग में लाभकारी
बच्चों में पेचिश होने पर अमरूद की 15 ग्राम जड़ को एक गिलास पानी में तब तक उबालें, जब तक यह आधा न हो जाए. इसके बाद इसे बच्चों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में 2-3 बार पिलाते रहें, इससे उन्हें फायदा हो सकता है. इसके अतिरिक्त हैजा होने पर भी अमरूद की छाल और इसके पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से राहत पाई जा सकती है.
हिमोग्लोबिन बढ़ाता है अमरूद
अमरूद में आयरन और विटामिन सी दोनों ही भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. चूंकि आयरन हिमोग्लोबिन बढ़ाने और विटामिन सी आयरन को शरीर में अवशोषित करने कार्य करता है, इसलिए हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए यह दोनों ही तत्व जरूरी हैं. यही वजह है कि एनीमिया से ग्रसित व्यक्ति को अमरूद का सेवन जरूर करना चाहिए.
गैस एसिडिटी दूर करने की कारगर औषधि
अमरूद के बीज एसिडिटी कम करने में काफी कारगर होते हैं. इसके लिए अमरूद के बीज निकालकर इसमें गुलाब जल और मिश्री मिलाकर सेवन करें, इससे एसिडिटी में फायदा होता है.
खूनी बवासीर में फायदेमंद है अमरूद की छाल
खूनी बवासीर में अमरूद की छाल काफी फायदेमंद होती है। 5-10 ग्राम अमरूद की छाल का चूर्ण का काढ़ा बनाकर सेवन करने से बवासीर ठीक हो सकता है. बवासीर के मरीजों को यह काढ़ा लगातार कम से कम 1 माह तक पीना चाहिए.
बुखार कम करने में सहायक है अमरूद के पत्ते
यदि बुखार तेज है, तो अमरूद का औषधीय प्रयोग लाभकारी होता है. अमरूद के पत्तों को पीसकर इसका रस निकालकर बुखार से पीडि़त व्यक्ति को पिलाने से बुखार कम होता है.
 

क्या आप खाते-खाते टीवी देखते है, तो हो जाइये सावधान, जाने क्या होता है इससे

क्या आप खाते-खाते टीवी देखते है, तो हो जाइये सावधान, जाने क्या होता है इससे

आजकल टीवी देखकर भोजन करना एक आम आदत है। अगर भोजन करते समय आपकी भी टीवी देखने की आदत है तो संभल जाइए क्योंकि इससे सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचता है। हम सभी दिन की उस घड़ी का इंतजार करते हैं, जब हम आराम से रिलैक्स कर सकें और शांति से अपना खाना टीवी के सामने खा सकें। लेकिन ऐसा करते समय, हम आम तौर पर अपनी भूख का ट्रैक खो देते हैं और जरूरत से ज्यादा खा जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ता है।

जब हमें बाद में इसका एहसास होता है, तो हम पश्चाताप करने लगते हैं। अगर आपको अपना वेट लॉस करना है, तो इस अनहेल्दी पैटर्न को ब्रेक करना होगा जो शायद कई लोगों के लिए आसान न हो। इस समस्या को दूर करने के लिए, यहां कुछ चीजें हैं जो आप कर सकते हैं।

लोग टीवी के सामने भोजन क्यों करते हैं

खाना खाते समय यह बेहद जरूरी है कि आप अपने ध्यान को यहां वहां न भटकाएं। जिस तरह से आप अन्य काम को ध्यानपूर्वक करते हैं, ठीक उसी तरह से भोजन को भी उतने ही ध्यान से खाएं और उसके हर एक निवाले का आनंद लें। खाते वक्त टीवी देखने से आपका ध्यान भटकता है और आप या तो जल्दी-जल्दी खाते हैं या फिर ज्यादा खा लेते हैं। अपने भोजन का स्वाद लेना, आपको अपने भोजन के सेवन को नियंत्रित करने में मदद करता है। आपका पेट मस्तिष्क को एक संकेत भेजता है कि यह भरा हुआ है और अब आपको रुकने की आवश्यकता है।

-टीवी देखने में लोग इतने मगन हो जाते हैं कि उन्हें ये पता ही नहीं चलता कि उन्होंने कितना खा लिया। ऐसे में कई बार लोग ज्यादा खा जाते हैं जिस वजह उन्हें पेट दर्द की शिकायत रहती है।

-अगर आप अपना वजन कम करना चाह रहे हैं, तो हमारा सुझाव है कि इस बुरी आदत को तुरंत छोड़ दें। डायनिंग टेबल पर जाएं और अपने भोजन को जितनी अधिक शांति में खा सके खाएं। किसी भी भोजन को खाने में सिर्फ 15 मिनट लगते हैं और हम यकीन मानते हैं कि आप उतना समय खुद को हेल्दी रखने के लिए निकाल ही सकते हैं।

-टीवी का रिमोट पकडऩे से पहले अच्छा होगा कि आप अपना भोजन समाप्त कर लें। अगर आपको ऐसा करना मुश्किल लगता है, तो आप इन ट्रिक्स को आजमा सकते हैं

-अगर आप पॉपकॉर्न या वेफर्स के एक बड़े कटोरे के साथ बैठते हैं, तो आप निश्चित रूप से उसे पूरा खत्म कर देंगे। एक छोटा कटोरा चुनें और उसमें अपना हिस्सा लें। केवल इतना ही खाएं और उसे फिर से भरने की कोशिश न करें।

-टेलीविजन देखने के दौरान स्नैकिंग के अलावा किसी और काम में व्यस्त रहें। आप चाहें तो अपने नाखूनों को पेंट कर सकती हैं या पैरों की मालिश कर सकती हैं। जब आपके हाथ अलग-अलग काम में लगेंगे, तो आप कम अनहेल्दी चीजें खाएंगी।

जब भी आपका अनहेल्दी खाने का मन करे, तो उससे पहले एक गिलास पानी पी लें। इससे आपकी भूख शांत होगी।

 
सर्दियों के मौसम में अक्सर लोगों को होती है खुजली की समस्या, जानें कैसे पाएं छुटकारा

सर्दियों के मौसम में अक्सर लोगों को होती है खुजली की समस्या, जानें कैसे पाएं छुटकारा

सर्दियों के मौसम में अक्सर लोगों को खुजली की समस्या होने लगती है और ये इस वजह से होती है क्योंकि स्किन ड्राय हो जाती है तो कई बार ऊनी कपड़े की वजह से भी इस तरह की समस्या लोगों में देखने को मिलती है। तापमान की कमी के कारण हमारी स्किन अधिक रूखी हो जाती है, जिसके कारण कई बार एक्जिमा तक की समस्या का सामना करना पड़ता है। स्किन में मॉश्चराइज रखने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। इस दौरान केवल आपको क्रीम या बाकि चीजों का ही इस्तेमाल नहीं करना है बल्कि आपको इस दौरान अपनी डाइट का भी इस्तेमाल करना चाहिए ताकि आपकी सेहत सही रहे और आपको इस तरह की समस्या ना हो। इसलिए इस दौरान आपको पानी खूब पीना चाहिए औऱ साथ ही अगर आफ इन चीजों का सेवन करते हैं तो इससे आपको बहुत फायदे होंगे। तो चलिए जानते हैं आपको किन चीजों का खास ध्यान रखना है।
गन्ना
सर्दियों के मौसम में गन्ने का जूस आपको जरुर पीना चाहिए ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए साथ ही ये एक्जिमा के साथ हर स्किन संबंधी समस्याओं से भी आपका बचाव करते हैं। इसलिए इसका जूस आप सप्ताह में 3 से 4 बार जरुर पिए इससे आपको बहुत राहत मिलेगी।
मूली
सर्दियों के मौसम में मूली खाना बहुत फायदेमंद माना दाता है और आप अपने खाने में इसे जरुर शामिल करें, इसके साथ ही हो सके तो आप सुबह पेट इसका सेवन जरुर करें।
सेब
सुबह एक सेब खाना सेहत के लिए कितना फायदेमंद है ये तो आप जानते ही है, ऐसे में आपको स्किन की समस्याओं से दूर रहना है तो इसका सेवन करते रहें, ताकि आप स्वस्थ रहें।
व्हीट ग्रास का जूस
गेंहू की घास का जूस सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इसका सेवन करके आप कई बड़ी से बड़ी बीमारियों से निजात पा सकते हैं। सर्दियों के मौसम में खुजली के साथ अन्य स्किन संबंधी समस्याओं से निजात पाने के लिए सुबह थोड़ा व्हीट ग्रास जूस जरूर पिएं।

