कोरोना अपडेट: प्रदेश में हो रही है कोरोना की रफ़्तार कम आज 10144 ने जीती कोरोना से जंग, कुल 4888 नए मरीज मिले 144 मृत्यु भी, देखे जिलेवार आकड़े    |    आईसीएमआर अपडेट : राज्य में मिले 4166 कोरोना पॉजिटिव, 19 जिलों में सौ से अधिक मिले मरीज, देखे बाकी जिलों के आकड़े    |    उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने उचित मूल्य की दुकानों के खुला रखने को लेकर कही ये बात    |    पीएम मोदी ने दिए ऑडिट के आदेश, पढ़े पूरी खबर    |    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 3.11 लाख लोग हुए संक्रमित, 4 हजार से ज्यादा मौत    |    कोरोना अपडेट: प्रदेश में हो रही है कोरोना की रफ़्तार कम आज 11475 ने जीती कोरोना से जंग, कुल 7664 नए मरीज मिले 129 मृत्यु भी, देखे जिलेवार आकड़े    |    आईसीएमआर अपडेट : राज्य में मिले 6918 कोरोना पॉजिटिव, आज रायगढ़ में सर्वाधिक, देखे बाकी जिलों के आकड़े    |    स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन की पहली खुराक देने में छत्तीसगढ़ बना नंबर वन, दूसरे नंबर पर ये प्रदेश    |    राहुल गांधी का पीएम पर तंज, कहा- आपने तो मां गंगा को रुला दिया    |    प्रधानमंत्री मोदी का राज्यों को सख्त आदेश, तुरंत इंस्टॉल किए जाएं स्टोरेज में पड़े वेंटिलेटर्स    |
अगर आप भी ज्यादा इस्तेमाल करते है ईयरफोन या हेडफोन तो जानिये उसके नुकसान

अगर आप भी ज्यादा इस्तेमाल करते है ईयरफोन या हेडफोन तो जानिये उसके नुकसान

हम में से अधिकतर लोग गाने सुनने के लिए हेडफोन्स या ईयरफोन्स इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हालांकि ईयरफोन्स और हेडफोन्स के नुकसान को लेकर भी कई रिसर्च सामने आ चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं ईयरफोन का इस्तेमाल करना ज्यादा खतरनाक होता है या हेडफोन्स का इस्तेमाल करना।
हालांकि हेडफोंस और ईयरफोंस दोनो आपकी सेहत को कुछ नुकसान पहुंचाते हैं। ईयरफोंस छोटे होते हैं और कानों में आसानी से फिट हो जाते हैं, लेकिन इससे बाहर की आवाज रुकती नहीं है। एक रिसर्च में सामने आया है कि आप बाहर की आवाज को दबाने के लिए इसकी आवाज तेज करते हैं जो कि आपके लिए खतरनाक है। अगर आवाज के अनुसार देखें तो हेडफोंस आपकी सेहत के अनुसार ठीक होते हैं, क्योंकि यह बाहर के साउंड को आसानी से रोक लेते हैं।
वहीं ईयरफोन उस वक्त ज्यादा नुकसान करते हैं जब आप ज्यादा समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। एक साथ 60 मिनट से अधिक गाना सुनना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन अगर आवाज धीरे है तो आप थोड़े ज्यादा समय तक गाने सुन सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि 85 डीबी से अधिक आवाज आपके कानों के लिए खतरनाक होती है।
जहां एक ओर ईयरफोन की तेज आवाज को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, वैसे ही हेडफोन्स में ईयर इंफेक्शन की बात कही जाती है। कई लोगों को मानना है कि हेडफोन्स पूरे कान में गर्मी पैदा कर देते हैं, जिससे बैक्टीरिया की वजह से ईयर इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिए एक रिसर्च में सामने आया है कि हेडफोंस से इंफेक्शन होने का खतरा नहीं होता है।
 

राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई) 3.0 की शुरूआत

राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई) 3.0 की शुरूआत

विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तीव्र मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई) 3.0 की शुरूआत कर दिया गया है,जिसका उद्देश्य उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचने का है जो नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से वंचित या छूट गए हैं। इसका उद्देश्य मिशन मोड में हस्तक्षेप के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पूर्ण टीकाकरण में तेजी लाना है। पहला चरण 22 फरवरी 2021 से 15 दिनों के लिए शुरू किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 19 फरवरी2021 को इस अभियान की शुरुआत की और राज्यों और जिलों के अधिकारियों से प्रत्येक बच्चे तक पहुंचने और पूर्ण टीकाकरण लक्ष्य प्राप्त करने का आग्रह किया। इस अभियान में राज्य स्तर पर शीर्ष नेतृत्व द्वारा टीकाकरण कार्यक्रम के स्वामित्व की छूट भी दी गई है। उत्तर प्रदेश में इस अभियान का उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने 21 फरवरी 2021 को किया था। राजस्थान में 22 फरवरी 2021 को इस अभियान का शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने की। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभु राम चौधरी ने 22 फरवरी 2021 को भोपाल में आयोजित एक समारोह में इस कार्यक्रम की शुरुआत की। 

जोरहाट  जिले में टीकाकरण

15 दिनों (नियमित टीकाकरण और छुट्टियों को छोड़कर) तक चलने वाले इस अभियान में टीकाकरण के दो दौर निर्धारित किए गए हैं। यह देश के 29 राज्यों/केंद्र्रशासित प्रदेशों में पूर्व चिन्हित 250 जिलों/शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। कोविड-19 के दौरान टीके की खुराक से वंचित रह गए बाहरी प्रदेशों के लाभार्थियों और जिन क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हुई,उन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। आईएमआई 3.0 के लिए जारी दिशानिर्देशों के अनुसार जिलों को कम जोखिम वाले 313,मध्यम जोखिम वाले 152 और सबसे ज्यादा जोखिम वाले 250 जिलों में वर्गीकृत किया गया है।

टीकाकरण गतिविधियों के दौरान कोविड से बचाव संबंधी नियमों (सीएबी) की पालन पर जोर दिया गया है। इसके लिए राज्यों से सत्र स्थलों पर भीड़ से बचने के लिए प्रभावी दृष्टिकोण अपनाने और अगर भीड़ से बचने के तरीके प्रभावी नहीं हैं,ऐसे में उन सत्रों का अलग विवरण तैयार करने की योजना बनाने को भी कहा गया है। टीकाकरण सत्र की योजना इस तरह से भी बनाई गई है कि एक समय में 10 से अधिक लाभार्थी सत्र स्थल पर मौजूद न हों।

आईएमआई 3.0 के पहले चरण के दौरान अभियान में उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को केंद्र में रखा जा रहा है,जो कोविड महामारी के कारण टीके की खुराक लेने से चूक गए।  22 फरवरी को शाम 5 बजे तक के आंकड़ों अनुसार लगभग 29,000 बच्चों और 5,000 गर्भवती महिलाओं को टीका लग चुका था (आंकड़े अनंतिम)।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रायोजित आईएमआई 3.0 अभियान को प्रमुख विभागों के सहयोग के साथ इसमें भाग लेने वाले लोगों,नागरिक समाज संगठनों,युवा समूहों और विभिन्न समुदायों के सदस्यों के मजबूत नेटवर्क के माध्यम से मिशन मोड में लागू किया जाएगा। इसे कोविड-19 महामारी के कारण टीकाकरण में आई कमी को पूरा करने के अवसर के रूप में लिया जाएगा। 

अगर आपको भी है एसिडिटी की समस्या, इन फूड्स का करें इस्तेमाल जल्द मिलेगी राहत

अगर आपको भी है एसिडिटी की समस्या, इन फूड्स का करें इस्तेमाल जल्द मिलेगी राहत

आपके पेट में जलन, गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याएं होना आम बता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ ऐसी चीजें हैं जो आसानी से आपकी एसिडिटी की समस्या को दूर कर सकती है. चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही सुपरफूड्स के बारे में जो एसिडिटी को कर देंगे छूमंतर.


