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मेडिकल फेस्क मास्क या फैब्रिक मास्क: WHO ने शेयर की गाइडलाइन्स, बताया किसे कब और कैसे पहनना चाहिए

मेडिकल फेस्क मास्क या फैब्रिक मास्क: WHO ने शेयर की गाइडलाइन्स, बताया किसे कब और कैसे पहनना चाहिए

Coronavirus prevention: मेडिकल मास्क और फैब्रिक मास्क दोनों कोविड-19 का एक महत्वपूर्ण एहतियाती उपाय है. रोजाना संक्रमण का ग्राफ ऊपर चढ़ने के बीच स्वास्थ्य पोर्टल और विशेषज्ञ अपनी सुरक्षा में मास्क समेत अन्य उपायों के प्रति ढिलाई नहीं बरतने का आह्वान कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी एक पोस्ट में समझाया गया है कि किसे कैसे कब मास्क पहनना चाहिए.


मेडिकल या सर्जिकल मास्क
ट्विटर पर जारी एक वीडियो में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सलाह दी है कि इस प्रकार के मास्क पहनने जाने चाहिए:
हेल्थ वर्कर्स
लोग जिनको कोविड-19 का लक्षण है
वो लोग जो संदिग्ध या कोवि-19 से संक्रमित किसी की देखभाल कर रहे हों
ऐसे इलाके में जहां वायरस का व्यापक रूप से प्रसार हो गया हो और कम से कम एक मीटर की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो गया हो, तब मेडिकल मास्क का इस्तेमाल किया जाना चाहिए:
ऐसे लोग जिनकी उम्र 60 या उससे ज्यादा हो
ऐसे लोग जिनको चिह्नित बीमारियां हों


फैब्रिक मास्क
• ये मास्क ऐसे समय सप्लीमेंट के तौर पर उभरे हैं जब दुनिया में मेडिकल मास्क की कमी हो गई है. डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी कि फैब्रिक मास्क उन लोगों के जरिए पहने जा सकते हैं जिनको कोविड-19 का लक्षण नहीं है. इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो सोशल वर्कर, कैशियर के साथ करीबी संपर्क में हैं.
• फैब्रिक मास्क व्यस्त सार्वजनिक जगहों जैसे परिवहन, कार्य स्थल, किराना स्टोर और अन्य भीड़भाड़ वाले वातावरण में पहने जाने चाहिए.
मेडिकल मास्क
• मेडिकल मास्क एक बार के इस्तेमाल योग्य हैं जिसे रोजाना विधिवत कूड़ेदान में फेंकने की आवश्यकता है
• मेडिकल मास्क को सर्जिकल मास्क भी कहा जाता है, जबकि फैब्रिक मास्क फिर से इस्तेमाल करने योग्य है. फैब्रिक मास्क को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी से धोए जाने की जरूरत है.

 

Covid-19 : हमारे शरीर में ही मौजूद है कोरोना की दवा, जानिए जरूरी बातें

Covid-19 : हमारे शरीर में ही मौजूद है कोरोना की दवा, जानिए जरूरी बातें

कोरोनावायरस से निजात पाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी है। अभी इस वायरस से राहत पाने के लिए कोई कारगर इलाज सामने नहीं आया है। लेकिन विशेषज्ञ, डॉक्टर्स इस वायरस से निपटने के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं। यदि आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है तो आप पर वायरस हावी नहीं हो सकता है यानी आपके शरीर में ही इस वायरस को मात देने की शक्ति मौजूद है। लेकिन जरूरी ये है कि हमें इस बारे में संपूर्ण जानकारी हो कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और ऐसी कौन-कौन-सी चीजें हैं जिनके सेवन से आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है?
आइए सबसे पहले पहले जानते हैं कि कौन-कौन-सी वे चीजें है जिनके सेवन से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं?

नियमित योगाभ्यास

शरीर को अंदर से मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित योगाभ्यास करना जरूरी है। शारीरिक व्यायाम आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।

शारीरिक गतिविधियां

फिजिकल एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान दें। शारीरिक गतिविधियों से आप एक्टिव रहेंगे और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। इसके लिए आप खेल को शामिल कर सकते हैं जिससे शरीर का व्यायाम भी होता रहे और मानसिक रूप से आप फ्रेश भी महसूस करें।
बाहर का खाना न खाएं

बाहर के खाने से मतलब है कि आपको घर में बने हुए शुद्ध भोजन का ही सेवन करना चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि आप वायरस से दूरी बनाए रखें तो आपको खुद पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए इस बदलाव को जरूर शामिल करें और घर का बना शुद्ध भोजन करें।

विटामिन सी का सेवन

इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए विटामिन-सी का सेवन करें। इसके लिए आप आंवले का सेवन कर सकते हैं।
फल और हरी सब्जियां

अपनी डाइट में फलों को शामिल करें। हरी सब्जियों का सेवन करें। यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करेगी और किसी भी वायरस से लड़ने की शक्ति देगी।

तुलसी का सेवन

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए तुलसी का सेवन करें। रोज खाली पेट तुलसी का सेवन आप कर सकते हैं।

आइए अब जानते हैं ऐसी कौन-सी चीजें हैं जिनके सेवन से आपकी इम्युनिटी घट सकती है।
यदि आप ऐसी चीजों का सेवन करते हैं, जो मैदे से बनी हैं तो तुरंत इनका सेवन करना बंद कर दें। ये आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। मैदे से बनी चीजें जैसे ब्रेड, नॉन, भटूरे, पिज्जा आदि।

चीनी का सेवन न करें, बल्कि चीनी की जगह आप गुड़ का सेवन कर सकते हैं।

यदि कोल्ड ड्रिंक्स पीने के शौकीन हैं, तो अपने शौक को बदलने का समय आ गया है। कोरोना काल में जब दिनचर्या में इतना बदलाव आ चुका है और लोग सेहतमंद जिंदगी ओर बढ़ना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उन सभी आदतों का त्याग करना होगा, जो आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
पैकिंग वाली चीजों को खाने से बचें।

जंकफूड के सेवन से बचें, यह आपके इम्यून सिस्टम को घटाने का काम करता है।

कोरोनावायरस से निपटने के लिए यदि हम अपनी डाइट व अपनी लाइफस्टाइल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करें तो इस वायरस को खुद पर हावी होने से रोका जा सकता है। अब वक्त है बदलाव का। कोरोना काल में बदलाव और समझदारी के साथ बढ़ाया गया कदम आपको सेहतमंद जिंदगी की तरफ ले जाएगा इसलिए इस वायरस से डरें नहीं, बल्कि खुद को अंदर से मजबूत करें और इस वायरस को मात दें।

 

अगर आपके में लक्षण हैं लेकिन रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो तो, ये टेस्ट कराने  विशेषज्ञ दे रहे है सलाह

अगर आपके में लक्षण हैं लेकिन रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो तो, ये टेस्ट कराने विशेषज्ञ दे रहे है सलाह

