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क्या आपको भी आदत है खाली पेट जूस पीने की, तो हो जाइये सावधान, आप पड़ सकते हैं मुसीबत में, जाने कैसे

क्या आपको भी आदत है खाली पेट जूस पीने की, तो हो जाइये सावधान, आप पड़ सकते हैं मुसीबत में, जाने कैसे

लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए कई प्रकार के तरीके अपनाते हैं. अपनी डाइट को बदलते हैं तो कुछ अपने भोजन में हेल्दी फूड लेने की कोशिश करते हैं. आपने देखा होगा कि कुछ लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए सुबह-सुबह जूस पीते है लेकिन क्या आप इससे होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में जानते हैं?

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ताजा फलों का जूस पीना लाभदायक माना जाता है क्योंकि फलों में शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसलिए लोग सुबह जूस पीकर दिन की शुरुआत करते हैं लेकिन खाली पेट जूस पीना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. हम आपको बताते हैं कि आपको कौन से फलों का जूस खाली पेट नहीं पीना है.

खट्टे फलों का जूस
रिपोर्ट्स के अनुसार खट्टे फलों का जूस पीने से आपके शरीर को नुकसान हो सकता है. जैसे संतरा, मौसमी, अंगूर या नींबू का जूस खाली पेट पीने से आपको तकलीफ हो सकती है क्योंकि इन फलों में साइट्रस की मात्रा होती है. इससे आपको एसिडिटी की शिकायत हो सकती है. हालांकि यह सभी लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं है.

ठंडा जूस
इसके अलावा आप सुबह के वक्त खाली पेट में ठंडा जूस बिल्कुल न पीएं क्योंकि सुबह-सुबह गुनगुने पानी का सेवन करने से शरीर को फायदा पहुंचता है. सुबह ठंडा जूस पीने से आपके म्यूकस मेम्ब्रेन को नुकसान हो सकता है. जिससे पाचन तंत्र में समस्या होने का खतरा रहता है. इसलिए आप सुबह जूस पीने की आदत को बदल लें. आप खाना खाने के बाद जूस को अपनी डाइट में शामिल कर लें.

 

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

 Health Tips : स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकता है गाजर का अधिक सेवन

Health Tips : स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकता है गाजर का अधिक सेवन

गाजर कई तरह के विटामिन्स और मिनरल का बेहतरीन स्रोत हैं, जिस वजह से इसको स्वस्थ आहार की श्रेणी में शामिल किया जाता है। हो सकता है कि इसी वजह से आपकी डाइट में भी गाजर शामिल हो, लेकिन अगर आप इसका अधिक सेवन करते हैं तो यह आपके शरीर को कई तरह की समस्याओं से घेर सकता है। आइए जानते हैं कि गाजर के अधिक सेवन से आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

त्वचा पर हो सकती है एलर्जी
वैसे तो गाजर का सेवन त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह त्वचा को हाइड्रेट करने के साथ-साथ विटामिन- सी भी प्रदान करता है। हालांकि, अगर आप इसका अधिक सेवन करते हैं तो गाजर से त्वचा को फायदे की बजाय नुकसान पहुंच सकता है। बता दें कि गाजर के अधिक सेवन से त्वचा पर सूजन, खुजली और रैशेज आदि समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गाजर का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करें।

कब्ज होना
गाजर का अधिक सेवन पाचन तंत्र के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है क्योंकि पाचन तंत्र गाजर की अधिक मात्रा को सही ढंग से पचाने में असमर्थ रहता है। इसके कारण व्यक्ति को कब्ज की समस्या होने की अधिक संभावना रहती है। इसके अलावा, इसकी वजह से गैस और पेट दर्द जैसी कई तरह की समस्याओं से भी जूझना पड़ सकता है। इसलिए भूल से भी गाजर का अधिक सेवन न करें।

प्रभावित हो सकता है त्वचा का रंग
गाजर बीटा-कैरोटीन से समृद्ध होती है, जिससे शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं, लेकिन अगर आप गाजर का अधिक सेवन करते हैं तो शरीर में इसकी मात्रा भी बढ़ जाती है। इसके कारण त्वचा का रंग नारंगी दिखाई देने लगता है। बता दें कि एक मध्यमाकार गाजर में लगभग चार मिलीग्राम बीटा-कैरोटीन मौजूद होता है, इसलिए बेहतर होगा कि आप सीमित मात्रा में ही गाजर का सेवन करें।

हो सकता है डायरिया
गाजर में फाइबर की अच्छी खासी मात्रा मौजूद होती है, लेकिन जब आप इसका अधिक सेवन करते हैं तो शरीर में फाइबर भी ज्यादा हो जाता है, जिसके कारण आपको डायरिया की समस्या या फिर कई तरह अन्य पाचन संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वैसे ये समस्याएं किसी और वजह से भी हो सकती हैं, इसलिए ऐसा कुछ होने पर डॉक्टरी जांच को प्राथमिकता दें। वहीं, डाइट में सीमित मात्रा में गाजर को शामिल करें।

गाजर कई ऐसे पोषक तत्वों से समृद्ध होती है, जो शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं और न्यूट्रीशियनिस्ट की मानें तो एक दिन में चार से पांच गाजर का सेवन ही लाभदायक है।
 

Work From Home में बढ़ रहा है आपका वजन तो करें ये काम, रहेंगे स्लिम

Work From Home में बढ़ रहा है आपका वजन तो करें ये काम, रहेंगे स्लिम

बहुत से लोग हैं जो कोविड काल के दौरान फिट हो गए थे पर अचानक वर्क फ्रॉम होम मिलते ही उनमें मोटापे के लक्षण नजर आ रहे हैं. वहीं इन दिनों ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों के बीच कई लोग फिर से वर्क फ्रॉम होम के तहत काम कर रहे हैं. आखिर वर्क फ्रॉम होम में दोबारा आने के बाद अब वजन दोबारा से क्यों बढ़ रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि वर्कफ्रॉम होम के दौरान लोग अपनी रूटीन छोड़ देते हैं जिसका बुरा असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है. ऐसा ही एक साइड इफेक्ट है वजन बढ़ाना. अगर आप डाइट, एक्सरसाइड, सही आदतों को वर्क फ्रॉम होम में छोड़ देंगे तो दोबारा मोटापा आपको अपना शिकार बना सकता है. ऐसे में वजन बढ़ने की समस्या से बचने के लिए आपको कुछ काम करने चाहिए जिससे आप अपना वजन बढ़ने से रोक सकते हैं. चलिए जानते हैं.
वर्क फ्रॉम होम में ऐसे घटाएं वजन-
वर्क फ्रॉम में पानी पीकर घटाएं वजन-
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो वर्क फ्रॉम होम के दौरान पानी पीने की मात्रा बढ़ा दें. पानी आपकी भूख को कम करता है और वजन कंट्रोल करने में मदद करता है. हम घर में रहते हुए पानी का सेवन कम कर देते हैं और इसकी वजह से मोटापे का शिकार बन जाते हैं. इसलिए आपको हर दिन 7 से 8 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए. वहीं अगर आप सुबह खाली पेट चाय या कॉफी पीने की जगह गुनगुना पानी पीते हैं तो ये आपके लिए फायदेमंद होगा. बता दें गरम पानी से फैट कम हो सकता है.
इन आहार को कहें बाय-बाय-
वर्क फ्रॉम के दौरान आपको बाहर की किसी चीच की चीज का सेवन करना अवॉइड करना चाहिए. कोविड के मद्देनजर और फिट रहने के लिए आप होम डिलीवरी के जरिए फूड ऑर्डर करने के बजाए घर में ही हेल्दी खाना कुक करें.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
 

आ रहा है! कोरोना वायरस का नया वेरिएंट WHO ने दी ये बड़ी चेतावनी, जानें क्या कहा..