केला- एसिड से बचने के लिए बनाना बेस्ट एंटी डोट है. पोटैशियम से भरपूर केला बॉडी का पीएच लेवल लो करता है. हाई फाइबर से भरपूर केले को खाने से ना सिर्फ आप एसिडिटी से बच सकते हैं बल्कि से आपको फिट रखने में भी मदद करता है.


खरबूजा- तरबूजा, खरबूजा सभी पानी, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. जो कि एसिडिटी से बचाते हैं और पेट की चिपचिपाहट को मेंटेन करते हैं. ये बॉडी को हाइड्रेट करने से लेकर पीएच लेवल भी बैलेंस करते हैं.


सेब और पपीता- फाइबर से भरपूर सेब और पपीते खाने से भी एसिडिटी से बच सकते हैं.


नारियल पानी- ये रिफ्रेशिंग नैचुरल ड्रिंक टॉक्सिंस को बॉडी से फ्लश करने में मदद करता है. फाइबर कंटेट से भरपूर कोकोनट वाटर बाउल मोमेंट को ठीक रखता है.


ठंडा दूध- ठंडा दूध पीने से भी एसिडिटी की समस्या को दूर किया जा सकता है. दूध पेट में मौजूद एसिड को एब्जॉर्व कर लेता है. इसके साथ गैस्ट्रिक सिस्टम में होने वाली जलन को भी कम करता है. जब भी हार्ट बर्न हो या पेट में जलन लगे तो बिना चीनी का ठंडा दूध पीएं.


ठंडा दही और बटर मिल्क- ठंडा दही और बटर मिल्क पीने का भी फायदा होता है. ये डायजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखता है. इसके साथ ही इसके सेवन से एसिडिटी की समस्या भी दूर हो जाती है.

नोट: ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.

 

रात में 5 घंटे से कम सोते हैं तो हो जाएं सावधान, इस गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है दोगुना

रात में 5 घंटे से कम सोते हैं तो हो जाएं सावधान, इस गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है दोगुना

एक नई रिसर्च चेतावनी देती है कि रात में पांच घंटे से कम सोना डिमेंशिया का खतरा दोगुना कर देता है. बोस्टन के ब्रिघम और महिला अस्पताल के शोधकर्ताओं ने 2 हजार 812 अमेरिकी व्यस्कों के अलावा 65 और 65 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों का डेटा परीक्षण किया. 'बहुत छोटी' नींद का समय पांच घंटे या पांच घंटे से कम के तौर पर परिभाषित किया गया था और 7-8 घंटे के 'अनुशंसित समय' की तुलना में डिमेंशिया का दोगुना खतरा पाया गया.


क्या आप रात में 5 घंटे से कम सोते हैं?


नई रिसर्च पूर्व की रिसर्च का समर्थन करती है कि नींद का अभाव अनिवार्य रूप से डिमेंशिया की शक्ल जैसे अल्जाइमर की बीमारी का 'मंच तैयार करती है'. ये रिसर्च संबंध के पीछे वजह की जांच नहीं करती है, लेकिन उचित आराम की कमी दिमाग को टॉक्सिन्स हटाने से रोक सकती है जिससे दिमाग के कार्य में गिरावट होती रहती है.


डिमेंशिया का दोगुना खतरा होने का डर


शोधकर्ता 'तत्काल जरूरत' को दर्शाते हैं, जिससे बुजुर्गों में नींद सुधार की खास सिफारिश की पहचान की जा सके. शोधकर्ता डॉक्टर रेबेका रोबिन्स का कहना है कि नतीजे से नींद की कमी और डिमेंशिया के खतरे के बीच संबंध स्पष्ट होता है और हर रात पर्याप्त नींद हासिल करने में बुजुर्गों की मदद करने के महत्व को दर्शाता है.


विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 50 मिलियन लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और करीब 10 मिलियन नए मामले हर साल उजागर होते हैं. अल्जाइमर की बीमारी डिमेंशिया की सबसे आम शक्ल है और डिमेंशिया के मामलों में इसका 60-70 फीसदी योगदान हो सकता है.


यूके अल्जाइमर सोसायटी के मुताबिक, ब्रिटेन में 9 लाख से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे हैं और 2024 तक एक मिलियन आंकड़ा होने का अनुमान है. स्लीप फाउंडेशन का कहना है कि किसी अन्य उम्र के लोगों के मुकाबले बुजुर्गों में नींद की ज्यादा गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं. डिमेंशिया के कई प्रकार होते हैं जिसमें से अल्जाइमर की बीमारी सबसे आम है.


डिमेंशिया वैश्विक चिंता है, लेकिन सबसे ज्यादा अमीर देशों में देखी जाती है. वर्तमान में डिमेंशिया का इलाज नहीं है, लेकिन दवाइयां रफ्तार को धीमा कर सकती हैं. अगर शुरुआती स्तर पर पहचान हो जाए, तो ये ज्यादा प्रभावी इलाज हो सकता है. चीन की एक नई रिसर्च के मुताबिक, पर्याप्त नींद नहीं लेनेवाले बुजुर्गों को दिमागी खराबी और डिमेंशिया का खतरा 25 फीसद ज्यादा होता है. 

दांतों की हर समस्या में कारगर हैं ये देसी नुस्खे, जान लीजिए

दांतों की हर समस्या में कारगर हैं ये देसी नुस्खे, जान लीजिए

अक्सर लोग शिकायत करते सुने जाते हैं कि महंगे टूथपेस्ट के इस्तेमाल के बावजूद दांतों में सफेदी और चमक नहीं दिखाई देती. ऐसी स्थिति में दांतों की देखभाल के आसान घरेलू इलाज बहुत मुफीद हो सकते हैं. दांतों को साफ करना हो या चमक बढ़ाना या फिर दुर्गंध दूर करना, दांतों के लिए साधारण और देसी टोटके हाजिर हैं. ये टोटके दांतों और मसूढ़ों के लिए फायदेमंद साबित होंगे.


1- दांत चमकदार बनाने के लिए एक चम्मच खाने का सोडा, एक चम्मच बारीक किया हुआ नमक और पिसा हुआ सुहागा लेकर शीशी में रख लें. उससे अपने दांतों को साफ करें.


2- थोड़ा बेकिंग सोडा में  नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें और ब्रश की मदद से उसे दांतों पर अच्छी तरह लगाएं. उससे पहले दांतों को टिशू पेपर से रगड़ कर साफ कर लें.


3- सरसों के तेल में नमक मिलाकर सुबह शाम इस्तेमाल करने से दांतों से खून आना, मसूढ़ों और दांतों के दर्द में आराम पहुंचता है. इसके अलावा दांत चमकदार और मजबूत भी होते हैं.


4- सुबह दांत ब्रश करने से पहले एक चम्मच नारियल का तेल मुंह में डालकर दांतों के आसपास खूब अच्छी तरह घुमाएं और 15 मिनट तक तेल दांतों पर लगा रहने दें. फिर गुनगुने पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें. इस तरह हफ्ते में दो से तीन बार करने दांत साफ और सफेद हो जाएंगा.


5- सुबह ब्रश करने के बाद, सेब के सिरका में बराबर मात्रा में पानी डालकर कुल्ला करने से दांतों की बदबू मिनटों में खत्म हो जाती है. सिरका हफ्ता में दो बार से ज्यादा इस्तेमाल न करें.


6- संतरे के सूखे छिलके के साथ तेजपत्ता बारीक पीस कर रख लें. अब उस पाउडर को अंगुली की मदद से दांत की सफाई करें. घरेलू टूथ पाउडर दांतों के लिए निहायत मुफीद है.


7- एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच नारियल तेल में 2-3 कतरा पुदीना का तेल मिश्रित कर लें. अब उस मिश्रण को सामान्य टूथपेस्ट की तरह इस्तेमाल करें. ये घरेलू टोटका दांखों की देखभाल के साथ सफेदी भी लौटाता है.


8- ताजा एलोवेरा जूस या उससे तैयार जेल दांतों पर रगड़ें. फिर ब्रश से मसाज कर कुल्ली कर लें. ये काम आप ब्रश करने के बाद भी दोहरा सकते हैं. चंद हफ्तों में आपके चेहरे पर मुस्कुराहट सफेद जगमगाते दांतों से सज जाएगी.