नई दिल्ली। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच भारत के शीर्ष विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि करीब 80 प्रतिशत मामलों में आरटी-पीसीआर जांच से कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चल पाता है, ऐसे में लक्षण वाले रोगियों की रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं होने पर उनका सीटी स्कैन या छाती का एक्सरे कराना चाहिए और 24 घंटे बाद दोबारा जांच करानी चाहिए।
सार्स सीओवी-2 के नए स्वरूपों के प्रकोप के बीच विशेषज्ञों ने कहा कि आरटी-पीसीआर जांच से वायरस के उत्परिवर्तित स्वरूप बच नहीं पाते, क्योंकि भारत में हो रहीं जांच में 2 से अधिक जीन्स का पता लगाने की क्षमता है। सरकार के 15 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में सार्स सीओवी-2 के विभिन्न स्वरूपों से कुल 1,189 नमूने संक्रमित पाए गए जिनमें से 1,109 नमूने ब्रिटेन में पाए गए कोरोना वायरस के स्वरूप से संक्रमित मिले, 79 नमूने दक्षिण अफ्रीका में मिले स्वरूप से और एक नमूना ब्राजील में मिले वायरस के स्वरूप से संक्रमित पाया गया।
आईसीएमआर के डेटा के मुताबिक वर्तमान आरटी-पीसीआर जांच में वर्तमान स्वरूपों का भी पता चल रहा है।आरटी-पीसीआर जांच में 80 मामलों में सही परिणाम निकल आता है लेकिन 20 फीसदी मामलों में हो सकता है कि नतीजे सही नहीं मिलें। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि यदि नमूना ठीक से नहीं लिया गया है या फिर जांच समय पूर्व कर ली गई जब तक संक्रमण अधिक नहीं फैला हो तो रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं होगी। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण हैं तो कोविड-19 का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला की रिपोर्ट, सीटी/चेस्ट एक्स-रे के मुताबिक उपचार शुरू किया जाना चाहिए। 24 घंटे बाद फिर से जांच करानी चाहिए।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान एवं संचारी रोग विभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में मिले वायरस के स्वरूप का आरटी-पीसीआर जांच में पता लग जाता है। हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण का पता नहीं चल पाता है। एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि केवल आरटी-पीसीआर जांच के परिणाम पर निर्भर रहने की बजाए लक्षण तथा सीटी स्कैन की रिपोर्ट के आधार पर उपचार किया जाना चाहिए। (भाषा)
 

Corona संक्रमण का इन्हें सबसे अधिक है खतरा, देखें लिस्ट, कहीं आप भी तो इसमें नहीं?

Corona संक्रमण का इन्हें सबसे अधिक है खतरा, देखें लिस्ट, कहीं आप भी तो इसमें नहीं?

कोरोना वायरस पूरे देश में तेजी से फैल रहा है. ऐसे में राज्य सरकारों द्वारा एहतियात के तौर पर कहीं कर्फ्यू तो कहीं लॉकडाउन लगाया जा रहा है. हालांकि कोरोना के मामले पहले की अपेक्षा काफी बढ़ चुके हैं. इस कारण आपका यह जानना जरूरी है कि इस बार कोरोना से किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है. क्योंकि अगर आपको पता होगा तो आप एहतियात के तौर पर कदम उठा सकेंगे. सरकार के #IndiaFightsCorona ट्विटर अकाउंट से एक तस्वीर को साझा किया गया है. इस तस्वीर में बताया गया है कि अखिर किन लोगों को कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा है.
ट्वीट के मुताबिक धूम्रपान, हृदय और सांस लेने से संबंधित जो लोग हैं उन्हें कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. इस कारण सरकार द्वारा गाइडलाइन भी जारी किया गया है. इसके मुताबिक जिनकी आय़ु 60 वर्ष या फिर उससे अधिक है. उन लोगों को कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. क्योंकि वृद्ध लोगों में कोरोना एक गंभीर बिमारी बन सकता है.
वहीं अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो तंबाकू के सेवन करने वालों, धूम्रपान करने वालों में कोरोना संक्रमण का काफी खतरा है. डायबिटीज से संबंधित मरीजों में कोरोना के गंभीर परिणाम देखने को मिले हैं. इसमें लोगों के मरने व संक्रमित होने की संभावना तीन गुणा ज्यादा होती है. नॉन कम्युनिकेबल बिमारी भी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण के खतरने को बढ़ाती है. कॉर्डियोवस्कुलर बीमारी, हृदय संबंधित बिमारी और हार्ट फेलियर जैसी बीमारियों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिले हैं.
 

 जानिए कोविड-19 वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में क्या खाना-पीना चाहिए

जानिए कोविड-19 वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में क्या खाना-पीना चाहिए

बहुत सारे लोगों ने कोरोना वायरस के खिलाफ कोविड-19 की वैक्सीन लगवा ली है. हालांकि, उसके संबंध में कई सारे सवाल बने हुए हैं. मिसाल के तौर पर वैक्सीन का असर, साइड-इफेक्ट्स और ये भी कि डोज लगवाने से पहले और बाद में क्या खाना चाहिए. आपके सवालों का जवाब देने के लिए हार्वर्ड न्यूट्रिशनल मनोचिकित्सक डॉक्टर उमा नायूड ने इंस्टाग्राम का सहारा लिया और बताया, "वैक्सीन लगवाने के वक्त जरूरी है कि आप अपनी डाइट पर ध्यान दें, जिससे होनेवाले किसी साइड-इफेक्ट्स को कम किया जा सके."


टीकाकरण से पहले संतुलित आहार खाएं
अपनी डाइट से कोविड-19 वैक्सीन लेने से पहले और बाद में समझौता न करें. वैक्सीन के साइड-इफेक्ट के तौर पर बेहोशी की सूचना मिली है, जिसे स्वस्थ, साबुत भोजन खाकर कम किया जा सकता है. उन्होंने कुछ फूड्स सुझाए हैं जिसे वैक्सीन लगवाने के पहले और बाद में खाया जा सकता है.


फाइबर से भरपूर फूड्स का इस्तेमाल करें

शांत शरीर और शक्तिशाली इम्यून सिस्टम के लिए फाइबर में भरपूर फूड्स जरूरी हैं. वैक्सीन के दौरान आपको आपको अच्छी तरह से आराम और सक्रिय होना चाहिए, जो ये उसी वक्त संभव है जब आपने साबुत अनाज खाया है. इसलिए सचुरेटेड फैट और शुगर वाले फूड्स से परहेज करें.


प्रोसेस्ड फूड के बजाए साबुत अनाज खाएं
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, स्वस्थ खानपान की आदतें इस महामारी के दौरान स्वस्थ शरीर के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए, जब आप कोविड-19 वैक्सीन का डोज लेने का फैसला करते हैं, स्वस्थ साबुत अनाज के फूड्स का इस्तेमाल करें जो फाइबर में भरपूर हो. बजाए इसके कि वो प्रोसेस्ड फूड जो सैचुरेटेड फैट में ज्यादा और कैलोरी की अधिक मात्रा होती है.


हाइड्रेटिंग वाले फल खाएं और पर्याप्त पानी पीएं
अच्छे स्वास्थ्य के लिए हाइड्रेट रहना बुनियाद है, खासकर जब आप कोविड-19 वैक्सीन का डोज लगवाने जा रहे हैं. आपको हाइड्रेटिंग वाले फल या खूब पानी पीकर खुद को तरोताजा बना लेना चाहिए, जो गंभीर साइड-इफेक्ट्स के खतरे को कम कर सकेगा और टीकाकरण की प्रक्रिया के दौरान आपको अच्छा महसूस होने देगा. 

कोवि‍ड ने दी एक नई बीमारी, नाम है ‘कोविड सोम्निया’, जानिए क्या है इसका इलाज?

कोवि‍ड ने दी एक नई बीमारी, नाम है ‘कोविड सोम्निया’, जानिए क्या है इसका इलाज?