 

जानिए क्यों सर्दियों के मौसम में बढ़ जाता है वजन और कैसे किया जा सकता है कंट्रोल

जानिए क्यों सर्दियों के मौसम में बढ़ जाता है वजन और कैसे किया जा सकता है कंट्रोल

ठंड या जाड़े के मौसम में अक्सर लोग वजन बढ़ जाने की शिकायत करते हैं. वैसे यह सच भी है कि सर्दियों में वजन सबसे ज्यादा बढ़ता है. दरअसल इस मौसम में ठंड के कारण हर कोई गर्मा-गर्म खाना पसंद करता है. इस दौरान ऑयली चीजें भी बहुत ज्यादा खाई जाती है. रजाई के अंदर बैठकर गर्म चाय की प्याली के साथ गर्मागर्म पकौड़े हों या भजिया या फिर गाजर का हलवा या कोई भी तला भुना खाना, कुछ ज्यादा ही स्वादिष्ट लगता है. आम दिनों की अपेक्षा सर्दियों में खाया गया खाना शरीर को भी ज्यादा ही लगता है. यही वजह है कि लोगों का वजन सर्दियों में बढ़ जाता है. हालांकि जाड़े में वजन बढ़ने के कई और कारण भी हैं.


ज्यादा सोना

सर्दी के मौसम में लोग आम दिनों की तुलना में ज्यादा देर तक बिस्तर पर सोते रहते हैं. इसका सीधा असर हमारी बॉडी पर पड़ता है. दरअसल जितना हम सोएंगें उतनी ही हमारी बॉडी आलसी होगी. यानी 8 घंटे से ज्यादा सोने की वजह से हम वेट गेन कर लेते हैं. इसके अलावा सर्दियों के मौसम में हमारा शरीर काम भी ज्यादा नहीं करता है, इस कारण पसीना कम आता है और वजन बढ़ता है.


ज्यादा मसालेदार भोजन करना

सर्दी के मौसम में ठंड से बचने के लिए लोग अक्सर मसालेदार भोजन खाना शुरू कर देते हैं. लेकिन ज्यादा मसालेदार और तलाभुना खाना खाने से वजन बढ़ने लगता है.


सर्दियों में मीठे के सेवन से बढ़ता है वजन

सर्दियों में लोग डाइटिंग वगैरह सब भुलाकर शुगर और कैलोरी से भरी चीजों का सेवन करने लगते हैं. इस दौरान गाजर का हलवा, मूंगदाल का हलवा, गुड से बनी गज्जक, जलेबी, गुलाब जामुन जैसी मिष्ठान काफी स्वादिष्ट लगते हैं. लेकिन इन चीजों में काफी कैलोरी होती है इस कारण सर्दियों में वजन बढ़ जाता है.


एक्सरसाइज न करना

सर्दियों के मौसम में लोग व्यायाम करने से भी कतराने लगते हैं. ठंड की वजह से लोग घर से बाहर निकलने की बजाय रजाई में दुबके रहना ज्यादा पसंद करते हैं. जिसका खामियाजा शरीर को बढ़े हुए वजन के तौर पर भुगतना पड़ता है.


सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर से बढता है वजन

कई रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि सर्दियो के सीजन में सूरज की रोशनी और धूप कम होने से लोगों में थोड़ा अवसाद नजर आता है. इस अवसाद को ही सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर भी कहा जाता है. दरअसल सूरज की रोशनी की कमी का संबंध हॉर्मोंस से होता है जो हमारे मूड को नियंत्रित करता है. अवसाद की वजह से हमारी शारीरिक एक्टिविटी कम हो जाती है नतीजतन वजन बढ़ने लगता है.


इस तरह किया जा सकता है सर्दियों में वजन कंट्रोल


1-सर्दियों में प्रोटीन ब्रेकफास्ट का ही सेवन करें


2- सर्दियों में बाहर नहीं निकलता चाहते हैं तो घर पर ही हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें.


3- ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जो पोषक तत्वों से भरपूर हों.


4- वजन कंट्रोल करना चाहते हैं तो अपनी डायट में फल और सब्जियों को शामिल करना कभी न भूलें.


5- ऐल्कॉहॉल, कार्बोहाईड्रेट और हाई शुगर फूड्स से परहेज ही करें.


6- पर्याप्त नींद लें.


7- सर्दियों में लोग पानी पीना कम कर देते हैं लेकिन इस मौसम में भी ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है और कैलोरी भी बर्न होती है. 

संतरा खाने से होते हैं शरीर को कई फायदे, लेकिन इन लोगों को नहीं करना चाहिए सेवन

संतरा खाने से होते हैं शरीर को कई फायदे, लेकिन इन लोगों को नहीं करना चाहिए सेवन

फल हमारे शरीर को कई फायदे पहुंचाते हैं उनमें संतरा भी शामिल हैं. संतरे में बिटामिन सी पाया जाता है.इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए संतरा काफी असरदार माना जाता है. ऐसे ही संतरे खाने से होने वाले फायदों के बारे में हम आपको बता रहे हैं.


एंटी ऑक्सीडेंट्स
संतरे स्वास्थ्य वर्धक एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. ये एंटी ऑक्सीडेंट्स सेहत को कई तरह से फायदे पहुंचाते हैं. संतरे में मौजूद एस्कॉर्बिक एसिड और बीटा कैरोटीन शरीर में कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद कर सकते हैं. संतरा शरीर से फ्री रेडिकल्स से छुटकारा दिलाने में भी मदद कर सकता है.


ब्लड प्रेशर को रखता है कंट्रोल
संतरे के रोजाना सेवन से आपको बीपी की समस्या होने की आशंका काफी कम हो सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट भी हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों को संतरे का सेवन करने की सलाह देते हैं.


इम्यूनिटी को बनाता है मजबूत
ठंड के मौसम में आम सर्दी, खांसी और जुकाम की शिकायत रहती है. इसके साथ ही कमजोर इम्यून सिस्टम कई संक्रमणों का भी कारण बनता है. संतरे में मौजूद विटामिन सी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है.


कम कैलोरी
संतरे को स्नैक्स वाले फ्रूट्स में शामिल कर अपने कैलोरी इंटेक को कम किया जा सकता है. इससे वजन को कंट्रोल में रखने में काफी मदद मिल सकती है. सुबह ब्रेकफास्ट में एक गिलास संतरे का जूस फायदेमंद हो सकता है.


स्किन के दाग धब्बे करता है दूर
संतरे में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और विटामिन सी आपकी स्किन की हेल्थ के लिए काफी बेहतर माना जाता है. यह आपकी स्किन को होने वाले नुकसान की भी काफी हद तक भरपाई कर सकता है. इसकी मदद से आपकी त्वचा पर मौजूद निशान भी काफी कम हो सकते हैं.