आ रहा है! कोरोना वायरस का नया वेरिएंट WHO ने दी ये बड़ी चेतावनी, जानें क्या कहा..

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक बड़े अधिकारी ने कोरोना को लेकर एक चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस का ओमिक्रोन वेरिएंट इसका अंतिम वेरिएंट नहीं होगा और अन्य नये वेरिएंट्स के सामने आने की काफी ज्यादा संभावना है.
वायरस पर बनाए हुए हैं बारीकी से नजर - WHO अधिकारी
डब्ल्यूएचओ के आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर आयोजित सवाल-जवाब के एक सत्र के दौरान संगठन के कोविड-19 तकनीकी दल की मारिया वान केरखोव ने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ओमीक्रोन के चार अलग-अलग रूपों पर नजर बनाये हुए है. मारिया ने कहा, 'हम इस वायरस के बारे में अब काफी कुछ जानते हैं, हालांकि, हम सब कुछ नहीं जानते. मैं बिल्कुल साफ तौर पर कहूं तो वायरस के ये स्वरूप 'वाइल्ड कार्ड' हैं. ऐसे में हम इस वायरस पर लगातार बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, जिस तरह इसमें बदलाव होते हैं और जिस तरह ये रूप बदलता है. हालांकि, इस वायरस में बदलाव की अत्याधिक संभावनाएं हैं.'
उन्होंने कहा, 'ओमिक्रोन, सबसे ताजा चिंताजनक स्वरूप है और ये अंतिम चिंताजनक स्वरूप भी नहीं होगा. ऐसे में हमें एक बार फिर से ना केवल टीकाकरण का दायरा बढ़ाना होगा बल्कि प्रसार की रोकथाम के उपायों का पालन सुनिश्चित करना होगा.'

 

क्या आप जानते हैं पुरुषों के ऑर्गेज्म से जुड़ी ये रोचक बातें, अगर नहीं तो आइये यहाँ जाने इनके बारे में

क्या आप जानते हैं पुरुषों के ऑर्गेज्म से जुड़ी ये रोचक बातें, अगर नहीं तो आइये यहाँ जाने इनके बारे में

मेल ऑर्गेज्म एक ऐसा विषय है जिस पर कम ही बात होती है. पुरुषों में ऑर्गेज्म से जुड़ी कुछ ऐसी बाते हैं जो पुरुष खुद भी नहीं जानते हैं. आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि महिलाओं के शरीर में ही कुछ पाइंट्स ऐसे होते हैं जो ऑर्गेज्म के दौरान चरम संतुष्टि पाने में मददगार होते हैं, लेकिन पुरुषों के साथ भी ऐसा होता है. हालांकि यह पाइंट्स अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हो सकते हैं. पुरुषों के लिए किसी खास तरह का ऑर्गेज्म नहीं होता है. ये इजेक्युलेटरी नॉन-इजेक्युलेटरी या दोनों तरह से हो सकता है.
आज हम आपको पुरुषों के ऑर्गेज्म से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिनके बारे में आप शायद ही जानते हों. healthline की खबर के अनुसार कोई पुरुष एक सेशन में मल्टीपल ऑर्गेज्म की क्षमता भी रखते हैं.

पुरुष के ऑर्गेज्म से जु़ड़ी कुछ अनजानी बातें
– सामान्य तौर पर ऑर्गेज्म और इजेक्युलेशन अक्सर एकसाथ होते हैं, लेकिन वास्तव में ये दो अलग-अलग घटनाएं हैं जो कि ज़रूरी नहीं हैं कि हमेशा एकसाथ ही हों.

– महिलाओं की तरह ही पुरुषों के शरीर में भी प्लेज़र पाइंट्स होते हैं जिससे ऑर्गेज्म का सुख काफी बढ़ाया जा सकता है. पुरुषों को फुल बॉडी ऑर्गेज्म देने के लिए प्रोस्टेट एक प्लेज़र पॉइंट है. ये एक अखरोट के आकार की ग्लैंड होती है जो कि पेनिस और ब्लैडर के बीच में रेक्टम के ठीक पीछे होती है.

– महिलाओं की तरह ही पुरुषों में भी निप्पल प्लेज़र पॉइंट होते हैं. निपल्स के आसपास काफी नर्व्स होती हैं और ये दिमाग के सेक्सुअल सेंसेशन से सीधे जुड़े हुए रहते हैं.

– महिलाओं की तरह ही पुरुषों में भी G-spot होता है. ये बात सुनकर आप चौंक सकते हैं. दरअसल, प्रोस्टेट को ही पुरुषों के शरीर में G-spot माना जाता है.

– पुरुषों के ऑर्गेज्म और महिलाओं के ऑर्गेज्म में ज्यादा फर्क नहीं होता है. ऑर्गेज्म के वक्त दोनों ही दिल की धड़कन बढ़ने और जननांगों में हाई ब्लड फ्लो का अनुभव करते हैं. हालांकि दोनों के ऑर्गेज्म में मुख्य अंतर उनके ड्यूरेशन और रिकवरी का होता है. उदाहरण के लिए महिलाओं में ऑर्गेज्म पुरुषों की तुलना में 20 सेकंड ज्यादा हो सकता है.

– पुरुष पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ से अपने ऑर्गेज्म को कुछ हद तक कंट्रोल कर सकते हैं. इन एक्सरसाइज़ को कुछ वक्त तक प्रैक्टिस कर ऑर्गेज्म के दौरान इनका लाभ लिया जा सकता है.

म्यूजिक थेरेपी: संगीत में झूमकर भी स्वास्थ्य को मिल सकते हैं कई फायदे

म्यूजिक थेरेपी: संगीत में झूमकर भी स्वास्थ्य को मिल सकते हैं कई फायदे

म्यूजिक यानी संगीत, जो हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि म्यूजिक एक थेरेपी की तरह काम करके कई तरह के स्वास्थ्य लाभ देने में मदद कर सकता है। जी हां, म्यूजिक की मदद से कई तरह के मानसिक विकारों से राहत दिलाने से लेकर शारीरिक विकास बेहतर तरीके से हो सकता है। आइए आज हम आपको विस्तार से बताते हैं कि म्यूजिक थेरेपी से क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।

म्यूजिक से मिलने वाले शारीरिक लाभ
अगर आप रोजाना कुछ मिनट ही लाइट म्यूजिक सुनते हैं तो इससे हृदय के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त, यह श्वसन में सुधार करने, रक्तचाप को नियंत्रित करने और मांसपेशियों को आराम देने में भी मदद कर सकता है। इसके साथ ही सिरदर्द से राहत दिलाने में भी म्यूजिक थेरेपी मदद कर सकती है क्योंकि इसका उद्देश्य दर्द से ध्यान हटाना है और उसे दूर करना है।

म्यूजिक से मिलने वाले मानसिक लाभ
अल्जाइमर रोगियों के इलाज के लिए भी म्यूजिक थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसका दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और अल्जाइमर एक मानसिक रोग है। इसके अतिरिक्त, यह चिंता, बेचैनी और तनाव जैसे मानसिक विकारों से छुटकारा दिलाने में भी कारगर है। इसके साथ ही व्यक्ति को आराम पहुंचाने और मन को खुश रखने में भी म्यूजिक थेरेपी काफी मदद कर सकती है। हालांकि, इन सभी लाभों के लिए गाने का सही चयन होना महत्वपूर्ण है।