कोरोना के कारण लोगों की जान ही नहीं जा रही, बल्कि इसकी वजह से कई तरह की मानसिक बीमारियां भी हो रही है। स्ट्रेस, ड‍िप्रेशन और कई तरह के फोब‍िया के साथ अब एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसकी वजह से कोविड सोम्निया हो रहा है।

यानि‍ नींद नहीं आने की बीमारी। वैसे नींद नहीं आने की बीमारी को इन्सोिमेनिया कहा जाता है, लेकिन चूंकि अब यह कोविड की वजह से हो रहा है इसलिए इसे कोवि‍ड सोम्निया कहा जा रहा है।

कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से दुनियाभर में यह देखने को मिला है कि लोग ठीक से सो नहीं पा रहे। रॉयल फिलिप नाम की एक संस्था ने 13 देशों में नींद से जुड़ा एक सर्वे किया गया है। सर्वे में 37 प्रतिशत लोगों ने माना है कि महामारी ने उनकी नींद पर बुरा असर डाला है।

सर्वे में शामिल 70 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि कोरोना महामारी शुरू होने के बाद उन्हें नींद से जुड़ी एक या उससे अधिक प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं में इस तरह की समस्या और ज्यादा देखी गई है।

स्लीप न्यूरोलॉजिस्ट ने इसे ‘कोविडसोम्निया’ का नाम दिया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मुताबिक इसके पीछे कोरोना वायरस से संक्रमित होने का भय, फैमिली मेम्बर्स और करीबियों के स्वास्थ्य की चिंता है।


कोरोना के कारण तनाव बढ़ रहा है। इसी तनाव के चलते लोग इंसोम्निया (नींद न आना या टूट जाना) के शिकार हो रहे हैं। अगस्त, 2020 में ब्रिटेन के साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च कहती है कि लॉकडाउन के दौरान चीन में इंसोम्निया की दर 14.6 से 20% तक बढ़ गई। इटली और ग्रीस में यह दर 40% तक पाई गई।

क्या है लक्षण?
नींद न आना या बार-बार टूटना। दिन के वक्त थकान महसूस होना या नींद आना। सोते वक्त बार-बार उठना। या देर से सोने के बाद भी जल्दी नींद खुल जाना जैसे लक्षण कोविडसोम्निया के हैं।

कैसे करें इलाज?
इसके इलाज के खुद ही अपने ऊपर ध्यादन दें। अपनी आदतों को बदलें। दोपहर में कैफीन न लें। यह नींद को प्रभावित करती है। सोने से पहले मोबाइल से बचें। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर की ब्लू स्क्रीन हार्मोन मेलाटोनिन की मात्रा को कम करती है। पलकों का झपकना भी कम होता है।

नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक बेडरूम का तापमान 16-19 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। यह नींद लाने में मदद करता है।

(साभार- वेब दुनिया )

 

कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे तेजी से हो रहे संक्रमित, जानें लक्षण, कैसे करें बचाव

कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे तेजी से हो रहे संक्रमित, जानें लक्षण, कैसे करें बचाव

Covid-19 Symptoms In Kids: देश भर में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. चिंता की बात ये है कि कोरोनावायरस की दूसरी लहर में अब बच्चे भी तेजी से संक्रमित हो रहे हैं. डॉक्टर्स भी इस बात को लेकर चिंतित हैं. गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख और निदेशक डॉ. कृष्ण चुघ ने कहा, “इस दूसरी लहर में बच्चों में कोविड-19 संक्रमण के काफी नए मामले सामने आ रहे हैं और इनकी संख्या पहले की तुलना में काफी अधिक है.”
बच्चों में कोविड 19 के लक्षण
डॉक्टर्स के मुताबिक, ज्यादातर बच्चे जो कोविड-19 से प्रभावित हैं, उनमें मौजूद लक्षण हल्का बुखार, खांसी, जुकाम और पेट से संबंधित समस्याएं हैं. कुछ को शरीर में दर्द, सिरदर्द, दस्त और उल्टी की भी शिकायत है.
पीएसआरआई अस्पताल साकेत में वरिष्ठ सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता शर्मा ने कहा कि इस दूसरी लहर में सभी आयु वर्ग के बच्चे, यहां तक कि एक वर्ष से कम आयु के बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कोविड की नई लहर में बच्चे पहले की तुलना में संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील हैं. बच्चों के लिए स्थिति पिछले साल से काफी अलग है, जो कि चिंता बढ़ानी वाली बात है.
नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेन गुप्ता ने कहा, “अब अधिक बच्चे 103-104 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार से प्रभावित हो रहे हैं, जो 5-6 दिनों तक बना रहता है.” उन्होंने कहा कि ऐसे भी कुछ मामले हैं, जिनमें निमोनिया भी देखा गया है.
कुछ बच्चों में मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) जैसी अधिक गंभीर जटिलताएं भी देखी गई हैं.
इन लक्षणों को न करें इग्नोर
विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों में हल्के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और माता-पिता को बच्चों में संभावित डायरिया, सांस लेने में समस्या और सुस्ती जैसे लक्षणों पर ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने खासकर बुखार के साथ इस तरह के लक्षणों पर सतर्क रहने की सलाह दी.
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में ऐसी समस्याओं को पहचानने में माता-पिता को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि शुरूआती तौर पर एक्शन लेने से बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी.
गुप्ता ने कहा, “अगर बुखार 5-6 दिनों तक रहता है, तो माता-पिता को अपने बच्चों के रक्तचाप की निगरानी करनी चाहिए. हालांकि, पल्स ऑक्सीमीटर के साथ उनके ऑक्सीजन के स्तर की जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनमें ऑक्सीजन संबंधी दिक्कतों का सामना करने की ज्यादा संभावना नहीं है. बच्चों के लिए यह डिवाइस अनफिट है.”
(एजेंसी से इनपुट)

 

कोरोना की दूसरी लहर से जीतना है तो इम्यूनिटी कमजोर करने वाली इन चीजों से बना लें दूरी

कोरोना की दूसरी लहर से जीतना है तो इम्यूनिटी कमजोर करने वाली इन चीजों से बना लें दूरी

Worst Food For Immunity: दुनिया में एक बार फिर कोरोना वापिस लौट आया है. और एक बार फिर कौरोना के आंकड़ों में तेजी देखी जा रही है. ऐसे में भारत के लिए कोरोना की यह दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हो रही है. युवाओं और बच्चों में भी अब कोरोना का संक्रमण फैल रहा है. ऐसे में जरूरी है कि आप सावधानी बरतें, घर से बाहर ना निकले और ऐसी चीजों का सेवन करें जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती हो. आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन आपको कोरोना के इस समय में नहीं करना चाहिए. ये चीजें आपके इम्यून सिस्टम को काफी कमजोर बनाती हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
स्मोकिंग- कोरोना कीा दूसरी लहर काफी खतरनाक हैं. ऐसे में इससे बचने के लिए शराब और स्मोकिंग से आपको दूरी बना लेनी चाहिए. यह आपकी इम्यूनिटी को कमजोर करते हैं.
फास्ट फूड- फास्ट फूड में शुगर, सोडियम, सैचुरेटेड फैट की मात्रा काफी अधिक होती है. इसे फाइबर ना के बराबर होता है. ऐसे में यह आपकी इम्यूनिटी को कमजोर कर सकता है.
मीठा- अगर आप मीठे के शौकीन हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि अधिक मात्रा में मीठी चीजों का सेवन करने से इम्यूनिटी कमजोर होती है. इसलिए आज ही से ही अपने मीठा खाने की मात्रा को सीमित कर दें.
चाय और कॉफी- ज्यादा मात्रा में चाय और कॉफी पीना भी इम्यूनिटी को नुकसान पहुंचता है. इनमें कैफीन की मात्रा काफी अधिक होती है. इसलिए यह इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाता है.
आइसक्रीम- आइसक्रीम में अधिक मात्रा में सैचुरेटेड फैट और शुगर पाया जाता है. जो इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है. इसलिए आइसक्रीम का ज्यादा सेवन करने से बचें.