किडनी की पथरी में फायदेमंद
किडनी स्टोन की समस्या होने पर रोजाना संतरे और इसके जूस का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है. संतरे का रस किडनी की पथरी को बाहर निकालने में मददगार माना जाता है. यह शरीर को हाइड्रेट कर किडनी स्टोन की समस्या से राहत दिलाने का एक कारगर घरेलू नुस्खा साबित हो सकता है.


गाठिया में फायदेमंद
संतरा शरीर से यूरिक एसिड को कम कर गठिया के मरीजों को आराम दिला सकता है. यह गठिया में शरीर की सूजन को कम करने में भी मददगार माना जाता है.


पेट की समस्याएं
संतरे के रस को गर्म करके उसमें काली मिर्च और सूंड का रस मिला लें. पेट में गैस, अपच, कब्ज, बदहजमी, सूजन, इंफेक्शन और बदहजमी को दूर करने के लिए इस मिश्रण का सेवन का सेवन काफी लाभकारी हो सकता है.


ये लोग करें संतरे से परहेज

छोटे बच्चों को ज्यादा संतरा खिलाने से उनको पेट दर्द की समस्या हो सकती है.
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्ट फीड कराने वाली महिलाओं को भी कम मात्रा में ही संतरा खाना चाहिए.
हार्ट के मरीजों को संतरे का सेवन कम करना चाहिए.
जिनकी पाचन शक्ति कमजोर है उन्हें संतरा खाने से परहेज करना चाहिए. संतरे में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकता है. 

क्या आपको भी मुंह की बदबू कर रही है शर्मिंदा, तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

क्या आपको भी मुंह की बदबू कर रही है शर्मिंदा, तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

अक्सर देखा जाता हैं कि कुछ लोग अपने दांतों की अच्छे सफाई करते हैं लेकिन उसके बावजूद भी मुंह से दुर्गन्ध आती रहती हैं। जरूरी नहीं हैं कि इसका कारण मुंह कि सफाई ही हो बल्कि यह पेट से जुड़ी बीमारी के कारण भी हो सकता हैं। मुंह से निकलने वाली दुर्गंध के चलते कई बार दूसरों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ जाता हैं। ऐसे में जरूरी हैं कि इसे जड़ से दूर किया जाए। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपके लिए कुछ घरेलू नुस्खें लेकर आए हैं जिनकी मदद से मुंह से आती दुर्गंध की समस्या को दूर किया जा सकता हैं। तो आइये जानते हैं इन नुस्खों के बारे में।

नमक के पानी से करें कुल्ला

मुंह से निकलने वाली दुर्गंध को दूर करने के लिए आप प्राथमिक उपचार के रूप में नमक पानी का कुल्ला कर सकते हैं। नमक में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में मौजूद दुर्गंध के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को मारने के लिए प्रभावी रूप से कार्य करता है और ओरल हेल्थ को मेंटेन बनाने में भी काफी मददगार साबित होता है। इसलिए जब भी आपको मुंह से दुर्गंध आने की समस्या हो तो आप इस घरेलू नुस्खे को ट्राय कर सकते हैं।

नींबू पानी का करें सेवन

मुंह से आने वाली दुर्गंध को दूर करने के लिए नींबू पानी भी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसके लिए एक गिलास पानी में 1 नींबू का रस मिलाएं और फिर इस पानी का सेवन रोज सुबह उठने के बाद करें। इस बात का ध्यान दें कि ब्रश करने से पहले ही इस पानी का सेवन करना है।

भुनी हुई लौंग का करें सेवन

मुंह से आने वाली दुर्गंध को दूर करने के लिए आप दूसरे प्राथमिक उपचार के रूप में भुनी हुई लौंग का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए लौंग को चबाकर खाने के लिए इस्तेमाल करना है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार भी लौंग का सेवन करने के कारण ओरल हेल्थ से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।

 
मोबाइल फोन से भी आप पड़ सकते हैं बीमार! खतरे से बचने के लिए ऐसे करें डिसइंफेक्ट

मोबाइल फोन से भी आप पड़ सकते हैं बीमार! खतरे से बचने के लिए ऐसे करें डिसइंफेक्ट

महामारी ने हमें कुछ अच्छी आदतों जैसे हाथ धोना और खांसते वक्त नाक-मुंह ढंकने को सिखा दिया है. संक्रमण के खतरे से बचने के लिए छूने वाली सतह की सफाई के दौरान भी ज्यादा सचेत कर दिया है. हम सभी सुनिश्चित करते हैं कि घर का हर कोना डिसइंफेक्ट हो. लेकिन, अक्सर हम अपने फोन की टच स्क्रीन को साफ करना भूल जाते हैं.


टॉयलेट सीट से ज्यादा फोन पर रोगाणु


माना जाता है कि ज्यादातर लोग दिन में औसत 96 बार फोन चेक करते हैं. लेकिन सिर्फ मोबाइल ही नहीं है जिसे पकड़ा या हाथों से छुआ जाता है. बल्कि फोन के साथ किराने का थैला, दरवाजा और दूसरी सतह भी संपर्क में आते हैं. जिसमें हजारों रोगाणु और बैक्टीरिया हो सकते हैं. जब आप अपने गंदे हाथों से फोन छूते हैं, रोगाणु स्कीन पर ट्रांसफर हो जाते हैं. यहां तक कि अगर आप फोन को कान और मुंह के पास बात करते हुए ले जाते हैं, तब भी अलग-अलग प्रकार के रोगाणु चिपक जाते हैं और ये आसानी से आपको बीमारी कर सकते हैं.


आपका मोबाइल फोन कितना गंदा है?


ये कहना गलत नहीं होगा कि सबसे ज्यादा गंदे सामानों में से एक आपका फोन है जिसका आपको रोजाना सामना होता है. 2017 में एरिजोना यूनिवर्सिटी के एक शोध के मुताबिक, सेल फोन टॉयलेट सीट के मुकाबले 10 गुना बैक्टीरिया फैलाते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि ज्यादातर लोग फोन की सफाई को नजरअंदाज करते हैं. इसलिए कीटाणु और बैक्टीरिया इकट्ठा होते रहते हैं. लिहाजा, संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए आवश्यक है कि फोन की सतह को बार-बार साफ किया जाए.


मोबाइल को कैसे डिसइंफेक्ट करें?


सतह की सफाई के लिए साबुन और पानी सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं. चूंकि, आप अपने मोबाइल पर पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते, ऐसी स्थिति में अल्कोहल वाइप्स मुफीद रहेगा. इस तरह के वाइप्स फोन की सतह पर मौजूद कीटाणु और बैक्टीरिया को आसानी से मार सकते हैं. लेकिन उसके कुछ नुकसान भी हैं.


अगर आपके फोन की सतह पर तेल लगा हुआ है, तो सतह की पूरी तरह सफाई करना मुश्किल हो जाता है. तेल और अन्य सामग्री की मौजूदगी वाइप्स को रोगाणुओं के सतह से हटाने को मुश्किल बना देता है. अपने फोन की ठीक तरह सफाई करने को सुनिश्चित बनाने के लिए पहले बक्से को हटाएं और कॉटन के कपड़े से फोन और बक्से को साफ करें. फिर उसके बाद अल्कोहल वाइप की मदद से दोनों की ठीक तरह सफाई करें. 