ये फायदे भी प्रदान करता है म्यूजिक
शारीरिक और मानसिक लाभ के साथ-साथ म्यूजिक थेरेपी में आध्यात्मिक अनुभवों को बढ़ाने की शक्ति है और इससे अन्य लोगों से जुडऩे में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त, यह खुद पर नियंत्रण की भावना पैदा करने में मदद करती है और मनोभ्रंश के प्रभाव को कम करने में भी मदद करती है। वहीं, मनोरंजन के हिसाब से भी म्यूजिक बेहतरीन है। शायद इसलिए हर पार्टी और जश्न का मजा इसके बिना अधूरा सा है।

किन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है म्यूजिक थेरेपी
जो व्यक्ति शारीरिक दर्द से राहत पाना चाहता है, उसके लिए म्यूजिक थेरेपी बेहतरीन है। वहीं, तनाव जैसे मानसिक विकारों से छुटकारा दिलाने में भी म्यूजिक थेरेपी मदद कर सकती है। ऑटिज्म और अल्जाइमर के रोगियों के लिए म्यूजिक थेरेपी लेना फायदेमंद साबित हो सकता है। हृदय और मधुमेह रोगी भी इसका विकल्प चुन सकते हैं। आर्मी के दिग्गज, जिन्होंने मौत और युद्धों का अनुभव किया हो, वे खुद को शांत करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।  

याददाश्त बढ़ाने में मदद कर सकते हैं ये प्राणायाम, ऐसे करें अभ्यास

याददाश्त बढ़ाने में मदद कर सकते हैं ये प्राणायाम, ऐसे करें अभ्यास

आज के दौर में कमजोर याददाश्त सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है और इसका मुख्य कारण गलत खान-पान और खराब जीवनशैली है। हालांकि, योग की मदद से न सिर्फ याददाश्त को तेज करने में मदद मिल सकती है बल्कि कई तरह के मानसिक बीमारियों के जोखिम कम करने में सहायक है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे प्राणायामों के अभ्यास का तरीका बताते हैं, जो याददाश्त तेज करने में काफी मदद कर सकते हैं।

भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम के लिए योगा मैट पर पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर अपने कानों के पास लाएं और अंगूठों से अपने दोनों कानो को बंद करें, फिर हाथों की तर्जनी उंगलियों को माथे पर और मध्यमा, अनामिका और कनिष्का उंगली को बंद आंखों के ऊपर रखें। इसके बाद मुंह बंद करें और नाक से सांस लेते हुए ओम का उच्चारण करें। कुछ मिनट बाद धीरे-धीरे प्राणायाम को छोड़ दें।

नाड़ी शोधन प्राणायाम
नाड़ी शोधन प्राणायाम के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सुखासन की मुद्रा में बैठें, फिर दाएं हाथ की पहली दो उंगलियों को माथे के बीचों-बीच रखें। अब अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद करके नाक के बाएं छिद्र से सांस लें, फिर अनामिका उंगली से नाक के बाएं छिद्र को बंद करके दाएं छिद्र से सांस छोड़ें। इस दौरान अपनी दोनों आंखें बंद करके अपनी सांस पर ध्यान दें। कुछ देर बाद प्राणायाम छोड़ दें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम
अनुलोम विलोम प्राणायाम के लिए पहले योगा मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठें और अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें। अब अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद करके नाक के बाएं छिद्र से सांस लें, फिर अपने दाएं हाथ की अनामिका उंगली से नाक के बाएं छिद्र को बंद करके दाएं छिद्र से सांस छोड़ें। कुछ मिनट इस प्रक्रिया दोहराने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलें और प्राणायाम का अभ्यास छोड़ दें।

उद्गीथ प्राणायाम
सबसे पहले योगा मैट पर पद्मासन या सुखासन की मुद्रा में बैठें और अपने दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रख लें। अब दोनों आंखों को बंद करके गहरी सांस लें और इसे धीरे-धीरे छोड़ते हुए ओम का जाप करें। ध्यान रखें की जब आप यह उच्चारण कर रहे हों, तब आपका ध्यान आपकी सांसों पर केंद्रित हो। शुरूआत में इस प्राणायाम का अभ्यास 5-10 मिनट तक करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।  

शहर में 5 स्थानों पर जेनेरिक मेडिकल स्टोर खुले, आमजनों को 72 प्रतिशत के साथ मिलेंगे दवाएं

शहर में 5 स्थानों पर जेनेरिक मेडिकल स्टोर खुले, आमजनों को 72 प्रतिशत के साथ मिलेंगे दवाएं

रायपुर :  नगर पालिक निगम रायपुर क्षेत्र में 5 स्थानों पर श्री धन्वंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर से सभी नागरिकों के लिये 72 प्रतिशत की भारी छूट सहित 20 ब्रांडेड कम्पनियों की दवाइयां की निरन्तरता के साथ सहज उपलब्धता नगर पालिक निगम रायपुर के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की श्री धन्वंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना के तहत विभिन्न 5 स्थानों नेताजी सुभाषचन्द्र बोस स्टेडियम परिसर, अमलीडीह, अन्तर राज्यीय बस टर्मिनल परिसर,मेकहारा परिसर के सामने, केनाल लींकिंग रोड राजातालाब में श्री धन्वंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर का संचालन किया जा रहा है एवं उक्त मेडिकल स्टोर में सभी लोगों को 72 प्रतिशत की भारी छूट के साथ विभिन्न 20 ब्रांडेड कम्पनियों की दवाइयां सहजता एवं सरलता से निरंतरता के साथ उपलब्ध करवाई जा रही हैं. कोई भी नागरिक रायपुर शहर में उक्त 5 श्री धन्वंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर में पहुंचकर राज्य शासन की योजना का पूर्ण वांछित लाभ प्राप्त कर सकता है.

सिरदर्द होने पर इन चाय का करें सेवन, जल्द मिलेगा आराम

सिरदर्द होने पर इन चाय का करें सेवन, जल्द मिलेगा आराम

अमूमन लोग सिरदर्द से राहत पाने के लिए पेनकिलर का सेवन करने लगते हैं, लेकिन इसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अगर अब आप सोच यह रहे हैं कि पनेकिलर नहीं तो किस तरह से सिरदर्द दूर होगा तो आपको बता दें कि चाय इससे आराम दिलाने में मदद कर सकती हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी चाय की रेसिपी बताते हैं, जिनका सेवन सिरदर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।

कैमोमाइल टी
कैमोमाइल टी एक हर्बल चाय है, जो कि एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ दर्द निवारक गुणों से समृद्ध होती है, इसलिए इसका सेवन सिरदर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इस चाय को बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में एक गिलास पानी और एक चौथाई कप सूखे कैमोमाइल के फूल डालकर उबालें और जब पानी आधा हो जाए तो गैस बंद करके चाय को छानकर कप में डालें। इसके बाद चाय में स्वादानुसार शहद मिलाकर इसका सेवन करें।

अदरक की चाय
अदरक की चाय हीलिंग प्रभाव और दर्द निवारक गुण से समृद्ध होती है, इसलिए इसका सेवन सिरदर्द को दूर करने में मदद कर सकता है। इस चाय को बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में दो से तीन कप पानी और थोड़ा सा कदूकस किया हुआ अदरक डालें। इसके बाद कुछ मिनट तक पानी को उबलाकर गैस बंद कर दें। अब इस चाय को छानकर एक कप में डालें, फिर इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर पिएं।