Note: यह खबर रिसर्च और मान्यताओं के आधार पर लिखी गई है. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.  

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचना है तो आज ही डाइट में शामिल करें ये चीजें

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचना है तो आज ही डाइट में शामिल करें ये चीजें

कैंसर सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है. कैंसर से पीड़ित व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहता है. ऐसे में हर कोई सोचता है कि किसी भी तरह इस गंभीर बीमारी की चंगुल में न आए. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो कैंसर के खतरे को कम करता है.


- कैंसर के खतरे को कम करना है तो खाने में हरी सब्जियां जरूर खाएं. खासकर फूलगोभी और ब्रोकली का सेवन जरूर करना चाहिए. यह हरी सब्जियां कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है.


-फलों का सेवन करने से आपकी सेहत अच्छी रहती है. जिन फलों से विटामिन सी और फाइबर मिलते हैं उनको खाने से आपकी सेहत बेहतरीन रह सकती है और कैंसर का खतरा कम हो जाता है.


- हल्दी का सेवन भी कैंसर के खतरे को कम करता है. यह कीमोथैरेपी का असर बढ़ाने में मददगार है.


-अदरक भी कैंसर के खतरे से बचाने में सहायक है. इतना ही नहीं अदरक कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से जो परेशानी होती है उसमें भी मददगार साबित होती है.


-आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लहसुन और प्याज भी कैंसर को खत्म करने में मदद करता है. इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी बड़ी आंत, स्तन फेफड़े की कोशिकाओं को नष्ट करता है.


Note: यह खबर रिसर्च और मान्यताओं के आधार पर लिखी गई है. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. 

क्या घी का इस्तेमाल करने से वजन घटाने में मिल सकती है मदद? जानिए पूरी हकीकत

क्या घी का इस्तेमाल करने से वजन घटाने में मिल सकती है मदद? जानिए पूरी हकीकत

अगर आप वजन में कमी लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो जरूर आपने अपनी डाइट से फैट हटा दिया होगा और पहला नंबर घी का आता है. लेकिन क्या होगा जब आपको पता चले कि जिस घी को आपने छोड़ा है, उसमें न सिर्फ बहुत ज्यादा पोषण संबंधी स्वास्थ्य फायदे हैं बल्कि आपको वजन घटाने में भी मदद मिल सकती है. आपने बिल्कुल ठीक सुना. घी अतिरिक्त वजन बढ़ाने का जिम्मेदार नहीं बल्कि ये ज्यादा वजन से छुटकारा दिलाने में मदद करता है.


क्या घी का सेवन घटाता है शरीर का वजन?


ज्यादातर भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल किया जानेवाला घी 99.9 फीसद फैट होता है. घी सैचुरेटेड फैट से तैयार किया जाता है और इस तरह कमरे के तापमान पर रखने से खराब नहीं होता है. घी गाय, बकरी, भेड़, भैंस के दूध से बनाया जा सकता है. हालांकि, ज्यादातर गाय के दूध का इस्तेमाल कर तैयार किया जाता है. घर पर बनाया गया घी फॉस्फोलिपिड की मौजूदगी के चलते ज्यादा समय तक सुरक्षित रहता है जबकि व्यावसायिक रूप से तैयार घी में ये नदारद रहता है.


घी में फैटी एसिड संरचना को समझने के लिए रिसर्च किया गया. पाया गया कि घी डोकोसैक्सिनोइक एसिड का अच्छा स्रोत है. डोकोसैक्सिनोइक एसिड सबसे लोकप्रिय ओमेगा-3 फैटी एसिड है. ओमेगा-3 फैटी एसिड जरूरी फैट है जिसे हमें अपने डाइट से सेवन की जरूरत होती है क्योंकि हमारा शरीर उसे नहीं पैदा कर सकता.


डोकोसैक्सिनोइक एसिड खास स्थितियों जैसे कैंसर, हार्ट अटैक, इंसुलिन प्रतिरोध, जोड़ों के दर्द का खतरा कम करने में मदद कर सकता है. आयुर्वेद के मुताबिक, घी लंबी उम्र करने में योगदान देता है और बहुत सारी बीमारियों से शरीर की सुरक्षा करता है. इसके अलावा, माना जाता है कि घी जोड़ों को पोषण और चिकनाई देता है और फैट में घुलनशील पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है. रोजाना एक या दो छोटा चम्मच घी की उचित मात्रा है.


न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर मानसी छतरथ के मुताबिक, सलाह दी जाती है कि अगर आप वजन में कमी लाने का प्रयास कर रहे हैं, तो घी का सेवन करें क्योंकि ये अमीनो एसिड में समृद्ध है और फैट सेल्स के आकार को छोटा करने में मदद करता है. मानसी आगे बताती हैं कि घी में करीब 99.9 फीसद फैट होने की वजह से, मात्रा पर जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि दो चम्मच से ज्यादा की सिफारिश नहीं की जाती है. अगर आप ओमेगा-3 के अन्य स्रोत जैसे अलसी, अखरोट या मछली के तेल का सेवन कर रहे हैं, तो आपको ओमेगा-3 के स्रोत के तौर पर घी की जरूरत नहीं होगी.


वजन में कमी लाने के लिए घी का इस्तेमाल

विशेषज्ञों का कहना है कि घी ओमेगा-3 फैट्स और ओमेगा-6 फैट्स में समृद्ध होता है और ये वजन घटाने के लिए बहुत अच्छा हो सकता है. घी आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर होता है जो फैट सेल्स का आकार छोटा कर सकता है. इसके अलावा, घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड आपके इंच को कम करने में मदद कर सकता है और आखिरकार अतिरिक्त वजन कम करने में आपको मदद मिल सकती है. 

क्या आपने कभी लहसुन की चाय पी है? फायदे जानकार हो जायेंगे हैरान

क्या आपने कभी लहसुन की चाय पी है? फायदे जानकार हो जायेंगे हैरान

Garlic Tea: चाय का नाम लेते ही अदरक वाली चाय याद आती है. उसकी खुशबू, स्वाद के कहने ही क्या. कुछ लोग हेल्थ के लिहाज से ग्रीन टी, ब्लैक टी आदि पीना पसंद करते हैं. पर क्या आपने कभी लहसुन की चाय पी है? अगर नहीं तो आज से ही पीना शुरू करें. कैसे बनेगी और इसके फायदे क्या हैं, हम बताते हैं.
लहसुन वाली चाय (garlic tea) कैसे बनेगी, ये जानने से पहले आपको लहसुन की चाय के फायदे जानने चाहिए.
लहसुन कई गुणों से युक्त होता है. इसमें जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं. इसलिए इसकी चाय सेहत के लिए फायदेमंद होती है.
ये चाय डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद है. इससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है. इसमें चयापचय बढ़ाने वाले गुण होते हैं. जो वजन घटाने में कारगर है.
इस चाय को पीने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित होता है. इसलिए दिल से जुड़ी बीमारियों में भी ये लाभदायी है.
इससे शरीर में इम्युनिटी सुधरती है. लहसुन की चाय शरीर से सूजन कम करती है.
कैसे बनाएं लहसुन वाली चाय
– एक कप पानी लें. लहसुन की एक-दो कलियां कूटकर डाल दें. पानी में उबाल आने दें.
– इस पानी में एक चम्मच काली मिर्च डाल दें. चुटकी भर नमक भी डाल सकते हैं.
– पांच मिनट तक चाय को उबलने दें. फिर गैस बंद कर दें.
– चाय को छान लें.