डायबिटीज को खतरनाक स्टेज पर जाने से रोक सकती हैं ये 8 बातें, रखें इनका ध्यान

डायबिटीज को खतरनाक स्टेज पर जाने से रोक सकती हैं ये 8 बातें, रखें इनका ध्यान

डायबिटिक कॉम्प्लीकेशन्स को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है: तीव्र (अचानक) और पुरानी (लॉन्ग टर्म). अक्सर ये देखा गया है कि एक लम्बे वक़्त से चली आ रही डायबिटीज की परेशानी आपके शरीर में कुछ ऐसी कॉम्प्लीकेशन्स पैदा कर देती हैं जो आपके शरीर के एक या अधिक भागों को नुक्सान पहुंचा सकती हैं. ऐसे में आपको डरने या घबराने की ज़रुरत नहीं हैं क्योंकि इसका इलाज संभव है, आपको महज़ उन 8 बातों का ध्यान रखना है जो आपके ऊपर से इस बीमारी के खतरे को कम करने में आपकी मदद कर सकती हैं.


1.एक्सरसाइज करना ज़रूरी
हर रोज थोड़ी बहुत एक्सरसाइज करते रहना आप के स्वास्थ्य के लिए एक बहुत अच्छी आदत है. व्यायाम आपके हृदय संबंधी जोखिमों, कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप के स्तर को कम करने में मदद करता है. साथ ही, व्यायाम वज़न कम करने और तनाव से छुटकारा दिलाने में भी सहायक है. इतना ही नहीं, व्यायाम को डायबिटीज कम करने के लिए भी एक कारगर उपाय माना जाता है.


2. वज़न पर लगाएं लगाम
ज़्यादा वज़न शुगर को बढ़ाने का एक अहम कारण माना जाता है. शुगर के अलावा बात करें तो, अधिक वज़न यानी शरीर में चर्बी का वास, ऐसे में मोटापे के शरीर को कई गंभीर बीमारियों का घर बनने में देर नहीं लगती. इसलिए ये ज़रूरी है कि आप अपना वज़न संतुलित रखें.


3. सही कार्ब्स चुनें
डायबिटीज का मतलब यह नहीं होता कि आपको कार्ब्स को पूरी तरह से काटना है. डायबिटीज में आपको ऐसे कार्बोहाइड्रेट चुनने चाहिये जो शरीर में धीरे-धीरे टूटकर स्थिर ऊर्जा प्रदान करते हैं. इसके लिए आप ताजा फल व सब्जियों को चुन सकते हैं. इसके अलावा मेवे, दाल व अनाज का प्रयोग भी कर सकते हैं.


4. नमक से रखें परहेज
आपको आप को डायबिटीज है तो आप कोशिश करें की जितना हो सके अपने खाने से नमक व चीनी को हटाएं. हो सके तो पूर्ण रूप से नमक का बहिष्कार करें. लेकिन अगर आप नमक के बिना नहीं रह सकते तो केवल काम चलाऊ मात्रा में नमक का प्रयोग करें और वह भी केवल सब्जियों में. आपको बता दें कि, डायबिटीज वाले लोगों को सोडियम का सेवन सामान्य तौर पर प्रति दिन 2,300 मिलीग्राम से कम करना चाहिए.


5. ब्लड शुगर को रोज़ चेक करना न भूलें
आप को रोज़ाना अपनी ब्लड शुगर को मापते रहना चाहिए क्योंकि इससे आप को पता लगता रहेगा कि आप की शुगर कब बढ़ती है और कब घटती है. अगर कुछ चीज़ खाने से अगले दिन आप की शुगर बढ़ जाती है तो बेहतर होगा कि आप उस चीज़ का सेवन करने से बचें. इससे आप को क्या खाना है और क्या नहीं , इसका पता चलता रहेगा.


6. स्ट्रेस से रहें दूर
अगर आप को बिना वजह स्ट्रेस या एंग्जाइटी रहती है तो आप इसे कम करने की कोशिश करें. इसके लिए आप योगा व मैडिटेशन का रास्ता अपना सकते हैं. जब आपको डायबिटीज होती है, तो तनाव आपके रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकता है. इसलिए किसी भी तरह के शारीरिक या मानसिक तनाव से बचना या निपटना ही बेहतर है.


7. धूम्रपान न करें
डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी में धूम्रपान का सेवन बेहद ही घातक और जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि डायबिटीज में धूम्रपान आपके रक्तचाप और स्ट्रोक, दिल के दौरे, तंत्रिका क्षति और गुर्दे की बीमारी के जोखिम को कई गुना ज़्यादा तक बढ़ा देता है. इसके अलावा, ये आपके दिलऔर फेफड़ों के लिए भी बहुत हानिकारक है. धूम्रपान छोड़ना आपके लिए ज़रूरी ही नहीं सही भी है. इसका त्याग आपको नई और स्वस्थ ज़िन्दगी की ओर ले जा सकता है.


8. नींद का रखें पूरा ख्याल
बहुत अधिक या बहुत कम नींद आपकी आपकी भूख बढाने का काम करती है जिसके कारण आप उच्च कार्ब वाले खाद्य पदार्थो का सेवन ज़्यादा करने लगते हैं जो वज़न के साथ साथ हृदय रोगों को बढ़ाने में बहुत सहायक है. इसलिए रात में सात या आठ घंटे की नींद लें. अगर आप स्लीप एपनिया से ग्रसित हैं, तो इसका इलाज करवाने से आपकी नींद में सुधार हो सकता है और आपके ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है. 

ठंडी में फटी एड़ियों की समस्या से पाएं निजात, अपनाये ये 5 टिप्स

ठंडी में फटी एड़ियों की समस्या से पाएं निजात, अपनाये ये 5 टिप्स

सर्दियों के दिनों में एड़ियों की फटने की समस्या लोगों को काफी परेशान करती है। ऐसे में यदि सही समय पर इसको ठीक नहीं किया गया तो फटी एड़ियों में दरारों के बढ़ने से कई बार सूजन और चलने में परेशानी भी होने लगती हैं।

यदि आप इस समस्या से बचना चाहते है, तो आप इन 5 टिप्स को जरूर फॉलो करें।
1 पेट्रोलियम जैली का प्रयोग इसका सबसे आसान तरीका है। इसके लिए डेढ़ चम्मच वैसलीन में एक छोटा चम्मच बोरिक पावडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और इसे रात को सोते समय फटी एड़ियों पर अच्छी तरह से लगा लें, ताकि रातभर यह असर कर पाए। कुछ ही दिनों में फटी एड़ियां फिर से भरने लगेंगी।

2 अमचूर का तेल, फटी एड़ियों के इलाज के लिए रामबाण औषधी है। यह गाढ़ा होता है जिसे पिघलाकर आप रात में एड़ियों पर लगाएं और सुबह धो लें। कुछ ही दिनों में एड़ियां बिल्कुल चिकनी हो जाएंगी।

3 अगर एड़ियां ज्यादा फटी हुई हों तो मैथिलेटिड स्पिरिट में रुई के फाहे को भिगोकर फटी एड़ियों पर रखें। ऐसा दिन में तीन-चार बार करें, इससे एड़ियां ठीक होने लगेंगी। लेकिन एड़ियों को धूल-मिट्टी से बचाना बहुत जरूरी है, इस बात का ध्यान रखें।

4 गुनगुने पानी में थोड़ा शैंपू, एक चम्मच सोड और कुछ बूंदें डेटॉल की डालकर मिला लें। इस पानी में पैरों को 10 मिनट तक भिगोकर रखें। त्वचा फूलने पर मैथिलेटिड स्पिरिट लगाकर एड़ियों को प्यूमिक स्टोन या झांवे से रगड़कर साफ कर लें। इससे एड़ियों कीमृत त्वचा साफ हो जाएगी। फिर साफ तौलिए से पोंछकर गुनगुने जैतून या नारियल के तेल से मालिश करें।

5 पैरों को साफ व खूबसूरत बनाए रखने के लिए पैडिक्योर अवश्य कराएं। यह पैरों के नाखून, एड़ी व तलवों की सफाई का बेहतर तरीका है, जिसे नियमित रूप से कराने पर यह समस्या कम हो जाएगी। इसे आप खुद घर पर भी कर सकती हैं या फिर ब्यूटी स्पेशलिस्ट से ही करवाना मुनासिब होगा।

 

मिट्टी पर नंगे पांव टहलना आपकी सेहत के लिए है फायदेमंद, जानिए कैसे पहुंचता है शरीर को फायदा?