 

हवा के जरिए तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस, स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे

हवा के जरिए तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस, स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे

coronavirus spreading through air? लैंसेट पत्रिका में शुक्रवार को प्रसारित एक नयी अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया कि इस बात को साबित करने के मजबूत साक्ष्य हैं कि कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 वायरस मुख्यत: हवा के माध्यम (coronavirus in Air) से फैलता है. हालांकि हवा के जरिए इमारतों के अंदर ट्रांसमिशन बाहर के मुकाबले ज्यादा है और वेंटिलेशन होने से यह कम हो जाता है.
ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा से ताल्लुक रखनेवाले छह विशेषज्ञों के इस आकलन में कहा गया है कि बीमारी के उपचार संबंधी कदम इसलिए विफल हो रहे हैं क्योंकि वायरस मुख्यत: हवा से फैल रहा है. अमेरिका स्थित कोलराडो बाउल्डेर विश्वविद्यालय के जोस लुई जिमेनजे ने कहा, ‘‘वायरस के हवा के माध्यम से फैलने के मजबूत साक्ष्य हैं.’’
उन्होंने कहा, ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए यह आवश्यक है कि वे वायरस के प्रसार के वैज्ञानिक साक्ष्य को स्वीकार करें जिससे कि विषाणु के वायुजनित प्रसार को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.’’
प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ में छपी एक स्टडी में कहा गया है कि ऐसे ट्रांसमिशन का हवा (aerosol) के जरिए होना ज्यादा आसान है बजाय बूंदों के. दरअसल रिपोर्ट में कहा गया है कि क्वारंटीन होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में रह रहे लोगों के बीच ट्रांसमिशन देखा गया, बिना एक-दूसरे के कमरे में गए.(इनपुट भाषा)
 

सावधान : अगर आप में है ये लक्षण, तुरंत कराएं जाँच क्योकि बदल रहा है कोरोना का लक्षण

सावधान : अगर आप में है ये लक्षण, तुरंत कराएं जाँच क्योकि बदल रहा है कोरोना का लक्षण

नई दिल्ली, कोरोना की लहार ने भारत में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है। गुरुवार को दो लाख से ज्यादा मामलों और हजार से ज्यादा मौतों ने साबित कर दिया है कि कोरोना की दिस्री लहार देश में कहर बनकर टूटी है। ऐसे में खुद को संक्रमण से बचाने के लिए आपके पास जो एक मात्र उपाय है वह है सावधानी बरतना। साथ ही जरूरी है कोरोना के लक्षणों पर नजर रखना। म्यूटेशन की वजह से कुछ दिन बाद ही कोरोना अपना रूप बदल रहा है जिस वजह से उसके लक्षणों में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

कोरोना के लक्षणों में बदलाव
कोलकाता के डॉक्टरों के अनुसार, बहुत उच्च संचरण दर के साथ-साथ कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 के लक्षणों में मामूली और सूक्ष्म परिवर्तन हुए हैं, जिससे वायरस की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। डॉक्टर भी कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के लक्षणों में हुए बदलाव की बात कह रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में ऐसे लोगों में भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो रही है, जिन्हें न बुखार आया और ना ही सर्दी-जुकाम हुआ। ये लोग तो बदन दर्द, सिर दर्द या पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे और जब उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट हुआ तो पता चला कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

डायरिया और बदन दर्द जैसे लक्षणों को इग्नोर न करें
डॉक्टरों की मानें तो पेट में दर्द, उल्टी-दस्त, डायरिया और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले करीब 40 प्रतिशत मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।ज्यादातर लोगों को अब तक यही लगता है कि सर्दी-खांसी, जुकाम और बुखार ही कोरोना के लक्षण हैं। इसलिए अगर उन्हें पेट दर्द, सिरदर्द या बदन दर्द की समस्या होती है तो वे डॉक्टर के पास जाने की बजाए घर पर ही घरेलू नुस्खों से इलाज करते रहते हैं, लेकिन जब काफी समय तक बीमारी ठीक नहीं होती तब वे डॉक्टर के पास जाते हैं और तब तक वायरस शरीर को काफी नुकसान पहुंचा चुका होता है।
ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बदन दर्द या पेट में दर्द की समस्या हो तो देर किए बिना कोरोना का टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इलाज में जुटे डॉक्टरों का भी कहना है कि कोरोना के कई सारे स्ट्रेन सामने आने के बाद मरीजों को सांस लेने में दिक्कत बुखार और सूखी खांसी के लक्षण आम हो गए हैं। इसके साथ ही मरीजों में गंध का पता न चल पाना और खाने का स्वाद गायब होना भी आम लक्षणों में से एक है।

दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण में बदलाव
डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना दूसरी लहर के दौरान बहुत उच्च संचरण दर के साथ आगे बढ़ रहा है जबकि मृत्यु दर कम है। वहीं खास बात यह है कि पिछली बार कोरोना संक्रमण के शिकार ज्यादातर 59-60 साल के बुजुर्ग लोग हो रहे थे वहीं इसी बार कोरोना 45-59 साल के बीच के लोगों को ज्यादा संक्रमित कर रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस उम्र के लोग बाहर अपने काम से या नौकरी करने के लिए ज्यादा निकलते हैं। साथ ही इस उम्र के लोगों का अभी टीकाकरण भी किया जा रहा है।

कोरोना के नए लक्षण
-थकान
-कमजोरी
-सुस्ती
-बदन दर्द
-डायरिया
-उल्टी
-पेट दर्द

-जोड़ो में दर्द
वहीं गौर करने वाली बात यह है कि सर्दी और बुखार जैसे लक्षण 10-15 फीसदी मामलों में नहीं नजर आ रहे हैं। साथ ही फेफड़ों में संक्रमण नहीं आने की एक वजह यह भी है कि युवाओं का इम्युन सिस्टम ज्यादा मजबूत होता है।

कोरोना के पुराने लक्षण
-सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना
-सीने में दर्द या दबाव
-बोलने या चलने-फिरने में असमर्थ
-गले में खराश
-दस्त
-आंख आना
-सिरदर्द
-स्वाद और गंध न पता चलना

कम पाए जाने वाले लक्ष्ण
-खुजली और दर्द
-त्वचा पर चकत्ते आना या हाथ या पैर की उंगलियों का रंग बदल जाना।
 

क्‍या आपको कोरोना छूकर निकल गया, कैसे पता करें आपको हो चुका है ‘कोरोना’

क्‍या आपको कोरोना छूकर निकल गया, कैसे पता करें आपको हो चुका है ‘कोरोना’

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे देश में कहर बरपाया हुआ है। अब रोजाना 1 हजार लोगों की मौतें हो रही हैं। लेकिन जिन लोगों को कोरोना नहीं हुआ है, उनके बारे में शोधकर्ताओं का कहना कि कुछ ऐसे संकेत सामने आए हैं, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि व्यक्ति को कोरोना छूकर निकल गया, लेकिन उन्हें पता भी नहीं चला।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें से कुछ लक्षण तो लॉन्ग कोविड के रूप में कई महीनों तक बने भी रह सकते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबि‍क डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक अच्छी खासी आबादी ऐसे लोगों की भी है, जिन्हें किसी न किसी तरह से वायरस का इंफेक्शन हुआ, लेकिन उनका टेस्ट पॉजिटिव नहीं आया, या फिर उन्होंने टेस्ट करवाया ही नहीं, क्योंकि उनमें किसी तरह के कोई लक्षण नहीं दिखे।


कोरोना वायरस की इस दूसरी लहर में जहां ज्यादातर मामले सिम्प्टोमैटिक यानी लक्षण वाले हैं, जिसमें सर्दी-जुकाम और बुखार के अलावा पेट दर्द, सिरदर्द, आंखों का गुलाबी हो जाना आदि लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जबकि पिछली बार एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीज ज्यादा थे।

आइए जानते हैं क्याय लक्षण हो सकते हैं जिनसे पता चलाया जा सकता है कि आपको एक बार तो संभवतर: कोरोना का इन्फेंक्शान हो चुका है।