 

विश्व कैंसर दिवस पर बालको मेडिकल सेंटर करने जा रहा है “योगाथॉन" और चिकित्सा शिविर का आयोजन

विश्व कैंसर दिवस पर बालको मेडिकल सेंटर करने जा रहा है “योगाथॉन" और चिकित्सा शिविर का आयोजन

रायपुर, विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर बालको मेडिकल सेंटर कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए कटिबद्ध है। मध्य भारत का सुप्रसिद्ध एवं सर्व सर्वसुविधायुक्त, आधुनिक कैंसर अस्पताल, बालको मेडिकल सेंटर इस वर्ष "योगाथॉन" का आयोजन कर रहा है।
इस अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए बालको मेडिकल सेंटर के मुख्य परिचालन अधिकारी एस. वेंकट कुमार ने कहा, “हम कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम समय समय पर स्क्रीनिंग कैंप लगाकर कैंसर की जांच एवं शीघ्र निदान करते है। हमारी विभिन्न स्वास्थ्य वार्ताओं के माध्यम से, हम जागरूकता पैदा करते हैं और शुरुआती जांच को प्रोत्साहित करते हैं। विश्व कैंसर दिवस पर बालको मेडिकल सेंटर इस वर्ष "योगाथॉन" का आयोजन कर रहा है। जिसके माध्यम से हम लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और योग के माध्यम से तनाव-मुक्त जीवन शैली को अपनाने का सन्देश देना चाहते हैं।
यह योगाथॉन सुबह 6 बजे रायपुर में अनुपम गार्डन में आयोजित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त बालको मेडिकल सेंटर 4-8 फरवरी 2021 तक मुफ्त कैंसर जांच शिविर का भी आयोजन कर रहे है, जिसके अंतर्गत पैप स्मीयर, एफ. एन. ए. सी., ब्रश सायटोलाजी, डिजिटल मैमोग्राफी एवं कैंसर, स्त्री रोग, एवं आहार विशेषज्ञ द्वारा परामर्श का लाभ लोगों को मिलेगा। इसके इलावा जिला अस्पताल, कालीबाड़ी में भी हमारे द्वारा निःशुल्क कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। स्तन एवं बच्चेदानी के कैंसर पर बालको मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों द्वारा एस. बी. आइ. के लेडीज क्लब में व्याख्यान भी दिया जायेगा। शाम को माई एफ.एम. 94.3 के साथ मिलकर मैग्नेटो मॉल में एक सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जायेगा।“


इस अवसर पर, बालको मेडिकल सेंटर में नए मेडिकल डायरेक्टर का भी आगमन हुआ है। डॉक्टर प्रोफेसर अनुराग श्रीवास्तव जी ने बालको मेडिकल सेंटर में हाल ही में बतौर मेडिकल डायरेक्टर कार्य प्रभार संभाला है। सर्जिकल क्षेत्र में 42 सालों के अनुभवी, डॉक्टर श्रीवास्तव पहले एम्स, नई दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जिकल डिसिप्लिन्स के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से उन्होंने कहा, "कैंसर एक बिमारियों का गुट हैं जिसमें क्रमादेशित कोशिकाओं की मृत्यु की क्षमता दोषपूर्ण हो जाती है और वे लगातार विभाजित होते रहते हैं। उन्होंने कैंसर के विभिन्न कारणों को समझाया जिसमें तम्बाकू का सेवन सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, गतिहीन जीवन शैली, मोटापा और बढ़ती उम्र अन्य कारक हैं। उन्होंने भगवद् गीता से सिखाया कि कैसे हमारे पूर्वजों ने स्वस्थ सात्त्विक भोजन की आदतों का पालन किया और स्वस्थ रहने के लिए शराब और तम्बाकू जैसे व्यसनों से दूर रहना सिखाया।“
कैंसर उपचार में विभिन्न उन्नत के बारे में बताते हुए, जो बालको मेडिकल सेंटर प्रदान करता है, चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख डॉ। जयेश शर्मा ने कहा, “हम यहां विभिन्न प्रकार के कैंसर का इलाज करते हैं। जब शुरुआती अवस्था में रोगी हमारे पास आते हैं तो हम खुश हो जाते हैं, क्योंकि तब कैंसर के पूर्णः ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है। हाल ही में हमने एक युवा महिला का इलाज किया है, जिसे डर था कि उसे स्टेज 4 कैंसर है और उसके जीने की कोई उम्मीद नहीं है, लेकिन उन्नत और सटीक नैदानिक सुविधाओं के कारण जो हमारे यहां उपलब्ध हैं, यह पाया गया कि उसे स्टेज 1 कैंसर है और अब वह सफलतापूर्वक इलाज के बाद पूर्णतः स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। इसी प्रकार हमने एक 95 वर्षीया वृद्ध का भी कैंसर का इलाज किया है जो अभी पूरी तरह से स्वस्थ है।“

बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) के बारे में:
बालको मेडिकल सेंटर, वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की पहली प्रमुख पहल, जो कि नया रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्थापित की गई है, में 170 बेड, अत्याधुनिक तृतीयक देखभाल ऑन्कोलॉजी सुविधा है, जिसमें 50 से अधिक शल्य चिकित्सा, विकिरण, हेमटोलॉजिकल और उपशामक देखभाल विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। यह पूरे मध्य भारत में सबसे बड़ी और सबसे उन्नत ऑन्कोलॉजी सुविधा है। VMRF का उद्देश्य भारत की आबादी तक उचित और सस्ती कीमत पर आसान पहुंच के भीतर अल्ट्रा-मॉडर्न, मल्टी-मॉडेलिटी डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय सुविधाएं लाना है।
 

कब्ज की समस्या को करना चाहते हैं खत्म, बना लें इन फूड्स से दूरी

कब्ज की समस्या को करना चाहते हैं खत्म, बना लें इन फूड्स से दूरी

कब्ज एक ऐसी बीमारी है जो अगर लग जाए तो आसानी से पीछा नहीं छोड़ती. यह कई बीमारियों की जड़ भी है. शुरुआत में लोग कब्ज की समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है. कब्ज को संयमित खान-पान, व्यायाम के द्वारा हराया जा सकता है. आज हम आपको उन फूड्स के बारे में बता रहे हैं जो जिनकी वजह से कब्ज होती है.


शराब

शराब का सेवन स्वास्थ्य के हानिकारक है. शराब कब्ज का भी कारण बनती है विशेष रूप से जब बड़ी मात्रा में शराब का सेवन किया जाता है, तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. ये प्रभाव कब्ज के जोखिम को बढ़ा सकता है. ये प्रभाव व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं.


प्रोसेस्ड अनाज

प्रोसेस्ड अनाज और उनके उत्पाद, जैसे कि सफेद चावल, सफेद पास्ता, और सफेद ब्रेड भी कब्ज का कारण है. इनमें साबुत अनाज की तुलना में कम फाइबर होते हैं, जो आम तौर पर अधिक कब्ज बनाते हैं.


डेयरी प्रोडक्ट्स
अगर आप रोजाना ज्यादा मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करते हैं तो आपको कब्ज इनसे भी हो सकती है. गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन के प्रति संवेदनशीलता के कारण शिशु, बच्चे और बच्चे विशेष रूप से जोखिम में दिखाई देते हैं.


रेड मीट
लाल मांस के सेवन से भी कब्ज होती है. यह आमतौर पर वसा में उच्च और फाइबर में कम होता है. यह पोषक तत्व संयोजन कब्ज के जोखिम को बढ़ा सकता है.


लस युक्त खाद्य पदार्थ
कब्ज से बचने के लिए ग्लूटेन वाले फूड्स से परहेज करने की जरूरत है. ग्लूटेन एक प्रोटीन है जो अनाज में पाया जाता है जैसे कि गेहूं, जौ, राई, स्पेल्ड, कामोट. कुछ लोग कब्ज का अनुभव कर सकते हैं जब वे खाद्य पदार्थ खाते हैं जिसमें लस होता है. यह एक स्थिति है जिसे ग्लूटेन असहिष्णुता या सीलिएक रोग के रूप में जाना जाता है.


तला हुआ भोजना या फास्ट फूड
तले हुए खाना या फास्ट फूड वसा में उच्च और फाइबर में कम होते हैं. यह संयोजन पाचन को धीमा कर सकता है. चिप्स, कुकीज, चॉकलेट और आइसक्रीम जैसे फास्ट फूड स्नैक्स के साथ अधिक फाइबर युक्त स्नैक विकल्पों को बदल सकते हैं. इनकी बजाय आप फल और सब्जियों का सेवन करें. 

शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने का मतलब अनेकों बीमारियों को न्यौता देना

शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने का मतलब अनेकों बीमारियों को न्यौता देना

शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने का मतलब अनेकों बीमारियों को न्यौता देना है। बता दें, हीमोग्लोबिन एक आयरन युक्त प्रोटीन है। बिना आयरन के शरीर में हीमोग्लोबिन नहीं बन सकता। हीमोग्लोबिन खून को उसका लाल रंग देता है। यह फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचाता है। अगर शरीर में आयरन की कमी होगी तो हीमोग्लोबिन कम होगा, जिससे शरीर को मिलने वाले ऑक्सीजन में भी कमी होने लगेगी। पुरुषों की मुकाबले महिलाओं में आयरन की कमी ज्यादा देखने को मिलती है। पुरूषों में सामान्य हीमोग्लोबिन 13.5-17.5 ग्राम और महिलाओं में 12.0-15.5 ग्राम प्रति डीएल होना चाहिए। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होना एनीमिया कहलाता है।

शरीर में खून की कमी होने के कारण

1. पोषक तत्वों की कमी

2. आयरन की कमी

3. विटामिन बी-12 की कमी

4. फॉलिक एसिड की कमी

5. स्मोकिंग

6. एजिंग

7. ब्लीडिंग

हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण:
-जल्दी थकान होना
-त्वचा का फीका, पीला दिखना
-आंखों के नीचे काले घेरे होना
-सीने और सिर में दर्द होना
-तलवे और हथेलियों का ठंडा पड़ना
-शरीर में तापमान की कमी होना
-चक्कर और उल्टी आना, घबराहट होना
-पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द होना
-सांस फूलना, धड़कनें तेज होना
-अक्सर टांगें हिलाने की आदत
-बालों का अधिक झड़ना

हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए ये खाएं:
अनार
एक अनार हमें सौ बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है। अनार आयरन कैल्शियम, सोडियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और विटामिन से भरपूर होता है। अनार शरीर में खून की कमी को बेहद जल्द पूरा करता है।

चुकंदर
चुकंदर शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने का रामबाण इलाज है। चुकंदर का जूस लगातार पीने से खून साफ रहता है और शरीर में खून की कमी भी नहीं होती। चुकंदर में आयरन के तत्‍व अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे नया खून जल्दी बनता है।

केला
केले में मौजूद प्रोटीन, आयरन और खनिज शरीर में खून बढ़ाते हैं।

गाजर
लगातार गाजर का जूस पीने या गाजर खाने से शरीर में खून की कमी को पूरा किया जा सकता है।

अमरूद
पका अमरूद खाने से शरीर में हीमोग्लोबीन की कमी नहीं होती।

सेब
अगर आप एनीमिया से ग्रसित हैं तो सेब खाना लाभकारी रहेगा। सेब खाने से शरीर में हीमोग्लोबीन की मात्रा बढ़ती है।

अंगूर
अंगूर में विटामिन, पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है। अंगूर में ज्यादा आयरन होने से यह शरीर में हीमोग्लोबीन बढ़ाने में सहायक है। अंगूर हमारी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

संतरा
संतरा विटामिन-सी के अलावा फॉस्फोरस, कैल्शियम और प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत है। संतरा खाने से शरीर में ना केवल खून बढ़ता है बल्कि खून साफ भी रहता है।

टमाटर
टमाटर सब्जी ही नहीं, बल्कि एक पौष्टिक और गुणकारी फल है। टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन-सी होता है। टमाटर का सूप या टमाटर खाने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।

हरी सब्जियां और सलाद
शरीर में आयरन की कमी दूर करने के लिए पालक, सरसों, मेथी, धनिया, पुदीना, बथुआ, ब्रोकली, गोभी, बीन्स, खीरा खूब खाएं। शरीर में हीमोग्लोबीन बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां भोजन में शामिल करें। पालक के पत्तों में सबसे अधिक आयरन पाया जाता है।

सूखे मेवे
हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए खजूर, बादाम और किशमिश खाएं। इनमें आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है। रोजाना दूध के साथ खजूर खाने से शरीर को बहुत-से फायदे होते हैं। खजूर खाने से शरीर को भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है।

गुड़
गुड़ एक प्राकृतिक खनिज है जो आयरन का प्रमुख स्रोत है। यह विटामिन से भरपूर होता है। गुड़ शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। लगातार गुड़ खाने से पेट की समस्‍याओं से भी निजात पायी जा सकती है।

इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन बी-12 की कमी को पूरा करने के लिए मीट, चिकन, मछली, अंडे का भी सेवन कर सकते हैं। बता दें, अंडे के पीले भाग में भरपूर मात्रा में विटामिन बी-12 पाया जाता है।

 

नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. Just 36 News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

सावधान! क्या आपको भी नींद नहीं आती, तो हो सकती हैं ये समस्याएं

सावधान! क्या आपको भी नींद नहीं आती, तो हो सकती हैं ये समस्याएं

Health Tips: अक्सर लोगों को सोते ही नींद नहीं आती. लोग सोने के लिए कभी टीवी देखते हैं तो कभी बुक्स पढ़ते हैं. क्या आप जानते हैं सही तरह से नींद ना आएं तो कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं. जी हां, आज हम आपको बता रहे हैं नींद ना आने से क्या–क्या दिक्कतें होती हैं. साथ ही ये भी बताएंगे कि अच्छी नींद का क्या मतलब है.


नींद ना आने से होने वाली समस्याएं-

कोई भी डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है.
डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं.
हार्ट प्रॉब्लम्स बढ़ने लगती हैं.
मोटापा बढ़ने लगता है.
हमेशा बीमार या सुस्त महसूस करते हैं.

क्या होती है अच्छी नींद-

एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, जो लोग बेड पर लेटते ही सो जाते हैं या फिर आधे घंटे से भी कम समय सोने में लगाते हैं. साथ ही रात में उनकी नींद नहीं टूटती तो समझ लीजिए उनकी नींद सबसे बेहतर है. ऐसे लोगों की नींद ना सिर्फ अच्छी होती है बल्कि वे हेल्दी भी रहते हैं.


नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. Just 36 News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

 

बीमारियों की अनुपस्थिति का मतलब यह भी नहीं है कि आप स्वस्थ हैं

बीमारियों की अनुपस्थिति का मतलब यह भी नहीं है कि आप स्वस्थ हैं

क्या आपको यह पसंद है की जब आप बीमार हो और खेलने के लिए बाहर नहीं जा सकते ? बिलकूल नही ! बीमार रहना किसी को पसंद नहीं है ! हालाँकि, आप अपनी पूरी कोशिश करने के बावजूद, कई बार बीमार पड़ जाते हैं ! यह मौसम में बदलाव या किसी वायरस के कारण हो सकता है, आप कभी भविष्यवाणी नहीं कर सकते। लेकिन, बीमारियों की अनुपस्थिति का मतलब यह भी नहीं है कि आप स्वस्थ हैं !  

 

क्यों अच्छा स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है ?