मिट्टी पर नंगे पांव टहलना आपकी सेहत के लिए है फायदेमंद, जानिए कैसे पहुंचता है शरीर को फायदा?

क्या कभी आपने सोचा है हरे-भरे बाग, पहाड़ी इलाके या समुद्र किनारे चलना क्यों अच्छा लगता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि आपकी निकटता प्रकृति के साथ होती है. कहा जाता है कि जितना करीब आप प्रकृति के साथ होंगे, उतना ही ज्यादा खुश और स्वस्थ होंगे. लेकिन, हमारी आधुनिक जीवन शैली इस तरह के संपर्क से अलग करती है.


सभी जीवित प्राणी अपना जुड़ाव जमीन के साथ रखते हैं. जमीन या साफ घास पर नंगे पांव टहलने की आदत आपको प्रकृति के साथ जोड़ने में मदद करती है. मगर इसका ये मतलब नहीं कि जमीन पर सोया जाए. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि प्रकृति और इंसानों के बीच अलगाव शारीरिक शिथिलता और रोग का प्रमुख सहयोगी होता है.


ब्लड प्रेशर कम करता है


जमीन पर नंगे पांव टहलने से हमें ताजगी, शांति और सुरक्षा का एहसास मिलता है. इसलिए, उसका ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. प्राकृतिक चिकित्सा में ब्लड प्रेशर को सामान्य करने के लिए 10-15 मिनट पैदल चलने की सलाह दी जाती है.


सूजन और दर्द कम करता है


जमीन के पास खास विद्युत शक्ति होती है. ये जमीन पर नंगे पांव टहलनेवाले को महत्वपूर्ण बल देता है. विज्ञान के मुताबिक, नंगे पांव टहलने से पृथ्वी के निगेटिव आयन के अवशोषण में मदद मिलती है और सीधा शारीरिक संपर्क स्थापित होने की वजह से जमीन की सतह से इलेक्ट्रॉन की विशाल आपूर्ति होता है.


इम्यूनिटी, आंत के स्वास्थ्य को बढ़ाता है


खुद को मिट्टी और जमीन के संपर्क में लाने के फायदे हो सकते हैं क्योंकि जमीन में पाए जानेवाले शक्तिशाली सूक्ष्म जीव प्राकृतिक तरीके से इम्यूनिटी बनाने में मदद करते हैं. सूक्ष्म जीव हमारे शरीर में त्वचा और नाखुनों के जरिए दाखिल होते हैं. शरीर में पहुंचकर ये हमारे आंत की अच्छे बैक्टीरिया को खुराक मुहैया कराते हैं.


आंतों में उपस्थित माइक्रोफ्लोरा सूक्ष्मजीवी बैक्टीरिया के कारण बनती है और ये इम्यून सिस्टम को बढ़ाकर हमें ज्यादा मजबूत और ज्यादा स्वस्थ बनाता है. अगर आपके पास प्रकृति तक पहुंचने की सुविधा हो, तो आदत को अपनाएं वरना जब कभी मौका मिले ते एक बार जरूर नंगे पांव पैदल चलें.

 

वज़न घटाने में बेजोड़ जीरा और धनिया, औषधीय गुणों से है भरपूर, जानिये कौन है ज़्यादा फायदेमंद

वज़न घटाने में बेजोड़ जीरा और धनिया, औषधीय गुणों से है भरपूर, जानिये कौन है ज़्यादा फायदेमंद

जीरा और धनिया दोनों ही खाने का जायका बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं. पर आयुर्वेद की मानें, तो ये दोनों कई औषधीय गुणों की भरमार हैं. जीरे और धनिये का उपयोग खाना बनाने में जितना असरदार है उससे कही ज़्यादा फायदेमंद है इनका पानी जिसे आयुर्वेद में पचान तंत्र को ठीक रखने का सबसे सटीक उपाय बताया गया है. ये तो सिर्फ एक झलक भर है आइये आज आपको इन दोनों की विशेषताओं के साथ साथ कौन है वज़न घटाने में ज़्यादा बेहतर- इसकी जानकारी भी विस्तार से देते हैं.


जीरे और धनिये के चमत्कारी गुण
एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, जहां एक तरफ जीरे में डाइजेस्टिव एंजाइम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो पाचन क्रिया को तेज़ करने का काम करता है. जीरे के सेवन से आहार को पचाने और मल के ज़रिये शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है. वहीं दूसरी ओर धनिया न सिर्फ पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है, बल्कि यह आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाने में भी लाभकारी माना जाता है.


जीरा और धनिया- वज़न घटाने में कौन ज़्यादा फायदेमंद


1.फैट बर्न करने के लिए
जीरा और धनिया दोनों ही मसाले अपने पाचन गुणों के लिए जाने जाते हैं. यहाँ तक कि जीरे का पानी पाचन के लिए ज़्यादा बेहतर माना जाता है क्योंकि ये आपके आंत के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हुए फैट लॉस में मदद करता है और पाचन में सुधार करता है. हालांकि धनिया भी पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है पर ये जीरे की तरह फैट बर्न नहीं कर पाता.


2.शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए
सुबह-सुबह धनिये और जीरे का पानी पीना आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को छोड़ने में मदद करता है. इसके अलावा, इन दोनों में एंटीऑक्सीडेंट तत्व उच्च मात्रा में पाया जाता है. आप चाहें, तो इन दोनों को एक साथ मिलाकर पाउडर बना कर इस्तेमाल कर सकते हैं.


3.कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए
धनिया न सिर्फ खाने को महक देता है बल्कि यह आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में फायदेमंद होता है. जिन लोगों का वज़न तेजी से बढ़ रहा है, उनके लिए ज़रूरी है कि वो अपने कोलेस्ट्रॉल को ठीक रखें. दरअसल, मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करना उन्हें कई सारी बीमारियों से बचा सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में धनिये के बीजों को उबालकर उसका पानी पीना कारगार उपाय साबित हो सकता है.


4.भूख कम करने के लिए
जीरे का इस्तेमाल आपकी भूख कम करने में मदद करता है क्योंकि यह आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखता है जिसकी वजह से ये आपके लिए मोटापा कम करने में भी सहायक है. साथ ही, जीरा शरीर में उन हेल्दी इंजाइम्स को बढ़ावा देता है, जो कि खाना पचाने में मदद करते हैं. इस तरह अगर आप खाने में जीरा पीस कर इस्तेमाल करें, तो खाना आराम से पचेगा और ये शरीरे में फैट के संचय को भी रोकेगा.


आपने देखा कि विभिन्न तरीकों से जीरा और धनिया वज़न घटाने के लिए फायदेमंद हैं. पर इन दोनों में से सबसे ज़्यादा फायदेमंद चीज़ की बात करें, तो वो जीरा है. जीरा आपके शरीर में ग्लूकोज और खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है. साथ ही, यह वसा और अन्य पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में भी असरदार है, जो कि मेटाबॉलिज्म को ठीक रखता है. तो अगर आपको तेज़ी से अपना वज़न घटाना है, तो रोज़ सुबह जीरे का पानी ज़रूर पियें. 