पुदीने की चाय
अगर आपके सिर में होने वाले दर्द का कारण चिंता है तो इससे राहत दिलाने में पुदीने की चाय मदद कर सकती हैं क्योंकि इसमें मौजूद गुण और इसकी सुगंध दिमाग को शांत करके सिर को आराम पहुंचाती है। पुदीने की चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में डेढ़ कप पानी में थोड़ी पुदीने की पत्तियां डालकर उबालें, फिर इस चाय को छानकर कप में डालें। इसके बाद चाय में स्वादानुसार शहद मिलाकर इसका सेवन करें।

ओलोंग टी
ओलोंग टी एंटी-ऑक्सीडेंट गुण के साथ-साथ कई ऐसे पोषक तत्वों से समृद्ध होती है, जो सिरदर्द से राहत दिलाने में सहायक हैं। इस चाय को बनाने के लिए गैस ऑन करके उस पर एक पैन रखकर उसमें पानी को गर्म करें, फिर पानी को एक कप में डालकर उसमें ओलोंग टी बैग को डालें। दो-तीन मिनट बाद इस स्वास्थ्यवर्धक हर्बल टी का सेवन करें। आप चाहें तो इसमें स्वादानुसार शहद मिला सकते हैं।

सिरदर्द से राहत दिलाने में इन चाय का सेवन मदद कर सकता है, लेकिन भूल से भी इनका अधिक सेवन न करें क्योंकि इनकी अति स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकती है। इसलिए एक दिन में ज्यादा से ज्यादा दो कप चाय पिएं।

 

कान की गंदगी निकालने के लिए अपनाये ये घरेल नुस्खे

कान की गंदगी निकालने के लिए अपनाये ये घरेल नुस्खे

आज के समय में कान साफ़ करने से कई लोग डरते हैं क्योंकि कान के पर्दे को इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में कई बार लोगों को कान साफ़ करने से कई बड़ी परेशानियां हो जाती है लेकिन आप कुछ घरेलू उपायों से कान की गंदगी साफ़ कर सकते हैं। आज हम आपको उन्ही उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आप कर सकते हैं और उससे आपका कान साफ़ हो सकता है।

बादाम का तेल- कान का मैल निकालने के लिए बादाम का तेल सबसे पुराने तरीकों में से एक है। जी हाँ और इस इस्तेमाल करने के लिए आप इस तेल को पहले गुनगुना कर लें उसके बाद दो या तीन बूंद बादाम का तेल कान में डालकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दे। इस तेल से कान का मैल मुलायम हो कर आराम से बाहर निकल जाएगा।

सरसों, जैतून और नारियल का तेल- सरसों, जैतून और नारियल का तेल भी बादाम के तेल की तरह कान का मैल निकालने में बेहतरीन है। इस दौरान इस बात का ध्यान रखें कि बाजार से हमेशा अच्छी क्वालिटी का ही तेल लाएं और अब आप इनमें से किसी भी तेल में लहसुन की तीन से चार कलियां डालकर गर्म करें, तेल दो चम्मच ही ले। इस लहसुन तेल को थोड़ा सा गुनगुना हो जाने पर कुछ बूंद कान में डालकर रूई से कान बंद कर लें। इससे लाभ होगा।

बेबी ऑयल तेल- कान की गंदगी निकालने के लिए बेबी ऑयल तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने कानों में 3 से 4 बूंदें बेबी ऑयल को डाल कर रूई से बंद कर दें और फिर 5 मिनट बाद रूई को निकाल दें।

सेब का सिरका और हाइड्रोजन पराक्साइड - इसके लिए थोड़ा सा हाइड्रोजन पेरोक्साइड को लेकर पानी में घोलें और इस मिक्सचर को कान में डालें। वहीं उसके बाद इस घोल को कान से बाहर निकाल दें। वैसे इसके अलावा सिरका की मदद से भी कान की सफाई कर सकते हैं। इसके लिए आप थोड़े से सिरके को एक चम्मच पानी में मिला ले और अब इसको कान में डाल दें।

गुनगुना पानी- वैसे आप गुनगुने पानी की मदद से भी कान का मैल साफ कर सकते हैं। इसके लिए पानी को थोड़ा सा गुनगुना कर लें और फिर रूई की सहायता से कान के अंदर डालें। अंत में उलटे होकर मेल बाहर निकाले।

प्याज का रस- इसे इस्तेमाल करने के लिए रूई की मदद से कुछ बूंदे कान के अंदर डालें क्योंकि इससे कान की गंदगी आसानी से बाहर आ जाएगी। 

स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है अंडे का अधिक सेवन, हो सकती हैं ये समस्याएं

स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है अंडे का अधिक सेवन, हो सकती हैं ये समस्याएं

अंडे का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होने के साथ ही आयरन, कैल्शियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे कई पोषक तत्वों से समृद्ध होता है। इसी वजह से लोग इसका सेवन करना पसंद करते हैं, लेकिन अगर आप अधिक अंडे खाते हैं तो इससे स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं कि अंडे का अधिक सेवन करने से किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हृदय हो सकता है प्रभावित
अंडे का अधिक सेवन हृदय के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। दरअसल, अंडे के अधिक सेवन से शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढऩे लगती है, जो हृदय को नुकसान पहुंचा सकती है। इस वजह से आपको हृदय से जुड़ी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए अगर आप पहले से ही किसी हृदय रोग से ग्रस्त हैं तो अंडे का सेवन डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही करें।

हो सकती है ब्लोटिंग की समस्या
अगर आप अंडे का अधिक सेवन करते हैं तो इसके कारण आपको ब्लोटिंग की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि खाने का पाचन ठीक ढंग से न होने के कारण पेट में गैस बनने लगती है और ऐसे में लोगों को पेट फूलने की समस्या से जूझना पड़ता है। पेट फूलने की समस्या को अंग्रेजी में ब्लोटिंग भी कहा जाता है, जिसकी वजह से पेट से जुड़ी कई समस्याएं होने लगती हैं।

मधुमेह होने का रहता है खतरा
अंडे का अधिक सेवन शरीर में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ा सकता है और इससे व्यक्ति के इंसुलिन में भी बदलाव होने लगता है। यह बदलाव मधुमेह का खतरा उत्पन्न कर सकता है। बता दें कि मधुमेह एक गंभीर समस्या है, जो व्यक्ति को मौत के मुंह में भी धकेल सकती है। इसलिए जिन लोगों को पहले से ही मधुमेह है तो वे कम ही अंडों का सेवन करें। वहीं, स्वस्थ व्यक्ति भी सीमित मात्रा में अंडे खाएं।

बढ़ सकती है मुंहासों की समस्या
अगर आपकी त्वचा तैलीय प्रकार की और मुंहासे वाली है तो आप भूल से भी जरूरत से ज्यादा अंडे का सेवन न करें। दरअसल, अंडा प्रोटीन युक्त होता है और जब यह शरीर में टूटता है तो गर्मी पैदा करता है, जिससे आपकी मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी डाइट में अंडे की मात्रा को डॉक्टर की सलाह अनुसार ही शामिल करें।

अगर आप वयस्क हैं तो आपके लिए रोजाना तीन अंडे खाना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद साबित हो सकता है। वहीं, बच्चों को रोजाना एक अंडे का सेवन करना ही काफी है।

 