कोशिकाएं सभी जीवित जीवों की मूलभूत इकाइयाँ हैं। वे विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थों से बने होते हैं। कोशिकाएँ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाती हैं। इसके अलावा, हमारे शरीर में विभिन्न विशिष्ट गतिविधियां होती हैं, जैसे हृदय रक्त पंप करता है, गुर्दे मूत्र को फ़िल्टर करता है, मस्तिष्क लगातार सोच रहा है, फेफड़े सांस लेने में मदद करते हैं।इस तरह, हमारे शरीर में विभिन्न अंगों के बीच बहुत अंतर-संबंध है। इन सभी गतिविधियों के लिए, हमारे शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। सेल और टिश्यू के कामकाज के लिए भोजन आवश्यक है। इसलिए, यदि आप ठीक नहीं हैं, तो आपकी सभी शारीरिक गतिविधियाँ बाधित होने लगती हैं।

 

स्वास्थ्य का महत्व

पूर्ण स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति है। स्वस्थ जीवन के लिए,  संतुलित आहार और नियमित रूप से व्यायाम करने की आवश्यकता होती है। व्यक्ति को उचित आश्रय में रहना चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और स्वच्छता की अच्छी आदतें होनी चाहिए। हमें वास्तव में स्वस्थ रहने के लिए खुश रहने की आवश्यकता है। अगर हम एक-दूसरे के साथ गलत व्यवहार करते हैं और एक-दूसरे से डरते हैं, तो स्वस्थ पर बुरा परभव पड़गा । व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सामाजिक समानता और सद्भाव महत्वपूर्ण हैं।सभी जीवों का स्वास्थ्य उनके आसपास या उनके वातावरण पर निर्भर करता है। हमारा सामाजिक वातावरण हमारे व्यक्तिगत स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण कारक है। सार्वजनिक स्वच्छता व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम नियमित रूप से कचरा इकट्ठा करें और उसे साफ करें। हमें किसी ऐसी एजेंसी से भी संपर्क करना चाहिए जो नालियों को साफ करने की जिम्मेदारी ले सके। इसके बिना, आप अपने स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। हमें स्वास्थ्य के लिए भोजन चाहिए और भोजन के लिए, हमें काम करके पैसा कमाना होगा। इसके लिए काम करने का अवसर उपलब्ध होना है। इसलिए, अच्छी आर्थिक स्थिति और रोजगार, व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं

 

क्या आपको भी है सुबह उठते ही फोन देखने की आदत, जान लें इसके नुकसान

क्या आपको भी है सुबह उठते ही फोन देखने की आदत, जान लें इसके नुकसान

आजकल के समय में मोबाइल हर किसी की जरूरत बन चुका है. आज मोबाइल के बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. यह अब हर व्यक्ति के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. मोबाइल लोगों की जिंदगी में इसकदर हावी हो गया है कि लोग सोते -उठते यहां तक की खाते समय भी मोबाइल का ही इस्तेमाल करते हैं. बहुत से लोग ऐसे भी हा जिन्हें सुबह उठते ही सबसे पहले फोन चलाने की आदत होती है.
क्या आप जानते हैं कि सुबह उठते ही फोन का प्रयोग करने से एक नहीं बल्कि कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं. अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो आज हम आपको इससे होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं.
– यूनाइटेड किंगडम में किए गए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो लोग सुबह उठते ही फोन यूज करते हैं उनके दिन की शुरुआत स्ट्रेस से भरपूर होती है. साथ ही ऐसे लोगों को अपने काम करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
– विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह उठते ही जब हम सभी मोबाइल में नोटिफिकेशन देखते हैं तो हमारा दिमाग उस समय सिर्फ उसी विषय के बारे में सोचने लगता है. जिस वजह से हमारा मन किसी दूसरे काम में नहीं लग पता है. ऐसा करने से हमारे कार्यक्षमता पर भी असर पड़ता है.
– सुबह उठते ही फोन देखते समय जो चीज हमें दिखती हैं हम दिन भर उसी के बारे में सोचते हैं जिससे हमें तनाव और एंजाइटी का सामना करना पड़ता है.
– सुबह उठते ही मेल या नोटिफिकेशन चेक करते हैं तो हम बीते दिनों की बातों को पढ़कर परेशान हो जाते हैं और हम पीछे की बातों को भूलाने की बजाए फिर से अपना मन और दिमाग पुरानी बातों में लगा लेते हैं.
 

क्या आप भी अपने शरीर पर मौजूद मस्सों से हैं परेशान ? तो अपनाइए ये आसान नुस्खे और पाइये मस्सो से छुटकारा

क्या आप भी अपने शरीर पर मौजूद मस्सों से हैं परेशान ? तो अपनाइए ये आसान नुस्खे और पाइये मस्सो से छुटकारा

त्वचा की देखभाल में हम कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। वहीं त्वचा में मौजूद मस्सों को जड़ से हटाने के लिए हम तमाम तरह के उपाय आजमाते तो जरूर है, लेकिन फायदा होता दिखाई नहीं देता। अगर आपकी त्वचा में बड़े या छोटे मस्से उभर आएं हैं? तो हम आपको इस लेख में कुछ ऐसे टिप्स बता रहें हैं जिन्हें अपनाने के बाद आप इस समस्या से राहत पा सकते है वो कैसे ?

आइए जानते हैं...

1 सेब का सिरका मस्सों को जड़ से खत्म करने के लिए बेहद प्रभावकारी उपाय है। इसे प्रतिदिन कम से कम 3 बार मस्सों पर रुई की सहायता से लगाएं और ऊपर से रुई चिपका दें। कुछ ही दिनों में मस्से का रंग गहरा हो जाएगा और उसकी त्वचा सूखकर निकल जाएगी। अगर इसे लगाने के बाद आपको कोई परेशानी महसूस हो, तो आप ऐलोवेरा जैल लगा सकते हैं।

2 लहसुन की कलियों को छीककर काट लें और इसे मस्सों पर रगड़ें या फिर इसका पेस्ट बनाकर मस्सों पर लगाएं। ऐसा करने से भी कुछ ही दिनों में मस्से समाप्त हो जाएंगे। नींबू के रस में रुई भि‍गोर मस्से पर लगाना भी लाभप्रद हो सकता है।

3 आलू का रस लगाना या फिर आलू को काटकर मस्सों पर रगड़ना भी एक बढ़ि‍या विकल्प है, अनचाहे मस्सों से निजात पाने का। आप चाहें तो आलू का रस रात भर मस्सों पर लगाकर भी रख सकते हैं।

4 बेकिंग सोडा का इस्तेमाल त्वचा की कई समस्याओं को समाप्त करने के लिए किया जाता है। मस्से समाप्त करने के लिए बेकिंग सोडा को अरंडी के तेल में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे मस्सों पर लगाएं। कुछ ही दिनों में फर्क नजर आएगा।

5 अनानास का रस, फूलगोभी का रस, शहद या फिर प्याज के रस का प्रयोग भी मस्सों को समाप्त करने के लिए किया जा सकता है। इसमें मस्सों को खत्म करने वाले विशेष एंजाइम्स होते हैं।

 

ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

क्या आप भी हैं अपने बढ़े वजन से परेशान ? तो खाइए ये फल, मिलेंगे वजन घटाने में मदद

क्या आप भी हैं अपने बढ़े वजन से परेशान ? तो खाइए ये फल, मिलेंगे वजन घटाने में मदद

कई शोधों में यह भी पाया गया है कि पपीते के बीजों में शरीर की अतिरिक्त वसा को अवशोषित करने से रोकने की क्षमता होती है जिससे वजन बढ़ने और फूलने की समस्या का समाधान होता है | कच्चे या पेस्ट के रूप में ये बीज शरीर की को बेहतर शेप देने में बेहद मददगार होते हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो वजन कम ना होने के कारण परेशान रहते हैं तो अब आपको अपनी डायट में थोड़ा बदलाव करना चाहिए |

पपीते को अपनी डायट में शामिल करके आप आसानी से वजन कम कर सकते हैं | पपीता एंटीऑक्सीडेंट और खनिजों से भरपूर होता है और इसमें कैलोरी की मात्रा भी कम होती है | चलिए जानते हैं पपीता और कैसे कर सकता है आपकी वजन कम करने में मदद। वजन कम करने से अधिक यह महत्वपूर्ण है कि आप शरीर को पोषण देते हुए वजन कम करें | पपीता एक्सट्रा कैलोरी को कम करने में मदद करता है |

पपीता शरीर से ना सिर्फ विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद करता है बल्कि ये मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है, पाचन प्रक्रिया को सुचारू करने के लिए फाइबर की आपूर्ति भी करता है। कई शोधों में यह भी पाया गया है कि पपीते के बीजों में शरीर की अतिरिक्त वसा को अवशोषित करने से रोकने की क्षमता होती है जिससे वजन बढ़ने और फूलने की समस्या का समाधान होता है |

कच्चे या पेस्ट के रूप में ये बीज शरीर की को बेहतर शेप देने में बेहद मददगार होते हैं। अपने वजन घटाने के प्लान में आप पपीते का सेवन नियमित अंतराल पर करें | आपको सुबह के नाश्ते से, लंच और डिनर में, बेशक थोड़ी मात्रा में लेकिन पपीते का सेवन करना है | आप पपीते को सलाद बनाकर, चाट के रूप में या फिर फल के रूप में भी खा सकते हैं | पपीते का शेक बनाकर पीता भी फायदेमंद है | यही कारण है कि पपीता उन लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है जो थोड़ा हमेशा वजन कम करने के बारे में सोचते हैं |


ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

क्या आप भी रोज नहाते हैं ? तो हो जाइये सावधान, हो सकते हैं आपके शरीर को ये नुकसान, जाने कैसे

क्या आप भी रोज नहाते हैं ? तो हो जाइये सावधान, हो सकते हैं आपके शरीर को ये नुकसान, जाने कैसे

अगर आप भी सर्दियों में नहाने से बचते हैं तो अच्छी बात है. जी हां, आपको पढ़कर हैरानी होगी कि हम क्या कह रहे हैं लेकिन ये सच हैं. अगर आप रोजाना नहीं नहाते तो ये आपकी हेल्थ के लिए अच्छा है. आमतौर पर लोग सर्दियों में कई बार नहाने से बचते हैं लेकिन इस बात को किसी को बताने में भी शर्माते हैं. लेकिन अब आप बिंदास होकर आप ना नहाएं क्योंकि रोजाना नहाने से आपकी स्किन को नुकसान को होता है.

क्या कहती है रिसर्च-
हालिया हुईं दो रिसर्च के मुताबिक, अगर आप सोचते हैं कि रोजाना नहाकर आप बहुत अच्छा कर रहे हैं तो आप गलत सोच रहे हैं. दरअसल, बहुत ज्यादा नहाने से शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम (microbiome) यानि छोटे-छोटे जीव डैमेज हो जाते हैं. माइक्रोब्स के डैमेज होने से एक्ने की दिक्कत हो जाती है.

हालांकि रिसर्च में बहुत ज्या‍दा नहाने से माइक्रोबायोम पर होने वाले प्रभावों को देखा गया है. लेकिन अधिकारिक तौर पर ऐसा कुछ नहीं कहा गया कि शरीर से दुर्गन्ध को रोकने और माइक्रोबायोम को डैमेज होने से बचाने के लिए सप्ताह में कितनी बार नहाना चाहिए.

क्यों जरूरी है माइक्रोबायोम-
माइक्रोबायोम बैक्टीरिया, वायरस कई तरह के ऐसे माइक्रोब्स का कलेक्शन है जिस पर ह्यूमन बॉडी जिंदा रहती है. साथ ही ये हर इंसान की हेल्थ के लिए जरूरी हैं. हमारा पूरा शरीर माइक्रोब्स की पूरी कम्यूनिटी पर डिपेन्डेंट हैं. ये जर्म्स से हमारी रक्षा करते हैं. फूड से होने वाली एलर्जी से बचाते हैं साथ ही विटामिन प्रोड्यूस करते हैं.

रिसर्च के मुताबिक, माइक्रोबायोम इसलिए भी इंसान के लिए जरूरी हैं क्योंकि इसके बिना व्यक्ति का इम्यू्न सिस्टम, डायजेशन और हार्ट काम करना बंद कर देते हैं.

क्या कहती है इससे पहले की रिसर्च-
2014 में शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च के दौरान ये भी दावा किया था कि पसीने को पीने वाले ये बैक्टीरिया एक्ने गंभीर घावों के ट्रीटमेंट में भी सहयोग करते हैं. रिसर्च में ये भी पाया गया कि मेटाबॉलिस अमोनिया नामक बैक्टीरिया का सबसे मेजर कॅपोनेंट स्वेट होता है जो कि स्किन हेल्थ को इंप्रूव करता है और कई तरह के स्किन डिस्ऑर्डर का ट्रीटमेंट भी करता है.

2015 में आई इसी तरह की ए‍क रिसर्च में पाया गया कि ये बैक्टीरिया आमतौर पर अंडरऑर्म्स और स्वेटिंग में पाए जाते हैं. यॉर्क यूनिवर्सिटी के डॉ. डेन बॉडोन का कहना है कि ये बैक्टीरिया अंडरऑर्म्स से बाहर आते हैं और माइक्रोबायोटा से मिलकर एक्टिव हो जाते हैं.

ये भी कारण है ना नहाने का-
एक अन्य रिसर्च के मुताबिक, रोजाना नहाने से स्किन में मौजूद एसेंशियल ऑयल निकल जाता है इससे स्किन ड्राई हो जाती है और स्किन में शाइनिंग भी नहीं रहती. इतना ही नहीं, शरीर में रेड स्पॉट दिखने लगते हैं और दर्द होना शुरू हो जाता है. इससे स्किन डिस्ऑर्डर होने का रिस्क बढ़ जाता है. हालांकि अगर आप रोजाना ऑयल से बॉडी की मसाज करते हैं तो इस खतरे से बच सकते हैं.

 

ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.  

अगर आप भी ब्रेकफास्ट नहीं करते तो हो जाएं सावधान, हो सकता है ये नुकसान

अगर आप भी ब्रेकफास्ट नहीं करते तो हो जाएं सावधान, हो सकता है ये नुकसान

सूबह का नास्ता सेहत के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. एक स्वस्थ ब्रेकफास्ट करना शरीर के लिये बेहद लाभदायक होता है. साथ ही इससे तनाव का स्तर कम होता है. सुबह के नाश्ते में आपको पोषण संबंधी चीजों का सेवन करना चाहिये. जैसे अनाज, दूध, नट्स, पोहा, इडली, दलिया, उपमा या अंडे आदि. प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का ब्रेकफास्ट आपको दिन में ऊर्जावान रहने में मदद करता है. आपको नाश्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे आप कितने भी व्यस्त क्यों न हो.

हृदय रोगों का कारण बन सकता है
अध्ययनों से पता चलता है कि एक हेल्दी ब्रेकफास्ट करने वाले लोगों को हार्ट संबंधित बीमारी होने का खतरा कम होता है. वहीं, ब्रेकफास्ट स्किप करने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां हो सकती हैं.

टाइप -2 मधुमेह का उच्च जोखिम
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने एक अध्ययन किया जिसका उद्देश्य खाने की आदतों और स्वास्थ्य के बीच संबंध का पता लगाना था. लगभग छह वर्षों तक किए गए शोध में 46,289 महिलाओं ने भाग लिया. अध्ययन के रिजल्ट हैरान करने वाले थे.जिन महिलाओं को नाश्ते से परहेज करने की आदत थी, उनमें टाइप -2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा उन महिलाओं की तुलना में अधिक था, जो अपना दैनिक नाश्ता करती थीं. वहीं, कामकाजी महिलाएं जिन्होंने अपने सुबह के भोजन को छोड़ दिया, उनमें टाइप 2 मधुमेह के विकास की 54 फीसदी अधिक संभावना थी.


ब्रेकफास्ट स्किप करना मोटापे का कारण बन सकता है
अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग सुबह का नाश्ता नहीं करते उनमें वजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है. यदि आप वजन कम करने के बारे में सोच रहे हैं तो नाश्ते को छोड़ने के बारे में विचार न करें.


बालों के झड़ने का कारण बन सकता है
अगर आप अपने बालों से प्यार करते हैं तो सुबह के नाश्ते से परहेज न करें. नाश्ता न करने से प्रोटीन का स्तर कम हो सकता है और साथ ही यह keratin के स्तर को प्रभावित कर सकता है. जो बालों की ग्रोथ को रोकता है और बालों के झड़ने का कारण बन सकता है. बालों को घना औऱ मजबूत बनाए रखना चाहते हैं तो आपको रोजाना प्रोटीन युक्त नाश्ते का आनंद लेना चाहिए.

 

 7 चीजों के नास्ते में सेवन से, सेहत को पहुंच सकता है नुकसान

7 चीजों के नास्ते में सेवन से, सेहत को पहुंच सकता है नुकसान

 पूरा दिन काम करने के लिए आपके शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है और यह ऊर्जा नाश्ते से ही मिलती है. कुछ चीजें नाश्ते में शामिल करने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है. 