रेड या पिंक आई
आमतौर पर वायरल की वजह से आंखें लाल हो जाती हैं या कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है। लेकिन आंखों का लाल होना, पानी आना कोविड-19 का संकेत भी हो सकता है। हालांकि कोरोना होने पर आंखें लाल होने के साथ बुखार या सिरदर्द भी हो सकता है।

‘थकान’
बहुत ज्यादा थकान महसूस होना भी कोरोना का एक लक्षण हो सकता है। आपको ज्यादा थकान हो रही है। पूरे शरीर में दर्द है और यह भी 3-4 दिनों तक रहता है तो आपको कोरोना इंफेक्शन हुआ था, लेकिन पता नहीं चला।

‘ब्रेन फॉग’
कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों की याद्दाश्त पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ लोगों को कन्फ्यूजन, असंतुलन और कॉन्सन्ट्रेट करने में दिक्कत जैसी समस्याएं भी आ रही हैं। इस स्थिति को मेडिकल टर्म में ब्रेन फॉग कहा जाता है। आप चीजें याद नहीं रख पा रहे हैं तो यह भी कोरोना संक्रमण के कारण हो सकता है।

‘स्टंमक’ प्रॉब्लरम
कोरोना संक्रमण सिर्फ श्वसन तंत्र को ही नहीं बल्कि पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर रहा है। एक रिसर्च में सामने आया है कि कई लोग हैं जिन्हें कोरोना से संक्रमित होने के बाद न तो सर्दी-जुकाम हुआ और ना ही बुखार। उनमें डायरिया, जी मचलने, पेट में ऐंठन और भूख न लगने जैसे लक्षण सामने आए।

‘ब्रि‍दिंग’ प्रॉब्लबम
सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत होना भी कोरोना वायरस से जुड़ा लक्षण है। सीने में जकड़न और भारीपन महसूस हुआ हो, दिल की धड़कन बढ़ गई हो तो इसे भी कोरोना इंफेक्शन का संकेत माना जा सकता है।

नोट: यह सब रि‍सर्च और डॉक्टरों के बयानों के आधार पर है, just36news.com इसकी पुष्टि नहीं करता है और न ही इसके लिए जिम्मेदार है।
 

Coronavirus: एक डोज के बाद संक्रमण हो जाए तो क्या: दूसरा डोज मिलेगा, क्याे कहते हैं डॉक्टर

Coronavirus: एक डोज के बाद संक्रमण हो जाए तो क्या: दूसरा डोज मिलेगा, क्याे कहते हैं डॉक्टर

देश मे कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे है और साथ ही भारत के कोरोना टीकाकरण भी काफी तेज़ी से चल रहा है।

भारत मे 10 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। लेकिन इस बीच कुछ ऐसे भी केस सामने आए है जिसमें वैक्सीन की एक डोज लगने के बाद मरीज संक्रमित हो गया या फिर दोनों डोज़ लगी है लेकिन बावजूद इसके वो संक्रमित हो गया।

सवाल उठा था कि जिसे पहली डोज मिली है और वो संक्रमित हुआ है तो क्या उसे दूसरी डोज मिलेगी और कब मिलेगी। वहीं क्‍या वैक्सीन लगने बाद भी कोई संक्रमित हो सकता है।

मीड‍िया में आई रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ वी के पॉल ने बताया कि अगर किसी को पहली वैक्सीन लगी है और उसे कोविड संक्रमण होता है तो उसे भी वैक्सीन की दूसरी डोज मिलेगी। डॉ पॉल के मुताबिक अगर ऐसा होता है तो उस व्यक्ति को संक्रमण से ठीक होने के 12 हफ्ते बाद दूसरी डोज मिलेगी।

उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को कोविड होता है हमारी जनरल गाइडलाइन है उसके ठीक होने के तीन महीने बाद यानी 12 हफ्ते के बाद वैक्सीन लगाना चाहिए। कोविड संक्रमित व्यक्ति को वैक्सीन लगाना चाहिए ये हमारे गाइडलाइन में स्‍पष्‍ट है।

जाहिर है पहले डोज़ के बाद कोई संक्रमित हो भी जाए तो उसे दूसरी डोज मिलेगी। उसे वापस पहला और फिर से दूसरा डोज लेने की जरूरत नहीं है। वहीं किसी को दोनों डोज लगने के बाद भी कोरोना संक्रमण हो सकता है। इस पर उन्होंने साफ कहा कि किसी भी वैक्सीन से 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं मिलती है। अगर किसी को हो भी जाए तो भी संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार नहीं होगा।

दरअसल, डॉक्‍टरों का क‍हना है कि वैक्सीन मिलने के बाद कोविड के लक्षण आए या टेस्ट पॉजिटिव हो गया तो वैक्सीन के बाद जो प्रोटेक्शन है वो 100 प्रतिशत नहीं होती। हमे उसके बाद भी कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करना होगा। हो सकता है की आपको वैक्सीन मिलने के बाद भी संक्रमण हो लेकिन वैक्सीन के बाद होने वाले गंभीर इन्फेक्शन नहीं होगा। 

भारत में अब तक इतने  करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया

भारत में अब तक इतने करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया

भारत में अब तक 11 करोड़ से अधिक लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है। गौरतलब है कि इससे पहले भारत मात्र 85 दिनों के भीतर 10 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने वाला सबसे तेज़ देश बना था। गौरतलब है कि सरकार ने 1 अप्रैल, 2021 से 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण शुरू किया है।

टीकाकरण की लागत कितनी है?
टीकाकरण अभियान सभी 10,000 सरकारी अस्पतालों में मुफ्त चलेगा।
लेकिन लाभार्थी को 20,000 निजी टीकाकरण केंद्रों पर अपना टीकाकरण कराने के लिए भुगतान करना होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अभी तक टीकों का शुल्क तय नहीं किया गया है।
कोविड-19 टीकाकरण का पहला चरण
कोविड-19 टीकाकरण अभियान का पहला चरण 16 जनवरी, 2021 को शुरू किया गया था। यह अभियान पूरे देश में 3006 टीकाकरण केंद्रों पर शुरू किया गया था। पहले चरण में केवल स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन श्रमिकों का टीकाकरण शुरू किया गया था। चरण 1 के तहत, लगभग 1,26,71,163 लोगों को अब तक टीका की पहली खुराक दी गयी है। उनमें से, लगभग 14 लाख लोगों ने दूसरी खुराक भी प्राप्त की है। टीकाकरण अभियान में 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को भी शामिल किया गया है।

दूसरा चरण
कोविड-19 टीकाकरण के दूसरे चरण के तहत, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीका लगाया जा रहा है।
इसके अलावा, दिशानिर्देशों के अनुसार, 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और रोगों से पीड़ित लोगो का टीकाकरण भी किया जा रहा है।
COVAXIN
COVAXIN भारत बायोटेक द्वारा निर्मित एक सरकारी समर्थित टीका है। इसकी प्रभावकारिता दर 81% है। COVAXIN वैक्सीन के चरण तीन परीक्षणों में 27,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है। COVAXIN दो खुराक में दिया जाता है। खुराक के बीच का समय अंतराल चार सप्ताह है। COVAXIN को मृत COVID-19 वायरस से तैयार किया गया था।

COVISHIELD
COVISHIELD वैक्सीन एस्ट्राज़ेनेका द्वारा निर्मित है। स्थानीय रूप से, COVISHIELD सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित किया जा रहा है। यह चिम्पांजी के एडेनोवायरस नामक एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से तैयार किया गया था। COVID-19 वायरस की तरह दिखने के लिए वायरस को संशोधित किया गया है। यह दो खुराक में लगाया जाता है।

 