कैंसर-मुक्त भारत के लक्ष्य की अगुवाई कर रहा वेंदाता का बालको मेडिकल सेंटर

कैंसर-मुक्त भारत के लक्ष्य की अगुवाई कर रहा वेंदाता का बालको मेडिकल सेंटर

रायपुर | वेदांता का बालको मेडिकल सेंटर भारत के शीर्ष कैंसर अस्पतालों में से एक और मध्य भारत के सबसे पसंदीदा कैंसर केयर अस्पताल के रूप में उभरा है। बालको मेडिकल सेंटर(बीएमसी) रायपुर, छत्तीसगढ़ में 170-बेड वाला एक अति आधुनिक, मल्टी-मोडलिटी डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय सुविधा वाला अस्पताल है। अस्पताल अपनी उन्नत मेडिकल केयर सुविधाओं, प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट और मरीजों के लिए किफायती कैंसर केयर को लेकर जाना जाता है।

बालको मेडिकल सेंटर ने रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों पर काम करते हुए लाखों लोगों के जीवन में बदलाव किया है। यह आधुनिक रेडिएशन थेरेपी,ब्रेकीथेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन, सर्जरी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, रक्त संबंधी विकार, प्लास्टिक एवं पुन: र्निर्माण सर्जरी तथा दर्द एवं उपशामक केयर के लिए देश के सबसे पसंदीदा अस्पतालों में से एक है। अस्पताल में पीएसएमए और डीओटीए स्कैन, वर्चुअल प्लानिंग एवं सिर व गर्दन की कैंसर सर्जरी में 3डी मॉडलिंग, सीआरएस व एचआईपीईसी, एडवांस्ड माइक्रोवस्कुलर सर्जरी, ल्यूटेटियम थेरेपी और एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी कैंसर डायग्नोस्टिक्स और ट्रीटमेंट की कई नवीनतम तकनीकें उपलब्ध हैं।

अस्पताल में लीनियर एक्सलरेटर्स हैं, जो आधुनिकतम एक्सलरेटर्स में से एक हैं। यहां कीमो थेरेपी के लिए सबसे बड़ी डे-केयर यूनिट, पांच आधुनिक ऑपरेशन थिएटर्स और छत्तीसगढ़ का एकमात्र स्पेक्ट सीटी मशीन से लैस एक पूर्ण विकसित न्यूक्लियर मेडिकल डिपार्टमेंट है, जो इसे सटीक डायग्नोस्टिक और सर्वोत्तम उपचार प्रदान करने में सक्षम बनाता है।

अपने उल्लेखनीय एवं प्रभावी काम के साथ यह अस्पताल कैंसर-मुक्त समाज बनाने, कैंसर के इलाज को लेकर देश में मांग-आपूर्ति के बड़े अंतर को कम करने, जागरूकता लाने, बुनियादी ढांचे की कमी व ऑन्कोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने के लिए अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों को समर्पित करते हुए काम कर रहा है। बालको मेडिकल सेंटर के लक्ष्य को साझा करते हुए बीएमसी की चेयरपर्सन श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने कहा, “पिछले कुछ दशकों में भारत में कैंसर उपचार की क्षमताओं में वृद्धि हुई है, लेकिन अधिकांश सुविधाएं शहरी इलाकों के आसपास केंद्रित हैं। कैंसर के बढ़ते मामलों को स्वास्थ्य के लिए खतरा मानते हुए और टियर 2 व 3 शहरों में गुणवत्तापूर्ण कैंसर केंयर सेंटर्स की कमी को देखते हुए वेदांता ने समाज के सभी वर्गों को सस्ती एवं व्यापक कैंसर केयर प्रदान करने के लिए नया रायपुर में बालको मेडिकल सेंटर की स्थापना की। हम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों पर इलाज के बोझ को कम करने के लिए इस दिशा में काम करने वाले परोपकारी संगठनों और प्रभावशाली लोगों के साथ साझेदारी का भी लाभ उठा रहे हैं।”

बालको मेडिकल सेंटर एनएबीएच से मान्यता प्राप्त है, जो इसकी सेवाओं की गुणवत्ता का प्रमाण है। कैंसर के इलाज के साथ-साथ बालको मेडिकल सेंटर के सभी रोगियों को मनोवैज्ञानिक, पोषण और फिजिकल थेरेपी के साथ-साथ विभिन्न पेशेंट सहायक समूह की सदस्यता से भावनात्मक संबल भी मिलता है।

छत्तीसगढ़ के डॉ. नीवराज सिंह, जिनकी मां, श्रीमती प्रीति सिंह का अस्पताल में इलाज चल रहा था, उन्होंने कहा, "मैं बालको मेडिकल सेंटर टीम द्वारा किए गए कार्य, उनके विजन, व्यवहार, काम के बारे में उनके ज्ञान और उनके प्रोफेशनलिज्म से बहुत संतुष्ट हूं। वे उचित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बहुत ही सहयोग के साथ व मेहनत से मेडिकल सर्विस देते हैं और मरीज की देखभाल करते हैं। उन्हें शुभकामनाएं।"

बालको मेडिकल सेंटर ने छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में स्क्रीनिंग कैंप आयोजित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ सहयोग किया है। इसके तहत विशेषज्ञतीन सबसे आम कैंसर - ब्रेस्ट, सर्विक्स और ओरल की मुफ्त स्क्रीनिंग प्रदान करते है। निकट भविष्य में शिक्षाविदों और रिसर्च जोड़ने के लक्ष्य के साथ बालको मेडिकल सेंटर का उद्देश्य ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में दुनियाभर में प्रसिद्ध ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’बनना है।

विश्व कैंसर दिवस के अवसर परअस्पताल खुद को कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहने के लिए समर्पित करता है। इस अवसर पर 4-14 फरवरी 2022 तक बालको मेडिकल सेंटर में निःशुल्क कैंसर जांच शिविर भी चलाया जायेगा जिसके अंतर्गत स्तन निरिक्षण, मुँह के कैंसर की जांच, ऍफ़.एन.ए.सी., पैपस्मीयर, तथा कैंसर विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया जायेगा। इसके अतिरिक्त, डिजिटल मैमोग्राफी पर ५०% की छूट भी दी जाएगी। पूर्व-पंजीकरण करने के लिए सभी को 828284444 पर कॉल करना होगा।

कैंसर मानव समाज के समक्ष मौजूद सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। बालको मेडिकल सेंटर अत्यधिक देखभाल और करुणा के साथ मानव जाति की सेवा करता रहेगा।

आज है वर्ल्ड कैंसर डे: इस वर्ष का थीम है क्लोजि़ंग द केयर गैप

आज है वर्ल्ड कैंसर डे: इस वर्ष का थीम है क्लोजि़ंग द केयर गैप

पैदा कर देता है। ऐसे में जिन्हें कैंसर हो जाता है और जो लोग उनकी सेवा सुश्रुषा करते हैं, उनकी मन:स्थिति को तो बयां ही नहीं किया जा सकता। फिर कैंसर केयर से सम्बंधित विभिन्न चरणों, जैसे- डायग्नोसिस, सर्जरी, रेडियोथैरेपी, कीमोथैरेपी और पैलीएटिव केयर व्यवस्था में कुछ 'गैपÓ हों, तो कैंसर के मरीज़ों और रिश्तेदारों की निराशा का सिफऱ् अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है। इस दृष्टि से इस वर्ष की थीम प्रासंगिक है, क्योंकि किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए केयर के मापदंडों पर शत-प्रतिशत खरा उतरना एक नामुमकिन सा आदर्श मात्र है। किसी व्यवस्था में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव होगा, तो कोई व्यवस्था बहुत खर्चीली होगी। कहीं लोगों की जीवनशैली और परिवेश में कैंसर के रिस्क फैक्टर बहुतायत में होंगे और कहीं आम जनता का "हैल्थ सीकिंग बिहेवियर" एक चुनौती होगा। साथ ही कैंसर प्रभावितों को टर्मिनल स्टेज में पैलीएटिव केयर दे पाना भी एक बड़ी ज़रुरत है। निष्कर्ष यही है कि कैंसर केयर के हर स्तर पर अपेक्षाओं और वास्तविकताओं में गैप होंगे ही। कहीं ज़्यादा, तो कहीं कम।