सीने के दर्द को नज़रंदाज़ करना पड़ सकता है बेहद भारी, जानें लक्षण और बचाव

सीने के दर्द को नज़रंदाज़ करना पड़ सकता है बेहद भारी, जानें लक्षण और बचाव

सीने में दर्द के कई कारण होते हैं, जैसे कि- मांसपेशियों में दर्द, हड्डी में दर्द, एसिड-रिफ्लक्स, एनजाइना, दिल का दौरा आदि. इनमें से कुछ समस्याएं मामूली हैं तो कुछ गंभीर. लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि ज़्यादातर मरीजों को सीने में उठने वाले दर्द का कारण पता ही नहीं चलता. कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो सीने में सुई की तरह चुभते हैं तो कुछ मंद-मंद होते हैं. ऐसे में इन्हें नज़रंदाज़ करना गलत है. इसीलिए आज हम आपको इस समस्या के बारे में विस्तार से बताते हुए, आपके साथ इसके लक्षणों और इससे बचाव की जानकारी साझा करेंगे.


किस तरह के दर्द की अनदेखी न करें
जब कभी आपको सीने के बीच में यानि सेंटर में दर्द हो या भारीपन महसूस हो तो समझ जाइए कि ये दर्द गंभीर है. इसके आलावा कंधे, हाथ, जबड़े या पीठ में झनझनाहट होना, पसीना आना, थकावट से होने वाले दर्द आदि पर ध्यान दिया जाना भी ज़रूरी है. इन लक्षणों को नज़रंदाज़ करने से आपको गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है.


दर्द से राहत पाने के उपाय
अगर घरेलू उपचारों की बात करें तो हल्का खाना खाना ज़्यादा फायदेमंद होता है. इसके अलावा यदि कारण मस्कुलोस्केलेटल है, तो आस-पास किसी मेडिकल स्टोर से पेनकिलर ले सकते हैं. इससे आपके दर्द में आराम मिल जाएगा. वहीं अगर एसिड-रिफ्लक्स आपके दर्द का कारण है, तो एंटासिड आपके काम आ सकती है. ध्यान दें कि, अगर ये दर्द कार्डियक है, तो जीभ के नीचे नाइट्रेट जैसी दवा रखें, इसकी मदद से सीने में दर्द से राहत मिलेगी.


दर्द का कारण
बता दें कि, सीने में दर्द के कई कारण होते हैं. यह मस्कुलोस्केलेटल हो सकता है, जो त्वचा, मांसपेशियों, हड्डी या जोड़ों से पैदा होता है. इसके अलावा, ये एसिड-रिफ्लक्स हो सकता है जो फूड-पाइप या पेट में बनने वाले एसिड से पैदा होता है. सीने में दर्द फेफड़े से भी उत्पन्न हो सकता है. दर्द का एक कारण धमनियां भी हैं. मतलब सीने में दर्द हृदय की धमनियों में रुकावट आने से भी हो सकता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों में रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है.


सीने में दर्द के लक्षण
- पसीना आना
- सांस लेने में तकलीफ
- धड़कन कम होना
- सिर में मंद दर्द होना
- डकार लेना
- उल्टी होना

 

वेदांता-बालको की परियोजना `आरोग्य’ से आई स्वास्थ्य-स्वच्छता के प्रति जागरूकता

वेदांता-बालको की परियोजना `आरोग्य’ से आई स्वास्थ्य-स्वच्छता के प्रति जागरूकता

कोरबा। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने सामुदायिक विकास परियोजना ‘आरोग्य’ के अंतर्गत अपने संयंत्र के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। माह अक्टूबर में लगभग 5000 नागरिको को सैनेटाइज़ेशन और सुरक्षा किट के अंतर्गत साबुन, मास्क और सैनिटाइजर वितरित किए गए। नागरिकों को वैश्विक महामारी से सुरक्षा के प्रति अनेक आयामों से परिचित कराया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता वेदांता-बालको के सामुदायिक विकास कार्यों में सर्वोपरि है। वेदांता-बालको की आरोग्य परियोजना के अंतर्गत दो वेदांत ग्रामीण चिकित्सालय संचालित हैं। इन चिकित्सालयों के संचालन का उद्देश्य ग्रामीणों को झोला छाप नीम-हकीमों से मुक्ति दिलाना है। चलित चिकित्सा शिविर, मौसमी बीमारियों से बचाव और जागरूकता शिविर, मातृ-शिशु स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ समन्वयन, एचआईव्ही एड्स के प्रति जागरूकता आदि अनेक ऐसे कार्यक्रम हैं जिनके माध्यम से ग्रामीणों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है। सैनिटेशन और सुरक्षा किट के वितरण पर ग्रामीणों ने बालको प्रबंधन के आभार जताया है।
कोविड-19 महामारी की रोकथाम की दिशा में वेदांता-बालको ने जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और समन्वयन में कोविड अस्पताल की स्थापना में मदद की। मास्क और पीपीई निर्माण के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों की सदस्यों के लिए आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए। जन प्रतिनिधियों के सहयोग से जरूरतमंदों को सूखा राशन और तैयार भोजन उपलब्ध कराए गए। राज्य और जिला प्रशासन ने कोरोना वाइरस के प्रति जागरूकता की दिशा में वेदांता-बालको संचालित कार्यों की खूब प्रशंसा की है।
बालको की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, आधारभूत संरचना विकास, महिला सशक्तिकरण, जैव-निवेश, आजीविका आदि क्षेत्रों में परियोजनाएं क्रियान्वित हैं। परियोजनाओं के दायरे में छत्तीसगढ़ के लगभग 1.50 लाख जरूरतमंद शामिल हैं। 300 स्व सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 4000 महिलाओं के स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण में मदद मिल रही है। लगभग 500 एकड़ भूमि पर किसान आधुनिक तकनीकों की मदद से खेती कर रहे हैं। वेदांता स्किल्स स्कूल ने छत्तीसगढ़ के लगभग 9000 जरूरतमंद युवाओं को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर स्वावलंबी बनने में मदद की है।
 

दांतों के पीलेपन से पाएं छुटकारा अपनाएं ये आसान उपाय

दांतों के पीलेपन से पाएं छुटकारा अपनाएं ये आसान उपाय

क्या आपके दांतों में भी पीलेपन की समस्या रहती है, जिस वजह से किसी से बात करते हुए आपके आत्मविश्वास में कमी आती है? अगर हां, तो जरूरी है कि इस समस्या से निजात पाएं। हम आपके लिए लाए हैं दांतों के पीलेपन से छूटकारा पाने का कारगर नुस्खा। आइए जानें –
सेब के सिरके के बारे में आपने जरूर सुना होगा। वैसे तो इसके कई आश्चर्यजनक फायदे है, लेकिन फिलहाल बात करते हैं कि कैसे ये आपके दांतों का पीलापन हटा सकता है।

* सेब का सिरका गहराई और कोमलता के साथ आपके दांतों की आंतरिक सफाई करने में सक्षम होता है।
* इससे आपके अम्लीयता होने पर भी पीएच की समानता बनी रहती है, और दांत पहले से अधि‍क साफ, सफेद और चमकदार दिखाई देते हैं।
* इतना ही नहीं, यह आपके मसूढ़ों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।

* इस सिरके से अपने दांत चमकाने के लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। बस लगभग एक कप पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका लें और अपने टूथब्रश की सहायता से दांतों पर इससे तब तक ब्रश करें, जब तक आपके दांत पूरी तरह से साफ न हो जाएं। दांतों के दाग हटने के साथ ही धीरे-धीरे आपके दांतों पर चमक भी आ जाएगी।

लेकिन इसे इस्तेमाल करने से पहले आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा। जानिए कौन-सी हैं वे बातें -
1 सेब का सिरका इस्तेमाल करते समय बॉटल को अच्छी तरह से हिलाएं, तभी इस्तेमाल करें।

2 बगैर पानी में घोले इसका इस्तेमाल करना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि यह प्राकृतिक अम्ल है।