टीका उत्सव (Teeka Utsav) के पहले दिन इतने लाख लोगों को टीका लगाया गया

टीका उत्सव (Teeka Utsav) के पहले दिन इतने लाख लोगों को टीका लगाया गया

टीके उत्सव के पहले दिन देश भर में 27 लाख 69 लोगों का टीकाकरण करवाया गया। 11 अप्रैल, 2021 को देश भर में टीका उत्सव शुरू हुआ था। यह उत्सव 4 दिन तक चलेगा। टीका उत्सव (Teeka Utsav) एक टीका पर्व है। यह 11 अप्रैल, 2021 और 14 अप्रैल, 2021 के बीच आयोजित किया जायेगा। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण करना है। यह COVID-19 वैक्सीन के शून्य अपव्यय पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

भारत में COVID-19 टीकाकरण अभियान
वर्तमान में, तीन राज्य अधिकतम COVID -19 खुराक प्राप्त कर रहे हैं। वे महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात हैं।
COVAXIN और COVISHIELD दो प्रमुख COVID-19 टीके हैं जो वर्तमान में भारत में इस्तेमाल किये जा रहे हैं।
अब तक, भारत ने कैरेबियाई, अफ्रीका और एशिया के 84 देशों में टीकों की 64 मिलियन खुराकें भेज दी हैं। भारतीय COVID-19 टीकों के प्रमुख प्राप्तकर्ता देश मैक्सिको, कनाडा और ब्राजील हैं।
भारत सरकार ने अपने टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जुलाई 2021 तक 250 मिलियन लोगों को “उच्च प्राथमिकता” श्रेणी में शामिल करने की योजना बनाई है।
COVAXIN
COVAXIN भारत बायोटेक द्वारा निर्मित एक सरकारी समर्थित टीका है। इसकी प्रभावकारिता दर 81% है। COVAXIN वैक्सीन के चरण तीन परीक्षणों में 27,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है। COVAXIN दो खुराक में दिया जाता है। खुराक के बीच का समय अंतराल चार सप्ताह है। COVAXIN को मृत COVID-19 वायरस से तैयार किया गया था।

COVISHIELD
COVISHIELD वैक्सीन एस्ट्राज़ेनेका द्वारा निर्मित है। स्थानीय रूप से, COVISHIELD सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित किया जा रहा है। यह चिम्पांजी के एडेनोवायरस नामक एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से तैयार किया गया था। COVID-19 वायरस की तरह दिखने के लिए वायरस को संशोधित किया गया है। यह दो खुराक में लगाया जाता है। 

अगर आप होम आइसोलेट हैं तो आपके लिए जरूरी खबर

अगर आप होम आइसोलेट हैं तो आपके लिए जरूरी खबर

कोरोनावायरस से संक्रमित हुए 66 फीसदी लोग होम आइसोलेशन में है। ऐसे में जरुरी यह हो जानना जरुरी हो जाता है कि होम आइसोलेशन को लेकर चिकित्सीय गाइडलाइन क्या है और अगर आप कोरोना पॉजिटिव होने के बाद होम क्वारेंटाइन है तो आपको किन सावधानियों का पालन करना है।

संक्रमित व्यक्ति घर में कैसे रहे-

होम आइसोलेशन के संबंध में कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार संक्रमित व्यक्ति एक अलग हवादार बाथरूम अटैच कमरे में रहना चाहिए। आइसोलेशन अवधि में संक्रमित व्यक्ति न तो अपने कमरे से बाहर निकले, व्यक्तियों से सीधे सम्पर्क में न आये और अपने कमरे में ही खाना खाये। वह अपने कपड़ों, दरवाजे का हेण्डल, बिजली के बटन, बाथरूम आदि की सफाई एक प्रतिशत सोडियम हाईपोक्लोराइड साल्यूशन से करे। अपने खाने के बर्तन भी स्वयं ही साफ करे।

होम आइसोलेशन के दौरान संक्रमित व्यक्ति घर के सभी सदस्यों,विशेषकर वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ और बच्चों से दूरी बनाये रखें। किसी भी सामाजिक और धार्मिक कार्य में सम्मिलित न हों। संक्रमित व्यक्ति के किसी कार्यक्रम में शामिल होने से कोरोना मरीजों की एक नई श्रृंखला बन जाएगी। संक्रमित व्यक्ति पर्याप्त आराम करें, क्योंकि कोरोना में कमजोरी काफी आती है,आराम से जल्दी ठीक होंगेे।

दूसरों को करें सावधान-

होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमित व्यक्ति अपने सम्पर्क में आये सभी व्यक्तियों को संक्रमण की जानकारी दूरभाष पर तुरंत दें। सम्पर्क में आये हुए परिचितों को अपने सम्पर्क दिनांक से 5वें से 10वें दिन के बीच जाँच कराने की सलाह दें। कोरोना से संबंधित जानकारी के लिये हेल्पलाइन 104 और 1075 लगातार 24 घंटे कार्यरत हैं।

परिजन रखे यह सावधानी-

कोरोना संक्रमित व्यक्ति के घर वाले भी सावधानियाँ बरतें। वृद्ध संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल घर के युवा सदस्य तीन परतों वाला मास्क पहनकर ही करें। भोजन, पानी, दवाइयाँ आदि देते समय दूरी बनाये रखें। न तो घर से बाहर निकलें और न किसी को घर में प्रवेश करने दें। देखभाल के दौरान सर्दी, खाँसी, बुखार, गले में खराश आदि होने पर समीप के फीवर क्लीनिक में तुरंत जांच कराए।
अस्पताल जाने की आवश्यकता है तो-
अगर कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति में उपर दिए गए लक्षण पाए जा रहे है और व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता है तो जिला कोविड कंट्रोल एवं कमाण्ड सेंटर से चर्चा कर उपलब्ध बिस्तर के आधार पर स्वयं के वाहन से चिन्हांकित केन्द्रों पर जा सकते हैं। स्वयं का परिवहन न होने पर 108 एम्बुलेंस परिवहन व्यवस्था का लाभ लिया जा सकता है। परिवहन के दौरान वाहन में मास्क का प्रयोग और हाथ का सेनेटाइज होना अनिवार्य है। वाहन की खिड़कियाँ खुली रखें और ड्रायवर से दूरी बनाकर रखी जाये। बंद एवं वातानुकूलित वाहनों का उपयोग नहीं किया जाये। इसी तरह ड्रायवर भी मास्क एवं दास्तानों का उपयोग करें। यथासंभव वाहन में ड्रायवर के अतिरिक्त 2 से अधिक व्यक्ति सफर न करें।
 

वैक्सीन लेने से पहले और बाद में सही डाइट क्या है, जानिए एक्सपर्ट की राय

वैक्सीन लेने से पहले और बाद में सही डाइट क्या है, जानिए एक्सपर्ट की राय

जिस तरह कोरोना की दूसरी लहर जोरों पर है, उसी तरह पूरे देश में वैक्सीनेशन ड्राइव भी जोरों पर है. लोग लाइन में लगकर कोरोना की वैक्सीन लगवा रहे हैं. हालांकि लोग वैक्सीन लेने में साइड इफेक्ट को लेकर चिंतित रहते हैं और चाहते हैं कि वैक्सीन लेने के बाद वह सुरक्षित रहे और किसी तरह की हेल्थ कंपलिकेशन में ना पड़ें. एक्सपर्ट की मानें तो वैक्सीन लेने के बाद ज्यादा साइड इफेक्ट ना हो, इसके लिए डाइट की महत्वपूर्ण भूमिका है. वैसे लोग कई तरह की सलाह देते हैं. कुछ लोग कहेंगे वैक्सीन लेने से पहले न्यूट्रिशियस डाइट लेनी चाहिए. कुछ कहते हैं कि पानी नहीं पीना चाहिए. हालांकि एक्सपर्ट की राय अलग है. क्या है एक्सपर्ट की राय, इसे जानिए


खूब पानी पिएं और फल खाएं
एक्सपर्ट की मानें तो शरीर में पानी की मात्रा गुड हेल्थ के लिए जरूरी है. जब वैक्सीन लेने जाएं तो खूब पानी पीएं और ज्यादा पानी वाले फल खाएं. इससे वैक्सीन लेने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट का असर बहुत कम हो जाएगा.