नाश्ते हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है. पूरा दिन काम करने के लिए आपके शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है और यह ऊर्जा नाश्ते से ही मिलती है.
नाश्ते में हम किन चीजों का सेवन करना चाहिए इसकी जानकारी जरूर होनी चाहिए. नाश्ते में कुछ चीजों का सेवन करने से शरीर को नुकसान भी हो सकता है. आज हम आपको बताएंगे कि नाश्ते में किन चीजों को शामिल नहीं करना चाहिए.

केला
केला स्वास्थ्य बहुत लाभदायक होता है लेकिन इसे नाश्ते में शामिल नहीं करना चाहिए.  दरअसल खाली पेट केले का सेवन नुकसानदायक होता है. इसे खाली पेट खाने से हमारे रक्त में मैग्नीशियम और पोटेशियम का स्तर असंतुलित हो सकता है.

खट्टे फल
नाश्ते में कभी भी खट्टे फल न खाएं. खाली पेट खट्टे फलों का सेवन करने से गैस की समस्या हो सकती है.

चाय
चाय का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए. ऐसा करना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. नाश्ते में चाय का सेवन करने से आपको एसिडिटी या अपच की समस्या हो सकती है.

दही, पनीर और छाछ 
नाश्ते में दही, पनीर और छाछ नहीं लेनी चाहिए. इनका सेवन कभी भी खाली पेट नहीं करना चाहिए.

टमाटर
टमाटर का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए. खाली पेट टमाटर का सेवन करने से गैस की समस्या हो सकती है.
 
इन आटों से बनी रोटियां सर्दियों में हैं फायदे मंद : जानिए क्या हैं खास बात

इन आटों से बनी रोटियां सर्दियों में हैं फायदे मंद : जानिए क्या हैं खास बात

अक्सर हम खाने में अलग अलग सब्जिया पसंद करते है। मौसम के हिसाब से भी सब्जियां हमे पसंद होती हैं , लेकिन क्या आपने कभी सोचा हैं की यदि सर्दी के दिनों में अगर रोटियां भी अलग -अलग आटे की मिल जाए जो शरीर को गर्म करने में सहायता करे , तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही आटो के बारे में जो शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं। हर सीजन में हम गेंहू के आटे का उपयोग करते हैं, लेकिन सर्दियों के दिनों में हम दूसरे पोषक तत्वों से भरे आटे की रोटियां भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यहां जानें इन रोटियों को खाने से शरीर को कितनी ताकत मिलती है। विंटर सीजन में लोग तमाम तरह के वायरल और संक्रमण का शिकार होते हैं। इस मौसम में होने वाली बीमारियों से बचना है तो हमें अपना इम्युन सिस्टम मजबूत रखना होगा। क्योंकि मौसमी बुखार या एलर्जी हो या फिर आम वायरल हमें इन संक्रमणों से लड़ने के लिए एक मजबूत इम्युन सिस्टम की आवश्यकता होती है। लिहाजा इस सीजन में हमें अपनी डाइट का खास ख्याल रखना जरूरी है। हर सीजन में हम गेंहू के आटे का उपयोग करते हैं, लेकिन इन दिनों इसके अलावा हम दूसरे पोषक तत्वों वाले आटे के व्यंजनों को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इन आटों से बनी चपातियां न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं बल्कि इनसे आपका इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत रहता है। आज हम आपको 6 प्रकार के आटे के बारे में बता रहे हैं जिनकी चपातियों के अलावा भी कई व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं।

इम्युन सिस्टम बूस्ट करता है बाजरे का आटा
फाइबर और पोटेशियम से भरपूर, बाजरा एक ऐसा आटा है जिसका सेवन सर्दियों के मौसम में तमाम भारतीय परिवारों के लोग करते हैं। इस आटे का प्रयोग वो लोग करते हैं जो गेंहू के आटे का सेवन नहीं कर सकते हैं। बाजरा ओमेगा -3 और आयरन का भी अद्भुत स्रोत है। आप इस आटे की न सिर्फ चपातियां बनाकर सर्व कर सकते हैं बल्कि उत्तपम, दलिया और खिचड़ी भी बना सकते हैं। बाजरा आपकी केवल पाचन क्रिया को तो दुरुस्त रखता ही है साथ ही कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है। लस मुक्त (gluten-free) बाजरा खाने से शरीर को भरपूर एनर्जी मिलती है क्योंकि ये ऊर्जा एक बहुत अच्छा स्त्रोत है। वजन घटाने के लिए भी आप बाजरे के आटे का उपयोग कर सकते हैं। दरअसल, बाजरा खाने के बाद काफी देर तक भूख नहीं लगती है जिससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया में सुधार के अलावा ये हैं ज्वार के आटे के फायदे
ज्वार एक लस मुक्त (gluten-free) आटा है जो पाचन में सुधार करता है। इसके सेवन से शरीर में शुगर का लेवल नियंत्रित करता है। दिल के मरीजों के लिए भी ज्वार का आटा अत्यंत लाभकारी है। बाजरा की तरह ज्वार भी शरीर में शक्ति प्रदान करता है और थकान को दूर करता है। इसके सेवन से शरीर में जलन, मोटापा, गैस, घाव और बवासीर जैसी शिकायतें नहीं होती हैं। ज्वार की रोटियों के अलावा आप इसके आटे से उपमा, डोसा और यहां तक कि पेनकेक्स भी तैयार कर सकते हैं। इसके सेवन से भी इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है।

बाल बढ़ाने के लिए करें कंगनी के आटे वाले व्यजंनों का सेवन
कंगनी को फॉक्सटेल बाजरा के रूप में भी लोग जानते हैं। सर्दियों के दौरान इसका सेवन आपके लिए कई तरह से लाभकारी हो सकता है। विटामिन बी 12 से समृद्ध कंगनी दिल और तंत्रिका तंत्र यानी नरवस सिस्टम के सुचारू संचालन यानी स्मूद फंक्शनिंग को सुनिश्चित करता है। बाल बढ़ाने के लिए इस खाने को खाने की सलाह दी जाती है। फॉक्सटेल बाजरा आसानी से पक जाता है। इसका उपयोग भी रोटी, दलिया, पुलाव, खिचड़ी बनाने के लिए किया जाता है।

लजीज ही नहीं लाभकारी भी है मक्के का आटा
सर्दियों के सीजन में मक्की की रोटी और सरसों का साग एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाला भोजन है। इस आटे का इस्ततेमाल खास तौर से सर्दियों में ही किया जाता है। मक्का विटामिन ए, सी, के, बीटा-कैरोटीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों का भंडार है। एनीमिया के रोगियों के लिए मक्की लाभकारी अनाज है क्योंकि यह आयरन युक्त है। सरसों का साग एक मौसमी व्यंजन है। यह खाने में तो लजीज है ही साथ ही इसके सेवन से इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत होता है।

वजन घटाने के लिए बेहतर है रागी का आटा
विंटर सीजन में रागी का सेवन भी लाभकारी होता है। वजन घटाने के लिए रागी के आटे का सेवन बेहद प्रभावी है। यह आटा कैल्शियम से भरपूर है और जल्दी डाइजेस्ट भी हो जाता है। मधुमेह यानी डायबटिक मरीजों के लिए रागी के सेवन की सलाह दी जाती है। आप इसे दूसरे आटे के साथ भी मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं। बहुत कम भारतीय इसके फायदों और पोषण संबंधी मूल्य के बारे में जानते हैं। फाइबर युक्त रागी के व्यंजन एनीमिया मरीजों के लिए लाभकारी हैं।

कुट्टू के आटे का सेवन
कुट्टू के आटे का प्रयोग ज्यादातर नवरात्रि और भी तमाम तरह के व्रतों में किया जाता है। कुट्टू को buckwheat के नाम से भी जाना जाता है। इसमें विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स के साथ-साथ विटामिन बी 2 (राइबोफ्लेविन) और विटामिन बी (नियासिन) भी होता है। पराठा और पूरियों से लेकर डोसा और पैनकेक तक, कुट्टू का आटा कई व्यंजनों को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुट्टू के आटे से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जिससे ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं नहीं होती हैं। इसके अलावा कुट्टू में मौजूद फाइबर और मैग्नीशियम शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है।