इस परिपेक्ष्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017), आयुष्मान भारत हैल्थ एंड वैलनेस सेंटर, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के साथ कैंसर के क्षेत्र में किए जा रहे विशिष्ट प्रयासों का यहां उल्लेख करना प्रासंगिक है। आयुष्मान भारत हैल्थ एंड वैलनेस सेंटर, भारत सरकार द्वारा कोम्प्रीहेंसिव प्राइमरी हैल्थ केयर सुनिश्चित करने की एक सुविचारित रणनीति है। देश में सभी उप-स्वास्थ्य केन्द्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को हैल्थ एंड वैलनेस सेंटर के रूप में क्रियान्वित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हमारे माननीय प्रधानमन्त्री जी ने दिया है और आज देश में 89,000 से अधिक हैल्थ एंड वैलनेस सेंटर के माध्यम से प्रिवेंटिव, प्रोमोटिव एवं कॉम्प्रीहैंसिव प्राइमरी हैल्थकेयर दी जा रही है। आशा एवं ए.एन.एम. द्वारा घर-घर जाकर 30 वर्ष से अधिक आयु की आबादी का पांच प्रमुख बीमारियों हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ और ओरल, ब्रैस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर के प्रारम्भिक लक्षणों के आधार पर पहचान का काम किया जा रहा है और साथ ही कैंसर से बचाव के लिए जीवनशैली में परिवर्तन के लिए अपेक्षित जानकारी भी दी जा रही है। निष्कर्ष के रूप में ये कहा जा सकता है कि कैंसर केयर के प्रारम्भिक स्तर पर गैप को क्लोज़ किए जाने का भरपूर प्रयत्न किया जा रहा है और इस प्रयास के सकारात्मक परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं।
हमारे देश में नेशनल प्रोग्राम फ़ॉर प्रिवेंशन एंड कण्ट्रोल ऑफ़ कैंसर, डायबिटीज़, कार्डियो-वस्कुलर डिज़ीज़ एंड स्ट्रोक के माध्यम से कैंसर के प्रमुख कारणों की रोकथाम एवं नियंत्रण का प्रयास भी किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कैंसर के प्रति जन जागरूकता स्थापित करने, जीवन शैली में सुधार करने के लिए जनमानस को प्रोत्साहित करने के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पतालों में एन.सी.डी. क्लिनिक संचालित करना है। जिला अस्पतालों में सी.टी. स्कैन, एम.आर.आई., मैमोग्राफ़ी, हिस्टोपैथोलॉजी सेवाओं का विस्तार कर कैंसर के शुरुआत में ही पहचानने सम्बंधी गैप को भी ख़त्म किया जा रहा है।
'आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजनाÓ के माध्यम से देश की बड़ी आबादी को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा चुनिन्दा सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों के माध्यम से मुहैया कराई जा रही है। और फिर देश में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में उन्नयन करने की माननीय प्रधानमंत्री जी की सोच भी सैकेंडरी केयर को सुदृढ़ करने में कामयाब हो रही है। इसी प्रकार टर्शिअरी केयर का विस्तार करने के लिए चरणबद्ध रूप से देश में 22 एम्स स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही टर्शिअरी कैंसर केयर सेंटर्स स्कीम के तहत स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट और टर्शिअरी कैंसर केयर सेंटर्स स्थापित करने के लिए अनुदान दिया जाता है, जिसका उपयोग कैंसर के निदान एवं उपचार करने, कैंसर से सम्बंधित परीक्षण करने, रिसर्च गतिविधियां संचालित करने, पैलिएटिव केयर सुविधा उपलब्ध कराने और कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम में सहभागिता करने के लिए किया जा सकता है। झज्जर (हरियाणा) में 700 बिस्तर वाले 'नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूटÓ और कोलकाता में 460 बिस्तर वाले 'चितरंजन नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूटÓ भी प्रारंभ किए गए हैं। ये सभी प्रयास कैंसर केयर में सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथैरेपी आदि क्षेत्रों में गैप क्लोज़ करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
मुझे लगता है कि हमारे देश में कैंसर की रोकथाम के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वो ऐतिहासिक हैं। इन प्रयासों में सुधार की गुंजाइश तो हमेशा रहेगी, लेकिन अब बहुत बड़ी जि़म्मेदारी हमारे देश के जनमानस, जिनमें से अधिकांश युवा हैं, की भी है, ताकि वो अपनी जीवनशैली को इस तरह से अपनाएं कि कैंसर की सम्भावना को न्यूनतम किया जा सके। संतुलित भोजन करें, योग और व्यायाम को अपनाएं, तम्बाकू एवं शराब का सेवन ना करें। और उनकी यह कोशिश न सिफऱ् उन्हें कैंसर की संभावना से बचाएगी, अपितु सीमित सेवाओं को गुणवत्ता पूर्वक, कैंसर रोगियों को समय पर उपलब्ध कराकर इस वर्ष की थीम 'क्लोज़ द केयर गैपÓ को भी चरितार्थ कर सकेगी। जय हिन्द!
- डॉ. मनोहर अगनानी
लेखक अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भारत सरकार हैं

 

ZyCoV-D : जायडस कैडिला ने सरकार को कोविड रोधी टीके की आपूर्ति शुरू की

ZyCoV-D : जायडस कैडिला ने सरकार को कोविड रोधी टीके की आपूर्ति शुरू की

नई दिल्ली : दवा निर्माता कंपनी जायडस कैडिला ने केंद्र सरकार को अपने कोविड-19 रोधी टीके जायकोव-डी की आपूर्ति शुरू कर दी है।
जायडस कैडिला ने बुधवार को एक बयान में कहा कि कंपनी ने सरकार के आदेश के अनुसार आपूर्ति शुरू कर दी है। यह कोविड-19 के खिलाफ एक 'प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है।

इसके अलावा समूह अपने कोविड रोधी टीके को निजी बाजार में बेचने की भी योजना बना रहा है। जायकोव-डी की तीन खुराक लगाई जाती है।
कंपनी ने कहा, ''टीके की कीमत 265 रुपये प्रति खुराक होगी और खरीदार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को छोड़कर 93 रुपये प्रति खुराक की पेशकश की जाएगी।

 