अल्कोहल से दूर रहें
वैक्सीन लेने के बाद किसी-किसी में मामूली साइड इफेक्ट देखा गया है. ज्यादातर लोगों में कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता. चूंकि वैक्सीन लेने के दौरान शरीर में पानी की खूब मात्रा होनी चाहिए लेकिन जब अल्कोहल लिया जाए तो इससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. इस स्थिति में साइड इफेक्ट की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए अल्कोहल बिल्कुल भी न लें.


प्रोसेस्ड फूड न खाएं
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन के मुताबिक महामारी के इस दौर में शुद्ध अनाज का भोजन करना चाहिए. वैक्सीन लेने के दौरान प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें. इससे बेहतर है कि ऐसी डाइड लें जिसमें फाइबर ज्यादा हो. यह देसी अनाजों में ज्यादा होता है. इसके अलावा शुगरयुक्त चीजों का भी सेवन न करें तो बेहतर है.


वैक्सीन लेने से पहले संतुलित आहार लें
वैक्सीन लेने के बाद ज्यादातर बेहोश होने की शिकायतें आती हैं. इसके लिए जरूरी है कि वैक्सीन लेने से पहले संतुलित आहार लें. सेंटर फ़र डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक वैक्सीन लेने से पहले पर्याप्त पानी, संतुलित आहार और स्नेक्स लेने से वैक्सीन के साइड इफेक्ट की चिंता दूर हो सकती है.

 

Remdesivir: क्या है रेमडीसिविर, क्यों बनाई गई थी और क्या है ‘कोरोना’ में इसका इस्तेमाल?

Remdesivir: क्या है रेमडीसिविर, क्यों बनाई गई थी और क्या है ‘कोरोना’ में इसका इस्तेमाल?

जिस रेमडीसिविर इंजेक्‍शन के लिए हाल ही में इंदौर समेत देश के कई शहरों के मेड‍ि‍कलों और दवा बाजारों में खरीददारों की भीड लगी, दरअसल वह इंजेक्‍शन कोविड संक्रमण में या तो बहुत कम या फ‍िर ब‍िल्‍कुल भी असरकारक नहीं है।

देश के कई डॉक्‍टरों और विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्‍ट‍ि की है और इसे अनफाउंडेड यानी निराधार बताया है।

आइए जानते है आखि‍र क्‍या है रेमडीसिविर और सबसे पहले इसे किस रोग के लिए डवलेप किया गया था। इसके इस्‍तेमाल को लेकर डॉक्‍टर क्‍या कहते हैं।

दरअसल, जिस रेमडीसिविर इंजेक्‍शन के लिए फ‍िलहाल इतनी मारामारी चल रही है, वो सबसे पहले हेपेटाइटीस सी के लिए बनाया गया था। इसके बाद उसे इबोला और मिड‍िल ईस्‍ट रेस्‍प‍िरेटरी सिंड्रोम एमईआरएस के लिए के लिए इस्‍तेमाल किया गया।

लेकिन जैसा कि अभी हो रहा है, कोविड-19 के संक्रमण में एक जीवन रक्षक ड्रग के तौर पर इसका इस्‍तेमाल गलत है। डॉक्‍टरों के मुताब‍िक रेमड‍ीसिविर इंजेक्‍शन सिर्फ मरीज के अस्‍पताल में रहने के समय को दो या तीन दिन घटा सकता है।

क्‍या थी आईसीएमआर की गाइडलाइन?
पिछले साल 2020 में इंड‍ियन काउंसिल ऑफ मेड‍िकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अपनी एक गाइडलाइन जारी कर बताया था कि इस ड्रग का लाइफ सेविंग में कोई फायदा नहीं है और यह सिर्फ संक्रमण के दौरान पहले 10 दिनों के भीतर इस्‍तेमाल करने के लिए ही है।

टाइम्‍स ऑफ इंड‍िया के हवाले से कोविड टास्‍क फोर्स के डॉ शशांक जोशी ने बताया कि लोगों को इसके लिए भागम-भाग नहीं करना चाहिए, क्‍योंकि यह नि‍राधार है। यह ड्रग सिर्फ शरीर में वायरल इंफेक्‍शन के रेप्‍लिकेशन को रोकने में मदद करता है। मृत्यु से बचाने के लिए इस ड्रग में कोई क्षमता नहीं है। डॉ जोशी कहते हैं कि हो सकता है कि डॉक्‍टर इसे प्र‍िस्‍‍क्राइब्‍स करते हों त‍ाकि अस्‍पताल में मरीज के रहने का टाइम घटाया जा सके और बाकी मरीजों के लिए पलंग की उपलब्‍धता बढाई जा सके।

टाइम्‍स के मुताबि‍क मुंबई, थाने के एक चेस्‍ट विशेषज्ञ डॉक्‍टर अजय गोडसे का कहना है कि करीब 95 प्रतिशत मरीजों के लिए रेमडेसिविर है, लेकिन इसे किसी चमत्‍कार की तरह नहीं लिया जाना चाहिए।

क्‍या कहती है दूसरी स्‍टडीज?
कोविड-19 के खिलाफ रेमडेसिविर कितनी असरदार है इसका पता लगाने के लिए अब तक कई ट्रायल और स्टडीज हो चुकी हैं। ऐसा ही एक ट्रायल अमेरिका की नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी किया था जिसमें यह सुझाव दिया गया कि रेमडेसिवियर कोविड-19 के मरीजों के रिकवरी टाइम को 31 प्रतिशत तक बेहतर कर सकती है और इस तरह से मरीज 11वें दिन में अस्पताल से बाहर आ सकता है। जबकी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट में मरीज को 15 दिन के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलती है।

क्‍यों बनाई गई थी रेमड‍ीसिविर?
रेमड‍ीसिविर को इबोला के लिए किया गया था विकसित
रेमड‍ीसिविर एक न्यूक्लियोसाइड राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) पोलीमरेज़ इनहिबिटर इंजेक्शन है।
इसका निर्माण सबसे पहले वायरल रक्तस्रावी बुखार इबोला के इलाज के लिए किया गया था।
इसे अमेरिकी फार्मास्युटिकल गिलियड साइंसेज द्वारा बनाया गया है।
फरवरी में US नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीज (NIAID) ने SARS-CoV-2 के खिलाफ जांच के लिए रेमड‍ीसिविर का ट्रायल करने की घोषणा की थी। 