3 इसका अत्यधि‍क प्रयोग करने से परहेज करें, साथ ही दिन में एक बार से ज्यादा इसका इस्तेमाल न करें। अन्यथा यह आपके दांतों की सतह को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

क्यों चर्चा में चीया सीड्स है, जानिए इसके फायदे और नुकसान

क्यों चर्चा में चीया सीड्स है, जानिए इसके फायदे और नुकसान

चीया सीड्स विश्व भर में लोगो के द्वारा उपयोग किया जाने वाला ऊर्जा का एक प्राचीन स्त्रोत है।  यह पोषक तत्वों का भंडार है। जिसमे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन C, विटामिन E, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैग्नीज, फॉस्फोरस, पोटैशियम, आयरन, जिंक इत्यादि पोषक तत्व आदि मौजूद होते है। जो कि हमारे शरीर और मस्तिष्क के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। चीया सीड्स छोटे छोटे काले दाने जैसे होते है जो कि साल्विया हिस्पैनिका नाम के पौधे से प्राप्त होते है। वैसे तो चीया सीड्स बहुत लंबे समय में उपयोग में लायी जाती है लेकिन पिछले कुछ सालों से वे लोग, जो कि हेल्थ कॉन्शियस है वे इसका ज्यादा उपयोग कर रहे है।
चीया सीड्स खाने के फायदे क्या है ?
चीया सीड्स के बारे में जानने के बाद अब बात करते है चिया सीड्स के फायदे की chia seeds benefits in hindi. इसके कई सारे आश्चर्यजनक फायदे देखने को मिलते है जिस वजह से इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। चीया सीड्स एक प्राकृतिक औषधी है तो चलिए देखते है कि chia seeds benefits क्या क्या है -
1. Chia seeds for weight loss - वजन कम करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमे पाए जाने वाले सॉल्युबल फाइबर्स पानी की अधिक मात्रा को खुद में संचित करे हुए होते है जिसे वे खाये जाने पर हमारे पेट मे मुक्त कर देते है। जिस वजह से हमे पेट के भरे होने का एहसास होता है और यह खाने के अवशोषण को भी कम करता है। इस प्रकार चीया सीड्स को अपनी डाइट में शामिल करके आप न सिर्फ वज़न घटाने का लाभ ले सकते हैं, बल्कि अपने शरीर को हेल्दी भी बना सकते हैं।

2. Chia seeds हृदय से सम्बन्धित बीमारियों से भी बचाव करने में सहायक होते हैं। चूंकि इसमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो कि हृदय के लिए फायदेमंद होते हैं। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने का काम करता है।

3. यह हमारे शरीर के ब्लड शुगर के लेवल को संतुलित रखने का कार्य भी करता है। यदि आपको टाइप 2 डायबिटीज है, तो यह आगे चलकर और भी गंभीर रूप धारण कर सकता है। अगर आप प्रतिदिन चीया सीड्स का सेवन करते हैं, तो शरीर में इंसुलिन की सेंसिविटी को बढ़ाता है। ब्लड शुगर लगातार बढ़े रहने से हृदय संबंधी बीमारियों का भी खतरा बना रहता है।

4. शरीर में होने वाले रैशेस, सूजन, जलन एवं प्रदाह इत्यादि समस्याओं के निदान में भी चीया सीड्स मददगार साबित होता है। ये स्किन प्रॉब्लम किसी इंफेक्शन या चोट की वजह से होते हैं। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या आगे चलकर खतरनाक हो सकती है।

5. चीया सीड्स omega 3 फैटी एसिड और न्यूरो प्रोटेक्टिव एन्टीओक्सिडेंट से परिपूर्ण होती है जो मस्तिष्क में स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण करती है। यह स्वस्थ कोशिकाएं हमारे मस्तिष्क में पोषक तत्वों की पर्याप्त आदान प्रदान करती है और साथ ही नर्व सिस्टम की प्रक्रिया को तीव्र करती है। जिसकी वजह से हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

6. वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली में प्रत्येक व्यक्ति इतना अधिक व्यस्त हो चुका है कि उसकी दिनचर्या पूरी तरह से डगमगा गयी है। घर के खाने की जगह आजकल बाहर के खाने जैसे फ़ास्ट फूड्स,जंक फूड्स,तेलीय खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है जिसका दुष्प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस दुष्प्रभाव को कम करने के लिए भी हम प्राकृतिक उपायों के बदले केमिकल युक्त दवाइयों का सेवन कर रहे है जो कि किसी न किसी तरह से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा रहे है। चीया सीड्स में ऐसे पोषक तत्व पाये जाते हैं जो कि हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते है। माया सभ्यता के अनुसार चीया शब्द का तात्पर्य "शक्ति" से है। प्राचीन समय से ही ऊर्जा की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए चिया सीड्स का सेवन किया जाता था। मैक्सिकन Tarahumara प्रजाति के धावक भी लम्बे दौड़ से पूर्व चिया सीड्स को अन्य सामग्रियों के साथ मिलाकर जूस बनाकर पीते थे और ऐसा कहा जाता हैं कि वे इस जूस को पी कर 100 मील से भी ज्यादा दूर तक सफर करते थे।

7. चीया सीड्स का प्रयोग केक की बेकिंग के लिए अंडे के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। चीया सीड्स के पाउडर (पिसा हुआ चिया सीड्स) को कुछ देर के लिए पानी में भिगो दिया जाए तो यह जैल बन जाता है और इस जेल को केक में अंडे के स्थान पर उपयोग में लाया जा सकता है। किसी बाउल में 1 चम्मच पिसा हुआ चीया सीड्स और 3 चम्मच पानी डालकर अच्छी तरह हिला दें अब इस मिश्रण को 5-10 मिनट के लिए भीगने दें। अब जो जेल तैयार होगा वह 1अंडे के बेहतरीन विकल्प के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। अगर आपको ज़्यादा अंडे का विकल्प चाहिए तो उपरोक्त सामग्री की मात्रा बढ़ा लें।

8. हर कोई अपनी उम्र से कम दिखना चाहता है हम अपने बढ़ती उम्र को रोक तो सकते नही किंतु हेल्दी फूड्स के द्वारा खुद को स्वस्थ और healthy जरूर रख सकते हैं। Chia seeds में भरपूर मात्रा में एन्टी ओक्सिडेंट पाये जाते हैं जो कि हमारे स्किन को रोज के धूल धुँए इत्यादि से होने वाले स्किन प्रॉब्लम से सुरक्षित रखते है।

9. आजकल बच्चे और बड़ों सभी मे आमतौर पर गलत खानपान की वजह से जोड़ो में दर्द होने लगता है जिसका प्रमुख कारण भोजन में कैल्शियम की कमी का होना होता है। chia सीड्स में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, अगर हम इसे अपने रेगुलर डाइट में शामिल करें तो इससे हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम प्राप्त होगा तथा हम हड्डियों के जोड़ो से सम्बंधित विभिन्न बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख पाएंगे ।

10. पिछले कुछ सालों से कैंसर एक ऐसी जटिल बीमारी बनी हुई है जो कि लाइलाज है। chia seeds में पाए जाने वाले गुणों की वजह से यह सर्वाइकल और स्तन कैंसर से बचाव करने में सहायक होता है। 2013 में मॉलिक्यूलर बायोकेमिस्ट्री पर हुए एक अध्ययन के अनुसार चिया बीज में अल्फा लिपोइक एसिड पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है जो कि इन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को सीमित करने का काम करता है।यह गुण chia seeds को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।