बच्चों के लिए फायदेमंद है जुम्बा, रोजाना 10 से 15 मिनट जरूर करवाएं

बच्चों के लिए फायदेमंद है जुम्बा, रोजाना 10 से 15 मिनट जरूर करवाएं

जुम्बा एक तरह की एक्सरसाइज है, जिसका अभ्यास गाने पर थिरकते हुए किया जाता है और इस मजेदार एक्सरसाइज से बच्चों को कई तरह स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। अगर आप बच्चों को रोजाना 10 से 15 मिनट के लिए जुम्बा करवाते हैं तो इससे न सिर्फ उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होगा बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। आइए आज हम आपको बताते हैं कि जुम्बा करने से बच्चों को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।
बच्चों में बढ़ता है आत्मविश्वास
जुम्बा के लिए बच्चों को अच्छा डांसर होने की जरूरत नहीं है बल्कि यह तो मस्ती में की जाने वाली एक्सरसाइज है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दरअसल, जुम्बा के दौरान हर बच्चे को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए समान रूप से उत्साहित किया जाता है यानी जुम्बा ट्रेनर बच्चों को ऐसा महसूस कराते हैं कि वे किसी पार्टी में हैं, जबकि वे वास्तव में अपनी फिटनेस की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
कैलोरी बर्न करने में है सहायक
कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण कई राज्यों में स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियों में कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में उनके लिए जुम्बा करना लाभदायक साबित हो सकता है। अध्ययनों के मुताबिक, एक घंटा जुम्बा करने से बच्चों को 300-400 कैलोरी बर्न करने में मदद मिल सकती है, इसलिए बच्चों को रोजाना जुम्बा करने के लिए प्रेरित करें। इसके अतिरिक्त, जुम्बा करते रहने से बच्चों के शरीर में लचीलापन भी बढ़ेगा।
बच्चों को रचनात्मक और सामाजिक बनाने में मिलती है मदद
जुम्बा की मदद से बच्चों को रचनात्मक और सामाजिक बनाने में भी काफी मदद मिल सकती है। दरअसल, जुम्बा में कई तरह के स्टाइल और स्टेप्स होते हैं। उदाहरण के लिए फ्रीस्टाइल जुम्बा करने से बच्चों को कल्पनाशील बनाने में मदद मिलती है। वहीं, जुम्बा से बच्चे अधिक सामाजिक भी हो सकते हैं क्योंकि इसके हर एक सत्र में कई अन्य बच्चे शामिल होते हैं और वे आपस बातचीत कर सकते हैं और नए दोस्त बना सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी है बेहतर
जुम्बा करने से बच्चों के शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है, जिससे उनके शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जुम्बा करने से बच्चों का मूड भी अच्छा रहता है क्योंकि इससे मूड को ठीक करने वाला होर्मोन एडर्निल शरीर के द्वारा अच्छे से रिलीज होते हैं, जिससे बच्चे हमेशा खुश, तनाव और चिंता से मुक्त रह पाते हैं। इसलिए नियमित तौर पर बच्चों को रोजाना कुछ मिनट जुम्बा जरूर करवाएं।

 

कोविड 19 : अब कोरोना से बचाएगा एयर वैद्य, धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुआ पहला अध्ययन

कोविड 19 : अब कोरोना से बचाएगा एयर वैद्य, धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुआ पहला अध्ययन

नई दिल्ली : कोरोना वायरस से बचाव में धूप अहम भूमिका निभाएगी। आयुर्वेद में वर्षों से चली आ रही धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुए दुनिया के पहले वैज्ञानिक अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। वैज्ञानिकों ने एयर वैद्य की खोज की है जो संक्रमण से बचाव के अलावा उसे प्रसारित होने भी नहीं देता।

एयर वैद्य एक धूप है जिसकी सुगंध के जरिये 19 तरह की जड़ी बूटियों का सेवन दिन में दो बार कर कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। इतना ही नहीं एक पारदर्शी केबिन में बंद मक्खियों पर भी इसका परीक्षण हुआ है जिसमें किसी भी तरह के हानिकारक तत्व की पहचान नहीं हुई है।
यानी इंसानों के लिए एयर वैद्य को पूरी तरह से सुरक्षित पाया गया है।

इस अध्ययन को बनारस हिंदू विवि (बीएचयू) और एमिल फार्मास्युटिकल्स ने मिलकर किया है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की क्लीनिकल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया में भी पंजीयन के बाद यह अध्ययन दो समूह में किया गया।बीएचयू के वरिष्ठ डॉ. केआरसी रेड्डी ने बताया कि 19 जड़ी-बूटियों से खोजा गया एयर वैद्य एक हर्बल धूप (एवीएचडी) के रुप में है।

हाल ही में इस पर दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हुआ है। दो अलग अलग समूह में हुए इस अध्ययन में पता चला है कि दिन में दो बार इसके इस्तेमाल करने पर कोरोना संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि राल, नीम, वासा, अजवाइन, हल्दी, लेमन ग्रास और वच सहित 19 जड़ी बूटियों पर अध्ययन हुआ है।

इस दौरान एयर वैद्य में चार किस्म के औषधीय गुण वायरस रोधी होना, सूजनरोधी होना, सूक्ष्मजीव रोधी और प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करना शामिल हैं। डॉ. रेड्डी का कहना है कि यही चारों गुण कोरोना वायरस के खिलाफ बचाव में कार्य करते हैं।एक सवाल पर डॉ. रेड्डी ने बताया कि एक समूह में 100 और दूसरे समूह में 150 यानी 250 लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया।

एक समूह को एयर वैद्य की धूप चिकित्सा सुबह-शाम दी गई। जबकि दूसरे समूह के लोगों को यह चिकित्सा नहीं दी गई।30 दिन तक यह प्रक्रिया अपनाने के बाद जब कोविड जांच हुई तो पता चला कि जिन्होंने एयर वैद्य का इस्तेमाल नहीं किया उनमें 37 फीसदी लोग संक्रमित मिले। जबकि जिन्होंने इसका इस्तेमाल किया उनमें महज चार फीसदी संक्रमित मिले। एयर वैद्य की वजह से इनमें से किसी भी रोगी में लक्षण विकसित नहीं हुआ।

 

खांसी हो रही है तो दवा लेने से पहले हो जाएं सावधान! बिना डॉक्टर की सलाह न लें कोई दवाई

खांसी हो रही है तो दवा लेने से पहले हो जाएं सावधान! बिना डॉक्टर की सलाह न लें कोई दवाई

सर्दियों में ठंड के कारण सर्दी लगना एक आम बात मानी जाती है, लेकिन, लापरवाही के चलते सर्दी कब खांसी में बदल जाती है, इसका लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं. फिर जब खांसी से परेशान होकर वो कोई भी दवा का सेवन करते हैं, तो ये भूल जाते हैं कि इसके बारे में भी डॉक्टर्स की राय जरूर लेनी चाहिए. अब आप सोच रहे होंगे कि यह एक आम बात है. इसके लिए डॉक्टर को क्यों परेशान करना.
भारत में डॉक्टर्स से ज्यादा घरेलू उपचार पर विश्वास किया जाता है. घरेलू नुस्खे में शहद, हल्दी, अदरक, पुदीना और नमक के पानी का गरारा कर सकते हैं. कहीं न कहीं यह असरदार भी हैं. मगर जब ये नुस्खे भी काम न करें तो जबरदस्ती खुद को डॉक्टर्स के पास जाने से न रोकें. क्या पता जिसे आप नॉर्मल खांसी समझ कर दवा लें रहे हैं वो कोई बड़ी बीमारी का रूप न ले लें.
इस विषय पर डॉक्टर्स का कहना है कि कोविड-19 की इस महामारी के दौर में आपको सतर्क होकर अपना ख्याल रखना है. अगर आपको खांसी आ रही है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. उनसे दवा लेकर अपना इलाज करें न की खुद डॉक्टर बनें. खांसी दो तरीके की होती है. सूखी और कफ वाली खांसी.
इन्हें नॉर्मल खांसी एक बार मान सकते हैं. मगर, ज्यादा दिन तक रहने से यह काफी गंभीर खांसी का रूप ले लेता है. इसकी वजह से खांसी के दौरान मुंह से खून भी आने लगता है. यह सब तब होता है, जब आप लापरवाही करते हैं. इसलिए बिना डॉक्टर से संपर्क किए खांसी की दवा न लें और नियमित इलाज करवाएं. साथ ही प्रणायाम करें.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