भारत के सक्रिय मामलों में इन 10 जिलों का योगदान इतने प्रतिशत

भारत के सक्रिय मामलों में इन 10 जिलों का योगदान इतने प्रतिशत

नईदिल्ली। आज देशभर में कोविड-19 के टीके की खुराक दिए जाने की कुल संख्या 9.80 करोड़ से अधिक हो गई है। आज सुबह 7 बजे तक की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, 14,75,410 सत्रों के माध्यम से कुल 9,80,75,160 टीके की खुराकें दी गई हैं। इनमें 89,88,373 स्वास्थ्य कर्मियों ने टीके की पहली खुराक और 54,79,821 स्वास्थ्य कर्मियों ने टीके की दूसरी खुराक, 98,67,330 अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने टीके की पहली खुराक, 46,59,035 अग्रिम मोर्च के कार्यकर्ताओं ने टीके की दूसरी खुराक, 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले 3,86,53,105 लाभार्थियों ने टीके की पहली खुराक और 15,90,388 लाभार्थियों ने टीके की दूसरी खुराक और 45 से 60 वर्ष की उम्र के 2,82,55,044 लाभार्थियों ने टीके की पहली खुराक और 5,82,064 लाभार्थियों ने टीके की दूसरी खुराक ली। देश में अब तक कुल टीके की 60.62 प्रतिशत खुराकें 8 राज्यों में दी गई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान 34 लाख से अधिक टीके की खुराकें दी गई। टीकाकरण मुहिम के 84वें दिन (09 अप्रैल 2021) को 34,15,055 टीके की खुराकें दी गई। 46,207 सत्रों के माध्यम से 30,06,037 लाभार्थियों ने पहली खुराक और 4,09,018 लाभार्थियों ने दूसरी खुराक ली। वैश्विक स्तर पर दैनिक खुराकों की संख्या के संदर्भ में, भारत प्रतिदिन औसत 38,93,288 टीके की खुराक दिए जाने के साथ शीर्ष पर बना हुआ। भारत में दैनिक नये मामलों का बढ़ना जारी है। पिछले 24 घंटे में 1,45,384 नये मामले दर्ज किए गए। दस राज्यों- महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान- में कोविड-19 के दैनिक नये मामलों में वृद्धि दिखाई दे रही है। नये मामलों का 82.82 प्रतिशत इन्हीं दस राज्यों में ही है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 58,993 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 11,447 जबकि उत्तर प्रदेश में 9,587 नये मामले दर्ज किए गए हैं। भारत में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 10,46,631 तक पहुंच गई है। यह देश में कुल पॉजिटिव मामलों का अब 7.93 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों में कुल सक्रिय मामलों की संख्या में से 67,023 मामले कम हुए। भारत में कुल सक्रिय मामलों का कुल 72.23 प्रतिशत पांच राज्यों महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और केरल में है। देश में कुल सक्रिय मामलों का 51.23 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र से है। देश के दस जिलों में कुल सक्रिय मामलों के 45.65 प्रतिशत हैं। भारत में आज तक कुल स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 1,19,90,859 है। राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी दर 90.80 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में 77,567 मरीज स्वस्थ हुए। दैनिक मौतें की संख्या में लगातार उछाल देखा जा रहा है। पिछले 24 घंटों में 794 मौतें दर्ज की गई।

इस राज्य  में वैक्सीन का स्टॉक ख़त्म होने के कगार पर अगले तीन दिनों का ही स्टॉक,शेष

इस राज्य में वैक्सीन का स्टॉक ख़त्म होने के कगार पर अगले तीन दिनों का ही स्टॉक,शेष

नईदिल्ली। देश में लगातार कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में इज़ाफ़ा हो रहा है. पूरे देश के केस लोड का आधे से अधिक महाराष्ट्र में है. इस बीच वहाँ के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि महाराष्ट्र में वैक्सीन का स्टॉक ख़त्म होने के कगार पर है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक उन्होंने कहा है कि राज्य के पास कोविड-19 वैक्सीन की लगभग 14 लाख खुराकें ही बची हुई हैं जो वर्तमान वैक्सीन देने की रफ़्तार के हिसाब से अगले तीन दिनों का स्टॉक ही है. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से कई वैक्सीन सेंटर बंद करने पड़े हैं और वहाँ लोगों को वापस जाना पड़ा है. उन्होंने केंद्र से वैक्सीन की आपूर्ति करने में महाराष्ट्र को प्राथमिकता देने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ मरने वालों की संख्या 50 हज़ार को पार कर चुकी है. इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि अब संक्रमित हो रहे लोगों में अधिकतर की उम्र 25 से 40 साल के बीच है.

हर्षवर्धन ने क्या कहा?
हालाँकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस तरह के वक्तव्यों को ध्यान भटकाने का प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि "हाल के दिनों में मैंने कुछ राज्य सरकारों की ओर से कोरोना महामारी को लेकर गैर ज़िम्मेदाराना बातें सुनी हैं. कुछ राज्य सरकारें अपने यहाँ महामारी को काबू करने के उपायों को लागूं करने में विफल रही हैं. ऐसे वक्तव्य लोगों का ध्यान भटकाने और उनमें दहशत फ़ैलाने का काम कर सकते हैं." साथ ही उन्होंने कहा कि देश में जब कोराना वैक्सीन की आपूर्ति सीमित तब प्राथमिकता के आधार पर ही वैक्सीन देना विकल्प है. भारत सरकार पारदर्शिता के साथ सभी राज्यों को वैक्सीन की मांग और आपूर्ति के बारे में बताती रही है. वैक्सीनेशन अभियान की पूरी रूपरेखा राज्यों के साथ बातचीत के बाद ही तैयार किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने वैक्सीन दिए जाने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष करने के कुछ राज्यों की उस मांग को ख़ारिज करते हुए कहा कि जब राज्य यह कहते हैं तो यह माना जाना चाहिए कि उन्होंने इससे अधिक उम्र के वर्गों को वैक्सीन लगा दिया होगा. जबकि आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं. इसके बाद उन्होंने सभी राज्यों के वैक्सीनेशन की ताज़ा स्थिति के आंकड़े साझा किए जिसके मुताबिक महाराष्ट्र के 86 फ़ीसद स्वास्थ्यकर्मियों को ही अभी वैक्सीन का पहला डोज़ दिया जा सका है. 

प्रतिदिन औसतन इतने लाख से अधिक लोगों को टीका लगाकर भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर

प्रतिदिन औसतन इतने लाख से अधिक लोगों को टीका लगाकर भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर

नईदिल्ली।  वैश्विक महामारी के विरुद्ध सामूहिक और सहयोगपूर्ण लड़ाई लड़ते हुए भारत ने इस वर्ष 16 जनवरी को शुरू किए गए विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। देश में अब कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत 9 करोड़ से ज्‍यादा लोगों को टीका लगाया जा चुका है। आज सुबह 7 बजे तक मिली प्रारंभिक सूचना के अनुसार 13,77,304 सत्रों में 9,01,98,673 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। इनमें 89,68,151 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों (एचसीडब्‍ल्‍यू) को टीके की पहली खुराक दी गई है और 54,18,084 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को दूसरी खुराक दी गई है। इसके अलावा 97,67,538 अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (एफएलडब्‍ल्‍यू) को पहली खुराक और 44,11,609 अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को दूसरी खुराक दी गई है। इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र के 3,63,32,851 लाभार्थियों को पहली खुराक और 11,39,291 लाभार्थियों को दूसरी खुराक दी गई है। 45 से 60 साल उम्र के 2,36,94,487 लाभार्थियों को पहली खुराक और 4,66,622 लाभार्थियों को दूसरी खुराक दी गई है। देश में अब तक लगाई गई टीके की कुल खुराक में 60 प्रतिशत 8 राज्यो में लगाई गई हैं पिछले 24 घंटों में टीके की 30 लाख से ज्‍यादा खुराकें दी गईं। टीकाकरण अभियान के 82वें दिन (7 अप्रैल, 2021) को 29,79,292 टीके लगाए गए। इनमें से 26,90,031 लाभार्थियों को 38,760 सत्रों में पहला टीका और 2,89,261 लाभार्थियों को दूसरा टीका लगाया गया। भारत में नए मामलों की संख्‍या बढ़ रही है। पिछले 24 घंटों के दौरान 1,26,789 नए मामले सामने आए। महाराष्‍ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्‍य प्रदेश, तमिलनाडु. गुजरात, केरल और पंजाब इन दस राज्‍यों में कोविड के प्रतिदिन सामने आने वाले मामलों में वृद्धि हुई है। कुल नए मामलों का 84.21 प्रतिशत मामले इन्‍हीं 10 राज्‍यों में दर्ज हुए हैं। महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा 59,907 नए मामले प्रतिदिन दर्ज किए गए। इसके बाद, छत्तीसगढ़ में 10,310 और कर्नाटक में 6,976 नए मामले दर्ज किए गए।