11.व्यस्त दिनचर्या की वजह से आज के समय मे लोग बमुश्किल ही समय से भोजन ले पाते है। ऐसी स्थिति में भोजन ग्रहण करने के बाद टहलना तो दूर की बात है जबकि पाचन क्रिया को सुचारू रखने के लिए भोजन के बाद कुछ कदम टहलना अत्यावश्यक होता है। इन परिस्थितियों के कारण पाचन प्रणाली को सुचारू करने के लिए चीया सीड्स का सेवन करना लाभदायक साबित हो सकता है। चीया सीड्स में प्रचुर मात्रा में फाइबर्स पाये जाते है जो कि पाचन क्रिया को संतुलित करने का काम करते है। इससे हमारे शरीर के इन्सुलिन का लेवल नियंत्रित बना रहता है।

12. Chia seeds benefits में एक फायदा यह भी है कि इसका प्रयोग केक की बेकिंग के लिए अंडे के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। चिया सीड्स के पाउडर (पिसा हुआ चिया सीड्स) को कुछ देर के लिए पानी में भिगो दिया जाए तो यह जैल बन जाता है और इस जेल को केक में अंडे के स्थान पर उपयोग में लाया जा सकता है। किसी बाउल में 1 चम्मच पिसा हुआ चिया सीड्स और 3 चम्मच पानी डालकर अच्छी तरह हिला दें अब इस मिश्रण को 5-10 मिनट के लिए भीगने दें। अब जो जेल तैयार होगा वह अंडे के बेहतरीन विकल्प के रूप में प्रयोग किया जा सकताहै। अगर आपको ज़्यादा अंडे का विकल्प चाहिए तो उपरोक्त सामग्री की मात्रा बढ़ा लें।
13. Chia seeds हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके सेवन से शरीर में जो भी विषैले तत्त्व मौजूद होते हैं, वे बाहर निकल जाते हैं। यह शरीर के लिए एक वाशिंग पाउडर की तरह काम करता है, जो की सारे दूषित पदार्थों को बाहर करके, बॉडी को विटामिन एवं मिनरल से भर देता है।

14. चीया सीड्स आँखों से संबंधित समस्याओं में भी कारगर होता है, क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो कि आँखों के सूखेपन को दूर करता है, आँखों की रोशनी बढ़ाता है।

15. युवाओं में बॉडी बिल्डिंग का क्रेज़ इन दिनों सर चढ़कर बोल रहा है, इसके लिए वे विभिन्न प्रकार की डाइट अपनाते हैं, एक्सरसाइज करते हैं, जिम में कड़ी मेहनत करते हैं। इन सब के अलावा अगर आप चीया सीड्स को भी अपनी रेगुलर डाइट में शामिल कर लें तो आपको चीया सीड्स के बेनिफिट्स दिखने को मिलेंगे । एक गिलास पानी में इसके कुछ बीज भिगोकर आप ट्रेनिंग से पहले पी लें, तो आपके शरीर को हाइड्रेट रखेगा। इसमें मौजूद फाइबर बॉडी को एनर्जी प्रदान करते हैं।
चीया सीड्स को ज़्यादातर भिगोकर ही खाया जाता है, अगर आप इसे बिना भिगोये भी खाते हैं, तो किसी प्रकार का नुकसान नहीं है, लेकिन इसका अच्छी तरह लाभ हमें तभी मिल सकता है , जब इसका इस्तेमाल भिगोकर किया जाए।
चीया सीड्स खाने के नुकसान
चीया सीड्स अगर सही तरीके से व संतुलित मात्रा में प्रयोग किया जाए तो, फायदेमंद होता है, किन्तु यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में किया गया तो, कई प्रकार के साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं ,तो चलिए देखते है
1.चीया बीज में रक्त को प्राकृतिक रूप से पतला करने की क्षमता होती है।यदि आपकी कोई सर्जरी, या किसी चोट सम्बंधित इलाज चल रही है तो आपको चीया बीज के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि पतले रक्त की स्कन्दन क्षमता भी कम होती है जिसके कारण ज्यादा रक्त स्त्राव होने का खतरा बना रहता है।

2.यदि आपको किसी किस्म के डॉयफूड्स, नट्स, या बिज के सेवन से एलर्जी होने की शिकायत है तो हो सकता है कि आपको चीया सीड्स के सेवन से भी एलर्जी की समस्या उतपन्न हो सकती है। जिसमे त्वचा में खुजली, जलन, रैशेस, आंखों में पानी आने की समस्या या स्किन से सम्बंधित अन्य प्रकार की समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है ।

3. गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए बेहतर है कि वे चीया सीड्स का सेवन न करें।

4.चीया सीड्स के सेवन करते वक्त आपको इसके नमी का ध्यान रखना जरूरी है।इसे आप बिना भिगाये या भुंज कर खाने से बचें क्योंकि इनमें पानी को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है।यह अपने वजन से 27 गुना अधिक पानी की मात्रा को सोखने की क्षमता रखते है।इन्हें सूखा खाने पर ये हमारे ग्रास नली,मुख कोष आदि को सूखा कर सकते है जिससे हमें दम घुटने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

5. चीया सीड्स के अधिक सेवन से पेट से सम्बंधित विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियों का सामना भी करना पड़ सकता है।जैसे- कब्ज, दस्त, पेट दर्द,पेट ऐंठना इत्यादि। यरह सारी समस्याएं आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकती है।इसलिए बेहतर होगा कि आप ऐसी स्थिति आने पर अपने चिकित्सक से तत्काल सम्पर्क करें ।
चीया सीड्स को कैसे खाएं
चीया सीड्स के फायदे और नुकसान के बारे में तो हमने जान लिया है, अब बात करते है कि चीया सीड्स को कैसे इस्तेमाल किया जाता है ? वैसे तो चीया सीड्स को ज़्यादातर भिगोकर ही खाया जाता है, अगर आप इसे बिना भिगोये भी खाते हैं, तो किसी प्रकार का नुकसान नहीं है, लेकिन इसका अच्छी तरह लाभ हमें तभी मिल सकता है , जब इसका इस्तेमाल भिगोकर किया जाए।आइये अब जानते है कि इसे खाया किस प्रकार जाए।
• आप चीया सीड्स को बिना भिगोये डायरेक्ट सूखा भी खा सकते हैं और एनर्जी प्राप्त कर सकते हैं । इसे सुखा ही दही, ओट्स में भी डालकर खाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे सूखा खाने से यह हमारे दांतों से चिपक भी सकता है। हम इसे सूखा खा तो अवश्य सकते हैं, किंतु इसके बाद भरपूर मात्रा में पानी पियें, क्योंकि इसकी तासीर होती है, ज़्यादा पानी सोखने की।
• चीया सीड्स खाने का दूसरा तरीका है, इसे भिगोकर खाना। इस तरीके से खाने से न सिर्फ ये आसानी से पचता है, बल्कि पोषक तत्व भी ज़्यादा मात्रा में मिलते हैं।
• चीया सीड्स को ग्राइंडर में पीसकर भी इसका इस्तेमाल मफिन्स, ब्रेड, पास्ता इत्यादि में किया जाता है।
चीया सीड्स का जूस बनाने का तरीका
पानी के साथ :-
चीया सीड्स को पानी में भिगोना है, लेकिन एक अनुपात में, और वह अनुपात है, 1:10 । इस अनुपात में इसे पानी में आधे घण्टे से लेकर लगभग 1.30-2 घंटे तक भिगोने के बाद इस्तेमाल में लाया जा सकता है। आधा या एक चम्मच चीया सीड्स को 1 कप पानी में भिगोकर भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। चीया सीड्स के भीगे हुए इस जूस को आप चाहें तो 4- 5 दिन तक फ्रिज में रखकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
दूध के साथ :-
चीया सीड्स को दूध में भी डालकर पुडिंग की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। और इसे दूध में डालकर लाजवाब शर्बत भी तैयार किया जा सकता है।