 

कोरोना का नया वेरिएंट NeoCov इंसानों के लिए कितना घातक? WHO ने दिया यह जवाब

कोरोना का नया वेरिएंट NeoCov इंसानों के लिए कितना घातक? WHO ने दिया यह जवाब

कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट से दुनिया अभी जंग लड़ रही है। इस बीच इस खतरनाक वायरस के एक अन्य वेरिएंट नियोकोव (NeoCov)ने वैज्ञानिकों को चिंता बढ़ाई है। लेकिन क्या यह नया वेरिएंट इंसानों के लिए घातक है? वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइडेशन (WHO) ने अब इसे लेकर अहम बात कही है। WHO की तरफ से कहा गया है कि रिपोर्ट के मुताबिक यह वेरिएंट साउथ अफ्रीका में चमगादड़ों में मिला है। लेकिन क्या यह वेरिएंट इंसानों के लिए घातक है, इसे लेकर अभी आगे अध्ययन किये जाने की जरूरत है। रूस की न्यूज एजेंसी 'Tass' के मुताबिक WHO ने कहा है कि वुहान वैज्ञानिकों की नई खोज के बारे में उन्हें जानकारी है। यह वेरिएंट इंसानों पर असर डालेगा या नहीं? इसके लिए अभी और अध्ययन किये जाने की आवश्यकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि इंसानों में होने वाले संक्रमण का 75 फीसदी स्त्रोत जानवर और खासकर जंगली जानवर हैं। कोरोना वायरस जानवर में भी मिले हैं। इसमें चमगादड़ भी शामिल हैं, जिनकी पहचान प्राकृतिक रूप से कई तरह के वायरसों के वाहक के तौर पर है। चीन के शोधकर्ताओं ने नए वेरिएंट का जिक्र अपने रिसर्च पेपर में किया है। उनका दावा है कि यह वायरस हाई रिस्क वाला है और उसका ट्रांसमिशन दर भी काफी ज्यादा है। वुहान में वैज्ञानिकों के एक रिसर्च पेपर के मुताबिक नियोकोव मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम या MERS-कोरोनावायरस से संबंधित है। पेपर को बायोरेक्सिव वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है और अभी तक इसकी समीक्षा नहीं की गई है।
रिसर्च में नतीजों के आधार पर बताया गया है कि MERS-CoV Beta-CoV (मर्बेकोवायरस) के वंश C से संबंधित है, जो करीब 35 फीसद की उच्च मृत्यु दर को देखते हुए एक बड़ा खतरा बन गया है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि स्टडी से पता चला है कि MERS से संबंधित वायरस में ACE2 के इस्तेमाल के पहले मामले को प्रदर्शित करता है। इसकी मृत्यु दर और ट्रांसमिशन दर दोनों उच्च है।
 

Corona Vaccination : देश में अब तक एक सौ 64 करोड़ 44 लाख से अधिक टीके लगाये गए

Corona Vaccination : देश में अब तक एक सौ 64 करोड़ 44 लाख से अधिक टीके लगाये गए

नई दिल्ली : पिछले 24 घंटों में 57 लाख से अधिक वैक्सीन की खुराक देने के साथ ही भारत का कोविड-19 टीकाकरण कवरेज अंतिम रिपोर्ट के अनुसार 164.44 करोड़ से अधिक हो गया। इस उपलब्धि को 1,79,63,318 टीकाकरण सत्रों के जरिये प्राप्त किया गया है।

पिछले 24 घंटों में 3,47,443 रोगियों के ठीक होने के साथ ही स्वस्थ होने वाले मरीजों (महामारी की शुरुआत के बाद से) की कुल संख्या बढ़कर 3,80,24,771 हो गई है। नतीजतन, भारत में स्वस्थ होने की दर 93.60 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में 2,51,209 नए मरीज सामने आए हैं।
वर्तमान में 21,05,611 सक्रिय रोगी हैं। वर्तमान में ये सक्रिय मामले देश के कुल पुष्टि वाले मरीजों का 5.18 प्रतिशत हैं।

देश भर में जांच क्षमता का विस्तार लगातार जारी है। पिछले 24 घंटों में कुल 15,82,307 जांच की गई हैं। भारत ने अब तक कुल 72.37 करोड़ जांच की गई हैं। देश भर में जांच क्षमता को बढ़ाया गया है, साप्ताहिक पुष्टि वाले मामलों की दर 17.47 प्रतिशत है, दैनिक रूप से पुष्टि वाले मामलों की दर 15.88 प्रतिशत है।
 

बड़ी खबर: Covishield और Covaxin टीकों को बाजार में बेचने को मिली मंजूरी, DGCI ने रखी ये शर्त

बड़ी खबर: Covishield और Covaxin टीकों को बाजार में बेचने को मिली मंजूरी, DGCI ने रखी ये शर्त

भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने आज यहां कुछ शर्तों के साथ दो कोरोना वैक्सीन (Coroan Vaccine), कोवैक्सीन (Covaccine) और कोविशील्ड (Covishield) के बाजार मार्केट ऑथराइजेशन को मंजूरी दे दी है. सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी ने इसी साल 19 जनवरी को वयस्क आबादी में शर्तों के साथ वैक्सीन को रिस्ट्रिक्टेड इमरजेंसी यूज से अपग्रेड कर नए ड्रग अनुमति देने के लिए की सिफारिश की थी.
डीसीजीआई द्वारा देश में दो कोरोना टीकों, कोवैक्सीन और कोविशील्ड का मार्केट ऑथराइजेशन कुछ शर्तों के साथ दी है. पहला है- फर्म छह महीने के आधार पर या जब भी उपलब्ध हो, जो भी पहले हो, उचित विश्लेषण के साथ उत्पाद के विदेशों में चल रहे क्लिनिकल ट्रायल का डेटा प्रस्तुत करेगी.
दूसरा- वैक्सीन को प्रोग्रामेटिक सेटिंग के लिए आपूर्ति की जाएगी और देश के भीतर किए गए सभी टीकाकरणों को कोविन प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड किया जाएगा और टीकाकरण के बाद एडवर्स इफेक्ट (AEFI) और एडवर्स इफेक्ट ऑफ स्पेशल इंटरेस्ट यानी (AESI) की निगरानी जारी रहेगी. फर्म एईएफआई (AEFI) और एईएसआई (AESI) सहित सुरक्षा डेटा को छह मासिक आधार पर या जब भी उपलब्ध हो, जो भी पहले एनडीसीटी नियम, 2019 के अनुसार उचित विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करेगी.
"कंडीशनल मार्केट ऑथराइजेशन" मार्केट ऑथराइजेशन की एक नई श्रेणी है जो वर्तमान वैश्विक महामारी कोविड के दौरान सामने आई है. दवाओं या टीकों की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ फार्मास्यूटिकल्स तक पहुंच बढ़ाने के लिए इस मार्ग के माध्यम से अनुमोदन मार्गों को कुछ शर्तों के साथ तेजी से ट्रैक किया जाता है.
वैश्विक कड़े रेगुलेटरी अथॉरिटी में से, सिर्फ यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) और यूके की मेडिसिन हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (MHRA) ने फाइजर और एस्ट्राजेनेका को उनके कोरोना वैक्सीन को "कंडीशनल मार्केट ऑथराइजेशन" दिया है.